जिला प्रशासन ने एक बड़े आंदोलन को बड़ी समझदारी से खत्म किया,न हो-हल्ला न झूमा-झटकी,कैसे हुआ ये सब?

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जशपुर – राजी पड़हा समेत 6 उरांव समाज के संगठनों ने जिले के सभी उरांव जनजाति को 3 सितंबर की सुबह से हॉकी स्टेडियम में बुलाया गया।जिसमें दोपहर 1 से डेढ़ बजे तक बमुश्किल 8-9 सौ लोग इकट्ठा हो पाए थे।बाद में झारखण्ड और ओडिशा से आई भीड़ ने आयोजनकर्ताओं की लाज रख ली।राजी पड़हा शासन व्यवस्था को माननेवालों की जनाक्रोश रैली को जिला प्रशासन ने केवल सभा में समेट दिया।बिना कोई ढोल-तमाशे के कार्यक्रम शाम 5 बजे तक खत्म हो गया।   यह सब पूर्व कांग्रेस विधायक विनय भगत समेत कई सामाजिक नेताओं,संगठनों के लोगों पर शासन की सतर्क निगाहों और तगड़ी घेराबंदी के कारण हो पाया।मंगलवार 3 सितंबर को सम्भावित जनाक्रोश से निपटने के लिए चार दिन पहले से ही प्रशासन ने रणनीति बना ली थी।पूरे जशपुर को छावनी में तब्दील करते हुए जगह-जगह टीन की दीवार खड़ी कर दी गई।   दीवार,बेरिकेड के आगे जितनी फोर्स लगाई गई उसी के अनुपात में पीछे भी फोर्स रखी गई थी।हालांकि सरकार की इंटेलिजेंस ने बखूबी काम करते हुए इतना क्लियर कर दिया था कि लाठीचार्ज की नौबत नहीं आएगी।मंच पर हर भड़काऊ भाषण देनेवाले को सादे वेश में पुलिस के जवान कवर किये हुए थे।तैयारी यह थी कि अगर भीड़ को उकसाने की किसी ने कोशिश की तो उसे तत्काल सभा से हटा दें।भीड़ को भेड़ बनाकर बाड़े में रखने की योजना बेहद सफल रही।सभा खत्म होने के बाद राजी पड़हा के धर्म गुरु बंधन तिग्गा दीपू बगीचा की ओर जाने की योजना बनाते हुए सभस्थल से बाहर निकल रहे थे कि योजना भांपकर तत्काल एडिशनल एसपी अनिल कुमार सोनी, डिप्टी कलेक्टर आकांक्षा त्रिपाठी,इंस्पेक्टर रवि तिवारी के साथ आयोजकों को शर्तें याद दिलाने लगे ,जिसका तेजी से असर हुआ।वहीं फोर्स भी गेट की एक ओर तैनात हो गई।भीड़ निकलती जा रही थी और अधिकारी,फोर्स के जवानों के साथ उन्हें घोलेंग रोड पर रवाना करते रहे।इस तरह न कोई हो-हल्ला न कोई झूमा-झटकी हुई और आंदोलन शान्तिपूर्ण शहर के बाहर ही निपट गया। बलौदाबाजार हिंसा से झुलसा छत्तीसगढ़ शासन का यह पहला ड्रिल था।जिसे कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल,पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने सफलतापूर्वक पूरा किया।

*छत्तीसगढ़ में 8.46 लाख गरीबों को मिलेगा पक्का मकान: प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत मिली मंजूरी*

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रायपुर: छत्तीसगढ़ के गरीब परिवारों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारत सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत राज्य में 8,46,931 पक्के मकानों की स्वीकृति दी है। इस योजना के तहत राज्य के ग्रामीण इलाकों में स्थित गरीब परिवारों को आवासीय सुविधा प्रदान की जाएगी। स्वीकृत मकानों में 6,99,331 आवास एसईसीसी 2011 की सूची के अनुसार और 1,47,600 आवास आवास प्लस सूची के आधार पर स्वीकृत किए गए हैं। **मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया आभार** छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का हार्दिक आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत मिली यह स्वीकृति राज्य के लाखों गरीब परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाएगी। इससे लोगों को अपने घर का सपना पूरा करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके जीवन में स्थिरता और सुरक्षा का भाव आएगा। **राज्य के विकास में मील का पत्थर** मुख्यमंत्री साय ने इस स्वीकृति को छत्तीसगढ़ के विकास में एक मील का पत्थर बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गरीब और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस योजना से राज्य के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे, और उनका जीवन स्तर बेहतर होगा। इस महत्वपूर्ण निर्णय से छत्तीसगढ़ के गरीब परिवारों के लिए एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है, जहां उन्हें अपने सपनों का पक्का घर मिलने की उम्मीद जगी है।

*कुनकुरी में मामूली विवाद बना हिंसा का कारण, आरोपी गिरफ्तार और जेल भेजा गया*

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जशपुर (कुनकुरी): एक मामूली विवाद ने उस समय हिंसक रूप ले लिया जब गांव के एक युवक ने लोहे के सब्बल से हमला कर एक व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना 2 सितंबर 2024 की सुबह ठेठेटांगर गांव की है। पीड़िता हेमोवती यादव ने कुनकुरी थाना में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि उनका पति रामचंद्र यादव खेत में मवेशी चरा रहा था। उसी समय गांव का विद्याधर यादव भी अपनी मवेशियों को लेकर वहां पहुंचा और अपनी मवेशियों को बांधने के लिए खेत में लोहे का साबर गाड़ने लगा। रामचंद्र ने उसे मना करते हुए कहा कि इससे दोनों के मवेशी आपस में लड़ सकते हैं, इसलिए यहां साबर न गाड़े। इस बात पर नाराज होकर विद्याधर यादव ने रामचंद्र को गाली-गलौज करते हुए लोहे के सब्बल से हमला कर दिया, जिससे रामचंद्र को चेहरे, पीठ, और बाएं हाथ पर गंभीर चोटें आईं। घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी सुनील सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक जशपुर, श्री शशि मोहन सिंह को अवगत कराया। पुलिस ने तुरंत कार्यवाही करते हुए आरोपी विद्याधर यादव के खिलाफ धारा 296, 351(2), 118(1), 118(2) बी, एन एस के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से हमले में प्रयुक्त लोहे का सब्बल भी जप्त किया गया है। पीड़ित रामचंद्र यादव के डॉक्टरी परीक्षण में पाया गया कि उनके बाएं हाथ की हड्डी टूट गई है, जिससे उनकी चोटें गंभीर मानी जा रही हैं। आरोपी विद्याधर यादव को 3 सितंबर 2024 को न्यायिक रिमांड पर कुनकुरी न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इस मामले की विवेचना में सहायक उप निरीक्षक संतोष तिवारी, आरक्षक नंदलाल और गणेश यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस अब इस मामले की आगे की जांच कर रही है।

राजी पड़हा जनाक्रोश महारैली को लेकर जशपुर छावनी में तब्दील,भारी फोर्स की तैनाती के साथ कई रोड ब्लॉक किये गए,,लोगों का आना शुरू,

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जशपुर – सरना पूजा स्थल दीपू बगीचा में राजी पड़हा के लोग शासन-प्रशासन के साथ ही उरांव समाज के कुछ नेताओं से नाराज चल रहे हैं।राजी पड़हा के आज 3 दिसम्बर को जिला मुख्यालय में आयोजित जनाक्रोश महारैली में उरांव आदिवासी समाज के लोगों का आना शुरू हो गया है।आंदोलन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। दरअसल,दीपू बगीचा जो उरांव जनजातीय समाज का पूजा स्थल है,जिसमें बीते माह राजी पड़हा मुख्यालय में संचालित छात्रावास प्रशासनिक जांच में अवैध पाया गया।जहां के छात्र-छात्राओं को शासकीय छात्रावासों में विधिवत प्रवेश दिलाया गया।एसडीएम जशपुर प्रशांत कुशवाहा ने बड़ी कुशलता से कार्रवाई की।इसके बाद राजी पड़हा के पदाधिकारी इसपर दबी जुबान से अपनी नाराजगी जताने लगे।जिसके बाद उरांव समाज के 6 संगठनों ने मिलकर सरना स्थल में तालाबंदी की बात कहते हुए 03 सितम्बर 2024, दिन-मंगलवार यानी आज जनाक्रोश रैली की अपील की।वहीं जशपुर विधायक रायमुनी भगत समेत उरांव समाज का एक वर्ग  इस रैली में समाज के लोगों को बहकावे में न आते हुए शामिल नहीं होने की अपील किया है। जो यह है, अपील, आप सभी उरांव समाज को सूचित किया जाता है कि उरांव समाज मुख्यालय दीपु बगीचा (सरना स्थल) दिनांक 10/08/2024 को उरांव आदिवासियों के रुढ़ि-प्रथा एवं संस्कृति आस्था व धरोहर का केन्द्र में सरहुल / खद्दी परब का सरना स्थल एवं राजी पड़हा मुख्यालय को नगरपालिका एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा ताला लगा दिया गया, जो कि हमारे पुरखों के द्वारा बरसों से इस दीपु बगीचा में उरांव आदिवासियों के द्वारा अपना सांस्कृतिक कार्यक्रम पूजा पाठ करते आ रहे हैं, परन्तु नगरपालिका के द्वारा दीपु बगीचा को अपने अन्दर में लेकर अन्य समाज के लोगों को कार्यक्रम करने समय-समय पर दिया जायेगा। उरांव समाज कहां पर सरहुल, करम, टुंटा मनाएगा। उरांव समाज का धरोहर एवं अस्तित्व समाप्त हो जाएगा अगर दीपु बगीचा को बचाना है तो उरांव समाज के जितने भी हमारे समाज के अगुवागणों से प्रार्थना है कि आप सभी अधिक से अधिक संख्या में आकर जन आक्रोश रैली को सफल बनावें । यह हमारा उरांव आदिवासियों का धरोहर का सवाल है। इस जन आक्रोश महारैली को सफल बनाने के लिए हमारे राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष-धरम गुरु श्री बंधन तिग्गा जी, श्री जगरनाथ उरांव (रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर) पधार रहे हैं। नोट :- उरांव समाज के सभी बन्धुगण एवं परिवार के सभी सदस्य गण जन आक्रोश महा रैली को सफल बनाने में योगदान दें निवेदक ( आयोजक) (1 ) शाखा-राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा भारत, बालाछापर जशपुर(2 ) उरांव समाज (पाड़हा व्यवस्था), (3) उरांव समाज के सभी संगठन,(4)सर्व आदिवासी समाज (5)नव युवा समाज,(6)रानी सिनगी दाई  महिला संगठन भारत, (7) समस्त मुली पाड़हा / डाड़ा पाड़हा/ अतखा पाड़हा (गांव स्तर)। इस अपील के अनुसार समाज के लोगों ने जिला प्रशासन से जनाक्रोश महारैली के लिए अनुमति मांगी।जिसपर प्रशासन ने इसकी अनुमति शर्तो के साथ दे दी। राजी पड़हा से जुड़े विनोद प्रधान ने बताया कि जनाक्रोश महारैली एस्टोटर्फ हॉकी मैदान में ,एनईएस कॉलेज के बगल में होगी।उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के अलावे ओडिशा,झारखण्ड,बिहार,पश्चिम बंगाल और नेपाल देश में रहनेवाली राजी पड़हा की प्रजा उपस्थित होगी।हालांकि संख्या कितनी होगी यह उन्होंने नहीं बताया।कहा कि अभी लोगों का आना शुरू हुआ है। बहरहाल, सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो बलौदाबाजार हिंसा के बाद से छत्तीसगढ़ सरकार हर प्रकार के प्रदर्शनों पर बेहद सतर्क है।जिला मुख्यालय में जगह-जगह मजबूत बेरिकेड बनाये गए हैं।भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया है।सादे वेश में पुलिसकर्मी कार्यक्रम में आने वाले लोगों पर नजर रख रहे हैं।सभा को शांतिपूर्ण सम्पन्न कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

*राजी पड़हा जनाक्रोश रैली को लेकर उरांव समाज में हुआ दो फाड़ ! विधायक ने कहा – लोग रैली में न हों शामिल,प्रशासन अशांति फैलानेवालों पर सख्ती बरतने को तैयार *

