सनकी चोर : साड़ी और पेटीकोट चुराकर नाचने वाला युवक गिरफ्तार, 4 साल से कर रहा था वारदातें

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जशपुर,19 अक्टूबर 2024- जिले के नारायणपुर थाना क्षेत्र के ग्राम चिटकवाईन में एक अजीबो-गरीब चोरी का मामला सामने आया है। 26 वर्षीय इमिल तिर्की, जो पिछले 4 सालों से महिलाओं के कपड़े चोरी कर उन्हें पहनकर नाचता था, आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद कृषि विस्तार अधिकारी सलिल कुजूर की रिपोर्ट पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। कपड़े चोरी कर करता था नृत्य ग्रामीणों के अनुसार, इमिल तिर्की मेहनती और सरल स्वभाव का लड़का है, लेकिन उसकी एक अनोखी आदत ने लोगों को चौंका दिया। वह चुपचाप बंद घरों में घुसकर साड़ियां और पेटीकोट चुराकर उन्हें पहनता और फिर कमरे के अंदर नाचता था। शुरुआत में वह कपड़े वहीं छोड़ देता था, लेकिन पिछले कुछ सालों से उसने उन्हें अपने साथ ले जाना शुरू कर दिया। ताजा मामला और गिरफ्तारी 12 अक्टूबर 2024 को कृषि विस्तार अधिकारी सलिल कुजूर जब अपनी पत्नी के इलाज के लिए बाहर गए हुए थे, तो उनके क्वार्टर से 7 नई साड़ियां चोरी हो गईं। वापस लौटने पर उन्होंने पाया कि उनके घर का ताला टूटा हुआ था और साड़ियां गायब थीं। उन्होंने तुरंत नारायणपुर थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस जांच के दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि इस तरह की चोरी के पीछे इमिल तिर्की हो सकता है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इमिल को गिरफ्तार किया और चोरी की गई साड़ियां बरामद कीं। पूछताछ में इमिल ने बताया कि वह पिछले 4 सालों से महिलाओं के कपड़े चुराकर उन्हें पहनता और नाचता था। ग्रामीणों को मिली राहत इमिल की गिरफ्तारी से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि पिछले कई सालों से गांव-गांव में महिलाओं के कपड़े गायब होने की घटनाएं हो रही थीं। पुलिस ने इमिल तिर्की के खिलाफ धारा 331(4) और 305(ए) के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई कर रही है।  

प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत छात्रवृत्ति आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2024

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रायपुर। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा सत्र 2024-25 के लिए प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत केंद्रीय क्षेत्रीय छात्रवृत्ति योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कॉलेज और विश्वविद्यालय के विद्यार्थी राष्ट्रीय ई-छात्रवृत्ति पोर्टल https://scholarships.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। नवीनीकरण के लिए 2019 से 2023 तक के विद्यार्थियों के साथ-साथ वर्ष 2024 के लिए नए आवेदन भी 31 अक्टूबर 2024 तक स्वीकार किए जाएंगे। छात्रवृत्ति और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी मंडल की वेबसाइट www.cgbse.nic.in पर उपलब्ध है। अधिक जानकारी के लिए एनएसपी हेल्पलाइन नंबर 0120-6619540 पर संपर्क कर सकते हैं। नवीनीकरण आवेदकों के लिए संशोधित दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं, जिनमें उन विद्यार्थियों को भी आवेदन की अनुमति दी गई है, जो पिछली बार आवेदन नहीं कर पाए थे, बशर्ते वे पात्रता शर्तें पूरी करते हों। उनकी ओटीआर आईडी एनआईसी-एनएसपी द्वारा पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजी जाएगी, और सत्यापन के बाद वे सत्र 2024-25 के लिए छात्रवृत्ति प्राप्त कर सकेंगे। शिक्षा मंत्रालय ने सभी शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे समय-सीमा के भीतर विद्यार्थियों के आवेदन सुनिश्चित कराएं।

वरिष्ठ पत्रकार ईरा झा का निधन, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

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रायपुर,18 अक्टूबर 2024 / वरिष्ठ पत्रकार ईरा झा का आज दुखद निधन हो गया, जिससे मीडिया जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ईरा झा का पत्रकारिता के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान रहा है। उनके निष्पक्ष और प्रखर लेखन ने हमेशा समाज को सही दिशा दिखाने का काम किया। ईरा झा का पत्रकारिता में एक लंबा और सम्मानजनक करियर रहा है, जिसमें उन्होंने राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर गहन लेखन किया। उनकी लेखनी में न केवल बेबाकी थी, बल्कि सच्चाई की झलक भी दिखाई देती थी। उन्होंने छत्तीसगढ़ के मीडिया परिदृश्य में अपनी पहचान बनाई और अनेक राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने का काम किया। ईरा झा को हमेशा उनके स्पष्ट विचारों और निर्भीक पत्रकारिता के लिए याद किया जाएगा। उनके निधन से छत्तीसगढ़ के पत्रकारिता जगत में एक बड़ी रिक्तता आ गई है। उनके योगदान और उनकी आवाज को हमेशा याद रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने ईरा झा के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे राज्य और मीडिया जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।  

बड़ी खबर: तांत्रिक विद्या सीख रहे दो सगे भाइयों की मौत से मचा हड़कंप,परिवार के अन्य सदस्यों की मानसिक हालत बिगड़ी,पुलिस जांच में जुटी

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बिलासपुर,18 अक्टूबर 2024/ सक्ती जिले के बाराद्वार थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत लोहराकोट के आश्रित ग्राम तांडूलडीह में तंत्र-मंत्र विद्या सीखने के दौरान दो सगे भाइयों की मौत से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। मृतकों की पहचान विक्की सिदार (22) और विक्रम सिदार (25) के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में भय और अंधविश्वास का माहौल बन गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मां के साथ कर रहे थे जाप, मानसिक स्थिति बिगड़ी सूत्रों के अनुसार, मृतकों की मां अपने तीन बेटों और दो बेटियों के साथ पिछले 6-7 दिनों से लगातार तंत्र-मंत्र के नाम पर किसी प्रकार का जाप कर रही थी। इसी दौरान परिवार के चार सदस्यों की मानसिक स्थिति अचानक खराब हो गई। इसमें महिला और उसके तीन बच्चे शामिल हैं। फिलहाल इन सभी का इलाज सक्ती के जिला अस्पताल में चल रहा है। तंत्र-मंत्र का शक, पुलिस जांच में जुटी घटना के बाद गांव में यह चर्चा हो रही है कि परिवार पर तंत्र-मंत्र का असर हो सकता है, जिसने उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित किया। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि घटना तांत्रिक क्रियाओं का परिणाम है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और इस दिशा में भी देख रही है कि कहीं यह किसी तांत्रिक क्रिया का नतीजा तो नहीं है। अंधविश्वास का शिकार बना परिवार? इस दुखद घटना ने एक बार फिर से समाज में व्याप्त अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र जैसी प्रथाओं के खतरों को उजागर किया है। इलाके में लोग इस घटना को लेकर सदमे में हैं और दहशत का माहौल है। पुलिस ने सभी संभावित पहलुओं पर काम करना शुरू कर दिया है और जांच जारी है। इस घटना ने तंत्र-मंत्र के अंधविश्वास के कारण होने वाले खतरों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो अक्सर परिवारों को नुकसान पहुंचाते हैं।  

*सफलता की कहानी: जशपुर की बेटियों का क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन,राष्ट्रीय अंडर-17 महिला क्रिकेट टीम में इन छात्राओं का हुआ चयन*

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जशपुर, 17 अक्टूबर 2024: जशपुर जिले की बेटियों ने खेल के मैदान में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। सरगुजा संभाग की टीम में शानदार प्रदर्शन करते हुए जशपुर की 13 बेटियों ने रजत पदक जीता है। इस उपलब्धि के साथ ही इचकेला स्थित प्री-मेट्रिक बालिका छात्रावास की 3 बेटियों, एंजल लकड़ा, झुमुर तिर्की और वर्षा बाई का चयन राष्ट्रीय अंडर-17 महिला क्रिकेट टीम में हो गया है। ये तीनों खिलाड़ी अब आगामी राष्ट्रीय अंडर-17 महिला क्रिकेट प्रतियोगिता 2024-25 में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। जशपुर की बेटियों का सरगुजा संभाग में दबदबा जशपुर की बेटियां राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में अपने अद्वितीय प्रदर्शन से न सिर्फ संभाग का नाम रौशन कर रही हैं बल्कि राष्ट्रीय टीम तक पहुंच रही हैं। सरगुजा संभाग की क्रिकेट टीम में जशपुर की 13 बेटियों का चयन यह दर्शाता है कि जिले में खेल के प्रति बढ़ती रुचि और संभावनाओं को कैसे साकार किया जा रहा है। इन खिलाड़ियों में से 11 बालिकाएं इचकेला छात्रावास की हैं, जो एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। छात्रावास अधीक्षिका पंडरी बाई का महत्वपूर्ण योगदान छात्रावास की अधीक्षिका पंडरी बाई ने छात्राओं के इस विकास में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने छात्रावास में अभ्यास पिच बनवाकर और क्रिकेट की आवश्यक सामग्रियां उपलब्ध कराकर खिलाड़ियों को लगातार प्रेरित किया। पंडरी बाई का कहना है, “मेरी बेटी आकांक्षा रानी ने राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की, और जब मैंने छात्रावास की बच्चियों में भी वही उत्साह देखा, तो मैंने उनके लिए बेहतर भविष्य बनाने का संकल्प लिया। आज उनकी मेहनत का फल मिल रहा है।” चयनित खिलाड़ियों का उत्साह चरम पर :  वर्षा बाई (राष्ट्रीय अंडर-17 और बीसीसीआई अंडर-19 खिलाड़ी): “छात्रावास में हमें निरंतर प्रशिक्षण और समर्थन मिल रहा है। मेरे राष्ट्रीय टीम में चयन से मेरे परिवार और गांव में खुशी का माहौल है। सभी ने मिठाइयाँ बांटी और मुझे देश का नाम रोशन करने की शुभकामनाएँ दीं। मेरा चयन अंडर-17 के साथ-साथ बीसीसीआई की अंडर-19 टीम में भी हुआ है, और मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ।” एंजल लकड़ा (कक्षा 8, राष्ट्रीय अंडर-17 खिलाड़ी): “मुझे बहुत खुशी है कि मेरा चयन राष्ट्रीय अंडर-17 टीम में हुआ है। मुझे मेरे शिक्षकों और कोच का भरपूर सहयोग मिल रहा है। मेरा सपना है कि मैं स्मृति मंधाना की तरह एक बेहतरीन बल्लेबाज बनूं और देश का नाम रोशन करूँ।” झुमुर तिर्की (कक्षा 8, राष्ट्रीय अंडर-17 खिलाड़ी): “यह मेरे लिए सपने के सच होने जैसा है। जब मेरा चयन राष्ट्रीय दल में हुआ तो मुझे यकीन नहीं हुआ। मेरे पिता के निधन के बाद मेरी माँ ने मुझे बहुत मेहनत से पाला, और उनका सपना था कि मैं परिवार का नाम रोशन करूं। अधीक्षिका पंडरी बाई के मार्गदर्शन और समर्थन से आज मैं इस मुकाम तक पहुंची हूँ।”  

*शासन की योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण : पी. दयानंद* *जनसम्पर्क विभाग की समीक्षा में सचिव ने दिए निर्देश*

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*शासन की योजनाओं का बेहतर प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के दिए निर्देश* *जनसंपर्क विभाग के सचिव पी. दयानंद ने की विभागीय काम-काज की समीक्षा* रायपुर, 17 अक्टूबर 2024/ ” राज्य सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में जनसंपर्क अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने जनसंपर्क अधिकारियों को राज्य सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लोगों की भलाई के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। पिछले 10 माह में राज्य सरकार ने किसानों, युवाओं, महिलाओं और गरीबों के लिए अनेक फ्लैगशिप योजनाएं शुरू की हैं, जिससे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।” उन्होंने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल व सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। वे आज नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद भवन में विभागीय काम-काज की समीक्षा बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। सचिव पी दयानंद ने कहा कि लोगों तक योजनाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर सूचना क्रांति का है ऐसे में सोशल मीडिया का महत्व बढ़ते जा रहा है। जनसंपर्क अधिकरियों को सोशल मीडिया प्लेटफार्म का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी समाचार माध्यमों को त्वरित रूप से समाचार उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। सचिव पी दयानंद ने कहा कि समाचार की भाषा शैली सरल, आकर्षक और पठनीय होनी चाहिए। सफलता की कहानी में किसी व्यक्ति के जीवन आए बदलाव के बारे में तथ्यपरक जानकारी और सुसंगत फोटोग्राफ का उपयोग किया जाए। राज्य सरकार के फ्लैगशिप योजनाओं और नवाचारी कार्यों के संबंध में समय-समय पर विशेष लेख नियमित रूप से जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि नगरीय योजनाओं से संबंधित होर्डिग्स नगरीय क्षेत्रों में लगाए जाएं और इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित योजनाओं की होर्डिंग्स तहसील मुख्यालयों और जनपद पंचायतों के परिसर में लगाए जाएं। उन्होंने बैठक में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, नेशनल मीडया और क्षेत्रीय स्तर पर प्रिंट मीडिया में प्रचार-प्रसार कार्यों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने बैठक में जिला जनसंपर्क कार्यालयों में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिससे शासन के कार्यों और फ्लैगशिप योजनाओं का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित हो सके। उन्होंने विभागीय सेट-अप की भी जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए। सचिव दयानंद ने छत्तीसगढ़ संवाद के विभिन्न शाखाओं का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में संचालक जनसंपर्क अजय कुमार अग्रवाल, अपर संचालक जे.एल. दरियो, उमेश मिश्रा, संजीव तिवारी, आलोक देव, संतोष मौर्य, श्रीमती हर्षा पौराणिक सहित विभाग के अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

*सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक अब 21 की जगह 22 अक्टूबर को होगी*

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रायपुर, 17 अक्टूबर 2024/ सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक 22 अक्टूबर को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में सवेरे 11 बजे से जिला जशपुर के मयाली नेचर कैम्प में आयोजित की गई है। गौरतलब है कि पहले यह बैठक 21 अक्टूबर को आयोजित होनी थी।बैठक की तैयारी में जिला कलेक्टर डॉ रवि मित्तल, एसपी शशिमोहन सिंह व जिले के सभी विभाग प्रमुख जूट गए हैं।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक: धान खरीदी, रोजगार और ग्रामीण पेयजल योजनाओं पर अहम फैसले

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रायपुर, 16 अक्टूबर 2024 – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए धान उपार्जन और कस्टम मिलिंग की नीति को अनुमोदित किया गया। राज्य में धान खरीदी 14 नवंबर 2024 से शुरू होकर 31 जनवरी 2025 तक चलेगी। धान खरीदी के लिए किसानों का पंजीकरण 31 अक्टूबर तक जारी रहेगा और इस वर्ष 160 लाख टन धान उपार्जन का अनुमान है। किसानों को बायोमेट्रिक प्रणाली से टोकन जारी किए जाएंगे और इलेक्ट्रॉनिक तौल यंत्रों से धान की खरीद होगी। धान की सुरक्षित भंडारण के लिए 8 लाख गठान बारदाने की आवश्यकता है, जिसमें से 4.02 लाख गठान जूट कमिश्नर के माध्यम से खरीदे जाएंगे। रोजगार और अनुकम्पा नियुक्ति के फैसले मंत्रिपरिषद ने सहकारी समितियों में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटरों को 18,420 रुपये प्रतिमाह मानदेय के रूप में 12 महीने का भुगतान करने का निर्णय लिया। इस पर कुल 60.54 करोड़ रुपये का व्यय होगा। इसके अलावा, दिवंगत पंचायत संवर्ग के शिक्षकों के आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति देने का निर्णय लिया गया। ग्राम पंचायतों में पेयजल की सुविधा बैठक में छत्तीसगढ़ ग्रामीण पेयजल संचालन एवं संधारण नियम, 2024 को मंजूरी दी गई। इसके तहत राज्य के हर ग्राम पंचायत के घरों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। आयु सीमा में छूट छत्तीसगढ़ पुलिस सेवा में सूबेदार, उप निरीक्षक, और प्लाटून कमांडर के पदों पर भर्ती के लिए एक बार के लिए अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट देने का निर्णय लिया गया। सभी छूटों के साथ यह आयु सीमा 45 वर्ष से अधिक नहीं होगी। अन्य महत्वपूर्ण निर्णय राज्य के राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े 49 प्रकरणों को जनहित में न्यायालय से वापस लेने का निर्णय लिया गया। लोकतंत्र सेनानियों की अंत्येष्ठि को राजकीय सम्मान के साथ करने और परिवार को 25 हजार रुपये की सहायता राशि देने का फैसला भी लिया गया। औद्योगिक नीति के तहत स्टील डाउन स्ट्रीम प्रोजेक्ट्स, एथेनॉल इकाइयों, और सीमेंट उद्योगों के लिए विशेष निवेश प्रोत्साहन पैकेज को भी मंजूरी दी गई। ये निर्णय राज्य की आर्थिक, सामाजिक, और औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से लिए गए हैं।  

रायपुर दक्षिण उप चुनाव की तैयारी शुरू, पौने तीन लाख मतदाता तय करेंगे बृजमोहन अग्रवाल का उत्तराधिकारी…

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Preparations for Raipur South by-elections begin, 2.75 lakh voters will decide Brijmohan Agrawal’s successor… रायपुर। रायपुर दक्षिण उपचुनाव का बिगुल बज चुका है, और इस चुनाव में लगभग 2.7 लाख मतदाता यह निर्णय करेंगे कि बृजमोहन अग्रवाल का उत्तराधिकारी कौन होगा। बृजमोहन अग्रवाल, जो भाजपा के प्रमुख और प्रभावशाली नेताओं में से एक रहे हैं, लंबे समय तक इस क्षेत्र के विधायक रहे हैं और उन्होंने यहां के विकास में अहम भूमिका निभाई है। अब, उनका उत्तराधिकारी चुनने के लिए जनता मतदान करेगी, जो रायपुर दक्षिण की राजनीतिक दिशा को अगले कई वर्षों तक प्रभावित करेगा। उपचुनाव का शेड्यूल और प्रक्रिया मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रीना बाबासाहेब कंगाले ने जानकारी दी कि इस उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया 18 से 25 अक्टूबर तक चलेगी। मतदान 13 नवंबर को होगा और मतगणना 23 नवंबर को की जाएगी। इस चुनाव में क्षेत्र के कुल 2,70,936 मतदाता भाग लेंगे, जिनमें से 1,33,713 पुरुष और 1,37,171 महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा, 52 तृतीय लिंग मतदाता और 59 सेवा मतदाता भी पंजीकृत हैं। मतदान केंद्र और सुरक्षा व्यवस्था चुनाव आयोग ने इस उपचुनाव के लिए 253 मतदान केंद्रों की स्थापना की है। इनमें 10 संगवारी मतदान केंद्र, 5 आदर्श मतदान केंद्र और 5 युवा मतदान केंद्र शामिल हैं। संगवारी मतदान केंद्र मुख्य रूप से आदिवासी क्षेत्रों में बनाए जाते हैं, जबकि आदर्श मतदान केंद्रों का उद्देश्य उच्चतम चुनावी मानकों को लागू करना होता है। मतदान की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे, इसके लिए 227 मतदान केंद्रों पर लाइव स्क्रीनिंग की जाएगी। सुरक्षा के लिहाज से चुनाव आयोग ने 5 कंपनियों को तैनात करने का निर्णय लिया है ताकि चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। क्षेत्र की राजनीतिक पृष्ठभूमि रायपुर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह क्षेत्र राज्य की राजधानी रायपुर का हिस्सा होने के कारण राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। बृजमोहन अग्रवाल, जो पिछले कई वर्षों से इस सीट पर जीत दर्ज करते आ रहे हैं, यहां के प्रमुख नेता रहे हैं। उनके कार्यकाल में रायपुर दक्षिण ने कई विकास कार्य देखे हैं, जिनमें सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, और शैक्षिक संस्थानों की स्थापना शामिल है। बृजमोहन अग्रवाल का उत्तराधिकारी कौन? यह उपचुनाव बृजमोहन अग्रवाल के उत्तराधिकारी को चुनने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। भाजपा के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय है क्योंकि उन्हें बृजमोहन अग्रवाल की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए एक योग्य उम्मीदवार खड़ा करना है। वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस मौके का फायदा उठाकर क्षेत्र में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। प्रमुख चुनावी मुद्दे रायपुर दक्षिण में इस उपचुनाव के दौरान कई प्रमुख मुद्दे चर्चा का केंद्र बनेंगे। विकास, बुनियादी ढांचे का सुधार, रोजगार के अवसर, स्वास्थ्य सेवाएं, और शिक्षा प्रमुख चुनावी मुद्दे हो सकते हैं। इसके अलावा, क्षेत्र में जातिगत समीकरण और सामाजिक असमानताएं भी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।   छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें राजनीति की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक

खबर खास : आदिवासी ज़मीन पर भूमाफियाओं का ऐसा फर्जीवाड़ा ! प्रशासन की अनियमितताओं से आदिवासी समुदाय पर गहरा संकट

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छत्तीसगढ़ में बस्तर से लेकर सरगुजा सम्भाग में आदिवासियों की जमीनों पर भूमाफिया लगातार गिद्धों की तरह हमला कर रहे हैं।ये भूमाफिया इतने संगठित हैं कि सरकार किसी की भी हो इनके काम में कोई फर्क नहीं पड़ता।ये सरकार के हिसाब से अपने चेहरे बदल लेते हैं।पढ़िए बस्तर से यह खास रिपोर्ट,,, बस्तर,16 अक्टूबर 2024 –  आदिवासी ज़मीनों पर कब्जे से जुड़े एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें स्थानीय भूमाफिया और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है। यह घोटाला बस्तर के जगदलपुर से सटे ग्राम तुसेल का है, जहाँ भूमाफियाओं ने सरकारी अधिकारियों की सहायता से आदिवासियों की ज़मीनों पर अवैध कब्जा कर लिया। इस साजिश का शिकार बने मासे पिता डोरा, जो माड़िया जनजाति से थे, उनकी मृत्यु के बाद उनकी ज़मीन को फर्जी दावों के आधार पर हड़प लिया गया। मासे पिता डोरा की ज़मीन का अवैध कब्जे की कहानी इस प्रकरण की शुरुआत लगभग 15 साल पहले हुई, जब ग्राम तुसेल निवासी मासे पिता डोरा की मृत्यु के बाद उनकी ज़मीन (खसरा नं. 104, रकबा 4 एकड़) पर भूमाफियाओं की नज़रें गड़ीं। इस ज़मीन को कोंडागांव निवासी भदरू पिता चैतू के नाम अवैध रूप से दर्ज करवा दिया गया। इस प्रक्रिया में स्थानीय भूमाफिया,पटवारी की भूमिका संदिग्ध रही, जिन्होंने बिना किसी वैध दस्तावेज़ के ज़मीन के नामांतरण को अंजाम दिया। यह मामला प्रशासनिक भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण है, जहाँ ज़मीन की हेराफेरी में जिम्मेदार अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद लीं। फर्जी दावे और धोखाधड़ी का सिलसिला: भदरू की पत्नी का दावा भदरू की मृत्यु के बाद भूमाफियाओं ने एक और चाल चली। भदरू की पत्नी रुकाय ने तहसील न्यायालय में फौती का आवेदन दाखिल किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि यह ज़मीन उनके पति की थी। जबकि यह ज़मीन 1961 में शासन द्वारा आदिवासी मासे पिता डोरा को आबंटित की गई थी। रुकाय ने आवेदन में खुद को मुरिया जनजाति से बताया, जबकि असल दस्तावेज़ों के अनुसार यह ज़मीन माड़िया जनजाति के डोरा की थी। इस धोखाधड़ी में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जिन्होंने जातीय हेरफेर कर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। प्रशासनिक अनियमितताएं और तहसीलदार की भूमिका इस मामले में तहसीलदार और बाबू की संदिग्ध भूमिका ने घोटाले को और गंभीर बना दिया। पहले तहसीलदार, रुपेश मरकाम ने 31 मई 2024 को एक आदेश जारी किया था। लेकिन दो महीने बाद एक अन्य नायब तहसीलदार ने उसी प्रकरण क्रमांक पर पुनः ऑफलाइन नोटशीट के आधार पर, बिना उचित दस्तावेज़ों की जांच किए, 27 जुलाई 2024 को ज़मीन फौती नामांतरण का आदेश जारी कर दिया। इस दोहरे आदेश ने ग्रामीणों के बीच संदेह उत्पन्न कर दिया है कि पहले जारी किया गया आदेश अभी तक क्यों छिपा रखा गया है? ग्रामीणों का मानना है कि यह आदेश शायद इस घोटाले को उजागर कर सकता था, जिसे जानबूझकर दबा दिया गया। 15 साल बाद घोटाले का खुलासा और पंचायत की प्रतिक्रिया करीब 15 साल बाद, जब भूमाफियाओं ने इस ज़मीन को बेचने की कोशिश की, तब ग्राम पंचायत को इसकी जानकारी मिली। पंचायत के उपसरपंच त्रिपाठी ने तत्काल इस मामले की शिकायत जगदलपुर के एसडीएम से की। उपसरपंच ने बताया कि पहले उन्हें इस ज़मीन पर हो रही गतिविधियों की जानकारी नहीं थी, लेकिन जब यह बात सामने आई कि ज़मीन की खरीद-फरोख्त की जा रही है, तब उन्होंने त्वरित कार्रवाई की। ग्राम तुसेल के ग्रामीणों और पंचायत के सदस्यों ने इस घोटाले पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह धोखाधड़ी सिर्फ ज़मीन पर कब्जा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी आजीविका, अधिकार और उनकी संस्कृति पर सीधा हमला है। ग्रामीणों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और कहा कि यह मामला प्रशासनिक भ्रष्टाचार का जीवंत उदाहरण है। दोषियों पर हो कार्यवाही अन्यथा धरना प्रदर्शन : प्रकाश ठाकुर सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने हाल ही में हुए ज़मीन घोटाले की कड़ी निंदा करते हुए इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासन को इस प्रकार की धोखाधड़ी और घोटालों के मामलों में अब सख्त रुख अपनाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। प्रकाश ठाकुर का कहना है कि आदिवासी समुदाय की भूमि के साथ बार-बार धोखाधड़ी होती रही है, जिससे उनकी आजीविका और अधिकारों पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि वह जमीनी मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करे और पंचायतों एवं ग्राम समितियों को सशक्त करे, ताकि भूमि से जुड़े मामलों में आदिवासी समुदाय की सुरक्षा हो सके। प्रकाश ठाकुर ने यह भी स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने इस मामले में त्वरित और सख्त कार्रवाई नहीं की, तो सर्व आदिवासी समाज सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएगा। उनका कहना है कि अगर उनके समुदाय के अधिकारों की अनदेखी की गई तो वे धरना प्रदर्शन करेंगे और तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता। प्रकाश ठाकुर की यह चेतावनी आदिवासी समाज के भीतर बढ़ते असंतोष और हताशा का स्पष्ट संकेत है। यदि प्रशासन ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया, तो भविष्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और आंदोलन की संभावना है, जो न केवल प्रशासन बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। सर्व आदिवासी समाज की यह मांग है कि ज़मीन से जुड़े घोटालों पर तत्काल कार्रवाई हो और दोषियों को सजा मिले, ताकि भविष्य में कोई भी आदिवासी समुदाय की जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा या धोखाधड़ी करने का साहस न कर सके। इस प्रकरण ने यह उजागर किया है कि किस प्रकार भूमाफिया और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर आदिवासियों की ज़मीनों को हड़पने का प्रयास कर रहे हैं। यह सिर्फ एक ज़मीन से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समुदायों के अस्तित्व और उनके अधिकारों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस घोटाले पर क्या कदम उठाता है और आदिवासी समुदाय की ज़मीनों की रक्षा के लिए किस प्रकार के ठोस कदम उठाए जाते हैं। इस मामले में जगदलपुर तहसीलदार रूपेश … Read more