*मोर आवास, मोर अधिकार: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हितग्राहियों को गृहप्रवेश पर दी शुभकामनाएं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बधाई देते हुए उन्हें ‘भारत का भगवान विश्वकर्मा’ बताया

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  रायपुर, 17 सितम्बर 2024 – प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण और शहरी) के तहत छत्तीसगढ़ में हजारों लोगों का सपना आज साकार हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘मोर आवास, मोर अधिकार’ कार्यक्रम के तहत 8 लाख 46 हजार 932 ग्रामीण और 23 हजार 71 शहरी हितग्राहियों को बधाई दी। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने नए घरों के लाभार्थियों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर भी शुभकामनाएं दीं और उनके दीर्घायु जीवन की कामना की, उन्हें आधुनिक भारत का विश्वकर्मा बताया। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष श्री रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, श्री दयाल दास बघेल और मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े उपस्थित थे। इस अवसर पर श्री साय ने योजना की तकनीकी मार्गदर्शिका का विमोचन किया और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जारी इस महत्वाकांक्षी योजना को जनहित के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। मुख्यमंत्री साय ने कहा, “आज छत्तीसगढ़ के हजारों परिवारों का घर का सपना पूरा हो रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उड़ीसा से इस योजना की पहली किश्त जारी की है, जिससे हितग्राहियों का गृहप्रवेश समारोह भी संभव हुआ। विश्वकर्मा जयंती के इस पावन अवसर पर मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं।” इस कार्यक्रम से छत्तीसगढ़ के हजारों लाभार्थी अब अपने नए घरों में प्रवेश कर रहे हैं, जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने हैं।  

*विश्वकर्मा जयंती पर राज्य स्तरीय ‘श्रमिक सम्मेलन‘ का होगा आयोजन* *मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 57 हजार श्रमिकों को 49.43 करोड़ राशि का डी.बी.टी. के माध्यम से करेंगे वितरण

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  रायपुर, 16 सितंबर 2024/ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश के श्रमिकों के हित में अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। जिसका सीधा लाभ श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों को मिल रहा है। उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन ने बताया कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय 17 सितंबर विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर ‘श्रमिक सम्मेलन‘ में 57 हजार से अधिक पंजीकृत श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों को 49 करोड़ 43 लाख 52 हजार 294 रूपए केन्द्रीकृत डी.बी.टी. के माध्यम से वितरण करेंगे। यह कार्यक्रम राजधानी रायपुर के इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालयपरिसर जोरा के कृषि मंडप मे आयोजित होगा। श्रम विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि प्रदेश के पंजीकृत श्रमिकांे एवं उनके परिवार के सदस्यों को श्रम विभाग के अधीन छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सर्न्न्मिाण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत 47 हजार 726 निर्माण श्रमिकों 38 करोड़ 37 लाख 10 हजार 652 रूपए, छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल अंतर्गत 6873 श्रमिकों को 9 करोड़ 86 लाख 58 हजार 500 रूपए एवं छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल अंतर्गत 2496 श्रमिकों को 1 करोड़ 19 लाख 83 हजार 142 रूपए की राशि डी.बी.टी. के जरिए वितरण करेंगे। इस तरह कुल 57 हजार 95 श्रमिकों को कुल राशि 49 करोड़ 43 लाख 5 हजार 229 रूपये का वितरण केन्द्रीयकृत डी.बी.टी. के माध्यम से किया जाएगा। श्रम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत 47 हजार 726 लाभार्थियों को कुल 38 करोड़ 37 लाख 10 हजार 652 रूपए का वितरण किया जाएगा। जिसमें मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत 5793 लाभार्थियों को 11 करोड़ 58 लाख 60 हजार रूपए, मुख्यमंत्री सायकल सहायता योजना के अंतर्गत 8181 लाभार्थियों को 3 करोड़ 3 लाख 8 हजार 652 रूपए, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना के अंतर्गत 6171 लाभार्थियों को 2 करोड़ 15 लाख 34 हजार 288 रूपए, मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के अंतर्गत 125 लाभार्थियों को 9 लाख 79 हजार 600 रूपए, मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 9749 लाभार्थियों को 1 करोड़ 84 लाख 87 हजार रूपए, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत 576 लाभार्थियों को 73 लाख 67 हजार 612 रूपए, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक दीर्घायु सहायता योजना के अंतर्गत 5 लाभार्थियों को 1 लाख रूपए, मुख्यमंत्री निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना के अंतर्गत 3653 लाभार्थियों को 54 लाख 79 हजार 500 रूपए, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत 279 लाभार्थियों को 2 करोड़ 83 लाख रूपए, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के अंतर्गत 6517 लाभार्थियों को 13 करोड़ 3 लाख 40 हजार रूपए, मुख्यमंत्री श्रमिक सियान सहायता योजना अंतर्गत 708 लाभार्थियों को 1 करोड़ 41 लाख 60 हजार रूपए, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक कॉपी सहायता राशि भुगतान योजना के अंतर्गत 5941 लाभार्थियों को 79 लाख 94 हजार रूपए, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के अंतर्गत 28 लाभार्थियों को 28 लाख रूपए का डी.बी.टी. के माध्यम से वितरण करेंगे। इसी तरह छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत 6873 लाभार्थियों को कुल 9 करोड़ 86 लाख 58 हजार 500 रूपए का वितरण किया जाएगा। जिसमें असंगठित कर्मकार महतारी जतन योजना के 3085 लाभार्थियों को 6 करोड़ 17 लाख रूपए, असंगठित कर्मकार मृत्य एवं दिव्यांग सहायता योजना के 322 लाभार्थियों को 3 करोड़ 22 लाख रूपए, असंगठित कर्मकार छात्रवृत्ति योजना के 3463 लाभार्थियों को 46 लाख 8 हजार 500 रूपए, ई-रिक्शा सहायता योजना के 3 लाभार्थियों को 1 लाख 50 हजार रूपए का वितरण करेंगे। छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अंतर्गत 2496 लाभार्थियों को 1 करोड़ 19 लाख 83 हजार 142 रूपए का वितरण करेंगे। जिसमें शैक्षणिक छात्रवृत्ति योजना के 504 लाभार्थियों को 22 लाख 42 हजार रूपए, निःशुल्क सायकल वितरण योजना के 1427 लाभार्थियों को 52 लाख 17 हजार 342 रूपए, निःशुल्क सिलाई मशीन वितरण योजना के 562 लाभार्थियों को 44 लाख 38 हजार 800 रूपए एवं खेलकूद प्रोत्साहन योजना के 3 लाभार्थियों को 85 हजार रूपए का वितरण केन्द्रीयकृत डी.बी.टी. के माध्यम से किया जाएगा।

*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विभागों की समीक्षा की,कलेक्टर-एसपी कांफ्रेंस का आज पहला दिन, सीएम की दो टूक : सुशासन लाने के लिए तत्परता से काम करें अधिकारी*

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रायपुर, 12 सितंबर 2024– मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज कलेक्टर्स कांफ्रेंस में नगरीय प्रशासन, खाद्य, सहकारिता, सुशासन एवं अभिसरण विभाग, सामान्य प्रशासन, और उच्च शिक्षा विभागों के कार्यों की समीक्षा की। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय और निर्देश दिए गए, जिनका उद्देश्य प्रदेश के समग्र विकास और सुशासन को मजबूत करना है। नगरीय प्रशासन विभाग की समीक्षा मुख्यमंत्री ने नगरीय प्रशासन के तहत जनसमस्या निवारण पखवाड़े में प्राप्त आवेदनों के शत प्रतिशत निराकरण पर जोर दिया। उन्होंने शहरों में प्रधानमंत्री आवास योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए कलेक्टरों की सराहना की और कहा कि गरीब परिवारों को आवास दिलाना सरकार का अहम लक्ष्य है। साथ ही, अमृत मिशन 2.0 योजना को समय पर पूरा करने के निर्देश भी दिए। खाद्य विभाग की समीक्षा खाद्य विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने राशन कार्ड नवीनीकरण की प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी पात्र हितग्राहियों का राशन कार्ड बने और ग्रामीणों को सुगमता से राशन मिले। सहकारिता विभाग की समीक्षा मुख्यमंत्री ने गोदाम निर्माण कार्यों को समय पर पूर्ण करने का आदेश दिया। साथ ही, पैक्स में माइक्रो एटीएम और कंप्यूटरीकरण का काम शीघ्र पूरा करने पर जोर दिया। सुशासन और सामान्य प्रशासन विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने भूमिहीन परिवारों को जाति प्रमाण पत्र मिलने में होने वाली परेशानी को प्राथमिकता से हल करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने जरूरतमंदों को 15 दिनों के भीतर स्वेच्छानुदान की राशि स्वीकृत करने पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि “भूमिहीनों की पीड़ा मेरा व्यक्तिगत अनुभव है।हमें उनकी परेशानियों को समझना होगा और दूर करना होगा।” उच्च शिक्षा पर जोर मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि शिक्षित युवा ही विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला हैं। उन्होंने युवाओं के कौशल विकास और रोजगार सृजन के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

*अशांति में राह दिखाता धर्म: बांग्लादेश के राजनीतिक आंदोलन में इसकी भूमिका*

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समसामयिक : निर्मल कुमार किसी भी बड़े पैमाने पर हिंसा का सबसे बड़ा शिकार हमेशा समाज की विविधता और एकता होती है। बांग्लादेश, जो एक बहुधार्मिक देश है, जहां हिंदू एक महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक समुदाय हैं, अक्सर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय बनता है। कुछ लोगों का मानना है कि ये विरोध इस्लाम के नाम पर हुए और इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमला करने के लिए लोगों को उकसाया। रिपोर्टों में कहा गया कि हिंदू धार्मिक स्थलों, घरों और महिलाओं पर हमले हुए। चूंकि इस्लाम बांग्लादेश का बहुसंख्यक धर्म है, इसे आंदोलन की एक बड़ी प्रेरक शक्ति बताया गया। हालांकि, यह जरूरी है कि हम इन विरोध प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों के आचरण और इस्लाम की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की बात समझें। इस्लाम की शिक्षाएं साफ तौर पर कहती हैं कि अल्पसंख्यकों के जीवन और संपत्ति की रक्षा होनी चाहिए, चाहे युद्ध का समय हो या शांति का। इसलिए, इन हिंसक विरोधों के दौरान, सरकार और प्रदर्शनकारियों दोनों को उचित आचरण करना चाहिए। विरोध आंदोलनों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे समाज में साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखें, नहीं तो उन्हें अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। बांग्लादेश में, विरोध आंदोलन ने जल्द ही अपने लक्ष्यों को पूरा किया और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी। मीडिया ने कुछ हिंसा की घटनाओं की जानकारी दी, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि कई स्थानीय मुसलमान, उलेमा, मदरसा छात्र और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिंदू घरों और मंदिरों की रक्षा के लिए पहल की। धार्मिक संगठनों ने भी लोगों से अपील की कि यह आंदोलन किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि भ्रष्ट राजनीतिक नेताओं के खिलाफ है, इसलिए सबको मिलकर साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखना चाहिए। ऐसे समय में, बांग्लादेशी मुसलमानों का धार्मिक कर्तव्य है कि वे हिंदुओं के जीवन और संपत्ति की रक्षा के लिए आगे आएं। सरकार, प्रशासन और आंदोलन के नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखें, क्योंकि इस्लाम अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का हुक्म देता है। इसे नियम और कानून का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। धार्मिक नेताओं को मस्जिदों से इस बात की घोषणा करनी चाहिए कि स्थानीय स्तर पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रयास किए जाएं। बांग्लादेश में छात्रों द्वारा शुरू किए गए इस आंदोलन ने देश में बदलाव की मांग और गहरे असंतोष को उजागर किया है। राजनीतिक गड़बड़ी, भ्रष्टाचार और आर्थिक समस्याओं ने इस आंदोलन को हवा दी है, लेकिन यह आंदोलन यह भी दिखाता है कि एक बहुधार्मिक समाज में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा और साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखना कितना जरूरी है। जैसे-जैसे आंदोलन आगे बढ़ता है, यह जरूरी है कि सरकार और प्रदर्शनकारी न्याय और अहिंसा के रास्ते पर चलें, ताकि राजनीतिक सुधार की कोशिशें समाज में और विभाजन या हिंसा न पैदा करें। इस्लाम की शिक्षाएं और सभी नागरिकों की नैतिक जिम्मेदारियां हमें यह याद दिलाती हैं कि हमें अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और इस आंदोलन का असली मकसद भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना और सभी के लिए एक बेहतर समाज बनाना है। बांग्लादेश को एक ऐसा भविष्य चाहिए जहां सभी समुदाय एक साथ मिलकर आगे बढ़ सकें। (लेखक आर्थिक व सामाजिक मामलों के जानकार हैं।समसायिक विषयों पर उनके लेख विभिन्न संचार माध्यमों में प्रकाशित होते हैं।यह लेखक के निजी विचार हैं।)

**देवघर: सावन पूर्णिमा पर रक्षाबंधन और श्रावणी मेला का अंतिम दिन, भक्तों ने बाबा बैजनाथ धाम में अर्पित किया जल**

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देवघर, झारखंड – सावन पूर्णिमा के अवसर पर आज रक्षाबंधन और श्रावणी मेला का अंतिम दिन भी एक साथ आया, जिससे भक्तों के बीच धार्मिक उत्साह और भी बढ़ गया। आज देवघर के प्रसिद्ध बैजनाथ धाम मंदिर में पांचवीं और अंतिम सोमवारी के दिन, सुबह से ही जल अर्पण के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। परंपरा के अनुसार, तीर्थ पुरोहितों ने सरकारी पूजा के बाद बाबा भोलेनाथ के शिवलिंग पर रक्षा सूत्र अर्पित किया। इसके पश्चात आम श्रद्धालुओं के लिए जल अर्पण की प्रक्रिया शुरू की गई। इस बार सावन मास में पांच सोमवारी का अद्वितीय संयोग बना, जिसे धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान पांचवीं सोमवारी के दिन शंख की उत्पत्ति हुई थी, जो शिव भक्तों को सुख और समृद्धि प्रदान करता है। इस बार सावन में चंद्र और सूर्य मास के अनुसार पांच सोमवारी का संयोग भी मिला, जो बेहद दुर्लभ होता है। आज बाबा बैजनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, क्योंकि रक्षाबंधन के पर्व के कारण अधिकांश श्रद्धालु कांवड़ यात्रा के लिए नहीं पहुंच सके। हालांकि, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ शिव भक्तों को जल अर्पण कराया जा रहा है। कल से भादो मेला की शुरुआत भी हो जाएगी। लंबोदर पंडा बाबा ने इसे बहुत बड़ा संयोग बताते हुए कहा कि यह धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का संचार करेगा। श्रावणी मेला के समापन के साथ ही देवघर में शिव भक्तों की आस्था और श्रद्धा का यह पर्व समाप्त हो रहा है, लेकिन भादो मेला की शुरुआत के साथ ही बाबा बैजनाथ धाम में भक्तों की भक्ति का सिलसिला निरंतर जारी रहेगा।

भारत और ईरान का चाबाहार पोर्ट,रणनीतिक साझेदारी से किसको कितना फ़ायदा ?

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भारत और इस्लामिक गणराज्य ईरान के बीच शाहिद बेहेशती पोर्ट, चाबाहार के विकास और संचालन के लिए हाल ही में अंतिम रूप दिए गए 10-वर्षीय समझौते से संकेत मिलता है कि दोनों देश एक सहयोगी रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। चाबाहार पोर्ट दक्षिण-पूर्वी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में ओमान की खाड़ी पर स्थित है। इसमें दो अलग-अलग पोर्ट शामिल हैं: शाहिद कलंतरी और शाहिद बेहेशती। भारत ने शाहिद बेहेशती में एक टर्मिनल का प्रबंधन करने की जिम्मेदारी ली है। ईरान के रणनीतिक चाबाहार पोर्ट के विकास और प्रबंधन की जिम्मेदारी लेना भारत को पश्चिम एशिया क्षेत्र में एक जिम्मेदार साझेदार और मुख्यधारा के खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है। यह क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक गहराई को भी दर्शाता है। अनजान लोगों के लिए, चाबाहार पोर्ट भारत के लिए अफगानिस्तान, मध्य एशियाई देशों और यूरोप के साथ व्यापार संबंध स्थापित करने का एक पारगमन बिंदु के रूप में कार्य करता है, जबकि पाकिस्तान के पोर्ट्स, विशेषकर ग्वादर पर लाभ प्रदान करता है, यह ध्यान में रखते हुए कि पाकिस्तान भारत का कट्टर प्रतिद्वंद्वी है। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं, जिसने स्वस्थ व्यापार और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा दिया है। भारत ने हमेशा मध्य एशिया, काकेशस और रूस के साथ भूमि और समुद्री संपर्क के लिए ईरान पर निर्भर किया है, जो यूरोप तक विस्तारित होता है। पोर्ट विकास परियोजना की योजना पहली बार 2003 में बनाई गई थी, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों और तेहरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के कारण कई वर्षों तक विलंबित रही। 2015 में, भारत ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान परमाणु समझौते के कारण प्रतिबंधों को शिथिल किया, जिससे भारत को ईरान के साथ व्यापार संबंधों का विस्तार करने में सक्षम बनाया गया। 2016 में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान यात्रा के दौरान परियोजना पर काम शुरू हुआ। 2018 में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा परमाणु समझौते को अचानक समाप्त करने और ईरान पर प्रतिबंधों को पुनः लागू करने से तेहरान के साथ भारत के चल रहे सहयोग पर अनिश्चितता पैदा हो गई। हालांकि, भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट हासिल की, जिससे वह अस्थायी रूप से पोर्ट का संचालन जारी रखने में सक्षम हो गया। सोमवार को हस्ताक्षरित समझौते के तहत, भारत ने टर्मिनल के लिए आवश्यक उपकरणों में $120 मिलियन का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके अतिरिक्त, संबंधित पोर्ट परियोजनाओं के लिए $250 मिलियन के ऋण सुविधा के शामिल होने के साथ अनुबंध का कुल मूल्य $370 मिलियन हो गया है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय व्यापार $2.33 बिलियन तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21.76% की वृद्धि दिखाता है। भारत का ईरान को निर्यात $1.66 बिलियन था, जिसमें 14.34% की वृद्धि दर थी जबकि भारत का ईरान से आयात $672.12 मिलियन तक पहुंच गया, जिसमें सालाना 45.05% की वृद्धि दर थी। चाबाहार पोर्ट का महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक और महत्व है। यह भारत को अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (NSTC) से जोड़ता है, जो ईरान, अजरबैजान और रूस के माध्यम से यूरोप तक एक वाणिज्यिक मार्ग स्थापित करता है। एक पूरी तरह से परिचालित NSTC महाद्वीपीय व्यापार में शामिल समय और खर्च दोनों को कम करता है और इसे स्वेज नहर मार्ग के विकल्प के रूप में देखा जाता है। चाबाहार पोर्ट ग्वादर पोर्ट से लगभग 200 किमी दूर स्थित है, जिसे चीन द्वारा उसके बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के हिस्से के रूप में नियंत्रित किया जाता है। यह निकटता चाबाहार को भारत के लिए विशेष रूप से अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। पोर्ट का विकास भारत-ईरान संबंधों को मजबूत कर सकता है, जो चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सहयोग का प्रतिकार कर सकता है। इस बीच, चीन ईरान में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है, महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों और रणनीतिक शिपिंग लेन को सुरक्षित करने के उद्देश्य से। ईरान के लिए, यह नई कूटनीतिक और आर्थिक गठबंधनों के द्वार खोलता है, विशेष रूप से पश्चिमी हलकों में इसके अलग-थलग स्थिति को देखते हुए। पोर्ट के विकास के माध्यम से भारत के साथ संबंधों को मजबूत करके, ईरान क्षेत्र में चीन के प्रभाव का मुकाबला कर सकता है। यह साझेदारी ईरान को वैकल्पिक आर्थिक अवसर प्रदान कर सकती है, पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण उसकी कमजोरी और आर्थिक स्थिरता को कम कर सकती है। ईरान और भारत के बीच संबंधों में सुधार क्षेत्रीय विभाजन को पाटने में भी मदद कर सकता है, अधिक समझ और सहयोग को बढ़ावा दे सकता है, क्षेत्रीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा दे सकता है, और जन-जन संपर्क को प्रोत्साहित कर सकता है। पोर्ट से जुड़े भूमि मार्ग अफगानिस्तान और मध्य एशिया के बाजारों की पहुंच को काफी हद तक बढ़ाने के लिए तैयार हैं। बढ़ते अंतर-संबंधों का अफगानिस्तान की तेजी से आर्थिक वृद्धि और विश्वव्यापी स्वीकृति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है। अफगानिस्तान मुख्य रूप से पाकिस्तान से गुजरने वाली वाणिज्यिक लाइनों पर निर्भर है; हालांकि, चाबाहार पोर्ट एक व्यवहार्य वैकल्पिक विकल्प प्रदान करता है। चाबाहार अफगानिस्तान की आर्थिक वृद्धि और भारत से निवेश को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा दे सकता है। अफगानिस्तान भारत की भागीदारी के लिए उत्सुक है, और तालिबान सरकार ने भारत को नए आर्थिक परियोजनाएँ शुरू करने के लिए आमंत्रित किया है। इससे अफगानिस्तान के व्यापार और वाणिज्यिक मार्गों में विविधता आएगी, जिससे उसकी पाकिस्तान पर निर्भरता कम होगी। चाबाहार पोर्ट का विकास क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देकर पड़ोसी देशों के बीच सहयोग और कनेक्टिविटी को बढ़ावा दे सकता है। पाकिस्तान और चीन जैसे प्रतिकूल पक्षों द्वारा उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, चाबाहार पोर्ट के बुनियादी ढांचे और रसद में निवेश करने से अफगानिस्तान और समग्र रूप से मध्य एशिया के लिए अधिक समृद्ध भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

C.A.A. पर भारत में चर्चाओं की ढेर से यह सच निकलकर आया सामने,मुसलमानों का डर कितना सही कितना गलत,,,पढ़िए ‘जनपक्ष’ की यह विशेष रिपोर्ट

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(जनपक्ष : सेंट्रल डेस्क) भारत में CAA इन दिनों खूब चर्चा में है।इस नए नागरिकता कानून को लेकर कई भ्रांतियां भी पैदा हो गई हैं।जिन्हें देखते हुए ‘जनपक्ष’ ने इस मुद्दे पर अध्ययनशील बुद्धिजीवियों से बात की।बातों से जो प्रतिक्रियाएं,जो प्रश्न निकल कर लोगों के जेहन में तेजी से घूम रही हैं उनका प्रतिवाद या कहें जवाब यूँ मिला है। प्रतिक्रिया संख्या एक  सीएए विभाजनकारी है, मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने के लिए है, भेदभाव करता है क्योंकि नागरिकता धर्म पर आधारित है। यह श्रीलंकाई तमिलों के खिलाफ है और ध्रुवीकरण तथा समुदायों के बीच मनमुटाव पैदा करने का एक प्रयास है। काउंटर सीएए मुसलमानों के खिलाफ नहीं है। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) 2019 एक ऐसा कानून है जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धर्म के आधार पर उत्पीड़न से भागकर आए अल्पसंख्यकों की दुर्दशा को संबोधित करता है। सीएए का उद्देश्य इन उत्पीड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को शीघ्रता से नागरिकता प्रदान करना है। सीएए भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने का उल्लंघन नहीं करता है और न ही यह किसी भारतीय नागरिक के नागरिकता अधिकार को प्रभावित करता है। यह दावा कि सीएए किसी विशेष समुदाय के खिलाफ है, निराधार है। यह नागरिकता देने का कानून है, किसी की नागरिकता छीनने का नहीं। भारत में मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अनुसार, दुनिया के किसी भी देश से किसी भी धर्म का कोई भी व्यक्ति कानूनी रूप से भारत की यात्रा/प्रवास कर सकता है । इसके अलावा 1955 अधिनियम की तीसरी अनुसूची या धारा 5 के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 6 में उल्लिखित शर्तों को पूरा करने पर भारतीय नागरिक भी बन सकता है। सीएए को किसी ख़ास वजह से जान बूझ कर रमज़ान महीने की शुरुआत में लागू किया गया ऐसा बिलकुल भी नहीं है। यह केवल पड़ोसी देशों के विभिन्न अन्य उत्पीड़ित समुदायों को नागरिकता देने से संबंधित है जिसके लिए प्रक्रिया काफी समय से चल रही थी। इस संबंध में भारतीय मुसलमान किसी भी तरह से प्रभावित नहीं हैं। जहां तक बात है श्रीलंकाई तमिलियों की तो सीएए दुनिया भर के मुद्दों का सर्वव्यापी समाधान नहीं है और भारतीय संसद से दुनिया के विभिन्न देशों में होने वाले संभावित उत्पीड़न पर कार्यवाही करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। जहां तक श्रीलंका का सवाल है, केंद्र सरकार ने उक्त विषय को अलग से और स्वतंत्र रूप से निपटाया है, जिसकी संबंधित मुद्दे से कोई तुलना नहीं है। भारत सरकार हमेशा एक विशिष्ट समस्या के समाधान के लिए काम करती रही है। 1947 के बाद से भारत सरकार ने अलग-अलग समय पर, सभी दलों की अलग-अलग सरकारों ने श्रीलंकाई नागरिकों को नागरिकता प्रदान की है। ऐसे 4 लाख 61 हजार लोगों को नागरिकता दी गई. उन श्रीलंकाई शरणार्थियों में से दो लाख 16 हजार शरणार्थी वापिस श्री लंका भी लौट गये। जब भी उत्पीड़ित शरणार्थियों ने भारत में सुरक्षित शरण के लिए आह्वान किया है, भारत ने हमेशा उनके लिए अपनी बाहें खोल दी हैं। भारत धर्मनिरपेक्ष लोकाचार और समानता में विश्वास करता है, और संविधान विभिन्न धर्मों का पालन करने वाले लोगों को धर्म की स्वतंत्रता की अनुमति देता है। इसके अलावा, ऐसे 50 देश हैं जिनका मोटे तौर पर राज्य धर्म इस्लाम है और उनमें से 11 शरिया कानूनों का पालन करते हैं जो धर्मनिरपेक्षता के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है। “धर्म की स्वतंत्रता” के किसी भी सिद्धांत का उल्लंघन करने के बजाय सीएए वर्गीकृत समुदायों की “धर्म की स्वतंत्रता” की रक्षा करना चाहता है, जिन्हें विशेष पड़ोसी देशों में अपने संबंधित धर्मों को व्यक्त करने और अभ्यास करने के लिए सताया गया है। संविधान के अनुच्छेद 14 द्वारा गारंटीकृत कानूनों की समान सुरक्षा का मतलब यह नहीं है कि सभी कानून चरित्र में सामान्य और लागू होने में सार्वभौमिक होने चाहिए और राज्य के पास अब कानून के प्रयोजनों के लिए व्यक्तियों या चीजों को अलग करने और वर्गीकृत करने की शक्ति नहीं है। नागरिकता के लिए आवश्यक आवश्यकताओं को सुरक्षित करने के लिए वर्गीकरण के लिए कानून बनाने का अधिकार संसद को वैध रूप से है। असंख्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, अपने अनुभव से समृद्ध और लोगों की इच्छा से मजबूत होकर, विधायिका को अपने ज्ञान का प्रयोग करने में काफी स्वतंत्रता प्राप्त है। किसी विशेष वस्तु या उद्देश्य की प्राप्ति के लिए बनाए गए कानून को सर्वमान्य होने की आवश्यकता नहीं है। विधायिका यह निर्धारित कर सकती है कि इस तरह के कानून के दायरे में वह किन श्रेणियों को शामिल करेगी और केवल इसलिए कि कुछ श्रेणियां उसी स्तर पर खड़े होने का दावा करती हैं, जो कानून में शामिल नहीं हैं, वही कानून को प्रस्तुत नहीं करेगा जो कि किया गया है। किसी भी तरह से भेदभावपूर्ण या अधिकारातीत तरीके से अधिनियमित किया गया सीएए की अधिसूचना कई हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद की गई थी। 2020 में अधिनियम पारित होने के बाद से यह प्रक्रिया जारी थी। महात्मा गांधी ने 26 सितंबर, 1947 को एक प्रार्थना सभा में घोषणा की थी कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू और सिख यदि वहां नहीं रहना चाहते हैं, तो उन्हें भारत लौट आना चाहिए और उन्हें स्वीकार करना भारत सरकार का कर्तव्य है। उन्हें रोजगार, मतदान का अधिकार देना और खुशहाल बनाना भी भारत सरकार का पहला कर्तव्य है।   यह नागरिकता देने का कानून है, नागरिकता छीनने का नहीं। यह अधिनियम पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करता है। अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी भी भारतीय नागरिक, विशेषकर मुसलमानों को प्रभावित करता हो। मुस्लिम समुदाय देश का अभिन्न अंग है और सीएए उनकी नागरिकता पर बिल्कुल भी प्रभाव नहीं डालता है। वे भारत के नागरिक बने रहेंगे. ध्रुवीकरण के लिए निहित दलों द्वारा अधिनियम के संबंध में गलत सूचना फैलाई जा रही है। यह धर्मनिरपेक्षता के पोषित सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं करता है। उत्तरपूर्वी राज्यों में प्रतिक्रियाएं संख्या दो CAA असम समझौते के खिलाफ है। सीएए असम के स्वदेशी समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। सीएए से उनकी संवैधानिक, राजनीतिक, भाषाई, सांस्कृतिक और पहचान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।CAA से बांग्लादेश से आए करीब 15-20 लाख लोगों को असम में नागरिकता मिलेगी। सीएए हिंदू बांग्लादेशियों के लिए असम में प्रवेश … Read more

मेरठ से भाजपा की टिकट पर कुमार विश्वास लड़ेंगे चुनाव!, इस तारीख को होगा खुलासा…

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नई दिल्ली। गाहे-बगाहे कुमार विश्वास के भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने की खबर उड़ती रहती है, लेकिन अबकी बार यह कुछ पुष्ट मानी जा रही है. भाजपा ने उत्तर प्रदेश की चार सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है. माना जा रहा है कि इनमें से मेरठ सीट से कुमार विश्वास को उतारा जा सकता है. इस बात का खुलासा 20-21 मार्च को प्रत्याशियों की घोषणा के साथ होगा.  नई दिल्ली में सोमवार देर शाम भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, केशव मौर्य समेत पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी शामिल हुए. बैठक में पहले और दूसरे चरण के मेरठ, सहारनपुर, गाजियाबाद और मुरादाबाद के प्रत्याशियों के नामों पर विचार किया गया. मेरठ से कवि कुमार विश्वास के नाम पर चर्चा होने की बात कही जा रही है. भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि कुमार विश्वास, अरुण गोविल, सांसद राजेन्द्र अग्रवाल, विधायक अमित अग्रवाल, वरिष्ठ नेता सुनील भराला समेत कई नामों पर चर्चा हुई. फाइनल मुहर केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में लगने के बाद प्रत्याशियों के नाम का ऐलान किया जा सकेगा. पार्टी जातिगत समीकरण को लेकर संशय में है. वैश्य, ब्राह्मण, ठाकुर के समीकरण को विशेष तौर पर ध्यान में रखकर विचार कर रही है.

अंतरिक्ष में खाना खाने का मौका दे रही यह कंपनी, खर्च मात्रा….

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Space Restaurant : एक लग्जरी अंतरिक्ष यात्रा कंपनी स्पेसवीआईपी (SpaceVIP) अंतरिक्ष में एक रेस्टोरेंट बनाने की पूरी तैयारी कर चुकी है. कंपनी ने 6 घंटे की हाई-टेक स्पेस बैलून यात्रा के साथ दो-मिशेलिन-सितारा रेस्टोरेंट में लग्जरी भोजन प्रदान करने की योजना बनाई है और इसके लिए डेनिश शेफ रासमस मंक को काम पर रखा है. 2025 में लॉन्च होने वाली इस असाधारण यात्रा की कीमत लगभग 4 करोड़ रुपये प्रति व्यक्ति है, फिर भी कई लोग इसमें रुचि दिखा रहे हैं. एक बार में 6 लोग उठा सकते हैं इस अनोखे रेस्टोरेंट का लुत्फरासमस ने बताया कि इस अनोखे रेस्टोरेंट का लुत्फ एक बार में 6 लोग उठा सकते हैं और खाना खाते हुए सूरज की किरणों को पृथ्वी पर पड़ते हुए देख सकते हैं. इसके साथ ही उन्हें वाई-फाई के साथ अपने परिजनों और दोस्तों के साथ लाइव-स्ट्रीम करने की अनुमति भी मिलेगी. शेफ ने बताया कि अभी तक उनका मेन्यू पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है, लेकिन व्यंजन यात्रा की तरह ही अनूठे होंगे. दर्जनों लोगों ने दिखाई यात्रा में दिलचस्पी कंपनी के संस्थापक रोमन चिपोरुखा ने कहा, “पहले से ही दर्जनों प्रतिभागियों ने इस अनोखे अनुभव को पाने में जबरदस्त रुचि व्यक्त की है, लेकिन अभी हमारे पास केवल 6 सीटें मौजूद हैं और हमें उम्मीद है कि आगे हम कई यात्रियों को यह अनुभव प्रदान कर सकेंगे. “कंपनी के एक अधिकारिक बयान के मुताबिक, स्पेस पर्सपेक्टिव द्वारा निर्मित इस स्पेस बैलून को किसी प्रशिक्षण या विशेष गेयर की आवश्यकता नहीं है.

Dantewada Encounter: दंतेवाड़ा में पुलिस और नक्सली मुठभेड़ में 2 माओवादी ढेर, हथियार भी बरामद

दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले से बड़ी खबर सामने आई है। बता दें, दंतेवाड़ा-बीजापुर के सीमावर्ती इलाके में हुए मुठभेड़ में 2 नक्सलियों के मारे जाने की खबर है। साथ ही हथियार भी बरामद किया गया है, साथ ही मुठभेड़ में अन्य कई नक्सलियों के घायल होने की आशंका है। जवानों ने नक्सली का शव बरामद किया और शिनाख्त करने की कोशिश की जा रही है। मुठभेड़ में कई नक्सलियों के घायल होने की आशंका है, घटनास्थल के आसपास सघन सर्चिंग जारी है। बीजापुर दंतेवाड़ा सीमावर्ती इलाके में मुठभेड़ के दौरान कई नक्सलियों के घायल होने की संभावना पुलिस ने जताई है। दंतेवाड़ा पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि, “18 मार्च को दंतेवाड़ा और बीजापुर के सीमावर्ती क्षेत्र में किरंदुल थाना क्षेत्र के पुरंगेल गमपुर के जंगल में सशस्त्र नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी, जिसके बाद संयुक्त टीम नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी।” डीएसपी कृष्ण कुमार चंद्राकर ने बताया कि, “यह मुठभेड़ बीजापुर बॉर्डर के पास किरंदुल थाना क्षेत्र के पुरंगेल-गमपुर के जंगलों में हुई है। सुरक्षाबलों ने मारे गए नक्सलियों के पास से दो घातक हथियार और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किए हैं। फिलहाल, घटना स्थल के आस-पास सघन सर्चिंग चल रही है।” जानकारी के लिए बता दें कि, दंतेवाड़ा-बीजापुर के सीमावर्ती क्षेत्र में थाना किरंदुल क्षेत्रान्तर्गत पुरंगेल गमपुर के जंगल में सशस्त्र माओवादियों की उपस्थिति की सूचना मिली थी, जिसके बाद डीआरजी (DRG) एवं बस्तर फाइटर्स (BFR) दंतेवाड़ा औऱ सीआरपीएफ (CRPF) 111, 230, 231 बटालियन की यंग प्लाटून की संयुक्त टीम नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी। इसी दौरान थाना किरंदुल क्षेत्रान्तर्गत पुरंगेल, गमपुर के जंगल में पुलिस और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई।