बड़ी खबर: राजनैतिक सौहार्द के मिसाल सालिक साय बने जिला पंचायत अध्यक्ष,उपाध्यक्ष बने शौर्य प्रताप सिंह जूदेव

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जशपुर ,12 मार्च 2025 – आज जिला पंचायत जशपुर के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद का निर्वाचन हो रहा है।जिसमें अंदरखाने से बड़ी खबर निकलकर सामने आई है कि जिला पंचायत सदस्य सालिक साय ने अध्यक्ष पद पर नामांकन दाखिल किया लेकिन अभी 11:40 तक अन्य किसी भी सदस्य ने नामांकन दाखिल नहीं किया।इसी तरह शौर्य प्रताप सिंह जूदेव ने उपाध्यक्ष पद का नामांकन भरा जिनके विरुध्द भी किसी अन्य सदस्य ने नामांकन नहीं भरा। इसका मतलब दोनों पदों पर भाजपा के दावेदार निर्विरोध हो गए हैं।हालांकि अभी इसकी अधिकारिक घोषणा बाकी है।वहीं सालिक साय के निर्विरोध की खबर पाकर जिला पंचायत के बाहर समर्थकों में खुशी देखी जा रही है। हम आपको बता दें कि सालिक साय ने इस बार कांग्रेस के गढ़ रहे तमता क्षेत्र से डीडीसी का चुनाव लड़ा और भारी बहुमत से चुनाब जीतकर जिला पंचायत पहुंव्हे हैं।इनकी सरलता,सौम्यता के साथ ही सबको साथ लेकर चलने की समझदारी इनकी जीत का बड़ा कारण बनी है।कांग्रेस समर्थित तीन डीडीसी के रहते हुए भी कांग्रेस ने लोकतांत्रिक विरोध भी नहीं किया।

पंडित प्रदीप मिश्रा विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर महादेव में करेंगे 21 से महाशिवपुराण कथा

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प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के आगमन की भव्य तैयारी, 21 से 27 मार्च तक होगी कथा जशपुर, 9 मार्च 2025: सर्व हिंदू समाज के आह्वान पर 21 मार्च से 27 मार्च तक विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर महादेव की गोद में महाशिवपुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस दिव्य कथा को प्रसिद्ध शिवपुराण कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा सुनाएंगे। आयोजन को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। कल सोमवार को मयाली नेचर कैंप के पास सुबह 9:30 बजे भूमि पूजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। कौन हैं पंडित प्रदीप मिश्रा? मध्यप्रदेश के सीहोर निवासी पंडित प्रदीप मिश्रा देशभर में अपनी शिवमहिमा से जुड़े प्रवचनों के लिए विख्यात हैं। वे अपने सरल व प्रभावशाली कथन शैली से शिव महापुराण, शिव कृपा, और रुद्राक्ष महिमा पर प्रकाश डालते हैं। उनके प्रवचनों से हजारों लोग आस्था से जुड़ते हैं और शिव भक्ति का मार्ग अपनाते हैं। महाशिवपुराण कथा का विशेष महत्व मधेश्वर महादेव धाम में हो रही यह कथा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक होने वाली है। शिव महापुराण के दिव्य प्रसंगों के साथ, शिव कृपा की महिमा को सुनने के लिए लाखों श्रद्धालु जुटने वाले हैं। इस आयोजन के माध्यम से जशपुर जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को एक नई ऊंचाई मिलेगी। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस कथा में भाग लें और शिव कृपा का लाभ उठाएं।

शिव बाबा की संघर्षगाथा: दूसरी बार निर्विरोध उपसरपंच चुने गए, गांव में जश्न का माहौल

