हिन्दू पॉप सिंगर की दो टूक -जब सब सनातनी हो जाएं तो डर कैसा,घरवापसी कर लो,हिन्दू राष्ट्र का झंडा लेकर निकली हरियाणा की गायिका कवि सिंह ने मोदी-योगी को लेकर कह दी बड़ी बात

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जशपुर – हिंदुत्व के गाने गानेवाली पॉप सिंगर कवि सिंह राष्ट्रजागरण करते हुए भारत यात्रा पर निकली हैं।इस दौरान छत्तीसगढ़ में प्रवेश करते हुए कुनकुरी शहर में उन्होंने विश्राम किया।हिन्दू राष्ट्र बनाने निकली इस यात्रा को जिले में हिन्दू धर्मावलंबियों का व्यापक समर्थन मिला है। पत्रकारों से चर्चा करते हुए इस यात्रा का मूल उद्देश्य हरिद्वार से गंगाजल लेकर रामेश्वरम तक फिर वहां की मिट्टी लेकर वापस हरिद्वार गंगा नदी में प्रवाहित कर खुद को बैकुंठधाम जाने योग्य अर्थात मोक्ष की अधिकारिणी बनना बताया है।इसी के साथ उन भटके हुए मूल सनातनियों को वापस लाने,हिन्दू जागृति लाने के लिए हिन्दू राष्ट्र यात्रा करना बड़ा उद्देश्य है। कवि सिंह मूलतः रोहतक सिटी,हरियाणा की रहनेवाली हैं।इनका जन्म राजस्थान के अलवर जिले में हुआ।26 वर्षीया कवि सिंह अपने पिता रामकेश जीवनपुरवाला के बनाये गीतों को गाकर प्रसिद्धि पाई है।कवि की गायकी में हिंदुत्व और देशभक्ति इस कदर रचा-बसा है कि इनकी ख्याति आज पूरे भारत मे हैं। जैसा कि कवि सिंह ने बताया कि 9 जुलाई को हरिद्वार की हरकी पौड़ी से गंगाजल लेकर रामेश्वरम के लिए हिन्दू राष्ट्र यात्रा पर रवाना हुई।अभी तक 14 राज्यों से गुजरी हैं।छत्तीसगढ़ राम के ननिहाल में रामभक्तों के स्वागत-सत्कार से अभिभूत हैं।उन्होंने यात्रा के अनुभव बताते हुए कहा कि यूपी में मुझे तिरस्कार मिला।झारखण्ड में धमकी मिली लेकिन वहां के हिंदुओं ने और शासन-प्रशासन ने मेरी सुरक्षा की।उन्होंने यह भी कहा कि यह मेरी निजी यात्रा है लेकिन मैं देश के हिंदुओं को जगाने के लिए निकली हूँ।खतरा है लेकिन डरती नहीं हूँ। हिंदुओं में एकजुटता के सवाल पर कवि ने कहा कि सनातनियों के देश के हर मंदिरों से विश्व का कल्याण हो,यह आवाज आती है।सनातनी एकजुट है बस ‘वे’ वापसी कर लें तो ज्यादा अच्छा है।राजनीति की अगर बात करते हैं तो 2014 से पहले गांव के बच्चे, गांव का मुखिया सभी लोग सोशल मीडिया में अंग्रेजी में बात करते थे।भाषण अंग्रेजी में बोली जाती थी।नेता,अभिनेता,खिलाड़ी सब अंग्रेजी बोलते थे,भले समझ मे आये या न आये।अब हिंदी बोलने लगे हैं।यही सनातन की शक्ति है और हम जाग गए हैं, इसका परिचय भी है।आगे हम संस्कृत भी बोलने लगेंगे।एक दिन रामराज्य आएगा। *प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांगी सुरक्षा* अपनी यात्रा और उसकी सुरक्षा लेकर कवि सिंह का दर्द छलक आया।उन्होंने कहा कि यह यात्रा बिना कोई राजनैतिक सहयोग के चल रही है।कोई सिक्योरिटी नहीं है।हम अपने दम पर अपने सनातनी भाइयों से सहारा लेकर चल रहे हैं।कोई कहीं से भी किसी तरह का कोई सहयोग नहीं है तो हमे बुरा लगा कि हम आपका सपोर्ट करते हैं।ये हम सीधे नरेंद्र मोदी को कह रहे हैं।उनके लिए गाने गाए हैं।मोदी देश के सबसे बड़े सनातनी नेता हैं।दूसरे नम्बर पर योगी हैं। कवि ने चर्चा में आगे बताया कि जब यात्रा का रूट तय कर रहे थे तो झारखण्ड और छत्तीसगढ़ को लेकर शुभचिन्तकों ने नक्सली क्षेत्र बताकर मना किया लेकिन सबसे ज्यादा अच्छा कार्यक्रम दोनों राज्यो में हुआ।यूपी में हमारी यात्रा खराब रही।झारखण्ड में एक धमकी मिली थी कि हमारे काफिले पर हमला कर देंगे लेकिन सनातनियों और शासन-प्रशासन के कारण ऐसा कुछ नहीं हुआ।उन्होंने हिंदुत्व से डरने वालों को साफ संदेश दिया कि “बुरा कर्म करने से डर लगता है,अच्छा कर्म करो,सनातन की ओर आ जाओ।सब एक ही रहेंगे तो डर किस बात का रहेगा।घरवापसी कर लो।” मीडिया से चर्चा के बाद कवि सिंह का काफिला शिवमंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद बगीचा होते हुए अम्बिकापुर के लिए रवाना हो गया।रात्रि विश्राम अम्बिकापुर में होगा।

*जशपुर की ‘लखपति दीदी’ लाल किले के समारोह में बनीं विशेष मेहमान* *78वां स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली में आयोजित समारोह में हुईं शामिल* *आरा क्लस्टर की लखपति दीदी शोभा टोप्पो ने पति के साथ देखा स्वतंत्रता दिवस समारोह*

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जशपुर – 15 अगस्त 2024/स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आज दिल्ली के लाल किले पर आयोजित समारोह में देश भर छह हजार विशेष मेहमान आमंत्रित किए गए। समारोह में शामिल होने के लिए करीब 45 लखपति दीदियों और करीब 30 ड्रोन दीदियों को भी विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था। जिसमें छत्तीसगढ़ से दो लखपति दीदी शामिल हैं। इसमें जशपुर जिले के जशपुर विकासखंड के आरा क्लस्टर की लखपति दीदी श्रीमती शोभा टोप्पो एवं उनके पति जीनियस टोप्पो के साथ बिहान को-ऑर्डिनेटर दीपेंद्र यादव के नेतृत्व में अतिथि के रूप में 78 वे स्वतंत्रता दिवस ध्वजारोहण समारोह में दिल्ली के लाल किला प्रांगण में सम्मिलित हुईं। उल्लेखनीय है कि पूरे भारतवर्ष से 70 लखपति दीदियां जो कि विभिन्न राज्यों से स्वतंत्रता दिवस के ध्वजारोहण समारोह में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित की गई थी। जशपुर जिले से शामिल श्रीमती शोभा टोप्पो ध्वजारोहण समारोह ने लाल किले के प्रांगण में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा दिए गए भाषण को सुना। साथ ही यहां आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुतियां देख अपनी खुशी जाहिर की।

*उपलब्धि :*जशपुर की आशा कार्यकर्ता और एएनएम का राष्ट्रीय स्तर पर हुआ सम्मान**समारोह में बनीं विशेष अतिथि*

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*केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने स्मृति चिन्ह देकर किया सम्मानित* *स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या राजधानी दिल्ली में विशेष समारोह आयोजित* *मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए मैदानी स्तर पर किये गए उत्कृष्ट कार्यों के स्वास्थ्य मंत्रालय ने किया सम्मान* *78वां स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले के समारोह में बनीं विशेष अतिथि* दिल्ली/रायपुर 15 अगस्त 2024/देश भर में आज 78वां स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है। इस वर्ष इस खास अवसर पर भारत सरकार द्वारा देश के विभिन्न राज्यों के आशा (मितानिन) एवं ए.एन.एम. को विशेष मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। वही स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या राजधानी दिल्ली में विशेष समारोह आयोजित की गई। जहां छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों की आशा कार्यकर्ता और एएनएम को सम्मानित किया गया। वही इस अवसर पर जशपुर जिले से आयुष्मान आरोग्य मंदिर पाकरगांव, विकासखंड पत्थलगांव की ए.एन.एम. श्रीमती निग्मा लाम्बा एवं कुनकुरी विकासखंड के गांव पंडरीपानी की आशा (मितानिन) कार्यकर्ता श्रीमती अमिशा बाई को उनके मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में विषम परिस्थिति में उत्कृष्ट कार्य हेतु केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। यहां उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन द्वारा इन ए.एन.एम और आशा (मितानिन) कार्यकर्ता को दिल्ली भेजा गया था। जहाँ स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित विशेष सम्मान समारोह में केन्द्रीय स्वास्थ मंत्री जे.पी.नड्डा एवं केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल के हाथों स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारीयों की गरिमामय उपस्थिति में सम्मानित किया गया। साथ ही इन सभी विशेष आमंत्रित अतिथियों को 78वां स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले के समारोह में कर्तव्य पथ पर होने वाले परेड में भी आमंत्रित किया गया। यह न सिर्फ इन आशा (मितानिन) कार्यकर्ता, ए.एन.एम. के लिए गर्व की बात है बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग सहित जशपुर जिले के लिए हर्ष का विषय है। इस खास उपलब्धि के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जशपुर डॉक्टर विपिन कुमार इंदवार एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी  गनपत नायक के द्वारा दोनोें स्वास्थ कार्यकर्ताओं को स्वास्थ विभाग की तरफ़ से ढेरों शुभकामनाएं एवं बधाई दी गई। साथ सभी अधिकारी एवं कर्मचारी को अपने कार्य एवं दायित्वों को निर्वाहन निष्ठा पूर्वक करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

*स्वतंत्रता दिवस पर श्रीमती कौशल्या साय ने कन्या हाई स्कूल ग्राउंड कुनकुरी में फहराया तिरंगा* *श्रीमती साय ने मुख्यमंत्री का जनता के नाम संदेश का किया वाचन*

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*स्वतंत्रता दिवस की दी बधाई और शुभकामनाएं* *उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित* जशपुर 15 अगस्त 2024/15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने कन्या हाई स्कूल ग्राउंड कुनकुरी में ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर श्रीमती साय ने मुख्यमंत्री का जनता के नाम का संदेश का वाचन भी किया। उन्होंने वहां पर मौजूद सभी को स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम में श्रीमती कौशल्या साय ने देश पर अपनी जान न्यौछावर करने वाले अमर शहीदों को याद करते हुए कहा की उनके समर्पण और त्याग की वजह से आज हम सभी खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं । श्रीमती साय ने इस अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरुस्कृत भी किया। श्रीमती कौशल्या साय ने इस दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हुए इस कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष श्रीमती अंजना मिंज, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अंजेम टोप्पो सहित अधिकारी-कर्मचारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और अन्य लोग मौजूद थे।

*सीएम कैम्प कार्यालय बगिया में मुख्यमंत्री की धर्म पत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने किया ध्वजारोहण, देश की रक्षा में बलिदान हुए जवानो को दी श्रद्धांजलि…….*

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जशपुर –  स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्म पत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय ने बगिया स्थित सीएम कैम्प कार्यालय में ध्वजा रोहण किया,इस मौके पर कार्यालय के सभी अधिकारी-कर्मचारी एवं सुरक्षा में तैनात जवान मौजूद रहे। इसके बाद श्रीमती साय बीएल स्कुल और बंदरचुँवा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में ध्वजा रोहण कर बलिदानी जवान आरक्षक अलसन एक्का,नोवेल खलखो,राजकुमार करकेट्टा और मनसीद कुजूर को श्रद्धांजलि अर्पित किया। उन्होंने कहा की देश की सीमा पर और देश के अंदर दुश्मनो से लोहा लेते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इन जाँबाज जवानों के दम पर ही हम और हमारा देश सुरक्षित है। इन बलिदानी जवानों का देश सदैव ऋणी रहेगा। इसके बाद कौशल्या साय कुनकुरी खेल मैदान में बतौर मुख्य अतिथि ध्वजारोहण करने रवाना हुईं।

**इतिहास में मुस्लिम महिलाओं की भूमिका: फ़ातिमा अल-फ़िहरी और खदीजा बिन्त खुवायलिद की विरासत**

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लेखक – निर्मल कुमार मुस्लिम महिलाओं को केवल घरेलू कार्यों तक सीमित मानने का विचार न केवल गलत है, बल्कि यह उन महत्वपूर्ण योगदानों को भी नजरअंदाज करता है जो उन्होंने इतिहास में दिए हैं। ऐसी ही एक अद्वितीय हस्ती हैं फ़ातिमा अल-फ़िहरी, जिनकी विरासत इस मिथक को खारिज करती है और यह दिखाती है कि मुस्लिम महिलाओं ने शिक्षा और समाजिक प्रगति में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। फ़ातिमा अल-फ़िहरी, एक दूरदर्शी मुस्लिम महिला, ने 859 ईस्वी में फ़ेज़, मोरक्को में अल-क़रावीइन विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। इस विश्वविद्यालय को यूनेस्को और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा दुनिया का सबसे पुराना लगातार संचालित डिग्री प्रदान करने वाला विश्वविद्यालय माना गया है। 9वीं सदी में एक महिला द्वारा इस विश्वविद्यालय की स्थापना इस्लामी दुनिया में महिलाओं की प्रमुख और अग्रणी भूमिका को उजागर करती है। फ़ातिमा अल-फ़िहरी और उनकी बहन मरियम ने पहले अल-अंडालुस मस्जिद का निर्माण किया, जो बाद में अल-क़रावीइन विश्वविद्यालय में बदल गया। इस निर्माण में 18 साल लगे, जिसमें फ़ातिमा ने मस्जिद की समाप्ति तक लगातार उपवास रखा। उद्घाटन के समय, वह पहली बार उसमें प्रवेश कर, प्रार्थना की और इस विशाल कार्य को पूरा करने के लिए भगवान का धन्यवाद किया। इन परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन उनके माता-पिता से विरासत में मिले थे, जो उनके युवावस्था में ही स्वर्गवासी हो गए थे। एक संपन्न परिवार से आने वाली फ़ातिमा और मरियम ने अपनी विरासत का उपयोग अपने समुदाय की भलाई और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किया। यह निर्णय उनकी सामाजिक और शैक्षिक विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो इस मिथक को खारिज करता है कि उस समय की मुस्लिम महिलाएं केवल घरेलू भूमिकाओं तक सीमित थीं। अल-क़रावीइन विश्वविद्यालय एक शिक्षण केंद्र बन गया, जो दुनिया भर से विद्वानों को आकर्षित करता था। यहीं पर पहली शैक्षणिक डिग्री प्रदान की गई, जो शैक्षिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था। खदीजा बिन्त खुवायलिद इस्लामी इतिहास में एक सफल व्यवसायी महिला और पैगंबर मुहम्मद की पहली पत्नी के रूप में प्रमुख स्थान रखती हैं। उन्होंने अपने पिता के व्यवसाय को विरासत में लेकर उसका विस्तार किया, जिससे वे मक्का की सबसे धनी और सम्मानित व्यापारियों में से एक बन गईं। खदीजा ने कई लोगों को रोजगार दिया, जिनमें मुहम्मद भी शामिल थे, जिनकी ईमानदारी और प्रबंधन कौशल ने उन्हें प्रभावित किया और उनके विवाह का कारण बना। एक सफल उद्यमी, समर्पित पत्नी और मां के रूप में उनकी विरासत मुस्लिम महिलाओं को अपने करियर का पीछा करने और अपने विश्वास को बनाए रखते हुए समाज में योगदान देने के लिए प्रेरित करती है। फ़ातिमा अल-फ़िहरी और खदीजा बिन्त खुवायलिद की कहानियां सिर्फ उन कई उदाहरणों में से हैं, जिनमें मुस्लिम महिलाओं ने घरेलू कार्यों के बाहर भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस्लामी इतिहास में महिलाएं विद्वान, कवि, डॉक्टर और नेता रही हैं। उन्होंने संस्थानों की स्थापना की और विज्ञान, साहित्य और राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। फ़ातिमा अल-फ़िहरी और खदीजा बिन्त खुवायलिद जैसी महिलाओं के योगदान से स्पष्ट है कि मुस्लिम महिलाओं की भूमिका कभी भी घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं रही है। वे इस्लामी दुनिया और उससे परे की बौद्धिक और सांस्कृतिक धरोहर को आकार देने में महत्वपूर्ण रही हैं। यह विरासत आज मुस्लिम महिलाओं को प्रेरित और सशक्त करती है, रूढ़ियों को चुनौती देती है और उनकी संभावनाओं और उपलब्धियों की व्यापक समझ को प्रोत्साहित करती है। उनके योगदान इस बात के स्पष्ट उदाहरण हैं कि इस्लामी दुनिया में महिलाओं ने पारंपरिक भूमिकाओं को पार किया है, ज्ञान और संस्कृति की उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन ऐतिहासिक हस्तियों को उजागर करके, हम मुस्लिम महिलाओं के आसपास की कथाओं को चुनौती और पुनर्परिभाषित कर सकते हैं, समाज में उनके अमूल्य योगदान को मान्यता दे सकते हैं और उन्हें लाखों वर्तमान समय की मुस्लिम महिलाओं के लिए प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं, ताकि वे पितृसत्ता की बेड़ियों से बाहर निकल सकें। (यह लेख निर्मल कुमार के निजी विचार हैं।वे आर्थिक व सामाजिक मामलों के जानकार हैं.)