*मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विजयादशमी पर्व के अवसर पर किया शस्त्र पूजन*

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रायपुर 12 अक्टूबर 2024// मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज विजयादशमी के शुभ अवसर पर अपने निवास कार्यालय में आयोजित शस्त्र पूजन में शामिल हुए। उन्होंने विधि-विधान से शस्त्रों की पूजा की और मां भगवती की आराधना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी को विजयादशमी पर्व की शुभकामनाएं दी। इस दौरान मुख्यमंत्री सचिवालय और मुख्यमंत्री सुरक्षा के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे।

बस्तर दशहरा: दन्तेश्वरी माई की डोली जगदलपुर के लिए निकली,मावली परघा के साथ विजयादशमी मनाने लाखों लोग जुटने लगे

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दंतेवाड़ा,12 अक्टूबर 2024 – बस्तर दशहरा, जिसे विश्व का सबसे लंबा और अनोखा दशहरा पर्व माना जाता है।इस महापर्व में मां दंतेश्वरी की डोली और छत्र का विशेष महत्व होता है। माता दंतेश्वरी की डोली शुक्रवार को जगदलपुर के लिए रवाना हुई। इस अवसर पर आंवराभाटा में परंपरागत विधियों से विशेष पूजा-अर्चना की गई, जिसमें दंतेवाड़ा पुलिस के जवानों ने डोली को सलामी दी। हर वर्ष की तरह इस बार भी डोली के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जो माता के आशीर्वाद के लिए बड़ी श्रद्धा से उपस्थित थे। माता की डोली और छत्र को जगदलपुर तक 10 विशेष स्थानों पर ही पूजा-अर्चना के लिए रोका जाएगा, जहां श्रद्धालु माता के दर्शन-पूजन कर सकेंगे। मंदिर के पुजारी विजेंद्र नाथ जिया के अनुसार, इस वर्ष का आयोजन कुछ खास है, क्योंकि 50 वर्षों में पहली बार डोली नवमी तिथि को प्रस्थान कर रही है। अष्टमी और नवमी की तिथियों के एकसाथ आने के कारण यह बदलाव किया गया है। डोली की यात्रा के दौरान 28 विश्राम स्थलों पर माता का विश्राम होगा, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर सकेंगे। इस अवसर पर आंवराभाटा, कारली, हारम पारा, और गीदम सहित अन्य स्थानों पर माता की डोली के स्वागत की भव्य तैयारियां की गई। बस्तर दशहरा में शामिल होने के बाद डोली दंतेवाड़ा लौटेगी, जहां बोधराज देव के लिए उपहार भी लाए जाएंगे। बस्तर दशहरा में माता दंतेश्वरी की डोली की यह परंपरा सदियों पुरानी है, जो सामाजिक और धार्मिक एकता का प्रतीक है। विश्व के सबसे लंबा 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा के बारे में आपको ज्यादा जानना है तो बस्तर टॉकीज Bastar Talkies यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिये।जिसमें आपको हर वर्ष दशहरे की पूरी खबर देखने को मिलेगी।  

छत्तीसगढ़ सरकार ने विधायकों का यात्रा-भत्ता किया दोगुना,जारी हुई अधिसूचना

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रायपुर,11 अक्टूबर 2024: छत्तीसगढ़ सरकार ने विधायकों को एक बड़ी राहत देते हुए उनके यात्रा भत्ते में उल्लेखनीय वृद्धि की घोषणा की है। राज्य के संसदीय कार्य विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब विधायकों को यात्रा के लिए 10 रुपये प्रति किलोमीटर की जगह 20 रुपये प्रति किलोमीटर का भत्ता मिलेगा। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य विधायकों के यात्रा खर्चों में राहत देना और उनके कामकाज में सुगमता प्रदान करना है। इस कदम से विधायकों को क्षेत्रीय यात्राओं के दौरान आर्थिक रूप से राहत मिलेगी, जिससे वे अपने विधानसभा क्षेत्रों में अधिक सक्रिय रूप से काम कर सकेंगे। विधानसभा के अंदर और बाहर विधायकों की यात्राएं अक्सर विभिन्न सरकारी योजनाओं के निरीक्षण और क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान के लिए की जाती हैं। इस भत्ते की बढ़ोतरी से उनकी कार्यक्षमता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। राज्य के विधायकों की यात्रा संबंधित आवश्यकताओं और बढ़ते खर्चों पर विचार करते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।  