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शिव बाबा की संघर्षगाथा: दूसरी बार निर्विरोध उपसरपंच चुने गए, गांव में जश्न का माहौल जशपुर,08 मार्च2025- विकास की राह में संघर्ष का दूसरा नाम बन चुके शिव कुमार यादव, जिन्हें क्षेत्र में लोग प्रेम से शिव बाबा कहते हैं, ने एक बार फिर अपनी नेतृत्व क्षमता साबित की। जनपद पंचायत बगीचा के ग्राम पंचायत गायलूँगा में 8 मार्च को संपन्न हुए उपसरपंच चुनाव में उन्होंने निर्विरोध जीत दर्ज कर दूसरी बार यह पद हासिल किया। इससे पहले उन्हें निर्विरोध पंच चुना गया था। शिव बाबा सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि गांव की आवाज बन चुके हैं। सड़क, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर उनके द्वारा किए गए संघर्ष और धरना-प्रदर्शन ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में वे गांव के विकास को अपनी प्राथमिकता मानते हैं। उनकी इस ऐतिहासिक जीत पर पूरे गांव में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी मनाई, एक-दूसरे को गुलाल लगाया और मिठाइयां बांटी। इस चुनाव ने गायलूँगा ग्राम पंचायत में भाईचारे और संगठन की शक्ति को दर्शाया, जहां पंचगणों ने एकमत होकर शिव बाबा को फिर से नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी। संघर्ष से सफलता तक – शिव बाबा की कहानी शिव बाबा सिर्फ नाम ही नहीं, बल्कि गांव के विकास के लिए समर्पित एक व्यक्तित्व हैं। उनके संघर्षों की गूंज न केवल गायलूँगा, बल्कि पूरे बगीचा क्षेत्र में सुनाई देती है। चाहे सड़क की मांग हो, बिजली की समस्या हो या किसी भी अन्य बुनियादी जरूरत की बात – वे हमेशा जनता के साथ खड़े नजर आते हैं। उनका मिलनसार स्वभाव और हर दुख-सुख में गांववासियों के साथ खड़े रहने की प्रवृत्ति ही उन्हें सबसे अलग बनाती है। ग्रामीणों का मानना है कि शिव बाबा के नेतृत्व में गायलूँगा पंचायत को और अधिक विकास कार्यों की सौगात मिलेगी। उनकी यह जीत साबित करती है कि जब कोई व्यक्ति सच्चे मन से समाज सेवा करता है, तो जनता उसे सिर आंखों पर बिठाती है।

बगीचा जनपद में भाजपा की रणनीतिक जीत, कांग्रेस की चाल ऐसे हुई फेल

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पर्यवेक्षक ठाकुर पुरुषोत्तम सिंह की सूझबूझ से भाजपा ने दर्ज की बड़ी जीत, गायत्री नागेश बनीं अध्यक्ष, अरविंद गुप्ता बने उपाध्यक्ष जशपुर/बगीचा, 4 मार्च 2025 – भारतीय जनता पार्टी ने बगीचा जनपद पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर अपनी रणनीतिक बढ़त साबित करते हुए परचम लहरा दिया। भाजपा की ओर से गायत्री नागेश ने अध्यक्ष और अरविंद गुप्ता ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। इस चुनाव में भाजपा का मुकाबला निर्दलीयों से था, क्योंकि कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं था, जिससे वह अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं कर पाई। हालांकि, कांग्रेस की रणनीति भाजपा को नुकसान पहुंचाने की जरूर थी, लेकिन भाजपा के जिला उपाध्यक्ष व बगीचा पर्यवेक्षक  ठाकुर पुरुषोत्तम सिंह की दूरदृष्टि और सूझबूझ ने  कांग्रेस की इस चाल को नाकाम कर दिया। इस रणनीति में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ भाजपा नेताओं को शामिल किया। कैसे फेल हुई कांग्रेस की रणनीति? पर्यवेक्षक पुरुषोत्तम सिंह को आभास हो गया था कि भाजपा और कांग्रेस के कुछ असंतुष्ट लोग उपाध्यक्ष पद पर खेल कर सकते हैं। इसे भांपते हुए उन्होंने भाजपा के दोनों दावेदारों भारत गुप्ता और अरविंद गुप्ता को गुप्त रूप से चुनाव लड़ने की छूट दी, जिससे किसी भी तरह के जोड़तोड़ की संभावना समाप्त हो गई और भाजपा को सीधा लाभ मिला। मतदान में भाजपा को मिली शानदार जीत *अध्यक्ष पद पर भाजपा की गायत्री नागेश को 14 मत मिले। *उपाध्यक्ष पद पर भाजपा के अरविंद गुप्ता को 12 मत मिले। यह जीत शुद्ध रूप से भाजपा के विष्णु सरकार के सुशासन की जीत है,दोनों पदों पर हमारे प्रत्याशी जीतकर आये हैं। इस जीत का श्रेय स्थानीय नेताओं और जनपद सदस्यों को देता हूँ- ठाकुर पुरुषोत्तम सिंह भाजपा कार्यालय में जश्न, जमकर मना विजय उत्सव जीत दर्ज करने के बाद दोनों विजयी प्रत्याशियों ने भाजपा कार्यालय पहुंचकर पार्टी पदाधिकारियों का आशीर्वाद लिया। कार्यकर्ताओं ने फूलमालाओं से स्वागत किया, जमकर आतिशबाजी की और मिठाइयां बांटी। इस दौरान भाजपा के जिला उपाध्यक्ष मुकेश शर्मा, शंकर गुप्ता, मंडल अध्यक्ष हरीश यादव, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रभात सिदाम, महामंत्री पवन सिंह, जिला पंचायत सदस्य गेंदबिहारी महराज, रीना बरला, राजकिशोर जायसवाल, सुमित्रा पैंकरा, पार्वती यादव सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। भाजपा की रणनीतिक जीत, कांग्रेस हाशिए पर इस चुनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भाजपा संगठन की रणनीतिक पकड़ मजबूत है। कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और कमजोर संख्या बल के कारण वह मुकाबले से बाहर हो गई। वहीं, भाजपा ने एकजुटता और समझदारी से जीत हासिल कर अपने वर्चस्व को और मजबूत कर लिया।

*सबका साथ सबका विकास को साकार करने वाली है बजट: कौशल्या साय*

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जशपुर, 03 मार्च 2025 – छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा सोमवार को विधानसभा में प्रस्तुत किए गए सरकार के दूसरे बजट में प्रदेश के सभी वर्गो के विकास का पूरा ध्यान रखा गया है। यह बजट छत्तीसगढ़ और यहां की सम्मानीय जनता की सुनहरे भविष्य को गढ़ने का काम करेगी। यह बातें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कही। उन्होनें वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा हस्तलिखित पेपरलेस बजट प्रस्तुत करने के निर्णय को साहसिक व दूरदर्शी कदम बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बजट में केंद्र की प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा हाल ही प्रस्तुत किए गए केंद्रीय बजट के लक्ष्य को प्राप्त करने की ओर उठाया गया कदम है। उन्होनें कहा कि इस बजट में महिला,गरीब , किसान,युवाओं का ध्यान रखा गया है। बजट में प्रशासनिक सुधार के लिए किए गए वित्तिय प्रावधानों को महत्वपूर्ण बताते हुए श्रीमती कौशल्या साय ने कहा कि इससे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आने के साथ ही आम जनता को सरकारी सेवाओं का सहजता से लाभ मिल सकेगा। जशपुर जिले में मेडिकल कालेज और नर्सिंग कालेज खोले जाने का स्वागत करते हुए श्रीमती साय ने कहा कि इससे जिलेवासियों को एक ओर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी,वहीं दूसरी ओर ये दोनों महत्वपूर्ण संस्थान जिले के विकास में भी योगदान देगें। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जशपुर जिले को विकसित,सुरक्षित और समृद्व  बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। इसके लिए हम सब उनका आभार व्यक्त करते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सार्थक पहल,कुनकुरी में खुलेगा नया मेडिकल कॉलेज,लोगों में छाई खुशी

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जशपुर 3 मार्च 25/छत्तीसगढ़ सरकार के द्वितीय बजट सत्र में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बजट पेश किया। इस बजट में जशपुर जिले के कुनकुरी में नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना का प्रावधान किया गया है। इस घोषणा के बाद जशपुर जिले में हर्ष का माहौल है। जशपुर नगर के व्यवसायी श्री सत्येंद्र कुमार पाठक ने इस बजट का स्वागत करते हुए कहा कि यह मेडिकल कॉलेज जिले के विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह निर्णय सुदूर क्षेत्र की जनता के लिए अत्यंत लाभकारी होगा। मेडिकल कॉलेज की स्थापना से जिले के युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे और स्वास्थ्य सेवाओं में भी व्यापक सुधार होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन और जनहितैषी नीतियों के तहत यह बजट छत्तीसगढ़ के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।  

क्या व्हाट्सएप ग्रुप से जंगल की आग बुझाई जा सकती है? जशपुर से जवाब आया ‘हाँ’

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जशपुर,02 मार्च 2025 – जशपुर जिले में गर्मी शुरू नहीं हुई है लेकिन जंगल मे आग लगने की घटनाएं सामने आने लगी हैं।ऐसे में आज शाम को जंगल मे आग लगने की एक घटना व्हाट्सएप ग्रुप में साझा करते ही एक मिनट में आग को बुझा लिया गया।इसका मतलब है कि वन विभाग को सूचना जरूर पहले मिल गई लेकिन ग्रुप में आने के बाद वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी फील्ड में कितने एक्टिव हैं,यह इससे पता चला। दरअसल,जशपुर जिले में एक व्हाट्सएप ग्रुप ‘वन मित्र’ की सक्रियता से जंगल में लगी आग को तुरंत बुझाने में सफलता मिली है। शहर से सटे बेलमहादेव जंगल में किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा आग लगाए जाने की सूचना स्थानीय युवक लालू यादव ने ‘वन मित्र’ ग्रुप में साझा की। यह संदेश शाम 6 बजकर 38 मिनट पर ग्रुप सदस्य रामप्रकाश पांडे ने देखा और तुरंत वन अधिकारियों को सूचित किया। आईएफएस अधिकारी आशीष अग्रवाल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वनकर्मियों को घटनास्थल पर भेजा, जिन्होंने 7 बजकर 9 मिनट पर आग पर काबू पा लिया। यह घटना दर्शाती है कि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स, विशेषकर व्हाट्सएप ग्रुप्स, वन संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ‘वन मित्र’ ग्रुप की तत्परता और समन्वय से जंगल को बड़ी क्षति से बचाया जा सका।  

कुनकुरी नगरपंचायत में नवजात शिशु की लाश,पुलिस मौके पर पहुंची

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जशपुर/कुनकुरी,02 मार्च 2025 – कुनकुरी शहर से बड़ी खबर आई है जिसमें एक नवजात शिशु का शव मिलने से सनसनी फैल गई है।मौके पर भारी भीड़ लग गई है।सूचना मिलते ही पुलिस भी पहुंच गई है। समाजसेवी मुरारी गुप्ता ने ख़बर ज़नपक्ष को जानकारी दी कि घटनास्थल कुनकुरी नगरपंचायत के वार्ड क्रमांक 15 में बेहराटोली में शिव मंदिर के पास चट्टान में है।ऐसा लगता है जैसे किसी ने लोकलाज के भय से अपने शिशु को जन्म देकर छोड़ दिया हो।जो भी हो घटना दुखदाई है और इसे देखकर मोहल्लेवासियों में नवजात को जन्म देने वाले अज्ञात माता-पिता की पहचान कर तत्काल गिरफ्तार करने की बात कह रहे हैं।

साक्षात्कार : “मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता ही पहला इलाज है” – डॉ. ग्रेस, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट

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छत्तीसगढ़ के सरगुजा क्षेत्र में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता धीरे-धीरे बढ़ रही है, और इस बदलाव की धुरी बन रही हैं डॉ. ग्रेस कुजूर। मानसिक चिकित्सा के कई विषयों में विशेषज्ञता रखने वाली डॉ. ग्रेस, 2022 से जशपुर रोड पर तालाब के सामने चर्च गेट के पास “GK साइकोथेरेपी एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर” का संचालन कर रही हैं। उनके प्रयासों से अब तक सैकड़ों मरीज ठीक होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। जनपक्ष के संपादक संतोष चौधरी ने उनसे एक विशेष बातचीत की। “मेरा उद्देश्य सेवा है, सिर्फ कमाई नहीं“ प्रश्न: डॉक्टर साहिबा, अपने बारे में हमारे पाठकों को बताएं। उत्तर: (मुस्कुराते हुए) सबसे पहले आपके पाठकों को मेरा नमस्कार। मैं डॉ. ग्रेस कुजूर, कुनकुरी से 16 किलोमीटर दूर केरसई गाँव की रहने वाली हूँ। मेरी पढ़ाई कुनकुरी निर्मला स्कूल से हुई, फिर 2008 में बिलासपुर गर्ल्स डिग्री कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। क्लिनिकल साइकोलॉजी में मास्टर्स GGU, बिलासपुर से किया और फिर सिकंदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु और मुंबई में अलग-अलग विषयों में विशेषज्ञता हासिल की। मैं दो विषयों में पीएचडी कर चुकी हूँ—एक क्लिनिकल साइकोलॉजी में और दूसरा नेचुरोपैथी में। 2017 में छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, रायपुर ने मुझे “साइंटिस्ट अवॉर्ड” दिया था, जब मैंने विशेष बच्चों के लिए एक ऐप विकसित किया। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में 24 साल से काम कर रही हूँ और इस काम को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि जीवन की सेवा मानती हूँ।मुझे वैज्ञानिक मनोचिकित्सक पुनर्वास एवं विशेषज्ञ के रूप में काम करने के लिए लाइसेंस प्राप्त है जिसका नम्बर C.R.R. A81006 है। “हर मानसिक बीमारी का इलाज संभव है” प्रश्न: आपके सेंटर में किस तरह के मरीजों का इलाज किया जाता है? उत्तर: हमारे सेंटर में काउंसलिंग, साइकोथेरेपी, रिलैक्सेशन थेरेपी, हिप्नोथेरेपी, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और ज़रूरत पड़ने पर एमडी के पास रेफर किया जाता है। अब तक, ✔ 10 सेरेब्रल पाल्सी के बच्चे पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। ✔ 15 ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चे सामान्य जीवन जी रहे हैं। ✔ 50 मंदबुद्धि (इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी) के बच्चे ठीक हो चुके हैं। ✔ 70 से अधिक व्यस्क मानसिक रोगी, जिनमें से 40 पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। ✔ 60-75 वर्ष के बुजुर्गों में भूलने की बीमारी का भी सफल इलाज जारी है। सेंटर का मुख्य उद्देश्य जागरूकता और सही उपचार देना है, इसलिए फीस बहुत कम रखी गई है। “बाहर की नहीं, अंदर की चोटों का इलाज भी जरूरी है“ प्रश्न: इतनी पढ़ाई और अनुभव के बाद आपने कुनकुरी को ही क्यों चुना? उत्तर: जब मैं रायपुर, बेंगलुरु में पढ़ाई कर रही थी, तब मैंने देखा कि सरगुजा क्षेत्र के कई मरीज मानसिक बीमारियों के कारण दर-दर भटक रहे हैं। मुझे लगा कि अगर मैं अपने ही क्षेत्र में रहकर लोगों की मदद करूं तो ज्यादा बेहतर होगा। चूंकि मेरा घर कुनकुरी में है, तो यहाँ सेंटर खोलना सुविधाजनक भी रहा। प्रश्न: आपके अनुसार, इस क्षेत्र में किस तरह के मानसिक रोग सबसे ज्यादा हैं? उत्तर: यह कहना मुश्किल है क्योंकि मानसिक बीमारी दिखती नहीं, महसूस होती है। डिप्रेशन, एंग्जायटी, सिजोफ्रेनिया (पागलपन), एडिक्शन, डी-एडिक्शन, याददाश्त की समस्या जैसी बीमारियाँ यहाँ आम हैं। लेकिन सबसे चिंता की बात यह है कि 8वीं-9वीं के बच्चों में भी मानसिक समस्याएँ बढ़ रही हैं। ✔ बच्चे भावनात्मक रूप से कमजोर होते जा रहे हैं ✔ या तो उन्हें बहुत अधिक सुविधाएँ दी जा रही हैं, या बहुत ज्यादा दबाव यही कारण है कि बचपन से मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है।          “मुझे अपने काम पर गर्व है” प्रश्न: इतने सालों का अनुभव कैसा रहा? उत्तर: (हँसते हुए) 24 साल से इस फील्ड में हूँ और मुझे अपने काम पर बेहद गर्व है। जब कोई मरीज स्वस्थ होकर अपनी ज़िंदगी फिर से शुरू करता है, तो जो संतुष्टि मिलती है, वह शब्दों में बयां नहीं कर सकती। “मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही ज़रूरी” अंतिम प्रश्न: हमारे पाठकों को क्या संदेश देना चाहेंगी? उत्तर:”जिस तरह बाहर की चोट का इलाज कराते हैं, वैसे ही अंदर की चोट का भी इलाज कराना ज़रूरी है।”अगर आपको लगे कि आपका कोई प्रियजन असामान्य व्यवहार कर रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है—इलाज संभव है! वैसे,ज्यादा सही होगा कि स्वस्थ दिखने वालों को भी मानसिक स्वास्थ्य की जांच करा लेनी चाहिए, जिससे बीमारी ही पैदा न हो पाए। मेरे GK साइकोथेरेपी एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में सोमवार से शनिवार, सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक आ सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए 7725093381,7067162282 पर संपर्क करें।मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी हर समस्या का समाधान संभव है—बस पहला कदम उठाने की देर है!

