*ग्रामीणों का हंगामा: जंगल में अवैध कब्जा हटाने पहुंचे, हाथियों के आगमन ने मचाई हलचल,जांच अधूरी छोड़ भागे अफसर*

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जशपुर: महेशपुर के जंगल में रविवार को कुछ ऐसा हुआ जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। एक तरफ जंगलों की सुरक्षा के लिए सैकड़ों ग्रामीणों का हुजूम पहुंचा, तो दूसरी तरफ अचानक हाथियों के झुंड ने सभी को चौंका दिया। यह मामला न केवल ग्रामीणों के साहसिक कदम को दिखाता है, बल्कि वन विभाग की उदासीनता और हाथियों के जंगलों से बाहर निकलने की वजह पर भी सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों के विरोध की वजह महेशपुर के रिजर्व फॉरेस्ट क्रमांक 984 में, झिमकी पंचायत के उपसरपंच ने सैकड़ों एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कर खेती शुरू कर दी थी। इससे महेशपुर के ग्रामीणों में गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने इस अवैध कब्जे को हटाने के लिए एकजुट होकर जंगल की ओर रुख किया। करीब साढ़े चार सौ ग्रामीणों ने एक साथ जंगल में पहुंचकर अपनी नाराजगी जाहिर की और अतिक्रमण हटाने का फैसला लिया। ### **अचानक हाथियों का आगमन** जब ग्रामीण जंगल में आगे बढ़ रहे थे, तभी जंगल में हाथियों के झुंड का आगमन हुआ। ग्रामीणों के लिए यह अनुभव बेहद रोमांचक और डरावना था। हालांकि, ग्रामीणों ने शांतिपूर्वक अपने विरोध को जारी रखा। हाथियों के इस अप्रत्याशित आगमन ने वन विभाग के अधिकारियों को जांच पूरी करने से रोक दिया। ### **वन विभाग की भूमिका** इस मामले में वन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वन समिति के अध्यक्ष अगस्तुस बेक ने बताया कि जंगल में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर जमीन को खेती के लिए तैयार किया जा रहा है। जब ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों को जंगल में ले जाकर यह स्थिति दिखाई, तो अधिकारी भी हक्के-बक्के रह गए।  जांच अधूरी पत्थलगांव रेंजर कृपासिंधु पैंकरा ने बताया कि शिकायत मिलते ही जांच टीम गठित की गई और जमीन की नाप शुरू की गई। लेकिन हाथियों के वन क्षेत्र में आने की वजह से जांच पूरी नहीं हो सकी। रेंजर ने आश्वासन दिया कि जांच पूरी होने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह घटना हसदेव अरण्य के बाद दूसरी बड़ी घटना है जब ग्रामीणों ने जंगल बचाने के लिए कदम उठाया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी भी हद तक जाकर जंगलों की रक्षा करेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने ग्रामीणों की जागरूकता और उनके जंगल प्रेम को उजागर किया है, जो एक सकारात्मक संदेश देता है। इस घटना ने बता दिया कि जंगलों की सुरक्षा के लिए न केवल वन विभाग बल्कि आम जनता को भी सक्रिय होना पड़ेगा। अवैध कब्जे और कटाई को रोकने के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे, ताकि वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की जा सके।

बच्चों के लिए सुरक्षित शिक्षा: जशपुर में अवैध छात्रावास से बच्चों का सफल रेस्क्यू** **शासकीय छात्रावास में स्थानांतरित बच्चों का भव्य स्वागत, SDM ने बच्चों को उपलब्ध कराई गई सभी सुविधाएं**

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  रायपुर – जशपुर जिले से बाल अधिकार को लेकर अच्छी खबर आई है जहां दीपू बगीचा में नियम विरुद्ध संचालित एक छात्रावास से रेस्क्यू किए गए बालक और बालिकाओं को सुरक्षित रूप से सरकारी छात्रावासों में स्थानांतरित कर दिया गया। यह कदम न सिर्फ प्रशासन की ओर से तत्परता से उठाया गया बल्कि अधिकारियों ने यह भी सुनिश्चित किया कि इन बच्चों का स्वागत और देखभाल पूरे सम्मान और आदर के साथ हो। छात्रों के आगमन पर अधिकारियों और अन्य छात्रावासी बच्चों द्वारा भव्य स्वागत किया गया और केक काटकर उत्सव मनाया गया।   एसडीएम प्रशांत कुशवाहा के निर्देशन में इस पूरी प्रक्रिया को कुशलता से अंजाम दिया गया। उन्होंने हॉस्टल अधीक्षक और अधीक्षिका को निर्देश दिया कि वे बच्चों की विशेष निगरानी रखें और किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत सूचना दें। साथ ही सहायक आयुक्त आदिवासी विकास संजय सिंह और तहसीलदार राहुल कौशिक जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति इस कदम की गंभीरता को रेखांकित करती है। उल्लेखनीय है कि स्थल जांच के दौरान, एसडीएम ने पाया कि संस्कृति कला केंद्र दीपू बगीचा और राजी पड़हा में बने दो भवनों में बच्चों को बिना किसी आधिकारिक अनुमति के छात्रावास के रूप में रखा जा रहा था, और कई तरह की अनियमितताएं सामने आई थीं। कार्रवाई के तहत बच्चों को अवैध छात्रावास से निकालकर शासकीय छात्रावास में स्थानांतरित कर दिया गया।   इस घटना ने एक बार फिर देश में बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया है। ऐसे उदाहरण हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि शिक्षा और सुरक्षा के प्रति समाज और प्रशासन की ज़िम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है। बाल अधिकारों के लिए समर्पित एसडीएम प्रशांत कुशवाहा और सहायक आयुक्त संजय सिंह जैसे अधिकारी, जिन्होंने स्वतंत्रता दिवस से पहले इस अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया, समाज के सामने एक मिसाल पेश करते हैं। *भारत में बच्चों के अधिकारों के लिए महान कार्यकर्ताओं के उदाहरण पढ़िए* भारत में बाल अधिकारों की लड़ाई में कई महान व्यक्तित्वों ने अहम भूमिका निभाई है। जिनमे 1. **कैलाश सत्यार्थी**: बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले कैलाश सत्यार्थी को 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ की शुरुआत की, जिसके तहत उन्होंने हजारों बच्चों को बंधुआ मजदूरी और शोषण से मुक्त कराया। 2. **मदर टेरेसा**: अपनी करुणा और सेवा के लिए विख्यात मदर टेरेसा ने समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर बच्चों के लिए समर्पित कार्य किया। उन्होंने ‘मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी’ की स्थापना की, जिसके तहत अनाथालयों और शेल्टर होम्स का संचालन किया जाता है। 3. **सुरभि सिंह**: ‘सोकोफाऊंडेशन’ की संस्थापक सुरभि सिंह ने सड़कों पर रहने वाले बच्चों और महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, और सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए। 4. **शांति राघवन**: दिव्यांग बच्चों और युवाओं के लिए काम करने वाली शांति राघवन ने ‘एनाबिल इंडिया’ की स्थापना की। उनकी पहल से दिव्यांग बच्चों को शिक्षा और करियर के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिला। इन सभी व्यक्तियों ने अपने कार्यों के माध्यम से यह दिखाया है कि जब समाज में बच्चे सुरक्षित और शिक्षित होते हैं, तभी एक समृद्ध और विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है। जशपुर में उठाए गए कदम बाल अधिकारों के लिए एक सार्थक पहल है और इस दिशा में अन्य राज्यों को भी प्रेरित करता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गांव बगिया में शिव भक्ति की बही बयार,तीन दिनों तक हुआ शिव महापुराण का वाचन

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और,,, जशपुर –  बगिया के श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय 51 हजार पार्थिव शिवलिंग, रुद्राभिषेक हवन पूजन के साथ समापन हुआ।इस मौके पर शिव महापुराण की कथा का भी शुक्रवार को विशाल भंडारा के साथ संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी कौशल्या साय की उपस्थिति में सैकड़ों श्रद्वालुओं ने 51 हजार पार्थिव शिवलिंग बना कर भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चन कर,शिव महापुराण की कथा का श्रवण किया। उल्लेखनिय है कि बगिया के श्रीफलेश्वर नाथ महादेव मंदिर में शिव कथा महापुराण एवं पार्थिव शिवलिंग निर्माण पूजन का आयोजन हर साल किया जाता है। इस साल यह आयोजन बुधवार को भव्य कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ था। बीते तीन दिनों से सुप्रसिद्व कथा वाचिका किशोरी राजकुमारी तिवारी शास्त्री की कथा सुनने के लिए श्रद्वालु यहां जुट रहे थे। आयोजन के अंतिम दिन पंडित राधेश्याम मिश्रा,गगन शर्मा,केयूर भूषण तिवारी,आजाद शर्मा,नवीन शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि विधान से भगवान महादेव की पूजा संपन्न कराया। कथा वाचिका किशोरी राजकुमारी तिवारी शास्त्री ने श्रद्वालुओं को कथा सुनाते हुए कहा कि पार्थिव शिव लिंग की पूजा कभी खाली नहीं जाती। भगवान महादेव श्रद्वालुओं की मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं। उन्होनें कहा कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए दिखावा नहीं,श्रद्वा की जरूरत होती है। हवन और पूजन के बाद विशाल भंडारा का आयोजन किया गया। यहां हजारों श्रद्वालुओं ने भगवान महादेव की प्रसाद ग्रहण किया। शिव महापुराण की कथा का सफलता पूर्वक आयोजन संपन्न होने पर कौशल्या साय ने आयोजन में सहयोग देने वाले कार्यकर्ताओं और श्रद्वालुओं का आभार जताया है।

*विश्व आदिवासी दिवस: कुनकुरी ब्लॉक में धूमधाम से मनाया जाएगा, तैयारियाँ पूर्ण*

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कुनकुरी, जशपुर – पूरे विश्व में 9 अगस्त को मनाए जाने वाले विश्व आदिवासी दिवस की तैयारियाँ कुनकुरी ब्लॉक में जोर-शोर से चल रही हैं। इस अवसर पर, क्षेत्र के विभिन्न जनजातीय आदिवासी समुदाय के लोग खेल मैदान में एकत्र होकर रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे और अपनी एकजुटता का परिचय देंगे। इस आयोजन का नेतृत्व सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले किया जा रहा है। सर्व आदिवासी समाज के उपाध्यक्ष वाल्टर कुजूर ने बताया कि कुनकुरी क्षेत्र के सभी आदिवासी भाई-बहन सुबह 10 बजे खेल मैदान में एकत्रित होंगे। इसके बाद, वे पारंपरिक आदिवासी नृत्य करते हुए जय स्तम्भ चौक और बस स्टैंड से होते हुए पुनः खेल मैदान में सामूहिक कार्यक्रम के लिए एकत्रित होंगे। कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 12 बजे ध्वजारोहण से होगी। इसके बाद, दोपहर 1 बजे युवा एवं महिलाओं के द्वारा अतिथियों का स्वागत किया जाएगा। मुख्य कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से शुरू होगा, जिसमें मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं आदिवासी समाज के नेताओं का उद्बोधन होगा। संध्या 4 बजे कार्यक्रम का समापन होगा। इस बड़े आयोजन की तैयारियों में छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार किस्पोट्टा के निर्देशन में संरक्षक डॉ. पी.सी. कुजूर, मुनेश्वर बैगा, अनिमानन्द एक्का, ब्लॉक अध्यक्ष श्याम सुन्दर मरावी, उपाध्यक्ष वाल्टर कुजूर, कुन्दन पन्ना, श्रीमती राजकुमारी लकड़ा, महासचिव दिलीप सिंह बेसरा, श्रीमती अंजना मिंज, कुलदीप मिंज, सचिव प्रवीण तिर्की, राधेश्याम गंगेश्री, सहायक सचिव जयन्त लकड़ा, रंजलाल भगत, कोषाध्यक्ष श्रीमती कलिस्ता तिकी, प्रदीप लकड़ा, बसंत बेक, सलाहकार अभिनन्द खलखो, एवं विधिक सलाहकार आशीष जोनी केरकेट्टा शामिल हैं। आयोजक मंडल के सदस्य जयंत लकड़ा ने बताया कि विश्व आदिवासी दिवस पर कुनकुरी के साथ ही जशपुर जिले के विभिन्न विकासखंडों में भी हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग अपने गौरवशाली इतिहास और परंपराओं को सम्मानित करेंगे और आने वाली पीढ़ी को इससे परिचित कराएंगे। विश्व आदिवासी दिवस पर इस तरह के आयोजन न केवल आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का माध्यम हैं, बल्कि ये उनकी एकजुटता और समाज में उनके योगदान को भी रेखांकित करते हैं।

छतीसगढ़ में मवेशी तस्करों के गांव साईंटाँगरटोली में पुलिस ने चलाया ‘ऑपरेशन शंखनाद’,,पढ़िए खास रिपोर्ट

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मवेशी तस्करों पर पुलिस के प्रहार की ख़ास खबर (खबर जनपक्ष) जशपुर: छत्तीसगढ़ राज्य के सीमावर्ती गांव साईं टांगरटोली में आज सुबह 4:00 बजे जशपुर पुलिस ने वृहद स्तर पर “ऑपरेशन शंखनाद” चलाकर पशु तस्करों के ठिकानों पर धावा बोला। इस अभियान का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित सोनी ने किया, जिसमें 125 पुलिसकर्मी शामिल थे। हम आपको बता दें कि यह गांव मुस्लिम आबादी वाला बड़ा गांव है।जो लोदाम पुलिस चौकी के अंदर झारखण्ड बॉर्डर पर शँख नदी के तट पर बसा है।अन्तर्राज्यीय सीमा पर होने के कारण यह गांव अपराधियों के लिए काफी मुफ़ीद रही है।यह गांव खासकर मवेशी तस्करी को लेकर बदनाम है।ढाई हजार की आबादी वाले इस गांव के ज्यादातर लोग छोटी-बड़ी दुकान चलाते हैं और मेहनत -मजदूरी करते हैं।शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है लेकिन दसवीं कक्षा के बाद ड्रॉप आउट स्टूडेंट्स की संख्या चिंताजनक है।बीते दो माह से जशपुर पुलिस ने जिले को अपराधमुक्त बनाने के लिए मवेशी तस्करी को टारगेट किया है।जिसके कारण आज इस गांव में ऑपरेशन शंखनाद शुरू किया गया। **ऐसा चला ऑपरेशन शंखनाद कि…** एसपी शशि मोहन सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित सोनी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में 125 पुलिसकर्मियों ने पांच टीमों में बंटकर बलवा ड्रिल और आंसू गैस सामग्री के साथ गांव को चारों ओर से घेर लिया। ऑपरेशन के दौरान ड्रोन से निगरानी की गई।पुलिस ने 04 अलग-अलग बाड़ों से कुल 37 गौ-वंश को मुक्त कराया और 10 तस्करों को गिरफ्तार कर उनसे 09 पिकअप वाहन, 03 कार, 01 स्कॉर्पियो और 05 मोटरसाइकिलें जब्त कीं।गिरफ्तार आरोपियों पर कई न्यायालयों से स्थाई वारंट जारी थे।जप्त वाहनों को राजसात किया जाएगा। एसपी शशि मोहन सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा, “जशपुर पुलिस द्वारा आज प्रातः साईं टांगरटोली में “ऑपरेशन शंखनाद” चलाते हुए 10 तस्करों को गिरफ्तार कर उनसे 09 पिकअप वाहन, 04 कार और 05 मोटरसाइकिलें जब्त की गई हैं। आने वाले दिनों में पूरे जिले में इस तरह की कार्रवाई की जाएगी और जिले को पशु तस्करों से पूर्णतः मुक्त कराया जाएगा।” *पुलिस आपकी दुश्मन नहीं है,हम आपको आईना दिखाने आये हैं*   कार्रवाई के दौरान एसपी शशि मोहन ने मुस्लिम बस्ती में युवाओं की स्टैंडिंग मीटिंग ली जिसमें उन्होंने कहा कि ढाई हजार की आबादी में से कुछ सौ-दो सौ लोग अपराध करते होंगे। जिनके चलते गांव की बदनामी होती है। बाकी लोग अपना सामान्य जीवन जी रहे है,कोई दुकान चलाता है,कोई मेहनत-मजदूरी करता है।ऐसे अपराधियों के कारण आपकी पीढ़ी बर्बाद हो रही है।उन्होंने बच्चों और युवाओं को पढ़-लिखकर अच्छा भविष्य बनाने की समझाइश दी। **पशु प्रेमियों की उम्मीदें:** यह गांव छत्तीसगढ़ के मवेशियों को तस्करी के जरिये झारखंड के रास्ते पश्चिम बंगाल होकर बांग्लादेश तक भेजने का प्रमुख EXIT GATE निकास द्वार है। पशु प्रेमी इस कार्रवाई को मवेशी तस्करी की अंतर्राष्ट्रीय चैनल तोड़ने की बड़ी सफलता मान रहे हैं। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि अब देसी नस्ल के मवेशी बच सकेंगे। इस ऑपरेशन में पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित सोनी, एसडीओपी जशपुर  चंद्रशेखर परमा, एसडीओपी कुनकुरी  विनोद कुमार मंडावी, उप पुलिस अधीक्षक विजय सिंह राजपूत, उप पुलिस अधीक्षक भावेश समरथ, थाना प्रभारी लोदाम निरीक्षक राकेश यादव, निरीक्षक हर्षवर्धन चौरासे और उप निरीक्षक सरिता तिवारी सहित अन्य अधिकारी और पुलिस के जवान शामिल रहे।

छत्तीसगढ़ में पीटीएम कार्यक्रम का मुख्यमंत्री साय ने जशपुर से किया शुभारम्भ, 48000 सरकारी स्कूलों में हुआ पालक-शिक्षक मीटिंग,पत्रकारों से कहा – नहीं बनेगा नया जिला

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जशपुर – मुख्यमंत्री विष्णुदे साय सोमवार-मंगलवार को गृहजिले जशपुर के दौरे पर रहे।इस दौरान उन्होंने शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल बन्दरचूंवा में प्रदेश स्तरीय पालक-शिक्षक बैठक का शुभारंभ किया।कार्यक्रम के बाद वनवासी कल्याण आश्रम के जिलाध्यक्ष बलराम भगत के घर दोकड़ा पहुंचकर उनकी माताजी के निधन पर शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री साय पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 12 बजे मेगा पालक-शिक्षक बैठक में शामिल होने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बन्दरचूंवा पहुंचे। यहां उन्होंने विद्यार्थियों और उनके पालकों से बातचीत की। यह कार्यक्रम शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम माना जा रहा है। शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने जानकारी दी कि प्रदेश के 5,500 संकुल में पालकों की बैठक आयोजित की जा रही है और 48,000 सरकारी स्कूलों में साल में तीन बार पालकों की बैठक होगी। यह पहली बैठक मुख्यमंत्री के निर्देश पर आयोजित की गई है। बैठक में पालकों को बच्चों की पढ़ाई के स्तर को बढ़ाने के लिए 12 बिंदुओं पर चर्चा की गई और जानकारी दी गई। बच्चों में पढ़ाई के कारण बढ़ते तनाव को दूर करने पर भी जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश में 20 बोली भाषाओं में पुस्तक बनाने का काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंच से कहा, ” यहां इस स्कूल में मैं पहले भी आ चुका हूं। मेरी पत्नी हर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस यहीं मनाती हैं। शिक्षा का बड़ा महत्व है और विद्वानों ने इसे विकास का मूलमंत्र बताया है। शिक्षा केवल नौकरी पाने के लिए नहीं है, बल्कि जीवन को पूर्ण बनाने के लिए जरूरी है। शिक्षा के कारण हमारा देश विश्वगुरु कहलाता था और यहां नालंदा और तक्षशिला में दुनियाभर से विद्यार्थी आते थे।” उन्होंने आगे कहा, “मैकाले की शिक्षा पद्धति बहुत दिनों तक चली, लेकिन अब समय के साथ बदलते परिस्थितियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति 2020 लागू की गई है, जो युवाओं और बच्चों को डिग्री, संस्कार और रोजगार के लिए कौशल विकास करने का काम करेगी। अब साल में तीन बार शिक्षक-पालक की बैठक होगी। नई शिक्षा नीति में लोकल भाषा में पढ़ाई कराई जाएगी। जशपुर में पीएमश्री योजना के तहत 263 स्कूल शामिल किए गए हैं, जिससे वे स्कूल प्रायवेट स्कूलों की तरह सुविधाओं से लैस होंगे।” मुख्यमंत्री साय ने जशपुर में 500 सीटर और कुनकुरी में 200 सीटर नालंदा परिसर खोलने की घोषणा की। उन्होंने बन्दरचूंवा में सर्व सुविधायुक्त बस स्टैंड, प्राथमिक शाला से छेराघोघरा के लिए स्ट्रीट लाइट, बंदरचुंवा दोनों मंदिरों के जीर्णोद्धार का भी ऐलान किया। इसके अलावा, उन्होंने बन्दरचूंवा में एक मिनी स्टेडियम और छात्रावास को 50 सीट से बढ़ाकर 100 सीट करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री साय ने पालक हरिसेवक की तारीफ करते हुए कहा कि उनका पोता यहीं से पढ़कर एमएससी कर रहा है। उन्होंने कहा, “रायपुर में नालंदा परिसर खोला गया है, जहां प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वालों के लिए 24 घंटे खुला रहता है। ऐसे ही नालंदा परिसर 22 जिलों में खोलने जा रहे हैं।” इन सभी योजनाओं और घोषणाओं के साथ, मुख्यमंत्री साय ने शिक्षा और विकास के क्षेत्र में व्यापक सुधार और प्रगति का आश्वासन दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने भी सरकारी स्कूल के शिक्षकों को उनकी मेहनत के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि वे निजी तौर पर 1990 से स्कूलों में जाकर पालकों, विद्यार्थियों और गुरुजनों के साथ चर्चा करती आ रही हैं। उन्होंने कहा, “परीक्षा कोई भूत नहीं है जो आपको इतना डरा दे। परीक्षा के समय स्कूलों में जाकर बच्चों को समझाना, परिणाम को लेकर अच्छा वातावरण बनाने का काम हम सभी को करना चाहिए।” उन्होंने पालकों को यह भी याद दिलाया कि बच्चों को संस्कार देने का काम उनका है, जबकि शिक्षक उन्हें आगे बढ़ाने का कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मीडिया से बात करते हुए घोषणा की है कि रेडी टू ईट योजना, जिसे भूपेश सरकार के दौरान महिला स्वसहायता समूहों से छीन लिया गया था, अब फिर से इन्हीं समूहों को सौंपने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री साय ने सुबह बगिया निवास श्रीराम सदन में 59 कब्जाधारियों को वनभूमि के पट्टे सौंपे। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने प्रदेश में नए जिले बनाने की योजना से फिलहाल इंकार किया।

 जशपुर में सड़क किनारे पहाड़ी कोरवा महिला ने दिया शिशु को जन्म, समय पर सहायता से सुरक्षित रहे जच्चा-बच्चा

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जशपुर: कुनकुरी तहसील के नारायणपुर गांव में आज सुबह 11 बजे एक असाधारण घटना घटी, जब एक पहाड़ी कोरवा महिला ने सड़क किनारे एक बाउंड्रीवाल के अंदर शिशु को जन्म दिया। इस घटना में मकान मालकिन, दुकानदार और स्वास्थ्यकर्मियों की तत्परता और सहयोग से समय से पहले हुए इस प्रसव में जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित रहे। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर श्रीमती किरण कांति कुजूर ने खबर जनपक्ष  को बताया कि प्रसूता बिंदेश्वरी बाई (21) अपने ससुराल बछरांव जाने के लिए नारायणपुर बस स्टेशन पर बस का इंतजार कर रही थीं। वह पिछले सप्ताह से अपने मायके जाताकोना में थीं और उनके भाई ने उन्हें बाइक से नारायणपुर छोड़ा था। अचानक, बिंदेश्वरी को पेट में तेज दर्द हुआ और वह सड़क किनारे एक बाउंड्रीवाल के अंदर चली गईं, जहां उनका मेम्ब्रेन फूटने से समय से 2 महीने पहले प्रसव हो गया। नवजात बालिका का वजन डेढ़ किलो है और उसे कुनकुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शिशु विशेषज्ञों द्वारा जांच के लिए ले जाया गया। घटना की सूचना मिलते ही बीएमओ ने ड्यूटी पर तैनात नर्सों को तत्काल मौके पर भेजा और जच्चा-बच्चा को सकुशल अस्पताल पहुंचाया। इस घटना में युवा व्यवसायी राहुल बंग और मकान मालकिन सपना सिंह की संवेदनशीलता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सपना सिंह ने बताया कि जब वह सावन सोमवार को शिव मंदिर से पूजा करके लौटीं, तो उन्होंने बाउंड्रीवाल के पास एक महिला को बच्चे को जन्म देते देखा। उन्होंने तुरंत पड़ोसी राहुल बंग को अस्पताल की सूचना देने के लिए कहा और खुद वाहन की व्यवस्था करने लगीं। महिला का बीपी बढ़ा हुआ था और खराब सड़कों पर बाइक से यात्रा करने के कारण यह घटना हुई थी। डॉ. मीना कुजूर, लैब टेक्नीशियन समाप्रिया खाखा, स्टाफ नर्स दीपा टोप्पो और लिपिक किरण मिंज ने भी मौके पर पहुंचकर तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की और महिला व शिशु को अस्पताल पहुंचाया। इन सभी की तत्परता और संवेदनशीलता ने एक जीवनरक्षक भूमिका निभाई और जच्चा-बच्चा को सुरक्षित रखा।

हाथी के हमले में बाल-बाल बचे दंपत्ति, बाउंड्रीवाल व घर को किया क्षतिग्रस्त

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जशपुर – बादलखोल अभ्यारण्य से सटे ग्राम बुटंगा में बीती रात एक दंतैल हाथी ने आतंक मचाया। एलासीयूस एक्का और उनकी पत्नी घर में गहरी नींद में सो रहे थे जब हाथी ने उनके घर पर हमला किया। घटना रात करीब 3 बजे की है, जब हाथी दल से बिछड़कर बस्ती में घुस आया। हाथी ने सबसे पहले एलासीयूस के घर की बाउंड्रीवाल को तोड़ा और फिर घर की दीवार में छेद कर धान के बोरों तक पहुंचने की कोशिश की। दीवार गिरने की आवाज से एलासीयूस जाग गए और उन्होंने तुरंत अपनी पत्नी को जगाया। दोनों ने समझदारी दिखाते हुए पड़ोसियों को आवाज देकर बुलाया। लगभग आधे घंटे तक हाथी घर के बाहर खड़ा रहा। ग्रामीणों के शोर-शराबे के बाद हाथी ख्रीस्तोफर के खेत में लगी धान की फसल को नुकसान पहुंचाते हुए जंगल की ओर लौट गया।   गेम रेंजर बुधेश्वर साय ने बताया कि अभयारण्य का स्टाफ लगातार गांव-गांव जाकर लोगों को हाथी से बचाव के उपाय बता रहा है। रविवार को बादलखोल अभयारण्य के स्टाफ ने साहीडांड़, रामसमा, सेंद्रीगुंडा, बच्छरांव, कलिया और सरायटोली गांवों में मुनादी कर ग्रामीणों को हाथियों से छेड़खानी न करने की सलाह दी और आवश्यक जानकारी दी। इस घटना से ग्रामीणों में हाथियों के हमले के प्रति जागरूकता बढ़ी है और अधिकारियों द्वारा चलाए जा रहे बचाव अभियानों की महत्वपूर्णता और भी स्पष्ट हो गई है।

*उत्कल ब्राह्मण महिला मंडल ने मनाया भव्य सावन मिलन समारोह* *नई पीढ़ी को सांस्कृतिक मूल्यों के बारे में मिली जानकारी*

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**जशपुर/कुनकुरी, 3 अगस्त 2023** – उत्कल ब्राह्मण महिला मंडल द्वारा शनिवार को आयोजित सावन मिलन समारोह एक भव्य और हर्षोल्लासपूर्ण आयोजन के रूप में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर समाज की महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए और इस आयोजन को विशेष बना दिया। समारोह की शुरुआत समाज की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत विभिन्न रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुई। महिलाओं ने सावन के गीतों और पारंपरिक नृत्यों से सबका मन मोह लिया। इस अवसर पर ‘मां के नाम एक पेड़ लगाने’ का संकल्प लेते हुए सभी ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और ‘प्लास्टिक मुक्त कुनकुरी’ का संकल्प भी लिया। समाज की वरिष्ठ महिलाओं को विशेष सम्मान देते हुए उन्हें श्रीफल और सुहाग सामग्री भेंट की गई, साथ ही उनसे सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद लिया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ महिलाओं के अनुभवों और समाज के प्रति उनके योगदान को भी याद किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चों की उत्साही भागीदारी से आयोजन में नई ऊर्जा का संचार हुआ। सावन मिलन समारोह ने न केवल समाज को एकजुट किया बल्कि हिंदू संस्कृति और परंपराओं को भी सजीव रूप में प्रस्तुत किया। इस भव्य आयोजन ने समाज के बीच भाईचारे और एकजुटता को मजबूत किया और आने वाले समय में समाज सेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के संकल्प को दोहराया। समारोह की सफलता के लिए सभी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का सराहनीय योगदान रहा। यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज की प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित करता है। ऐसे आयोजनों से समाज में एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत होती है और नई पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का सुअवसर मिलता है।

सांय-सांय : डॉक्टरों की कमी को दूर करने सीएम साय की बड़ी पहल, ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में 18 डॉक्टरों को भेजा गया,15 दिन में ज्वाइन करने का अल्टीमेटम

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जशपुर –  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर जशपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग ने 18 एमबीबीएस चिकित्सको की नियुक्ति की है।चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे जशपुर के खासकर ग्रामीण इलाकों के आदिवासियों के लिए यह राहत की खबर है। दरअसल,जशपुर सहित पूरे प्रदेश में एमबीबीएस चिकित्सको की कमी को दूर करने के लिए लोक स्वास्थ और परिवार कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2018 पाठ्यक्रम के स्नातक उत्तीर्ण मेडिकल छात्र छात्राओं को दो साल के लिए संविदा नियुक्ति देते हुए पदस्थापना सूची जारी की है। इस सूची में जशपुर जिले को 18 चिकित्सक मिले हैँ। इनमे डॉ चंचल धुर्वे को जिला चिकित्सालय,डॉ अविनाश मिंज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दूल्दुला,डॉ अंजू परिहार को जिला चिकित्सालय,डॉ मिती कुंज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनोरा,डॉ लोकेश कुमार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किलकिला,डॉ अंकित खलको को जिला चिकित्सालय,डॉ पवन कुमार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र झिमकी,डॉ विश्वजीत पांडे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आस्ता,डॉ देवेंद्र कुमार को जिला चिकित्सालय,डॉ जॉन खलखो को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कस्तूरा,डॉ अंकित भगत को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कंदाईबहार,डॉ मधुवेन्द्र सिंह को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुकरगाँव,डॉ निकिता खलखो को जिला चिकित्सालय,डॉ आकांक्षा तिग्गा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोदाम,डॉ आयुष सिंह को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छीछली,डॉ अदिति मोना टोप्पो को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मैनी,डॉ शशि एक्का को सामुदायिक स्वास्थ केंद्र सन्ना और डॉ कुलदीप प्रताप सिंह को सामुदायिक स्वास्थ केंद्र लोदाम में पदस्थ किया गया है। उल्लेखनीय है कि जशपुर जिले की स्वास्थ्य सुविधा में सुधार और इसे सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पदभार सम्हालने के बाद से ही सक्रिय हैँ। 18 एमबीबीएस चिकित्सको से पहले जिले को 7 विशेषज्ञ चिकित्सको की नियुक्ति राज्य सरकार कर चुकी है। गौरतलब, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने पहले बजट में जशपुर वासियों के दशकों पुराने मेडिकल कॉलेज स्थापना के सपने को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 220 बिस्तर का सर्वसुविधा युक्त अस्पताल निर्माण की स्वीकृति देते हुए,इसके लिए बजट भी जारी कर दी है। जिले में एम्बुलेंस की कमी को दूर करने के लिए 14 अतिरिक्त एम्बुलेंस और 1 शव वाहन उपलब्ध कराया जा चूका है। सरकार ने बजट में जिले के 7 उप स्वास्थ्य केन्द्रो को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उनयन करने की स्वीकृति भी दे चुकी है। इसके साथ ही जिले की स्वास्थ्य सुविधा को सुदृढ़ करने के लिए जिले को 138 करोड़ रूपये का अतिरिक्त आबंटन जारी किया जा चूका है। इस राशि का प्रयोग कुनकुरी में डाईलिसीस केंद्र स्थापित करने के साथ जिला चिकित्सालय में सी आर्म मशीन,लोदाम और मनोरा में ब्लड स्टोरेज मशीन,पत्थलगांव और बगीचा में वाशिंग मशीन और फरसाबहार में अत्याधुनिक एक्सरे मशीन स्थापित करने के लिए किया जाएगा।