डबल इंजन:विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम: चार नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के लिए 1020 करोड़ रुपये का ई-टेंडर जारी

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  रायपुर, 11 अक्टूबर 2024 – छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार ने चार नए मेडिकल कॉलेजों के भवन निर्माण के लिए 1020.60 करोड़ रुपये का ई-टेंडर जारी किया है। इस कदम से राज्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की उम्मीद है। इन नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण जांजगीर-चांपा, कबीरधाम, मनेंद्रगढ़ और दंतेवाड़ा के गीदम में किया जाएगा। इन कॉलेजों की प्लानिंग, डिजाइनिंग और इंजीनियरिंग के साथ-साथ निर्माण कार्य भी उच्च स्तरीय होगा, और इसे छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉरपोरेशन (CGMSC) द्वारा 24 महीनों के भीतर पूरा किया जाएगा। ई-टेंडर प्रक्रिया की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो गई है, और बोली जमा करने की अंतिम तिथि 7 नवंबर 2024 तय की गई है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस मौके पर कहा, “हमारी प्राथमिकता राज्य के हर नागरिक को उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। इन मेडिकल कॉलेजों से न केवल राज्य के युवाओं को चिकित्सा शिक्षा में नए अवसर मिलेंगे, बल्कि स्थानीय जनता को भी बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।” राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के इस बड़े कदम की व्यापक सराहना की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री साय और स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में जो सुधारात्मक और विकासात्मक योजनाएं बनाई हैं, वे राज्य को एक बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यह परियोजना न केवल चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी। इस कदम से प्रदेशवासियों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विश्वास और भी मजबूत होगा।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्यपाल रमेन डेका से की सौजन्य भेंट

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  रायपुर, 11 अक्टूबर 2024 – छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजभवन में राज्यपाल रमेन डेका से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को नवरात्रि के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि के लिए शुभकामनाएं प्रकट कीं। राजभवन में हुई इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय और राज्यपाल श्री डेका के बीच प्रदेश के विकास से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा हुई। दोनों ने राज्य में शांति, प्रगति और विकास के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।  

समसामयिक लेख : *संजौली और मंडी में मस्जिद निर्माण पर विवाद:एक गहरी दृष्टि *

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निर्मल कुमार हिमाचल प्रदेश के संजौली और मंडी में हाल ही के विरोध प्रदर्शनों की जड़ अवैध मस्जिद निर्माण के आरोप हैं। अवैध निर्माण की चिंता ने इन विरोधों को जन्म दिया है, लेकिन यह मुद्दा केवल कानूनी मामलों तक सीमित नहीं है। यह साम्प्रदायिक सौहार्द्र, सामाजिक संतुलन, और धार्मिक आस्थाओं के आपसी मेल-जोल से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। इस्लाम के अनुसार, मस्जिद का निर्माण नैतिक और वैध जमीन पर होना चाहिए ताकि पूजा और इबादत का स्थान पवित्र और वैध रहे। इससे संबंधित विवाद न केवल धार्मिक जिम्मेदारियों को प्रभावित करते हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक सौहार्द्र को भी चुनौती देते हैं। मस्जिद का निर्माण: इस्लामी मान्यताएँ और सिद्धांत इस्लाम में, मस्जिद केवल एक पूजा स्थल नहीं है; यह एक सामुदायिक केंद्र, आध्यात्मिकता का स्रोत, और नैतिकता का प्रतीक होती है। इसे इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार एक पवित्र स्थान के रूप में देखा जाता है जहाँ केवल धार्मिक कर्मकांड ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता और नैतिकता का पालन भी होता है। मस्जिद के निर्माण की प्रक्रिया से लेकर उसके संचालन तक हर कदम नैतिकता और कानून के दायरे में होना चाहिए। मस्जिद निर्माण के लिए शरीयत (इस्लामिक कानून) के तहत यह अनिवार्य है कि उसका निर्माण केवल वैध, विवाद-मुक्त जमीन पर ही किया जाए। हदीस और कुरान की शिक्षाओं के अनुसार, किसी भी मस्जिद का निर्माण अनैतिक साधनों, जैसे अवैध भूमि या भ्रष्टाचार के धन से नहीं किया जाना चाहिए। अवैध या विवादित भूमि पर मस्जिद बनाकर उस स्थान की पवित्रता को खतरे में डालने से मस्जिद में की गई नमाज़ भी प्रश्नों के घेरे में आ सकती है। इसलिए, मस्जिद का निर्माण पूरी तरह से पारदर्शी, नैतिक और कानूनी रूप से शुद्ध होना चाहिए। इस्लामी धर्मशास्त्र और धार्मिक स्थलों की पवित्रता इस्लाम में धार्मिक स्थलों की पवित्रता का एक गहरा महत्व है। केवल बाहरी रूप से मस्जिद का निर्माण महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसका आधार, उसकी प्रक्रिया, और उसमें उपयोग की गई सामग्री भी धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होती है। उदाहरण के लिए, कुरान में इस बात पर बल दिया गया है कि अवैध तरीके से प्राप्त संपत्ति को धार्मिक कार्यों में शामिल करना निषिद्ध है। ऐसे में अवैध भूमि पर बनी मस्जिद की वैधता संदेह के घेरे में आ जाती है। हदीस के अनुसार, मस्जिद एक शुद्ध, विवाद-मुक्त और पारदर्शी प्रक्रिया द्वारा बनाई जानी चाहिए। यदि मस्जिद का निर्माण विवादित या अवैध भूमि पर किया जाता है, तो वह मस्जिद सामुदायिक असंतोष का कारण बन सकती है। इससे समाज में शांति की बजाय अशांति फैलने की संभावना बढ़ जाती है, जो कि मस्जिद के वास्तविक उद्देश्य के बिल्कुल विपरीत है। मस्जिद एक ऐसा स्थान होना चाहिए जहाँ लोग एकजुट होकर ईश्वर की इबादत कर सकें और नैतिकता के उच्चतम मानकों का पालन कर सकें। स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान मस्जिद निर्माण के विवाद का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे सांस्कृतिक और स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान करना चाहिए। जब धार्मिक स्थल अवैध रूप से बनाए जाते हैं, तो यह समाज में असंतुलन और गलतफहमियों को जन्म देता है। भारत जैसे विविध और बहु-धार्मिक देश में, धार्मिक स्थलों का निर्माण न केवल धार्मिक भावना का सम्मान करना चाहिए, बल्कि स्थानीय समुदायों के रीति-रिवाजों और भावनाओं का भी ध्यान रखना चाहिए। विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में, जहाँ सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता है, बाहरी लोगों की उपस्थिति और उनकी गतिविधियों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। बाहरी समुदायों को शरण देने और स्थानीय संस्कृति को बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। अगर किसी बाहरी समुदाय की गतिविधियों से स्थानीय सांस्कृतिक संतुलन बिगड़ता है, तो यह साम्प्रदायिक तनाव को जन्म दे सकता है। इसलिए, मस्जिद निर्माण के दौरान यह ध्यान रखना चाहिए कि स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान हो और साम्प्रदायिक सौहार्द्र बना रहे। साम्प्रदायिक सौहार्द्र का महत्व भारत में धार्मिक विविधता सदियों से एक मजबूत पहलू रही है। यहाँ सभी धर्मों के लोग एक साथ रहते हैं और धार्मिक स्थलों का सम्मान करते हैं। मस्जिद, मंदिर, चर्च, गुरुद्वारा—हर धार्मिक स्थल को साम्प्रदायिक सौहार्द्र के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। जब किसी धार्मिक स्थल का निर्माण कानून का पालन करते हुए और स्थानीय समुदाय की सहमति से होता है, तो वह एकता और शांति का संदेश देता है। संजौली और मंडी में मस्जिद निर्माण के विवाद के बाद, मस्जिद प्रबंधन समितियों ने जो कदम उठाए, वे सराहनीय हैं। उन्होंने अवैध निर्माण के हिस्सों को गिराने का निर्णय लिया, ताकि समाज में साम्प्रदायिक तनाव न बढ़े और शांति बनी रहे। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो यह दर्शाता है कि कानून का पालन करते हुए धार्मिक स्थलों का निर्माण किया जाना चाहिए। कानून और सामुदायिक जिम्मेदारियाँ धार्मिक स्थलों का निर्माण केवल धार्मिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी भी है। भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है, लेकिन इसके साथ यह भी सुनिश्चित करता है कि इस अधिकार का दुरुपयोग नहीं किया जाए। जब कोई धार्मिक स्थल, जैसे मस्जिद, मंदिर, या चर्च, वैध प्रक्रिया और कानून के तहत बनाए जाते हैं, तो इससे समाज में विश्वास और एकता बढ़ती है। कानूनी तौर पर, भूमि का स्वामित्व विवादित नहीं होना चाहिए और सभी आवश्यक अनुमतियाँ और स्वीकृतियाँ प्राप्त करने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जाना चाहिए। मस्जिदों या अन्य धार्मिक स्थलों के अवैध निर्माण से सामाजिक असंतोष पैदा हो सकता है, जो कि साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ावा दे सकता है। *धार्मिक स्थल: एकता का केंद्र* धार्मिक स्थल जैसे मस्जिद, मंदिर, और चर्च समाज में शांति, एकता और सामंजस्य का प्रतीक होते हैं। इनका उद्देश्य केवल पूजा करना नहीं होता, बल्कि समाज के लोगों को एकजुट करना और नैतिकता का पालन करना होता है। जब किसी धार्मिक स्थल का निर्माण विवादों में घिर जाता है, तो उसका वास्तविक उद्देश्य खो जाता है। मस्जिद का निर्माण अगर विवाद-मुक्त और नैतिक तरीके से किया जाता है, तो वह समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है। महात्मा गांधी के विचार भी इस बात पर जोर देते हैं कि किसी भी धार्मिक स्थल का निर्माण और उसका संचालन नैतिकता, अहिंसा और सभी धर्मों के प्रति सम्मान के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने हमेशा कहा कि धार्मिक … Read more

मुख्यमंत्री श्री साय की विशेष पहल से सर्पदंश और जंगली हाथियों के हमलों से हो रही मौतों पर रोक, जनमन महाअभियान के तहत वनवासियों को मिले पक्के मकान

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( विशेष रिपोर्ट ) जशपुर और सरगुजा संभाग में जंगली हाथियों के हमले और सर्पदंश से हो रही मौतों पर रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल रंग ला रही है। राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए जनमन महाअभियान के तहत जंगलों और झाड़ियों में रहने वाले वनवासियों को पक्के मकान उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम करने के लिए सरकार ने लोगों को अंधविश्वास से निकालकर तत्काल चिकित्सा सुविधा दिलाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल ने जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि सर्पदंश जैसी गंभीर परिस्थितियों में भी लोगों को समय पर इलाज मिल सके। सर्पदंश के मामलों में जागरुकता बढ़ी जिले में सर्पदंश के शिकार लोगों को झाड़-फूंक जैसे अंधविश्वासों से दूर रखने और उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए जनजागरुकता अभियान भी चलाया जा रहा है। कलेक्टर डॉ. मित्तल ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे गांवों में लोगों को जागरूक करें कि सांप काटने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में आकर इलाज कराएं। आज सुबह सन्ना निवासी रसेल राम को जहरीले बंबू पिट वाइपर सांप ने काट लिया। पहले उन्होंने झाड़-फूंक का सहारा लिया, लेकिन जब स्थिति बिगड़ी तो वे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सन्ना पहुंचे। वहां पर चिकित्सकों ने उन्हें तुरंत एंटी स्नेक वेनम का इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद उनकी हालत सामान्य हो गई। डॉक्टरों ने उन्हें अंधविश्वासों से दूर रहने और भविष्य में किसी भी सर्पदंश की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी। जनजागरुकता अभियान के सकारात्मक परिणाम चिकित्सकों ने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार गांवों में जागरुकता फैलाने का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है। पहले जहां लोग झाड़-फूंक का सहारा लेते थे, अब वे स्वास्थ्य केंद्रों में आकर अपना इलाज करा रहे हैं। सन्ना सीएचसी के डॉक्टर सुनील लकड़ा  ने बताया कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां लोग जागरूक होकर समय पर इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे हैं, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी है। मुख्यमंत्री की इस पहल और कलेक्टर के निर्देशों के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और जागरुकता बढ़ने से ग्रामीण अंचलों में सर्पदंश से होने वाली मौतों में कमी आ रही है, जो सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है।  

विष्णु के सुशासन की सुंदर तस्वीर बनकर कैसे आगे बढ़ रहा घुघरी पँचायत? पढ़िए विकास की यह कहानी,,,

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*विष्णु के सुशासन में तेजी से बदल रही गांव की तस्वीर* *विकास और समाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में ग्राम पंचायत घुघरी विकास और बदलाव की नई परिभाषा गढ़ रहा* *महिला सशक्तिकरण के तहत् स्व सहायता समूहों की 412 महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया* जशपुर 10 अक्टूबर 2024/छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में  राज्य के गांवों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। शासन के प्रयासों और पंचायती राज योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश के गांव अब विकास और समाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में नई कहानियां लिख रहे हैं। ऐसी ही एक कहानी है जशपुर जिले के बगीचा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत घुघरी की। जिला मुख्यालय जशपुर से 93 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव विकास और बदलाव की नई परिभाषा गढ़ रहा है। यहां पंचायत की बैठकों में जनभागीदारी के माध्यम से गांव के हर चुनौतीका समाधान किया जाता है। गांव में 567 लोगों का राशन कार्ड बनाया गया हैं जिनमें 37 एपीएल कार्ड, 407 बीपीएल कार्ड शामिल हैं। आंगनबाड़ी केन्द्र के माध्यम से 216 बच्चों को पोषण का लाभ मिल रहा है। धात्री और गर्भवती महिलाओं के लिए भी पोषण की व्यवस्था की गई है। समाजिक सुरक्षा के लिए 2 लाख 10 हजार खर्च किए गए हैं। साथ ही 342 लोगों को पेंशन योजनाओं से जोड़ा गया है। घुघरी निवासी मंगरी बाई ने बताया कि उन्हें हर महिना 500 रूपए पेंशन मिलती है। उसी पैसे से अपना जीवन यापन करती हैं। परिवार के पालन पोषण करने में सहायता मिल रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत् 56 जरूरतमंद परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए गए हैं। 483 परिवारों के मनरेगा जॉब कार्ड बनाए गए हैं। पीछे दो वर्षाे में मनरेगा के 20 व्यक्तिगत तालाबों का निर्माण कराया गया है। ग्राम पंचायत घुघरी के विनोद राम ने बताया कि उनके गांव में अक्टूबर और नवम्बर में मनरेगा का कार्य चालू होता है। उसमें गांव के लोग काम करने जाते हैं। गांव के लोगों का जॉब कार्ड है। मनरेगा में कार्य करके सभी परिवार मिलकर 28 हजार रूपए कमा लेते हैं। इसे घर परिवार अच्छा से चल रहा है। महिला सशक्तिकरण के उददेश्य से 36 स्व सहायता समूहों का गठन कर 412 महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। ग्राम पंचायत घुघरी की यह कहानी संवरते छत्तीसगढ़ के सुरक्षित होते भविष्य की कहानी है।

महाकुल यादव समाज सेवा समिति छत्तीसगढ़ का चुनाव संपन्न, गणेश यादव बने निर्विरोध प्रदेश अध्यक्ष, इन्हें भी मिली बड़ी जिम्मेदारी, समाज के लोगों ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को दी बधाई….

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जशपुर,10 अक्टूबर 2024। महाकुल यादव समाज सेवा समिति का चुनाव संपन्न हुआ ,गणेश यादव को निर्विरोध प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है,वहीं समाज में कई लोगों को अहम जिम्मेदारी दी गई है। बुधवार को हुए कांसाबेल सनातन धर्मशाला में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अपील निराकरण दिनांक 30.8.2024 के आदेश अनुसार कार्यालय रजिस्ट्रार फर्म एवं संस्थाएं रायपुर के पत्र दिनांक 24 .06 .2022 द्वारा निर्देशित पंजीकृत नियमावली की कंडिका 12 में दर्शित पदों के अनुरूप निर्माण कर्ता सदस्यों व प्रदेश के वरिष्ठ समाज सेवियों की उपस्थिति में निर्माणकर्ता सदस्यों की बैठक 22.09.2024 को लिए गए निर्णय के अनुसार चुनाव प्रभारी  परमेश्वर यादव बगीचा एवं प्रदीप यादव कुनकुरी के द्वारा बुधवार 09 अक्टूबर को नियमानुसार चुनाव की कार्रवाई की गई । जिसमें 29 निर्माणकर्ता सदस्यों में से 20 सदस्य उपस्थित रहे ,और चुनाव प्रक्रिया में भाग लेकर निर्विरोध महाकुल यादव समाज सेवा समिति छत्तीसगढ़ का निर्वाचन संपन्न कराया गया। प्रदेश समाज में प्रदेश अध्यक्ष पद हेतु  गणेश यादव ग्राम सेदरीमुंडा कुनकुरी का प्रस्ताव पवित्र मोहन बेहरा ग्राम घरजियाबाथान पत्थलगांव द्वारा किया गया ,जिसका समर्थन थबीरो राम यादव लैलूंगा के द्वारा किया गया ,वहीं प्रदेश उपाध्यक्ष पद हेतु भगवानों राम यादव ग्राम लोटा बगीचा का प्रस्ताव थविरो राम यादव ग्राम लैलूंगा के द्वारा किया गया ।जिसका समर्थन श्री हरिहर यादव अंबिकापुर के द्वारा समर्थन किया गया। सचिव पद हेतु मोहन यादव अधिवक्ता पत्थलगांव का प्रस्ताव नरेश यादव कंडोरा के द्वारा किया गया जिसका समर्थन रवि यादव बिलासपुर के द्वारा किया गया। कोषाध्यक्ष पद हेतु ललित यादव ग्राम मुड़ापारा तहसील लैलूंगा का प्रस्ताव उपेंद्र यादव ग्राम कलिबा कुनकुरी द्वारा किया गया। जिसका समर्थन  विशेश्वर यादव ग्राम खटंगा तहसील दुलदुला के द्वारा किया गया ।तथा संयुक्त सचिव पद हेतु  हीराधर यादव ग्राम पसेना तहसील लुण्ड्रा का प्रस्ताव  दुर्योधन यादव ग्राम कोतबा द्वारा किया गया जिसका समर्थन  ललित यादव ग्राम मुड़ापारा तहसील लैलूंगा के द्वारा किया गया। सदस्य हेतु विशेश्वर यादव ग्राम खटंगा तहसील दुलदुला का प्रस्ताव हरिहर यादव ग्राम गोधनपुर अंबिकापुर के द्वारा किया गया जिसका समर्थन लोकनाथ यादव ग्राम खंताडाड तहसील बगीचा के द्वारा किया गया।वहीं समाज के सदस्य हेतु  नरेश यादव ग्राम कंडोरा तहसील कुनकुरी का प्रस्ताव  रवि यादव कुदमुरा बिलासपुर के द्वारा किया गया जिसका समर्थन श्री भवानी शंकर खूंटिया गोलाबुडा तहसील धर्मजयगढ़ के द्वारा किया गया । आज के चुनाव प्रक्रिया में प्रदेश के वरिष्ठ समाजसेवी उपस्थित थे जिन्होंने सर्वसम्मति से समर्थन किया।इस प्रकार निर्वाचन के सभी पद निर्विरोध चुने गए ।इस मौके पर नव निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष  गणेश यादव ने समाज के सभी लोगों का आभार जताते हुए कहा की समाज के हित में अनेक कार्य करने का संकल्प लिया है। अपने एक बयान में उन्होंने समाज की भलाई और विकास के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की बात कही। गणेश यादव ने आगे कहा कि समाज के हर वर्ग की समस्याओं का समाधान करना उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए वह पूरी निष्ठा से काम करेंगे। उन्होंने कहा कि महाकुल समाज के हर सदस्य की प्रगति के लिए वह हरसंभव सहायता प्रदान करेंगे और समाज में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देने का काम करेंगे।उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में समाज के उत्थान के लिए विभिन्न कार्यक्रम और योजनाएँ चलाई जाएँगी, जिससे समाज को एक नई दिशा मिल सके।

मुख्यमंत्री श्री साय ने राष्ट्रीय डाक दिवस पर दी बधाई,जानिए डिजिटल युग में डाक विभाग की भूमिका ,,,

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रायपुर, 10 अक्टूबर 2024: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय डाक दिवस के अवसर पर भारतीय डाक विभाग के सभी कर्मियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि भारतीय डाक विभाग, देश की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित सरकारी डाक प्रणाली, आज भी अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। हर साल 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय डाक दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिससे इस विभाग द्वारा देश के विकास में दिए गए अमूल्य योगदान को सम्मानित किया जाता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारतीय डाक सेवा आज भी दुनिया के सबसे बड़े डाक नेटवर्क के रूप में जानी जाती है। यह सेवा न केवल शहरों में बल्कि ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में भी संचार का महत्वपूर्ण साधन बनी हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डिजिटल युग के इस दौर में भी भारतीय डाक ने अपनी प्रासंगिकता बनाए रखी है और यह सेवा ई-कॉमर्स, बैंकिंग और डिजिटल इंडिया जैसी सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने डाक विभाग की अन्य सेवाओं की सराहना की, जैसे बैंकिंग सुविधा, जोकि ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में सहायक रही है। उन्होंने कहा कि यह विभाग न केवल संचार के क्षेत्र में बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रीय डाक दिवस, डाक सेवाओं की उपयोगिता और उनकी भूमिका का स्मरण कराता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि आधुनिक तकनीक के बावजूद, डाक सेवा का महत्व बना हुआ है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां डिजिटल संसाधन सीमित हैं।भारतीय डाक सेवा दुनिया का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क है। राष्ट्रीय डाक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने डाक विभाग को देश के नागरिकों के साथ बेहतर संचार और सेवाओं को जोड़ने के लिए धन्यवाद दिया और उनके समर्पण की सराहना की।