छत्तीसगढ़ में पोषण ट्रैकर एप बना आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए सिरदर्द, तकनीकी खामियों के कारण वेतन कटौती पर भड़का संघ

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जशपुर ,27 फरवरी 2025 – छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए पोषण ट्रैकर एप एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। इस एप में तकनीकी खामियों के चलते प्रदेशभर में कई कार्यकर्ताओं का वेतन बिना किसी गलती के काटा जा रहा है, जिससे वे परेशान और आक्रोशित हैं। इस मुद्दे को सबसे पहले जशपुर जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ ने प्रमुखता से उठाया है और मंगलवार 25 फरवरी को जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर तत्काल समाधान की मांग की है। तकनीकी खामियां बनी बड़ी समस्या संघ की जिलाध्यक्ष श्रीमती कविता यादव के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि पोषण ट्रैकर एप के नए वर्जन में कई व्यावहारिक समस्याएं हैं। इसमें टीएचआर (टेक होम राशन) वितरण के लिए हितग्राहियों के आधार और मोबाइल से ओटीपी सत्यापन की अनिवार्यता है, जिससे कई परेशानियां खड़ी हो रही हैं— एक ही व्यक्ति को हर माह राशन लेने की अनिवार्यता – परिवार का कोई अन्य सदस्य राशन लेने नहीं जा सकता। ओटीपी सत्यापन की समस्या – कई हितग्राही ओटीपी साझा करने से मना करते हैं, जिससे उन्हें राशन नहीं मिल पाता। मोबाइल की अनुपलब्धता – कई आदिवासी और वनवासी परिवारों के पास मोबाइल फोन नहीं है, जिससे वे पोषण योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। नेटवर्क और तकनीकी दिक्कतें – कई इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं होने से पोषण ट्रैकर एप काम नहीं करता, जिससे राशन वितरण बाधित होता है। कमजोर मोबाइल उपकरण – आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिए गए मोबाइल इस एप को सुचारू रूप से चलाने में सक्षम नहीं हैं, जिसके लिए कम से कम 5GB रैम वाले मोबाइल की जरूरत है। रिचार्ज सुविधा का अभाव – कार्यकर्ताओं को मोबाइल रिचार्ज के लिए प्रति माह ₹500 की स्वीकृति दी जाए, ताकि वे निर्बाध रूप से अपने कार्य कर सकें। मानदेय में कटौती से बढ़ रही नाराजगी संघ का आरोप है कि विभागीय अधिकारी इन समस्याओं से भली-भांति परिचित होने के बावजूद, कोई समाधान निकालने के बजाय कार्यकर्ताओं के मानदेय में कटौती कर रहे हैं। यह कटौती केवल एप में दर्ज आंकड़ों के आधार पर की जा रही है, जबकि तकनीकी गड़बड़ियों के कारण कई बार सही डेटा दर्ज नहीं हो पाता। संघ की जिलाध्यक्ष कविता यादव ने कहा, “हम अल्प मानदेय पर कार्य करते हैं और उसी से परिवार चलता है। यदि छोटी-छोटी तकनीकी खामियों के कारण वेतन में कटौती होगी, तो हम पर आर्थिक संकट आ जाएगा। सरकार को इस समस्या का तत्काल समाधान निकालना चाहिए।” संघ ने शासन-प्रशासन से आग्रह किया है कि— टीएचआर वितरण का कार्य अन्य एजेंसी या संस्था के माध्यम से किया जाए, ताकि तकनीकी परेशानियों से बचा जा सके। पोषण ट्रैकर एप की खामियों को दूर किया जाए और इसे ऑफलाइन मोड में भी संचालित करने की सुविधा दी जाए। किसी भी कार्यकर्ता या सहायिका का मानदेय बिना उचित कारण के न काटा जाए और जब तक समस्या का समाधान न हो, तब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। प्रदेश भर में फैल सकता है आंदोलन यह समस्या केवल जशपुर की नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो यह मुद्दा प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है। संघ ने सरकार से अपील की है कि पोषण ट्रैकर एप से जुड़ी तकनीकी समस्याओं को दूर कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बिना बाधा अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने दिया जाए। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं।