बड़ी खबर : शेरा ने तेंदुए के जबड़े से छीनकर बचाई बच्चे की जान, वन विभाग की अनदेखी पर उठे सवाल

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इंसानी खून का स्वाद चख चुके तेंदुए पर वन विभाग की अनदेखी ने लोगों के अंदर खौफ़ बढ़ा दिया है। कांकेर,02 अक्टूबर2024/ जिले के दुधावा में बीती शाम दिल दहला देने वाली घटना हुई। 11 साल का नीरज ध्रुव अपने चाचा के घर जा रहा था, जब अचानक तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया। तेंदुआ नीरज को गले से पकड़कर जंगल की ओर ले जा रहा था, लेकिन तभी पालतू कुत्ता शेरा सामने आया और तेंदुए पर टूट पड़ा। शेरा की बहादुरी से तेंदुआ बच्चे को छोड़कर भाग गया। नीरज के परिवार और ग्रामीणों ने शेरा की बहादुरी को सराहा और बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। पहले उसे कांकेर और फिर रायपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, नीरज की हालत अब स्थिर है। हैरानी की बात यह है कि इसी क्षेत्र में तेंदुआ पहले भी तीन बच्चों पर हमला कर चुका है, जिसमें एक बच्चे की जान भी जा चुकी है। इसके बावजूद, वन विभाग अब तक तेंदुए को पकड़ने में नाकाम रहा है। वन विभाग के अधिकारी डीएफओ आलोक बाजपेई ने बताया कि रायपुर से एक्सपर्ट की टीम तेंदुए को पकड़ने के लिए पहुंच गई है, और जल्द ही उसे जंगल में छोड़ दिया जाएगा। लेकिन, ग्रामीणों में वन विभाग की सुस्ती को लेकर नाराजगी है। पालतू कुत्ते शेरा की बहादुरी ने जहां एक ओर बच्चे की जान बचाई, वहीं वन विभाग की अनदेखी ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।  

दामाद ने भोजन में मिलाया जहर या फ़ूडप्वाइजनिंग: विषाक्त भोजन से एक ही परिवार के 8 सदस्य बीमार, अस्पताल में इलाज जारी

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दामाद-बेटी में हुए विवाद के बाद भोजन कर सो रहा परिवार अचानक उल्टी-दस्त का शिकार हो गया,शक दामाद पर किया जा रहा है। कोरबा,02 अक्टूबर 2024/ जिले के पसान थाना क्षेत्र के रानी पत्थर फोड़ गांव में एक ही परिवार के आठ सदस्य जहरीला भोजन खाने से बीमार हो गए। सभी को गंभीर हालत में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के जिला अस्पताल लाया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। ग्रामीणों का शक है कि उनके दामाद ने भोजन में जहर मिलाया, जबकि डॉक्टरों का मानना है कि यह मामला फूड प्वाइजनिंग का हो सकता है। घटना 1 अक्टूबर की रात की है, जब परिवार ने भिंडी, तोरई और चावल का भोजन किया। भोजन के कुछ घंटों बाद, घर के सभी सदस्यों को उल्टी, दस्त और सिर चकराने जैसी समस्याएं होने लगीं। परिवार के सदस्यों की तबीयत बिगड़ने पर 108 एंबुलेंस बुलाई गई और सभी को अस्पताल पहुंचाया गया। पीड़ितों में 9 साल के सरस कुमार से लेकर 64 साल के अहिबारन तक शामिल हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बेटी और दामाद के बीच झगड़े के बाद बेटी अपने मायके लौट आई थी। घटना वाले दिन दामाद उसे लेने आया था, लेकिन खाना बनाने के दौरान दोनों के बीच कहा-सुनी हो गई। ग्रामीणों का संदेह है कि दामाद ने रसोई में भोजन के दौरान कुछ विषैला पदार्थ मिलाया होगा, जिससे पूरे परिवार की तबीयत बिगड़ गई। हालांकि, डॉक्टर योगेंद्र पैकरा का कहना है कि मरीजों की स्थिति फूड प्वाइजनिंग जैसी लग रही है, लेकिन विषाक्त पदार्थ मिलाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। दो बुजुर्गों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि बाकी सभी खतरे से बाहर हैं।

नेशनल हाइवे 43 पर 130 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला की तैयारी में जुटा ईसाई आदिवासी महासभा,जशपुर विधायक रायमुनी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर होगा प्रदर्शन

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  जशपुर, 1 अक्टूबर 2024 – छत्तीसगढ़ में इसाई आदिवासी महासभा द्वारा जशपुर की विधायक श्रीमती रायमुनी भगत के खिलाफ एक बड़े प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। यह विरोध प्रदर्शन 3 अक्टूबर 2024 को जशपुर में आयोजित किया जाएगा, जिसमें करीब 1.5 लाख लोगों के शामिल होने की संभावना है। यह विवाद 1 सितंबर 2024 को ढेंगनी  गांव में एक सार्वजनिक सभा के दौरान श्रीमती भगत के कथित अपमानजनक बयान के बाद शुरू हुआ, जो बाद में सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ। अपने संबोधन में, भगत ने ईसाई धार्मिक प्रथाओं पर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसे ईसाई समुदाय ने अत्यंत अपमानजनक बताया है। इसाई आदिवासी महासभा ने इसके बाद विधायक से सार्वजनिक माफी और भारतीय दंड संहिता की धारा 196, 299 और 302 के तहत उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है, आरोप लगाते हुए कि उनके बयान ने धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। हालांकि, शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद, स्थानीय प्रशासन द्वारा अब तक विधायक भगत के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसाई आदिवासी महासभा ने पहली बार 18 सितंबर 2024 को अपनी शिकायतें प्रस्तुत की थीं, लेकिन अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। महासभा ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती है, तो एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा, और शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 25 सितंबर 2024 को महासभा ने दोबारा अपनी मांगों को दोहराया, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस घटनाक्रम के कारण तनाव बढ़ गया है, और जशपुर में प्रस्तावित प्रदर्शन की तैयारियां तेजी से की जा रही हैं। जशपुर जिले की इसाई आदिवासी महासभा के अध्यक्ष वाल्टर कुजूर के अनुसार, 3 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से 11:30 बजे तक यह प्रदर्शन 130 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाते हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।इस मानव श्रृंखला ने डेढ़ लाख लोग शामिल होंगे।  वाल्टर कुजूर ने जोर देकर कहा कि यह आंदोलन ईसाई समुदाय के न्याय के लिए है, जो विधायक  श्रीमती भगत के बयान से आहत महसूस कर रहा है। जैसे-जैसे प्रदर्शन की तारीख नजदीक आ रही है, स्थानीय प्रशासन इस बड़े आयोजन की तैयारी कर रहा है, जो हाल के समय के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक हो सकता है।  

अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति का आह्वान अधिक से अधिक संख्या में पत्रकार 2 अक्टूबर को रायपुर पहुँचे,पत्रकारिता संकल्प महासभा 2 अक्टूबर रायपुर के ग्रास मेमोरियल ग्राउंड में

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अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति से जुड़े प्रदेश के पत्रकार हजारों की संख्या में इस महासभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। रायपुर,1सितंबर 2024/ प्रदेश में पत्रकारों के साथ हो रहें अन्याय के खिलाफ एवं पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कराने के लिए सरकार से मांग रखने 2 अक्टूबर को प्रदेश की राजधानी रायपुर के ग्रास मेमोरियल ग्राउंड में प्रदेश के अधिकाश पत्रकार संगठनों का एक. समूह जिसे सयुंक्त पत्रकार महासभा का नाम दिया गया जिसके बैनर तले ये महासभा का आयोजन किया गया है जिसमें अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति छत्तीसगढ़ इकाई से जुड़े प्रदेश के हजारों पत्रकार इस महासभा में अपनी उपस्थित दर्ज कराएंगे। अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द शर्मा ने कहा अब जरूरी हो गया है पत्रकारों एवं पत्रकार संगठनों को एक साथ एक मंच में आना ही पड़ेगा जिससे पत्रकारों पर हो रहें अन्याय के लिए लड़ा जा सके और उन्हें न्याय दिलाया जाये और वो समय अब आता हुआ दिखाई दे भी रहा है प्रदेश में इतनी बड़ी संख्या में पत्रकार संगठन और पत्रकार 2 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में एकत्रित हो रहें है। राष्ट्रीय समिति के वरिष्ठ पत्रकार राकेश सिंह परिहार (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), नितिन सिन्हा (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ), महफूज खान (राष्ट्रीय महासचिव ) ने इस मुहीम में शामिल होने की बात कहते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के साथ प्रदेश ही नहीं पुरे भारत के पत्रकार साथियो का समर्थन है और समय समय पर संगठन के बैनर तले पुरे भारत वर्ष के पत्रकार छत्तीसगढ़ में आकर अपना समर्थन जता चुके हैं। आगे भी जब भी छत्तीसगढ़ के पत्रकारों को आवश्यकता होंगी देश के पत्रकार छत्तीसगढ़ फिर से आकर उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होंगे। अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के प्रदेश संयोजक कमलेश स्वर्णकार, ने प्रदेश संगठन से जुड़े सभी साथियो से एकता के साथ इस महासभा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने कहा और पत्रकार सुरक्षा कानून जल्द से जल्द पुरे प्रदेश में लागू हो उसकी मांग की. प्रदेश समिति के सभी वरिष्ठ पत्रकार दीपक साहू (प्रदेश उपाध्यक्ष), पुष्पा रोकडे (प्रदेश उपाध्यक्ष ), डी पी गोस्वामी, (प्रदेश उपाध्यक्ष ), प्रवीण निशी (प्रदेश उपाध्यक्ष ), राजेश यादव (प्रदेश उपाध्यक्ष )नाहिदा कुरैशी (प्रदेश सचिव ), राकेश तम्बोली (प्रदेश सचिव ), क्रांति रावत (प्रदेश सचिव ), सिकंदर खान (प्रदेश संगठन मंत्री ), ने संयुक्त बयान दिया कि पत्रकारों की एकजुटता तथा देश में निर्भीक पत्रकारिता के लिए वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में पहली बार लगभग सभी पत्रकार संगठन पत्रकार हितों के लिए एक मंच पर आ कर संकल्प लेंगे। सभी जिलाध्यक्ष और उनकी टीम पूरी तैयारी में लगी हुई है और हर जिले से अखिल भारतीय पत्रकार समिति के साथी अधिक से अधिक संख्या में 2 अक्टूबर रायपुर महासभा में पहुंचेंगे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर जताई खुशी, जशपुर जिले ने राष्ट्रीय पोषण माह में रचा इतिहास,5 लाख से ज्यादा गतिविधियों के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर

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  जशपुरनगर, 28 सितंबर 2024/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशन में छत्तीसगढ़ के आंगनबाड़ी केंद्रों में राष्ट्रीय पोषण माह के तहत विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान में जशपुर जिले ने कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल के मार्गदर्शन में प्रदेश में सबसे अधिक सफलता हासिल की है और पहले स्थान पर पहुंच गया है। जशपुर जिले में अब तक 5 लाख 68 हजार से अधिक गतिविधियों का संचालन किया जा चुका है, जिससे जिले ने प्रदेश भर में अपनी अलग पहचान बनाई है। राष्ट्रीय पोषण माह अभियान: जनआंदोलन के रूप में इस साल 1 से 30 सितंबर तक आयोजित ‘राष्ट्रीय पोषण माह’ का मुख्य उद्देश्य जनसमुदाय तक स्वास्थ्य, पोषण, और स्वच्छता के महत्व को पहुंचाना है। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के मार्गदर्शन में इसे जनआंदोलन के रूप में संचालित किया जा रहा है, जिसमें जनप्रतिनिधि, पंचायतीराज संस्थाएं, स्वयंसेवी संस्थाएं, महिला स्व-सहायता समूह, युवा संगठन और अन्य सामाजिक संस्थाएं सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण 2.0 कार्यक्रम के अंतर्गत जागरूकता बढ़ाने, स्वच्छता बनाए रखने और कुपोषण की रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल ने जनमानस में सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जशपुर जिला पूरे राज्य में राष्ट्रीय पोषण माह अभियान की सबसे उत्कृष्ट मिसाल पेश कर रहा है। 5 लाख से अधिक गतिविधियों के सफल आयोजन से यह स्पष्ट है कि जिला प्रशासन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, और स्थानीय समुदाय इस जनहितकारी अभियान को सफल बनाने के लिए एकजुट होकर काम कर रहे हैं। कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल ने कहा, “यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह जनआंदोलन है, जिसका उद्देश्य हमारे समाज के सबसे निचले तबके तक पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता का संदेश पहुंचाना है। जशपुर के लोग इस अभियान में पूरी सक्रियता से भाग ले रहे हैं और यही हमारी सफलता की कुंजी है।” इस अभियान में पंचायतीराज संस्थाओं के प्रतिनिधि, महिला मंडल, नेहरू युवा केंद्र, नेशनल कैडेट कोर (NCC), और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) जैसे संगठन भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन सभी की सामूहिक भागीदारी ने इसे और अधिक प्रभावी बनाया है, जिससे जशपुर जिले में अभूतपूर्व परिणाम सामने आए हैं। इस अभियान ने जशपुर जिले में न केवल पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई है, बल्कि स्थानीय समुदायों को एक साथ लाने और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में भी अहम भूमिका निभाई है। इस प्रेरणादायक पहल से प्रदेश के अन्य जिलों को भी सीख मिल रही है और वे भी इसे सफल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 25 सितंबर को ननिहाल जाएंगे, रोड शो कर भाजपा की डबल इंजन सरकार के गिनाएंगे फायदे,दो दिवसीय दौरा कार्यक्रम तय

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बगिया गृहनिवास आगमन, भाजपा सदस्यता अभियान और झारखंड के कुरडेग में करेंगे चुनावी रोड शो जशपुर, 24 सितंबर 2024: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 24 सितंबर की शाम अपने गृहनिवास बगिया पहुंचेंगे, जहां वे रात्रि विश्राम करेंगे। मुख्यमंत्री के आगमन से गांव में उत्साह का माहौल है, और उनके स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं। सूत्रों के अनुसार, 25 सितंबर की सुबह मुख्यमंत्री अपने गांव में भारतीय जनता पार्टी के सदस्यता अभियान में भाग लेंगे। इस अभियान के दौरान श्री साय नए सदस्यों को भाजपा से जोड़ने का कार्य करेंगे, जिससे संगठन को और मजबूती मिलेगी। इसके बाद वे निर्धारित समयानुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय झारखंड के सिमडेगा जिले के लिए हेलीकॉप्टर से रवाना होंगे, जहां वे एक विशाल चुनावी रोड शो करेंगे। झारखंड में होने वाले इस रोड शो को लेकर काफी उत्साह है और भाजपा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उनकी अगवानी के लिए तैयार हैं।बड़ी बात यह भी कि कुरडेग सीएम साय का ननिहाल है।इस इलाके में श्री साय की अच्छी पकड़ है जिसका लाभ आनेवाले झारखण्ड चुनाव में भाजपा को मिलेगा। अपुष्ट जानकारी के अनुसार श्री साय रोड शो के बाद शाम को फिर से बगिया लौट आएंगे और 27 सितंबर को रायपुर के लिए रवाना होंगे। उनके इस दौरे से स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और जनता में भारी उत्साह है, और उनके स्वागत के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

*बड़ी खबर: 20 लाख के चार इनामी माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, लोन वर्राटू अभियान के तहत हुई बड़ी सफलता**मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पुनर्वास नीति का बड़ा असर*

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 रायपुर/दन्तेवाड़ा,22 सितंबर2024 – लोन वर्राटू (घर वापस आइए) अभियान के तहत दंतेवाड़ा जिले में माओवादी गतिविधियों पर एक और बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। विष्णु सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर, माओवादी दंपति सहित 20 लाख रुपये के चार इनामी माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पित माओवादियों में रीजनल कंपनी नंबर 02 के दो सदस्य, एक उत्तर सब जोनल ब्यूरो में सक्रिय राजनीतिक टीम की सदस्य और एक केएएमएस (क्रांतिकारी आदिवासी महिला संगठन) की पूर्व अध्यक्ष शामिल हैं। शासन ने इन पर क्रमशः 8-8 लाख, 3 लाख और 1 लाख रुपये के इनाम घोषित किए थे। माओवादियों की पृष्ठभूमि रीजनल कंपनी नंबर 02 के सदस्य हुंगा तामो और उनकी पत्नी आयती ताती, दोनों पर 8 लाख रुपये का इनाम था। हुंगा तामो 2018 में छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर पुलिस पार्टी पर हमले में शामिल था। वहीं, राजनीतिक टीम सदस्य देवे वंजाम नए कैडर को नक्सली विचारधारा सिखाने का कार्य करती थी, जिस पर 3 लाख रुपये का इनाम था। इनके अलावा, केएएमएस की पूर्व अध्यक्ष माड़वी आयते, जिन पर 1 लाख रुपये का इनाम था, भी आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल थी। माओवादियों ने लोन वर्राटू अभियान और छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर यह निर्णय लिया। नक्सल संगठनों में बढ़ते मतभेद, अमानवीय जीवनशैली, और जंगलों में कठिन जीवन ने इन माओवादियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लौटने पर मजबूर किया। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने अपने भविष्य को समाज में सकारात्मक योगदान देने का संकल्प लिया है। अभियान की अब तक की उपलब्धियां लोन वर्राटू (घर वापस आइए) अभियान और पुनर्वास नीति के तहत अब तक 872 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिसमें 197 इनामी माओवादी शामिल हैं। जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ की मदद से चलाए जा रहे इस अभियान में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई है। पुनर्वास और पुनर्स्थापन आत्मसमर्पित माओवादियों को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 25-25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही, उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण और आवास की सुविधा भी प्रदान की जाएगी ताकि वे समाज में पुनर्वासित होकर एक नई शुरुआत कर सकें। इस सफलता के पीछे जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और बस्तर फाइटर्स का विशेष योगदान रहा है।  

*’मोदी है तो सम्भव है’ पुस्तक का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया विमोचन* *रामेश्वर वैष्णव द्वारा रचित है पुस्तक

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रायपुर, 22 सितंबर 2024/छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार रात रायपुर स्थित निवास कार्यालय में सुप्रसिद्ध साहित्यकार, गीतकार रामेश्वर दास वैष्णव द्वारा रचित पुस्तक ’मोदी है तो सम्भव है’ का विमोचन किया। विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पुस्तक के लेखक रामेश्वर दास वैष्णव को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में प्रत्येक क्षेत्र में ऐतिहासिक काम हुए हैं। साथ ही देश के प्रत्येक वर्ग का सर्वांगीण विकास हुआ है। ऐसे में उन्होंने साहित्यिक रचना हेतु पुस्तक के लेखक को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों को अलग अंदाज में मुक्तकों के द्वारा प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री के प्रेस ऑफिसर आलोक सिंह, सुप्रसिद्ध रंगकर्मी अनिल शर्मा, लेखक विजय मिश्रा ’अमित’, सतीश शर्मा, पत्रकार योगेश मिश्रा, प्रमोद मिश्रा, हेमंत शर्मा उपस्थित रहे।

महामहिम द्रौपदी मुर्मू ने नक्सल पीड़ितों की कहानी उनकी जुबानी सुनी,पीड़ितों ने मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जताया आभार

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  नई दिल्ली, 22 सितंबर 2024 – छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र से 70 लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल आज राष्ट्रपति भवन पहुंचा, जहां उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर अपनी पीड़ा साझा की। बस्तर में दशकों से माओवाद के आतंक का सामना कर रहे ये लोग, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल के तहत अपनी आवाज देश की सर्वोच्च सत्ता तक पहुंचाने में सक्षम हुए। राष्ट्रपति ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को अवगत कराया कि बस्तर के लोग पिछले 40 वर्षों से माओवादी आतंक का शिकार हो रहे हैं।जिनमें से कुछ लोग आपके सामने जीवित बचकर आये हैं।उन्होंने बताया कि माओवादियों के हमलों में हजारों लोग मारे गए हैं और सैकड़ों स्थायी रूप से अपंग हो चुके हैं। बारूदी सुरंगों और बम विस्फोटों ने न केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें गहरा आघात दिया है। उन्होंने बताया कि माओवादी आतंक ने उनके घरों, जमीन और सांस्कृतिक धरोहर को बर्बाद कर दिया है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले ढाई दशकों में 8,000 से अधिक लोग इस हिंसा के शिकार हुए हैं, और आज भी कई लोग नक्सलियों के डर में जी रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के सामने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सराहना करते हुए बताया कि  बस्तर में शांति बहाली और विकास के कई महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री साय की संवेदनशील पहल के तहत बस्तर के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उनकी योजनाओं ने बस्तरवासियों में एक नई उम्मीद का संचार किया है। प्रतिनिधियों ने बताया कि मुख्यमंत्री साय ने न केवल नक्सल उन्मूलन के लिए ठोस कदम उठाए हैं, बल्कि वहां के लोगों को एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर करने के लिए भी काम किया है। उनके नेतृत्व में बस्तर में शांति बहाली और पुनर्निर्माण के लिए गम्भीर प्रयास किए जा रहे हैं। बस्तर शांति समिति के प्रतिनिधियों मंगऊ राम कावड़े और जयराम दास ने राष्ट्रपति से अपील की कि बस्तर को माओवादी आतंक से मुक्त कराने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने बस्तर को फिर से उसकी प्राकृतिक सुंदरता और शांति लौटाने की मांग की। महामहिम द्रौपदी मुर्मू ने प्रतिनिधियों की पीड़ा को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि सरकार बस्तर में शांति और विकास के लिए हरसंभव कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि बस्तरवासियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नक्सलवाद से मुक्ति पाने के लिए  छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री की नई पहल की राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है।यह मुलाकात नक्सल पीड़ितों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है। वहीं,राष्ट्रपति से मिलने का यह अवसर बस्तरवासियों के लिए एक आशा की किरण साबित हो सकता है, जो वर्षों से नक्सली हिंसा के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं।नक्सल प्रभावित लोगों में उम्मीद जागी है,जो आने वाले समय में बस्तर के भविष्य को एक नई दिशा दे सकता है।  

पर्युषण पर्व : जब अश्वरथ में व्रती निकले तो शहर के लोग शामिल होने उमड़ पड़े, जैन धर्म का पर्युषण पर्व पर भव्य रैली निकली

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*जशपुर/कुनकुरी*- पर्युषण पर्व के समापन अवसर पर कुनकुरी में भगवान श्री जी की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई जिसमें अश्वरथ में व्रतियों को बिठाकर जैन मंदिर से निकलकर नगर भ्रमण कराया गया।गाजे-बाजे के साथ निकाली गई शोभा यात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। जिसमें जैन समाज के साथ सभी समाज के लोग शामिल रहे।ऐसा ही नजारा जिला मुख्यालय जशपुर,बगीचा में भी देखने को मिला। पर्युषण पर्व प्रारम्भ से समापन तक सभी दिगम्बर जैन धर्म के लोग 10 दिनों तक भगवान की विशेष पूजा-अर्चना साधना करते है। पर्युषण पर्व का अपना अलग महत्व होता है, इसमें 7 प्रकार के सिद्धांतों का पालन करना पड़ता है। जिसमें सबसे पहले आत्मा को शुद्ध करना होता है. इस दौरान जैन धर्म के लोग व्रत, तपस्या, और ध्यान करते हैं। इसके बाद आत्म-चिंतन और आत्म-समृद्धि की प्रक्रिया की जाती है।फिर पर्युषण पर्व के दौरान जैन धर्म के लोग भविष्य में गलत काम न करने की शपथ लेते हैं। जैनधर्मियों द्वारा पर्यावरण का शोधन किया जाता है।इसके बाद संयम और विवेक का अभ्यास करते हैं। माना जाता है कि सालभर के सांसारिक क्रिया-कलापों के कारण जीवन में जो भी दोष आ जाते हैं, उन्हें यह पर्व दूर करता है. इस पर्व के दौरान सभी जैन धर्म के सिद्धांतों का पालन करने का प्रयास करते हैं. जैन समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष गजेंद्र जैन ने बताया कि पर्यूषण पर्व पर कई जैन अनुयायी अपनी क्षमता के अनुसार कठिन तपस्या करते हैं. इस दौरान कुछ श्रद्धालु 10 दिनों तक निर्जला व्रत करते हैं, जिसमें बिना अन्न, जल या फल का सेवन किए उपवास रखा जाता है। दिगंबर जैन समाज के इस पर्व में कुनकुरी में 6 जैनधर्मी महिला, पुरुष और युवाओं ने उपवास कर तपस्या की है। यह उपवास आत्म शुद्धि और आत्म कल्याण के उद्देश्य से किए जाते हैं, जिसमें शरीर और आत्मा को शुद्ध करने का प्रयास किया जाता है।