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जशपुर, 2 सितंबर: शहर में कल 3 सितंबर को प्रस्तावित जनाक्रोश महारैली को लेकर माहौल गर्म है। राजी पड़हा सरना प्रार्थना समाज समेत छह सामाजिक संगठनों द्वारा जिला मुख्यालय में इस रैली का आयोजन किया जा रहा है, जिसे लेकर उरांव समाज में विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो गई है। दरअसल, रैली के आयोजक प्रशासन पर दीपू बगीचा स्थित सरना पूजा स्थल को सील करने का आरोप लगा रहे हैं। इस मुद्दे पर उरांव समाज का एक वर्ग आक्रोशित है और उन्होंने हजारों लोगों के साथ रैली में शामिल होने का ऐलान किया है। छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है। हालांकि, समाज के दूसरे पक्ष ने रैली का विरोध करते हुए इसे समाज में फूट डालने की कोशिश करार दिया है। जशपुर विधायक रायमुनी भगत और देवलाल भगत ने अपील की है कि समाज के लोग इस रैली से दूर रहें। उनका दावा है कि पूजा स्थल को प्रशासन द्वारा सील नहीं किया गया है, बल्कि राजी पड़हा के कुछ पदाधिकारियों ने स्वयं ही मुख्य गेट पर ताला लगाकर अफवाह फैलाई है। इस पूरे विवाद की जड़ दीपू बगीचा में अवैध रूप से चलाए जा रहे छात्रावास से जुड़ी है। प्रशासन ने बिना अनुमति और समुचित व्यवस्था के नाबालिग लड़के-लड़कियों को एक ही कमरे में रखने के आरोप में छात्रावास को बंद करा दिया था। इसके बाद से राजी पड़हा सरना समूह ने प्रशासन पर धार्मिक स्थल के खिलाफ कार्रवाई का आरोप लगाया है, जिससे जनाक्रोश महारैली की योजना बनाई गई। स्थानीय प्रशासन एसडीएम प्रशांत कुशवाहा ने भी मीडिया को बताया कि पूजा स्थल में प्रशासन की ओर से कोई तालाबंदी नहीं की गई है।अफवाह फैलाने,अशांति फैलाने की कोशिश करनेवालों पर सख़्त कार्रवाई करने की तैयारी है। रैली के विरोध में स्थानीय हिंदू उरांव समाज ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने रैली से शहर की शांति और सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ने की आशंका जताई है। जिला प्रशासन ने हालांकि रैली को सशर्त अनुमति दे दी है, और इसके मद्देनजर हॉकी स्टेडियम समेत पूरे शहर में भारी पुलिस बल तैनात किया जा रहा है। जशपुर विधायक रायमुनी भगत ने कहा, “समाज के लोगों को गुमराह करके रैली का आयोजन किया जा रहा है। दीपू बगीचा सरना पूजा स्थल के मुख्य गेट पर प्रशासन ने कोई ताला नहीं लगाया है। यह अफवाह फैलाकर माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। मैं संपूर्ण उरांव समाज से अपील करती हूँ कि इस रैली में शामिल न हों।” कल की रैली को लेकर जिले भर में उत्सुकता और आशंका का माहौल है, और प्रशासन स्थिति पर कड़ी निगरानी बनाए हुए है।

*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने तीजा के अवसर पर दी बड़ी सौगात, 70 लाख महिलाओं को मिली महतारी वंदन योजना की सातवीं किश्त*

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  **रायपुर, 02 सितंबर 2024:** मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने तीजा के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ की 70 लाख महिलाओं को बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित तीजा-पोरा महतारी वंदन तिहार के दौरान, श्री साय ने महतारी वंदन योजना की सातवीं किस्त के रूप में प्रत्येक लाभार्थी महिला के खाते में 1,000 रुपये डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से अंतरित किए। इस अवसर पर प्रदेश की महिलाओं के चेहरे खुशी से खिल उठे और उन्होंने अपने “विष्णु भैया” का आभार व्यक्त किया। महतारी वंदन योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और उनके स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार करना है। योजना के तहत विवाहित, विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं को, जिनकी उम्र 21 वर्ष से अधिक है, हर महीने 1,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना का शुभारंभ 10 मार्च 2024 को किया था। तब से अब तक योजना की सात किश्तें लाभार्थी महिलाओं के खातों में जमा की जा चुकी हैं। **तीजा-पोरा तिहार का महत्व:** तीजा और पोरा, छत्तीसगढ़ के प्रमुख त्यौहार हैं, जो विशेष रूप से महिलाओं द्वारा धूमधाम से मनाए जाते हैं। तीजा, जिसे हरतालिका तीज भी कहा जाता है, विशेषकर विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। यह त्यौहार महिलाओं की भक्ति, श्रद्धा, और उनकी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। पोरा त्यौहार, कृषि कार्यों की समाप्ति के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन लोग मिट्टी के बैल बनाकर उनका पूजन करते हैं, जो कृषि की समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक होते हैं। महिलाएं इस दिन विशेष पूजा अर्चना करती हैं और खेतों में हल चलाने का प्रतीकात्मक अनुष्ठान करती हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा तीजा-पोरा के मौके पर महतारी वंदन योजना की सातवीं किस्त का वितरण, महिलाओं के प्रति सम्मान और उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार लाने और उन्हें समाज में एक मजबूत भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करती है।

छात्रों की लड़ाई में पिसता प्रिंसिपल,आत्मानन्द में हुई मारपीट के पीछे की सच और साजिश की क्या है कहानी?

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जशपुर/कुनकुरी – बीते 28 अगस्त को स्वामी आत्मानन्द विशिष्ट अंग्रेजी मीडियम हाईस्कूल कुनकुरी में छात्रों के बीच हुई मारपीट के मामले में पड़ी धुंध हटती जा रही है।पुलिसिया और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच खबर जनपक्ष को ऐसी जानकारियां मिलीं हैं, जिन्हें पाठकों के सामने रखना जरूरी समझा। क्यों हुई मारपीट? यह बताने से पहले हम छात्रों के बदले हुए नाम से सच्ची कहानी बताते हैं – इसमें चांद,सूरज और पृथ्वी तीन किरदार हैं।दरअसल,उस दिन और दिनों की तरह पढाई चल रही थी।रेसिस टाईम में करीब 10:10 बजे सुबह चांद और सूरज के बीच छात्र चुनाव को लेकर बहस होने लगी।जिसमें बात बढ़ते-बढ़ते हाथापाई पर उतर आई।पृथ्वी ने बताया कि सबसे पहले सूरज ने चांद के चेहरे पर मुक्का मारा,फिर चांद ने मुक्का मारा जो सूरज को नहीं लगा,दुबारा मुक्का मारा जो सूरज के कान के पीछे पड़ा,जिससे सूरज के सिर से खून बहने लगा।चांद ने फाइटर से मारा हालांकि चांद का कहना है पृथ्वी पूरा सच नहीं बता रहा है,मैंने अंगूठी पहनी थी,जिससे सूरज को चोट लगी है।खून निकलता देख सूरज का दोस्त पृथ्वी अपने दो-तीन दोस्तों के साथ बीच-बचाव किया।तब तक स्कूल के टीचर दीपक यादव, वाइस प्रिंसिपल चौहान स्टेज के पीछे हो-हल्ला सुनकर पहुंचे।उन्होंने घायल सूरज को अस्पताल पहुंचाया।जहां सिर में टांके लगने के बाद सूरज वापस स्कूल आ गया। घटना के समय प्रिंसिपल इकबाल खान कहाँ थे? इस घटना के दौरान स्कूल के प्रिंसिपल इकबाल खान आवश्यक बैठक में जशपुर कलेक्ट्रेट में थे।जैसे ही उन्हें पता चला वे बैठक से निकल गए।तब तक इधर मामला थाने तक जा पहुंचा।सूरज अपने साथियों के साथ थाने में और चांद सीधे घर।प्रिंसिपल सीधे थाने पहुंचे और घायल सूरज से मिले।मामला सुलझाने और समझौता करने-कराने की बात पर समय निकलता गया।छात्रों की लड़ाई में दो समुदाय का तड़का लगते ही एफआईआर हो गया।माहौल में गर्मी बढ़ता देख प्रिंसिपल इकबाल घर चले गए क्योंकि चांद तो उनका ही बेटा था।दूसरे दिन इस बात पर चिल्लम-चिल्ली होती रही कि चांद ने फाइटर से मारकर सिर फोड़ा है या चांद की अंगूठी से लगकर सूरज को गहरी चोट आई है। कलेक्टर के निर्देश पर जांच फिर प्रिंसिपल पर गिरी गाज मामला सुर्खियों में आने के बाद जिला शिक्षाधिकारी पी.के.भटनागर ने स्कूल में एक जांच टीम भेजी।जांच टीम ने सम्बंधित पक्षों उनके पालकों, शिक्षकों और छात्रों के बयान लिए और प्रतिवेदन बनाकर डीईओ श्री भटनागर को सौंप दिया गया।डीईओ ने इसे कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल के समक्ष प्रशासनिक कार्यवाही के लिए रखा।जिसका अवलोकन करने के बाद इस घटना में प्रिंसिपल की घोर लापरवाही पाई गई।जिसमें प्रमुख कारण यह माना गया कि अपने स्कूल में सक्षम प्राधिकारी के बिना अनुमति बाहरी स्कूल के 2 छात्रों को प्रवेश दिया गया।तीन दिन का समय देकर कारण बताओ नोटिस प्रिंसिपल को दिया गया। कैसा रहा है प्रिंसिपल इकबाल खान का शिक्षकीय व प्रशासकीय सफर? एक नजर —– 1988 से अपने शिक्षकीय जीवन की शुरुआत करनेवाले इकबाल अहमद खान नारायणपुर थाना अंतर्गत दाराखरिका गांव से आते हैं।इनके बारे में जब हमने जानकारी जुटानी शुरू की तो 36 वर्षों के शिक्षकीय,गैर शिक्षकीय व प्रशासनिक कार्यों में बेदाग रहे।ये राज्यपाल, मुख्यमंत्री व जिला कलेक्टरों द्वारा 2021 से अब तक अपनी कुशल अध्यापन व प्रशासनिक दक्षता से सम्मानित होते आये हैं।इन्होंने मानवता की मिसाल पेश करते हुए 3 नवम्बर 2013 को खेत से लौटते हुए एक बेसुध वृद्ध महिला को देखा,जिसके पैर में बड़ा घाव जिसमें कीड़े रेंग रहे थे।इकबाल उसे अपने घर ले गए और सेवा करने लगे।घाव से कीड़े खुद साफ करते,खाना खिलाते।इसका घर में विरोध भी हुआ लेकिन उन्होंने उसकी सेवा करते हुए उसे ठीक कर दिया।वृद्ध महिला की याददाश्त चली गई थी तो वह इकबाल को ही अपना बेटा मानकर घर में ही रही। सरबकोम्बो हाईस्कूल में प्रिंसिपल के पद पर रहते हुए अपने भाई सुल्तान से 51,000/- रुपये दान में लेकर छात्रों के लिए सायकिल स्टैंड बनवाया।वहीं हाईस्कूल के लिए रास्ते के लिए जनप्रतिनिधियों से बार-बार मांग कर रास्ता तैयार कराया।वर्ष 2022 में राज्य शासन से इन्हें प्रतिनियुक्ति में स्वामी आत्मानन्द उत्कृष्ट अंग्रेजी विद्यालय का प्रिंसिपल बनाया।आत्मानन्द स्कूल के शिक्षकों ने इनके कार्यकाल को अनुशासन व अध्ययन-अध्यापन के लिए स्वर्णिम काल बताया है।वहीं 28 तारीख की घटना के बाद प्रिंसिपल खान के स्थानान्तरण की आशंका से कई विद्यार्थी और उनके अभिभावकों में निराशा है और अब बीच सत्र में ही टीसी लेकर दूसरे स्कूलों में जाने का मन बना रहे हैं। बहरहाल, दो छात्रों की लड़ाई में गैरहाजिर रहे प्रिंसिपल इकबाल खान पिसते नजर आ रहे हैं।जानकारों की मानें तो जब संकल्प कोचिंग के छात्र दूसरे स्कूल के छात्र हो सकते हैं तो प्रिंसिपल के बेटे-भतीजे अनुमति लेकर दूसरे स्कूल में पढ़ रहे हैं तो इसमें इतना बवाल क्यों? अब देखना होगा कि जो आरोप उनके ऊपर लगे हैं वो कितना सही है।

* पुलिस ने प्रेमिका से मिलने जा रहे युवक को किया गिरफ्तार,आरोपी के कब्जे से ऐसा क्या मिला कि उसे जाना पड़ा सलाखों के पीछे? जानने के लिये क्लिक करें *

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*जांजगीर-चांपा, 01 सितंबर 2024* – थाना नवागढ़ क्षेत्र के ग्राम मिसदा में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध युवक को देशी कट्टा और कारतूस के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान गुलशन उर्फ दीपांशु वर्मा (26 वर्ष) निवासी बाजार चौक सिलतरा, थाना धरसीवा, जिला रायपुर के रूप में हुई है। घटना 31 अगस्त 2024 की है जब पुलिस अधीक्षक श्री विवेक शुक्ला (भा.पु.से.) के निर्देशन में थाना नवागढ़ के निरीक्षक भास्कर शर्मा अपनी टीम के साथ रात्रि गस्त पर निकले थे। रात करीब 3:30 बजे ग्राम मिसदा के मेन रोड पर एक नीली बलेनो कार (CG-04-PA-9622) संदिग्ध स्थिति में खड़ी मिली, जिसमें एक व्यक्ति मौजूद था। पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर व्यक्ति ने गुमराह करने की कोशिश की, जिससे पुलिस का संदेह और बढ़ गया। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने अपना नाम गुलशन उर्फ दीपांशु वर्मा बताया और बताया कि वह अपनी प्रेमिका से मिलने नवागढ़ क्षेत्र आया था। पुलिस द्वारा कार की तलाशी लेने पर ड्राइवर सीट के पास रखे स्नैकर के पैकेट से एक देशी कट्टा और माचिस के डिब्बे में एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसने रायपुर सिलतरा क्षेत्र से यह हथियार किसी बाहरी व्यक्ति से खरीदा था। आरोपी के पास से अवैध रूप से हथियार रखने के संबंध में कोई लाइसेंस नहीं मिला, जिसके बाद उसके खिलाफ धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी के पास से एक देशी कट्टा, एक जिंदा कारतूस, बलेनो कार, और एक एप्पल मोबाइल सहित कुल मिलाकर 10 लाख रुपए की संपत्ति जप्त की है। आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर 01 सितंबर 2024 को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। इस पूरी कार्रवाई में निरीक्षक भास्कर शर्मा, एसआई रमेश एक्का, प्र.आर. मथुरा प्रसाद केशी, जनक राम कश्यप, अनिल कुरे, और बलराम यादव का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

*जशपुर: राजी पड़हा की आक्रोश रैली को बताया राजनीतिक स्टंट, स्थानीय नेताओं ने जताई कड़ी आपत्ति* *विधायक रायमुनी भगत समेत कई आदिवासी नेता आये सामने*

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  जशपुर, 1 सितंबर: जशपुर जिले में 3 सितंबर को आयोजित की जाने वाली राजी पड़हा की आक्रोश रैली को स्थानीय नेताओं ने एक राजनीतिक स्टंट करार देते हुए इसका कड़ा विरोध किया है। जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत ने इस रैली को समाज के भोले-भाले आदिवासियों को गुमराह करने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि चंद लोग राजनीतिक फायदे के लिए समाज के लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। विधायक श्रीमती भगत ने स्पष्ट किया कि दीपू बगीचा में राजी पड़हा द्वारा अवैध रूप से संचालित किए जा रहे छात्रावास को जिला प्रशासन ने 10 अगस्त को बंद कराया था। इस कार्रवाई को लेकर राजी पड़हा द्वारा गलत जानकारी फैलाकर समाज में भ्रम पैदा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों पर कोई रोक नहीं है, और प्रशासन ने किसी प्रकार की सीलबंदी की कार्रवाई भी नहीं की है। श्रीमती शांति भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष, ने भी इस मामले में राजी पड़हा के नेताओं के ऐसे प्रयासों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज आक्रोश रैली का पुरजोर विरोध करता है। शांति भगत ने आरोप लगाया कि वे राजनीतिक लाभ के लिए भोले-भाले आदिवासियों का उपयोग कर रहे हैं और प्रशासन से इस रैली की अनुमति न देने की मांग की। कई आदिवासी नेताओं ने भी राजी पड़हा के नेताओं के निर्णय पर असंतोष जाहिर किया और इसे समाज को समाज से लड़ाने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि दीपू बगीचा में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर कोई रोक नहीं है और प्रशासन से अनुमति लेकर इन्हें आयोजित किया जा सकता है। नगर पालिका अध्यक्ष राधेश्याम राम ने भी राजी पड़हा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राजी पड़हा ने कभी भी स्थानीय आदिवासियों को विश्वास में लेकर कार्य नहीं किया है और अब अवैध छात्रावास के मामले में समाज के लोगों को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे राजी पड़हा के बहकावे में न आएं और इस रैली का विरोध करें। जशपुर के विभिन्न जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने 3 सितंबर को आयोजित की जाने वाली आक्रोश रैली को लेकर अपने कड़े विरोध के स्वर बुलंद कर दिए हैं। अब देखना यह है कि इस विरोध के बीच रैली का क्या परिणाम होता है।

आत्मानन्द के प्रिंसिपल पर गिरी गाज, कलेक्टर ने शो-कॉज नोटिस थमाया तो शासन ने हटा दिया,छात्रों के बीच मारपीट की घटना पर हुई कार्रवाई

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जशपुर/कुनकुरी – स्वामी आत्मानन्द उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल कुनकुरी में दो दिन पहले दो छात्रों की आपसी लड़ाई के मामले में प्रिंसिपल इकबाल खान पर बड़ी कार्रवाई की गई है।उन्हें राज्य शासन ने स्कूल से हटा दिया है।वहीं कलेक्टर जशपुर ने शो-कॉज नोटिस जारी कर तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है। दरअसल,घटना 28 जुलाई की है जब SAGES कुनकुरी के प्रिंसिपल इकबाल खान का बेटा और उसी स्कूल का एक छात्र आपस में भिड़ गए।उनके बीच हुई मारपीट में 12 वीं का एक छात्र का सिर फट गया।जिसकी बाकायदा कुनकुरी थाने में रिपोर्ट हुई है,जिसपर पुलिस कार्रवाई कर रही है। कलेक्टर जशपुर डॉ. रवि मित्तल ने शासकीय स्कूल परिसर के अंदर हुई इस घटना को गम्भीरता से लेते हुए कारण बताओ नोटिस देते हुए प्रिंसिपल इकबाल खान पर पदीय कर्तव्य निभाने में घोर लापरवाही बरतने जैसे शब्दों के साथ तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा है। वहीं संचालक लोक शिक्षण संचालनालय, इंद्रावती रायपुर के पत्र क्रमांक 9051/30-08-2024 के आदेश पत्र के अनुसार प्रभारी प्राचार्य इकबाल खान की प्रतिनियुक्ति आदेश को समाप्त करते हुए मूलतः वापस भेजने के लिए प्रस्तावित किया गया है।वहीं आत्मानन्द स्कूल के व्याख्याता अनिल सिंह के प्रभारी प्राचार्य के लिए प्रस्तावित करने सम्बन्धी आदेश जारी किया गया है।इसके साथ ही इसी आदेश में कोतबा SEGES के प्राचार्य फिलमोन मिंज को हटाते हुए व्याख्याता जय कुमार सिदार को प्रशासनिक व्यवस्था के तहत प्रभारी प्राचार्य के पद पर प्रस्तावित किया गया है। हम आपको बता दें कि 28 अगस्त की सुबह करीब 10 बजे 12 वीं के दो छात्र के बीच हुई मारपीट के समय प्राचार्य इकबाल खान कलेक्टर मीटिंग में शामिल होने जशपुर गए हुए थे।घटना में आरोपी छात्र प्रिंसिपल का बेटा है जो कथित रूप से विशेष अनुमति लेकर कक्षा 12 वीं में अध्ययनरत है।वहीं पीड़ित भी उसी कक्षा का छात्र है।प्रिंसिपल इकबाल खान पर आरोप है कि उन्होंने दूसरे स्कूल में दर्ज छात्र को गलत तरीके से अपने स्कूल में पुत्रमोह के कारण पढाई करने की अनुमति कैसे दे दी?जिसकी वजह से यह घटना हुई है। बहरहाल,सवाल कई हैं लेकिन यह बात स्पष्ट तौर पर कहा जा रहा है कि विष्णु के सुशासन में सबकुछ सांय-सांय चल रहा है।