भूख हाथियों को धान मंडी तक खींच लाई,छत्तीसगढ़ में 20 रातों से धान की बोरियां उठाकर जंगल ले जा रहे जंगली हाथी

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भूख हाथियों को धान मंडी तक खींच लाई,छत्तीसगढ़ में 20 रातों से धान की बोरियां उठाकर जंगल ले जा रहे जंगली हाथी सार – जैसे ही अंधेरा घिरता है, ग्रामीणों को हाथियों के आने की खबर मिल जाती है। इसके बाद धान खरीदी केंद्र के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो जाते हैं। लोग मोबाइल कैमरों से उस दृश्य को रिकॉर्ड करते हैं, जहां विशालकाय हाथी शांति से धान की बोरियां उठाकर जंगल की ओर लौट जाते हैं। रायगढ़,09 जनवरी,2025 रायगढ़ जिले में ग्राम बंगुरसिया के धान खरीदी केंद्र में इन दिनों एक अनोखा लेकिन बेहद चिंताजनक दृश्य देखने को मिल रहा है। लगातार 15 से 20 दिनों से हर रात जंगली हाथियों का झुंड धान मंडी तक पहुंच रहा है और वहां से धान की बोरियां उठाकर जंगल की ओर ले जा रहा है। यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि जंगलों में बदलती स्थिति और भूखे वन्यजीवों की मजबूरी की तस्वीर है। रात होते ही जुटती है ग्रामीणों की भीड़ जैसे ही अंधेरा घिरता है, ग्रामीणों को हाथियों के आने की खबर मिल जाती है। इसके बाद धान खरीदी केंद्र के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो जाते हैं। लोग मोबाइल कैमरों से उस दृश्य को रिकॉर्ड करते हैं, जहां विशालकाय हाथी शांति से धान की बोरियां उठाकर जंगल की ओर लौट जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि हाथी अब तक किसी तरह की तोड़फोड़ या आक्रामकता नहीं दिखा रहे हैं। वन विभाग सतर्क, हाथी मित्र दल तैनात वन विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। हाथी मित्र दल की टीम मौके पर तैनात है, जो हाथियों की गतिविधियों की मॉनिटरिंग कर रही है और उन्हें सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर वापस भेजने का प्रयास कर रही है। हालांकि, हाथियों का बार-बार लौट आना यह संकेत देता है कि जंगलों में उनके लिए पर्याप्त भोजन नहीं बचा है। तस्वीरें बता रही हैं जंगल की सच्चाई हाथियों के ये वीडियो और तस्वीरें साफ संदेश दे रही हैं कि जंगल भले ही हाथियों का प्राकृतिक घर हों, लेकिन वहां भोजन का संकट गहराता जा रहा है। जंगलों में घटता प्राकृतिक आहार, बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप और विकास गतिविधियां हाथियों को इंसानी इलाकों की ओर खींच रही हैं। गणेश के स्वरूप गजराज संकट में भारत में हाथी को भगवान गणेश के रूप में पूजा जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में यही पूजनीय जीव आज अपने अस्तित्व और भोजन के लिए संघर्ष करता नजर आ रहा है। मानव-हाथी द्वंद्व बढ़ने का सबसे बड़ा कारण जंगल में इंसानों की बढ़ती दखलअंदाजी और हाथियों की भोजन तलाश में बस्तियों तक पहुंच है। सिर्फ नुकसान की नहीं, चेतावनी की खबर बंगुरसिया की धान मंडी में उठती धान की बोरियां केवल सरकारी नुकसान की कहानी नहीं कहतीं, बल्कि यह भविष्य के बड़े टकराव की चेतावनी भी हैं। यदि जंगलों में हाथियों के लिए भोजन और सुरक्षित रास्ते नहीं बनाए गए, तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। स्थायी समाधान जरूरी वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए जंगलों में प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता बढ़ाना,हाथी कॉरिडोर का संरक्षण,और मानव बस्तियों से हाथियों की सुरक्षित दूरी सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है। यह खबर हाथियों की नहीं, हमारी जिम्मेदारी की कहानी भी है।

युवती ने शादी से मना किया तो प्रेमी फंदे पर झूल गया,प्रेमी के भाई ने लगाए गंभीर आरोप

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कुनकुरी में युवक ने लगाई फांसी, प्रेम संबंध को लेकर प्रताड़ना का आरोप कुनकुरी,09 जनवरी 2026 – कुनकुरी थाना क्षेत्र के ठेठेटांगर में शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे एक 20 वर्षीय युवक ने अपने ही घर के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान दिलेश्वर यादव के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही कुनकुरी पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मृतक के परिजनों का आरोप है कि दिलेश्वर यादव का पड़ोस के गांव की एक सजातीय युवती से प्रेम संबंध था और वह उससे विवाह करना चाहता था। परिजनों के अनुसार इस रिश्ते से युवती के पिता और चाचा नाराज थे और उन्होंने दिलेश्वर को जान से मारने की धमकी देते हुए युवती से दूर रहने के लिए बार-बार आमने-सामने और फोन पर दबाव बनाया। परिजनों का कहना है कि इसी मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर दिलेश्वर ने यह कदम उठाया। परिजनों ने यह भी दावा किया कि दिलेश्वर यादव ने आत्महत्या से पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी, जिसमें उसने युवती का नाम लेते हुए अपनी मौत का कारण प्रेम और विवाह को लेकर हुए कथित धोखे को बताया है। वहीं कुनकुरी पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार दिलेश्वर यादव ने अपने घर के म्यार (छज्जे/अंदरूनी हिस्से) में फांसी लगाकर आत्महत्या की है। पुलिस का कहना है कि मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई की जा रही है और आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस संभवतः सोशल मीडिया पोस्ट, परिजनों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच करेगी।

मुख्यमंत्री के जिले में धान खरीदी पर घमासान, 9 जनवरी को 46 केंद्रों में कांग्रेस का जिला-व्यापी “धान खरीदी किसान न्याय आंदोलन”

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मुख्यमंत्री के जिले में धान खरीदी पर घमासान, 9 जनवरी को 46 केंद्रों में कांग्रेस का जिला-व्यापी “धान खरीदी किसान न्याय आंदोलन” जशपुर,08/01/2026 मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नमी, कटौती, अवैध वसूली और बिचौलियों के जरिए धान खरीदी के आरोपों को लेकर जशपुर जिला कांग्रेस कमेटी ने 9 जनवरी शुक्रवार को जिले-व्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। कांग्रेस के अनुसार जिले के सभी 46 धान खरीदी केंद्रों में एक साथ सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। यह जिला-व्यापी “धान खरीदी किसान न्याय आंदोलन” जिला कांग्रेस अध्यक्ष यूडी मिंज के नेतृत्व में होगा। कार्यक्रम के वरिष्ठ मार्गदर्शक प्रदेश महासचिव एवं जिला कांग्रेस प्रभारी भानु प्रताप सिंह होंगे, जो आंदोलन को संगठनात्मक और रणनीतिक दिशा देंगे। कांग्रेस ने आंदोलन के लिए संयोजक और सह-संयोजक भी तय किए हैं। पूर्व विधायक विनय भगत को मुख्य संयोजक बनाते हुए जशपुर जिला एवं जशपुर विधानसभा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज सागर यादव को कुनकुरी विधानसभा का सह-संयोजक बनाया गया है। वहीं पत्थलगांव विधानसभा में प्रदेश महासचिव एवं जिला पंचायत सदस्य आरती सिंह को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। युवा कांग्रेस प्रभारी रवि शर्मा, महिला कांग्रेस प्रभारी रत्ना पैकरा, सेवा दल एवं सभी प्रकोष्ठों को भी आंदोलन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। कांग्रेस का दावा है कि जिले के सभी 46 धान खरीदी केंद्रों में पार्टी की ओर से प्रभारी नियुक्त किए गए हैं, जो ब्लॉक अध्यक्षों और ब्लॉक प्रभारियों के साथ मिलकर आंदोलन को सफल बनाएंगे और किसानों के साथ खड़े रहेंगे। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के जिले में ही किसानों के साथ खुलेआम लूट हो रही है। धान खरीदी केंद्रों में नमी के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। शासन द्वारा निर्धारित 40.680 किलोग्राम (बारदाना सहित) के मानक की अनदेखी कर अधिक तौल की जा रही है। कई केंद्रों पर बिचौलियों के माध्यम से धान खरीदी होने से किसानों को सीधे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। विरोध करने पर किसानों से दुर्व्यवहार किया जा रहा है, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री महेश त्रिपाठी ने बताया कि 22 दिसंबर 2025 को इन गड़बड़ियों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक किसी भी दोषी पर कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस का आरोप है कि धान खरीदी में फैली अव्यवस्था और भ्रष्टाचार को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। कांग्रेस ने मांग की है कि धान की तौल निर्धारित 40.680 किलोग्राम के मानक के अनुसार की जाए, बिचौलियों के जरिए खरीदी पर तत्काल रोक लगे और राइस मिलों को विशेष निगरानी में रखा जाए, जहां से पिक-अप के माध्यम से धान मंडी आने की शिकायतें मिल रही हैं। साथ ही किसानों से दुर्व्यवहार करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो तथा नमी के नाम पर होने वाली अवैध वसूली पूरी तरह बंद की जाए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि 9 जनवरी का धरना-प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन यदि किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पार्टी ने कहा कि अन्नदाता के साथ हो रहे अन्याय को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और किसान न्याय की यह लड़ाई आखिरी दम तक लड़ी जाएगी।

*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर में स्वास्थ्य क्रांति, दो वर्षों में बदली जिले की तस्वीर, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की मिली बड़ी सौगात….*

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*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर में स्वास्थ्य क्रांति, दो वर्षों में बदली जिले की तस्वीर, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की मिली बड़ी सौगात….* जशपुर, 19 दिसंबर 2025/मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में जशपुर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं ने ऐतिहासिक परिवर्तन का साक्षी बना है। कभी सीमित संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझने वाला यह जिला आज आधुनिक चिकित्सा ढांचे, सुदृढ़ आपात सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण प्रदेश के अग्रणी जिलों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जशपुर की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। पहले जहां दूरस्थ अंचलों के लोगों को सामान्य उपचार और सुरक्षित प्रसव के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब जिले में ही उच्च स्तरीय उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। डायलिसिस जैसी जटिल सेवाएं, जो कभी कल्पना से परे थीं, अब जिलेवासियों के लिए सुलभ होती जा रही हैं। *दो वर्षो में मिली स्वास्थ्य के क्षेत्र में मिलीं जिले को कई ऐतिहासिक सौगातें* मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। जशपुर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए वित्त विभाग से 359 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक स्वीकृति मिलना जिले के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इसके साथ ही 220 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक अस्पताल के निर्माण के लिए 32 करोड़ रुपये की मंजूरी ने जिले में उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था की नींव रख दी है।अखिल भारतीय कल्याण आश्रम परिसर में 35 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक चिकित्सालय का निर्माण कार्य तीव्र गति से जारी है, जो भविष्य में जशपुर को एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। वहीं नर्सिंग शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 8.78 करोड़ रुपये की लागत से नर्सिंग कॉलेज भवन निर्माण को स्वीकृति दी गई है, जिससे जिले को प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित होगी। *मातृ-शिशु स्वास्थ्य को मिली प्राथमिकता* मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करते हुए कुनकुरी में 50 बिस्तरों वाले मातृ-शिशु अस्पताल का निर्माण 8.77 करोड़ रुपये की लागत से प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त जिले में 14 करोड़ रुपये की लागत से फिजियोथेरेपी महाविद्यालय तथा कुनकुरी में 2 करोड़ 62 लाख रुपये से नेचुरोपैथी भवन निर्माण की स्वीकृति ने स्वास्थ्य सेवाओं को बहुआयामी बनाया है।वहीं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर जिले के फरसाबहार मुख्यालय में बहुत जल्द सत्य साईं मातृत्व शिशु चिकित्सालय की स्थापना होगी जो जिले वासियों के साथ पड़ोसी राज्यों को भी इसकी सुविधाएं मुहैया होगी। यह नागलोग क्षेत्र वासियों के लिए बड़ी सौगात है।अब स्वास्थय के क्षेत्र में लोगों के लिए यह वरदान साबित होगी। *जिले में आपातकालीन सेवाओं को मिली नई गति* मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के निर्देश पर जिले में आपात चिकित्सा सेवाओं का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। स्वास्थ्य आपात स्थितियों में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के लिए जिले को 10 नई 108 संजीवनी एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। अब जिले में कुल 24 संजीवनी एक्सप्रेस एंबुलेंस जीवनरक्षक सेवा प्रदान कर रही हैं। इसके अलावा 102 महतारी एक्सप्रेस की 18 एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाकर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित कर रही हैं। प्रत्येक विकासखंड में शव वाहन की उपलब्धता ने कठिन समय में ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत दी है। *नए स्वास्थ्य केंद्रों की सौगात से ग्रामीण क्षेत्रों को मिला संबल* जिले के स्वास्थ्य ढांचे को जमीनी स्तर पर मजबूत करते हुए कोतबा में 4 करोड़ 37 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण की स्वीकृति दी गई है। साथ ही जिले के फरसाबहार तहसील के पेटामारा (अंकिरा) एवं गांझियाडीह, दुलदुला तहसील के करडेगा एवं सीरिमकेला तथा कुनकुरी तहसील के केराडीह में 5 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना को मंजूरी मिली है,जो ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ जाएगी। आज जशपुर स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में किए गए ये ऐतिहासिक प्रयास जिले को एक मजबूत, सक्षम और आधुनिक स्वास्थ्य मॉडल के रूप में स्थापित कर रहे हैं। यह परिवर्तन केवल अधोसंरचना का नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक है।

संपादकीय : छत्तीसगढ़ में गौ-तस्करी : संरचनात्मक विफलता और शासन की नैतिक जिम्मेदारी

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संपादकीय : छत्तीसगढ़ में गौ-तस्करी : संरचनात्मक विफलता और शासन की नैतिक जिम्मेदारी संतोष चौधरी छत्तीसगढ़ में गौ-तस्करी की बढ़ती घटनाएँ अब केवल आपराधिक गतिविधि भर नहीं रहीं, बल्कि वे राज्य की पशु-कल्याण नीति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और शासन-प्रणाली की गंभीर संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर कर रही हैं। कुनकुरी में पकड़ी गई हालिया घटना—जिसमें पिकअप वाहन में क्रूरतापूर्वक लदे मवेशियों में से एक बैल और दो गायों की दम घुटने से मृत्यु हो गई—इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि गौ-संरक्षण के दावे और जमीनी वास्तविकता के बीच गहरी खाई मौजूद है। यह प्रश्न अत्यंत प्रासंगिक है कि जब सरकार गौ-तस्करी के विरुद्ध “जीरो टॉलरेंस” की नीति का दावा करती है, तब बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर जैसे कृषि प्रधान जिलों से बड़ी संख्या में मवेशी बिना किसी प्रभावी रोक-टोक के अंतरराज्यीय मार्गों तक कैसे पहुँच रहे हैं? स्पष्ट है कि यह समस्या केवल तस्करों की चतुराई का परिणाम नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र की सीमाओं और प्रशासनिक समन्वय की कमी का द्योतक है। गौ-तस्करी का मूल कारण : आवारा मवेशी और अपर्याप्त गौशालाएँ छत्तीसगढ़ में आवारा मवेशियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खेतों में फसल नुकसान और मवेशियों की बढ़ती तादाद से किसान विवश होकर मवेशियों को खुला छोड़ देते हैं। राज्य में उपलब्ध गौशालाओं की संख्या, उनकी क्षमता और संसाधन इस बढ़ते दबाव को संभालने में पूर्णतः अक्षम प्रतीत होते हैं। अनेक गौशालाएँ मात्र औपचारिकता बनकर रह गई हैं—जहाँ न पर्याप्त स्थान है, न चारा, न पशु चिकित्सा सुविधाएँ। इसी शून्य का लाभ गौ-तस्कर उठाते हैं। आवारा मवेशी उनके लिए कच्चा माल बन जाते हैं। नतीजतन, तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा न रहकर नीतिगत विफलता का रूप ले लेती है। कानून प्रवर्तन की सीमाएँ और जोखिम कुनकुरी की घटना में पुलिस की तत्परता सराहनीय है, किंतु यह भी ध्यान देने योग्य है कि कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मी घायल हुए और तस्कर अंधेरे का लाभ उठाकर फरार हो गए। यह दर्शाता है कि गौ-तस्करी जैसे संगठित अपराधों से निपटने के लिए वर्तमान व्यवस्था न तो पर्याप्त संसाधनों से लैस है और न ही तकनीकी रूप से सुदृढ़। शासन की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी भारतीय संविधान और पशु-कल्याण से जुड़े अधिनियम राज्य को यह दायित्व सौंपते हैं कि वह मूक पशुओं के संरक्षण और मानवीय व्यवहार को सुनिश्चित करे। गौमाता को सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से सम्मान देने का दावा तभी सार्थक होगा, जब उसे सड़कों पर बेसहारा भटकने और तस्करों के वाहनों में दम तोड़ने से बचाया जा सके। आवश्यक नीतिगत हस्तक्षेप समस्या का समाधान प्रतीकात्मक अभियानों से नहीं, बल्कि ठोस और दीर्घकालिक रणनीति से संभव है। इसके लिए— प्रत्येक विकासखंड में पर्याप्त क्षमता वाली, सुव्यवस्थित गौशालाओं की स्थापना आवारा मवेशियों का पंजीकरण और ट्रैकिंग प्रणाली अंतरराज्यीय सीमाओं पर स्थायी, तकनीक-आधारित निगरानी और गौ-तस्करी में संलिप्त पूरे नेटवर्क पर कठोर, उदाहरणात्मक कार्रवाई अनिवार्य है।   कुनकुरी की घटना एक चेतावनी है—यदि अब भी गौ-तस्करी को केवल पुलिसिया समस्या मानकर टाल दिया गया, तो यह संकट और गहराएगा। तीन गायों की मौत केवल एक समाचार नहीं, बल्कि यह उस व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है जो गौ-संरक्षण की बात तो करती है, पर उसके लिए आवश्यक ढाँचा खड़ा करने में अब तक विफल रही है। शासन को आत्ममंथन करना होगा, क्योंकि गौमाता की दुर्दशा अंततः राज्य की प्रशासनिक और नैतिक साख से जुड़ा प्रश्न है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया सड़क हादसे पर गहरा दुख

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया हादसे पर गहरा दुःख  आज सुबह नेशनल हाईवे 43 पर तेज रफ्तार कार और ट्रेलर में हुई भिड़ंत में पांच लोगों की हुई मौत जशपुर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43, पतराटोली के पास हुए दर्दनाक सड़क हादसे में पाँच लोगों की मौत की खबर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने गहरा शोक प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि हादसे की सूचना अत्यंत दुखद है और इस दुखद घड़ी में वे शोकाकुल परिजनों के साथ हैं।मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और परिजनों को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।

कुनकुरी में सड़क हादसा बना कड़वी सच्चाई का आईना — मर गया सरकारी सिस्टम और मर गई मानवीय संवेदना !

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कुनकुरी,05/12/2025 गुरुवार शाम तपकरा रोड गड़ाकटा में हुए एक सड़क हादसे ने न सिर्फ एक व्यक्ति की जान ले ली, बल्कि यह भी उजागर कर दिया कि इस शहर में सरकारी सिस्टम और मानवीय संवेदना — दोनों की सांसें कब की थम चुकी हैं। दरअसल,कुंजारा निवासी 47 वर्षीय चंद्रिका यादव गुरुवार शाम साढ़े छह बजे अपनी मोटरसाइकिल सड़क किनारे खड़ी कर मोबाइल पर बात कर रहे थे। तभी अचानक पीछे से आई तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। बाइक सवार कथित रूप से नशे में था और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वह पीडब्ल्यूडी विभाग का कर्मचारी बताया जा रहा है। टक्कर इतनी भीषण थी कि चंद्रिका सड़क पर ही गिर पड़ा और तड़पते रहा।   लेकिन असली दर्दनाक कहानी उसके बाद शुरू हुई—घायल चंद्रिका काफी देर तक सड़क पर पड़े-पड़े जान बचाने की उम्मीद लिए तड़पता रहा, मगर न तो 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची, न वहां कार से गुजर रहे शहर के संभ्रांत युवाओं ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। प्रत्यक्षदर्शी विकास यादव के शब्दों में, “जब तक उनमें प्राण थे, कोई मदद के लिए नहीं आया… जब प्राण निकल गए तब सरकारी शववाहन जरूर आ गया।”   कुनकुरी पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।   लेकिन यह सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं… यह सवाल है उस सिस्टम पर जो अक्सर समय पर नहीं जागता, उस समाज पर जो मोबाइल से वीडियो तो बना लेता है, पर गिरते इंसान को उठाने का साहस नहीं करता। कुनकुरी इलाके में यदि जीते जी इलाज नहीं मिलता और मरने के बाद कभी शववाहन भी नसीब नहीं होता, तो यह घटना बयान कर गई कि यहां सरकारी सिस्टम की मौत तो पहले ही हो चुकी थी — अब मानवीय संवेदना भी दम तोड़ चुकी है।

जशपुर में दहला देने वाली घटना — प्रिंसिपल के बैड टच से त्रस्त नाबालिग छात्रा ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में खोले काले राज… अवैध हॉस्टल में चल रहा था दरिंदगी का खेल!

जशपुर में दहला देने वाली घटना — प्रिंसिपल के बैड टच से त्रस्त नाबालिग छात्रा ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में खोले काले राज… अवैध हॉस्टल में चल रहा था दरिंदगी का खेल!   जशपुर – जिले के बगीचा थाना क्षेत्र के गोवासी गांव में रविवार सुबह एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। नवीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा ने प्रिंसिपल की प्रताड़ना से तंग आकर फांसी लगा ली। छात्रा स्कूल के भीतर ही संचालित अवैध हॉस्टल में रहती थी, जिसे स्कूल प्रिंसिपल कुलदीप टोपनो खुद चलाता था।   ❗ सुसाइड नोट में बड़ा खुलासा — बैड टच, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की बातें लिखीं पुलिस को घटनास्थल से बरामद सुसाइड नोट में छात्रा ने साफ लिखा है कि प्रिंसिपल उसके साथ बैड टच करता था और उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता था। नाबालिग की पीड़ा पढ़कर जांच टीम भी सन्न रह गई।   ❗ आरोपी प्रिंसिपल हिरासत में, अवैध हॉस्टल का काला सच सामने   सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और आरोपी प्राचार्य कुलदीप टोपनो को हिरासत में ले लिया। जांच में सामने आया कि ग्रामीण शिक्षा समिति द्वारा संचालित इस स्कूल में 124 बच्चे पढ़ते हैं, जिनमें 33 बच्चे प्राचार्य द्वारा चलाए जा रहे अवैध हॉस्टल में रह रहे थे। मृत छात्रा भी इसी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी।जिसने बीती रात हॉस्टल के स्टडी रूम में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।   ❗ प्रशासनिक तंत्र हरकत में — कई अधिकारी मौके पर   घटना के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीईओ, एसडीएम, बीईओ, सहायक आयुक्त, तहसीलदार, एसडीओपी और पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है।फॉरेंसिक एक्सपर्ट भी पहुंच गए हैं। मृतका का कमरा सील कर दिया गया है और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया।   ❗ एसएसपी का बड़ा बयान   एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि, “यह नाबालिग छात्रा की आत्महत्या का मामला है। सुसाइड नोट मिला है जिसमें प्रताड़ना का जिक्र है। जांच गंभीरता से चल रही है।”   ❗ जिले में उबाल — निजी स्कूलों व हॉस्टलों पर सवाल घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। लोग अवैध हॉस्टलों और निजी स्कूलों की लचर व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। इससे पहले भी पोर्तेंगा मिशन स्कूल में अवैध हॉस्टल में बच्चों के धर्मांतरण की कोशिश के आरोप के साथ ही उन्हें शारीरिक प्रताड़ना देने का मामला आया था।वहीं कुनकुरी में नर्सिंग कॉलेज के हॉस्टल में एक प्रिंसिपल द्वारा जबरन धर्मांतरण का मामला सामने आ चुका है। ऐसे में जिले के अंदर निजी स्कूलों और संस्थाओं की निगरानी पर भी अब बड़ी बहस शुरू हो गई है। यह दिल दहला देने वाली घटना न केवल एक छात्रा की जिंदगी छीन ले गई, बल्कि जिले में संचालित निजी शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर गई है।

संडे स्पेशल : देश में कट्टरता बढ़ी, पर ‘मानवतावादी कट्टरता’ की मिसाल बने यातायात निरीक्षक विशाल कुजूर — दो मजदूरों की पीड़ा ने पुलिस अधिकारी को रुला दिया

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देश में कट्टरता बढ़ी, पर ‘मानवतावादी कट्टरता’ की मिसाल बने यातायात निरीक्षक विशाल कुजूर — दो मजदूरों की पीड़ा ने पुलिस अधिकारी को रुला दिया   रायपुर (छत्तीसगढ़ ) – समाज में कट्टरता अक्सर नकारात्मक रूप में देखी जाती है, लेकिन जब यही कट्टरता मानवता के प्रति समर्पण बन जाए तो वह समाज को रोशन करने का काम करती है। रायपुर में पदस्थ यातायात निरीक्षक विशाल कुजूर ऐसी ही ‘कट्टर मानवता’ की मिसाल बनकर सामने आए हैं। शनिवार की शाम उनके व्यवहार और एक भावुक घटना से यह स्पष्ट हो गया कि व्यवस्था संभालने वाले हाथ यदि संवेदनाओं से भरे हों तो किसी की कठिन यात्रा भी आसान बनाई जा सकती है।   दरअसल, इन्स्पेक्टर विशाल कुजूर द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक घटना ने लोगों को झकझोर दिया। रोज की तरह जब वे अपने क्षेत्र में यातायात व्यवस्था देख रहे थे, तभी उनके मुंशी ने दो थके-हारे युवकों को देखकर संदेह जताया और उन्हें बातचीत के लिए बुलाया। बात करने पर पता चला कि दोनों युवक — प्रदीप और संतोष — उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले के एक अंदरूनी गांव से मछली पकड़ने के काम के लिए किसी एजेंट के माध्यम से गोवा ले जाए गए थे।   तीन महीने काम करने के बावजूद उन्हें तनख्वाह नहीं मिली। जब उन्होंने विरोध किया तो जहाज मालिक ने मारपीट कर उन्हें वहां से भगा दिया। भय के कारण ये दोनों गोवा पुलिस तक नहीं गए। जेब में 100 रुपये तक नहीं थे। किसी तरह ट्रेन के बाथरूम में छिपते-छिपाते वे नागपुर पहुँचे, और फिर वहाँ से पाँच दिनों तक पैदल चलकर रायपुर पहुँचे।   दोनों डरे हुए थे, टूटी-फूटी हिंदी बोल रहे थे, और पिछले 7 दिनों की भूख और मुश्किलें उनके चेहरों पर साफ दिख रही थीं। उनका आधार कार्ड, फोन और अन्य दस्तावेज गोवा में ही कंपनी के मालिक के पास बंधक पड़े थे। इनके घरवालों का मोबाइल भी कवरेज की कमी के कारण स्विच ऑफ मिला। स्थिति जानकर विशाल कुजूर ने तुरंत भोजन कराया, कुछ आर्थिक मदद की और दोनों का झारसुगुड़ा तक का टिकट बनवाकर उन्हें ट्रेन में बैठाया। साथ ही अपना मोबाइल नंबर दिया और स्थानीय थाना में शिकायत करने के लिए कहा। दोनों युवकों ने इसकी हामी भरी।   लेकिन इन्स्पेक्टर विशाल को सबसे अधिक भावुक कर देने वाली बात तब सामने आई, जब उन्होंने पूछा कि 8 दिनों तक बिना पैसे के खाना कैसे खाया? दोनों ने सिर झुकाकर जवाब दिया— “नागपुर से रायपुर तक रेलवे ट्रैक के किनारे गिरे पैकेट जमा करके खाते हुए आए हैं…”   इस जवाब ने अधिकारी का दिल दहला दिया। उन्होंने लिखा— “कल इन दो दोस्तों ने सचमुच रुला दिया… अब बस उनके कॉल का इंतज़ार है।”   कुजूर ने लोगों से अपील की है कि रास्ते में ऐसे किसी जरूरतमंद को देखें तो जरूर पूछें और मदद करें। उन्होंने यह भी याद किया कि कोरोना काल में जब वे कुनकुरी थाना प्रभारी थे, तब जशपुर और कुनकुरी के लोगों ने पैदल लौट रहे मजदूरों की जो मिसाल पेश की थी, वह आज भी यादगार है।   दिलचस्प संयोग यह कि 22 नवंबर 2025 को घटी यह घटना उसी तारीख की याद दिलाती है जब 2017 में — ठीक 22 नवंबर को — इन्स्पेक्टर विशाल की पोस्टिंग कुनकुरी थाना में हुई थी। मानवता के प्रति ऐसी कट्टरता ही आज के समय में समाज को जोड़ने और लोगों के जीवन में आशा की लौ जलाने का काम करती है।

छत्तीसगढ़ की सीमा पर शव वाहन नहीं पहुंचने पर स्वास्थ्य विभाग ने खबरों का किया खंडन,मुकेश ने कहा – मैंने तकलीफ बताई जो सत्य है,,

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*समाचार* खंडन  मुक्तांजली वाहन नहीं मिलने के संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने रखा अपना पक्ष जशपुरनगर 18 नवम्बर 2025/* सिंगीबहार निवासी श्री मुकेश नायक के नवजात शिशु के शव को घर तक लाने हेतु मुक्तांजली वाहन की सुविधा नहीं मिलने के संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार 17 नवम्बर 2025 को सुबह 09 बजे श्री कुंदन राजपूत एवं श्री मुकेश नायक का फोन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जशपुर को प्राप्त हुआ तथा तत्काल जिला प्रबंधक मुक्ताजंली वाहन को इसकी सूचना देते हुए वाहन भेजने हेतु निर्देशित किया गया। जिला प्रबंधक के द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र फरसाबहार लोकशन पर उपलब्ध वाहन को सूचना दी गई व वाहन रवाना करने के निर्देश दिये गये, किन्तु मुक्तांजली वाहन कर्मचारी फरसाबहार के द्वारा लोकेशन पता करने एवं अन्य आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए श्री मुकेश नायक को फोन किये जाने पर श्री मुकेश नायक के द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया, इसकी सूचना कर्मचारी के द्वारा तत्काल उच्च अधिकारियों को दिया गया। तत्पश्चात स्वयं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जशपुर के द्वारा कॉल बैक करते हुए श्री मुकेश नायक को फोन रिसीव करने को कहा गया। जिस दौरान स्वयं श्री मुकेश नायक के द्वारा नेटवर्क में नहीं होने के कारण बात नहीं हो पाने की जानकारी दिया गया। तत्पश्चात पुनः मुक्तांजली वाहन कर्मचारियों के द्वारा फोन किया गया, किन्तु श्री मुकेश नायक के द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया। जिससे सम्पर्क नहीं हो सका। घटना स्वास्थ्य विभाग अथवा मुक्तांजली वाहन की लापरवाही से नहीं बल्कि संबंधित से सम्पर्क नहीं होने की वजह से हुआ है। नोट : यह खंडन प्रेस विज्ञप्ति से लिया गया है। इस मामले पर मृत नवजात के पिता और पेशे से पत्रकार मुकेश कुमार ने ख़बर जनपक्ष के सवालों पर कहा कि मैंने कब कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने शव वाहन की व्यवस्था नहीं की।उन्होंने मुझे आश्वस्त किया और मैं इंतजार करता रहा।जब दो घंटे तक शव वाहन नहीं आया तो स्कूटी से शव लेकर घर गया। मैंने तो केवल अपनी तकलीफ बताई जो सत्य है।मुझे और परेशान न किया जाए। बहरहाल,घटना से परिवार में शोक की लहर है।वहीं स्वास्थ्य विभाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपना पक्ष रख दिया है।ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि मरीजों और मृतकों को समय पर एंबुलेंस और शव वाहन देने की कोशिश पर अब सवाल खड़े नहीं होंगे।