कलेक्टर और एसपी ने किया हैलीपैड और मयाली नेचर कैंप का निरीक्षण,80 से ज्यादा वीवीआइपी,वीआईपी के साथ सीएम 21को करेंगे बैठक

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जशपुर, 14 अक्टूबर 2024 / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आगामी 21 अक्टूबर को जशपुर में होने वाली सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में शामिल होंगे। इस बैठक की तैयारियों का जायजा लेने के लिए कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल और पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने कुनकुरी विकासखंड के मयाली नेचर कैंप, टापू और हैलीपैड का निरीक्षण किया। कलेक्टर ने हैलीपैड पर सुरक्षा व्यवस्था, स्थल की लाइटिंग और बिजली आपूर्ति की तैयारी की समीक्षा की। साथ ही, बैठक स्थल को फूलों से सजाने और डोम तैयार करने के निर्देश दिए। मयाली नेचर कैंप की झील में बोटिंग के लिए नाव की व्यवस्था करने को भी कहा गया है। भोजन व्यवस्था के लिए तीन अलग-अलग पंडाल बनाने के निर्देश दिए, ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने गाड़ियों की पार्किंग, प्रवेश द्वार और अन्य व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर प्रदीप कुमार साहू, कुनकुरी एसडीएम नंदजी पांडे व अन्य जिला स्तरीय अधिकारी भी उपस्थित थे।  

खबर का असर : सरकारी शिक्षक ने भाजपा की सदस्यता लेने की ख़बर पर रखा अपना पक्ष, खबर जनपक्ष को व्हाट्सएप पर भेजी चिट्ठी

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जशपुर/बगीचा 13 अक्टूबर 2024 – एक सरकारी शिक्षक द्वारा भारतीय जनता पार्टी का सदस्य बनने की खबर सुर्खियों में आने के बाद शिक्षक ने खबर जनपक्ष के सामने अपना पक्ष रखा है।जिसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताया है। दरअसल, मामला जशपुर जिले के बगीचा में पदस्थ हॉस्टल अधीक्षक व शिक्षक विश्वनाथ प्रधान से जुड़ा हुआ है। दिनांक 12 अक्टूबर,2024 को खबर जनपक्ष में प्रकाशित समाचार का असर हुआ कि भाजपा की सदस्यता लिए हुए सरकारी शिक्षक विश्वनाथ राम ने खबर पढ़ने के बाद फोन पर अपना पक्ष रखा है।उनका कहना है कि दो दिन पहले मेरे घर पर भाजपा के मंडल महामंत्री हरीश यादव,महावीर यादव और अजीत देहरी आये हुए थे। मैं उनके लिए पानी लेने घर के अंदर गया हुआ था।मेरा मोबाइल बाहर ही टेबल पर रखा हुआ था।मुझे नहीं मालूम कि कैसे मुझे सदस्य बना दिया गया।मेरा किसी भी राजनैतिक पार्टी का सदस्य बनने का कोई इरादा नहीं है। इतना ही नहीं विश्वनाथ प्रधान ने अपना पक्ष लिखित में भी भेजा है।

समसामयिक लेख : *संजौली और मंडी में मस्जिद निर्माण पर विवाद:एक गहरी दृष्टि *

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निर्मल कुमार हिमाचल प्रदेश के संजौली और मंडी में हाल ही के विरोध प्रदर्शनों की जड़ अवैध मस्जिद निर्माण के आरोप हैं। अवैध निर्माण की चिंता ने इन विरोधों को जन्म दिया है, लेकिन यह मुद्दा केवल कानूनी मामलों तक सीमित नहीं है। यह साम्प्रदायिक सौहार्द्र, सामाजिक संतुलन, और धार्मिक आस्थाओं के आपसी मेल-जोल से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। इस्लाम के अनुसार, मस्जिद का निर्माण नैतिक और वैध जमीन पर होना चाहिए ताकि पूजा और इबादत का स्थान पवित्र और वैध रहे। इससे संबंधित विवाद न केवल धार्मिक जिम्मेदारियों को प्रभावित करते हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक सौहार्द्र को भी चुनौती देते हैं। मस्जिद का निर्माण: इस्लामी मान्यताएँ और सिद्धांत इस्लाम में, मस्जिद केवल एक पूजा स्थल नहीं है; यह एक सामुदायिक केंद्र, आध्यात्मिकता का स्रोत, और नैतिकता का प्रतीक होती है। इसे इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार एक पवित्र स्थान के रूप में देखा जाता है जहाँ केवल धार्मिक कर्मकांड ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता और नैतिकता का पालन भी होता है। मस्जिद के निर्माण की प्रक्रिया से लेकर उसके संचालन तक हर कदम नैतिकता और कानून के दायरे में होना चाहिए। मस्जिद निर्माण के लिए शरीयत (इस्लामिक कानून) के तहत यह अनिवार्य है कि उसका निर्माण केवल वैध, विवाद-मुक्त जमीन पर ही किया जाए। हदीस और कुरान की शिक्षाओं के अनुसार, किसी भी मस्जिद का निर्माण अनैतिक साधनों, जैसे अवैध भूमि या भ्रष्टाचार के धन से नहीं किया जाना चाहिए। अवैध या विवादित भूमि पर मस्जिद बनाकर उस स्थान की पवित्रता को खतरे में डालने से मस्जिद में की गई नमाज़ भी प्रश्नों के घेरे में आ सकती है। इसलिए, मस्जिद का निर्माण पूरी तरह से पारदर्शी, नैतिक और कानूनी रूप से शुद्ध होना चाहिए। इस्लामी धर्मशास्त्र और धार्मिक स्थलों की पवित्रता इस्लाम में धार्मिक स्थलों की पवित्रता का एक गहरा महत्व है। केवल बाहरी रूप से मस्जिद का निर्माण महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसका आधार, उसकी प्रक्रिया, और उसमें उपयोग की गई सामग्री भी धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होती है। उदाहरण के लिए, कुरान में इस बात पर बल दिया गया है कि अवैध तरीके से प्राप्त संपत्ति को धार्मिक कार्यों में शामिल करना निषिद्ध है। ऐसे में अवैध भूमि पर बनी मस्जिद की वैधता संदेह के घेरे में आ जाती है। हदीस के अनुसार, मस्जिद एक शुद्ध, विवाद-मुक्त और पारदर्शी प्रक्रिया द्वारा बनाई जानी चाहिए। यदि मस्जिद का निर्माण विवादित या अवैध भूमि पर किया जाता है, तो वह मस्जिद सामुदायिक असंतोष का कारण बन सकती है। इससे समाज में शांति की बजाय अशांति फैलने की संभावना बढ़ जाती है, जो कि मस्जिद के वास्तविक उद्देश्य के बिल्कुल विपरीत है। मस्जिद एक ऐसा स्थान होना चाहिए जहाँ लोग एकजुट होकर ईश्वर की इबादत कर सकें और नैतिकता के उच्चतम मानकों का पालन कर सकें। स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान मस्जिद निर्माण के विवाद का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे सांस्कृतिक और स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान करना चाहिए। जब धार्मिक स्थल अवैध रूप से बनाए जाते हैं, तो यह समाज में असंतुलन और गलतफहमियों को जन्म देता है। भारत जैसे विविध और बहु-धार्मिक देश में, धार्मिक स्थलों का निर्माण न केवल धार्मिक भावना का सम्मान करना चाहिए, बल्कि स्थानीय समुदायों के रीति-रिवाजों और भावनाओं का भी ध्यान रखना चाहिए। विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में, जहाँ सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता है, बाहरी लोगों की उपस्थिति और उनकी गतिविधियों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। बाहरी समुदायों को शरण देने और स्थानीय संस्कृति को बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। अगर किसी बाहरी समुदाय की गतिविधियों से स्थानीय सांस्कृतिक संतुलन बिगड़ता है, तो यह साम्प्रदायिक तनाव को जन्म दे सकता है। इसलिए, मस्जिद निर्माण के दौरान यह ध्यान रखना चाहिए कि स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान हो और साम्प्रदायिक सौहार्द्र बना रहे। साम्प्रदायिक सौहार्द्र का महत्व भारत में धार्मिक विविधता सदियों से एक मजबूत पहलू रही है। यहाँ सभी धर्मों के लोग एक साथ रहते हैं और धार्मिक स्थलों का सम्मान करते हैं। मस्जिद, मंदिर, चर्च, गुरुद्वारा—हर धार्मिक स्थल को साम्प्रदायिक सौहार्द्र के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। जब किसी धार्मिक स्थल का निर्माण कानून का पालन करते हुए और स्थानीय समुदाय की सहमति से होता है, तो वह एकता और शांति का संदेश देता है। संजौली और मंडी में मस्जिद निर्माण के विवाद के बाद, मस्जिद प्रबंधन समितियों ने जो कदम उठाए, वे सराहनीय हैं। उन्होंने अवैध निर्माण के हिस्सों को गिराने का निर्णय लिया, ताकि समाज में साम्प्रदायिक तनाव न बढ़े और शांति बनी रहे। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो यह दर्शाता है कि कानून का पालन करते हुए धार्मिक स्थलों का निर्माण किया जाना चाहिए। कानून और सामुदायिक जिम्मेदारियाँ धार्मिक स्थलों का निर्माण केवल धार्मिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी भी है। भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है, लेकिन इसके साथ यह भी सुनिश्चित करता है कि इस अधिकार का दुरुपयोग नहीं किया जाए। जब कोई धार्मिक स्थल, जैसे मस्जिद, मंदिर, या चर्च, वैध प्रक्रिया और कानून के तहत बनाए जाते हैं, तो इससे समाज में विश्वास और एकता बढ़ती है। कानूनी तौर पर, भूमि का स्वामित्व विवादित नहीं होना चाहिए और सभी आवश्यक अनुमतियाँ और स्वीकृतियाँ प्राप्त करने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जाना चाहिए। मस्जिदों या अन्य धार्मिक स्थलों के अवैध निर्माण से सामाजिक असंतोष पैदा हो सकता है, जो कि साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ावा दे सकता है। *धार्मिक स्थल: एकता का केंद्र* धार्मिक स्थल जैसे मस्जिद, मंदिर, और चर्च समाज में शांति, एकता और सामंजस्य का प्रतीक होते हैं। इनका उद्देश्य केवल पूजा करना नहीं होता, बल्कि समाज के लोगों को एकजुट करना और नैतिकता का पालन करना होता है। जब किसी धार्मिक स्थल का निर्माण विवादों में घिर जाता है, तो उसका वास्तविक उद्देश्य खो जाता है। मस्जिद का निर्माण अगर विवाद-मुक्त और नैतिक तरीके से किया जाता है, तो वह समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है। महात्मा गांधी के विचार भी इस बात पर जोर देते हैं कि किसी भी धार्मिक स्थल का निर्माण और उसका संचालन नैतिकता, अहिंसा और सभी धर्मों के प्रति सम्मान के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने हमेशा कहा कि धार्मिक … Read more

मुंबई में जशप्योर ब्रांड की धूम, शुद्धता और सेहतमंद उत्पादों से बढ़ी मांग

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जशपुरिया उत्पादों की मुंबई में लोकप्रियता बढ़ी शुद्धता और स्वास्थ्य लाभ बने आकर्षण का कारण जशपुर, 10 अक्टूबर 2024 – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रयासों से जशपुर जिले के स्थानीय उत्पादों को देशभर में पहचान मिल रही है। मुंबई के विभिन्न स्थानों पर जशप्योर ब्रांड के उत्पादों की स्टॉल लगाई गई हैं, जो लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो रही हैं। जशपुर की आदिवासी महिलाओं द्वारा तैयार किए गए ये उत्पाद अपनी शुद्धता और स्वास्थ्य लाभ के कारण बड़ी मात्रा में खरीदे जा रहे हैं। कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल के मार्गदर्शन में मुंबई में जशप्योर ब्रांड की स्टॉल नियमित रूप से लगाई जा रही हैं। इन स्टॉल पर जशपुर के प्राकृतिक और बिना रसायन वाले उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं, जिन्हें स्थानीय आदिवासी महिलाएं तैयार करती हैं। इन उत्पादों को स्वस्थ विकल्प मानते हुए लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं। मुंबई में लगने वाली इन स्टॉल्स में महुआ सिरप, महुआ आधारित च्यवनप्राश विकल्प ‘फॉरेस्टगोल्ड वन्यप्राश’, और बाजरा से बने पास्ता जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिनकी बाजार में बड़ी मांग है। इसके अलावा, छिन्द घास से बने हाथ के बने टोकरियां भी त्योहारी सीजन में खूब बिक रही हैं। जशप्योर ब्रांड की स्टॉल मुंबई के डीसीबी बैंक मुख्यालय, कांदिवली, साकी नाका, अंधेरी, आईआईटी-मुंबई, पवई, लोअर परेल और अन्य कई स्थानों पर लगाई जा रही हैं। इस पहल से जशपुर और महाराष्ट्र के जवाहर जिले के आदिवासी समुदायों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है। “माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विशेष प्रोत्साहन से जिला प्रशासन का यह प्रयास न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि आदिवासी समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद कर रहा है।” – डॉ. रवि मित्तल,कलेक्टर जशपुर  

सूखा नशा : जशपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: पंजाब के 5 तस्कर गिरफ्तार, 26 किलो गांजा और कार बरामद

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जशपुर, 10 अक्टूबर 2024 – जशपुर पुलिस ने गांजा तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। पंजाब के पांच तस्करों को गिरफ्तार करते हुए पुलिस ने 26 किलो 330 ग्राम गांजा बरामद किया है, जिसकी कीमत करीब 3 लाख रुपये आंकी गई है। पकड़े गए तस्करों में दो महिलाएं भी शामिल हैं, जो ओडिशा के संबलपुर से इस गांजे को पंजाब ले जा रहे थे। पुलिस ने तस्करी में उपयोग की गई होंडा जैज कार (PB 13 AQ 1759) भी जब्त कर ली है, जिसकी अनुमानित कीमत 4 लाख रुपये बताई जा रही है। गुप्त सूचना पर की गई कार्रवाई पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह को गुप्त सूचना मिली थी कि तस्कर ओडिशा से होकर पंजाब की ओर गांजे की तस्करी कर रहे हैं। सूचना मिलते ही चौकी उपरकछार, थाना तपकरा की पुलिस टीम को नाकाबंदी और वाहनों की कड़ी जांच के निर्देश दिए गए। नाकाबंदी के दौरान पुलिस ने बनडेगा से आ रही होंडा जैज कार को रोका, जिसमें तीन पुरुष और दो महिलाएं सवार थे। पुलिस ने शक के आधार पर कार की तलाशी ली और सीट के नीचे और डिक्की में छिपाकर रखा 26 किलो 330 ग्राम गांजा बरामद किया। सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार की गई है: 1. कपिल कुमार (26), निवासी सानेवाल, थाना सानेवाल, जिला लुधियाना, पंजाब 2. संदीप सिंह (27), निवासी रायपुरबेट, थाना कुमकला, जिला लुधियाना, पंजाब 3. राजेश कुमार (21), निवासी सानेवाल, थाना सानेवाल, जिला लुधियाना, पंजाब 4. कीरती देवी (24), निवासी सानेवाल, थाना सानेवाल, जिला लुधियाना, पंजाब 5. तान्या कुमार (19), निवासी गोविंदगढ़, थाना गोविंदगढ़, जिला लुधियाना, पंजाब   पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे यह गांजा ओडिशा के संबलपुर से तस्करी कर पंजाब ले जा रहे थे। महिलाओं का इस्तेमाल तस्करी के लिए जशपुर पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने बताया कि तस्करी के लिए महिलाओं का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है क्योंकि आमतौर पर पुलिस महिलाओं पर शक नहीं करती। यह घटना एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती है, जिसमें महिलाओं को मोहरा बनाकर तस्करी के धंधे को अंजाम दिया जा रहा है। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है कि कहीं इन आरोपियों के संबंध किसी संगठित आपराधिक गिरोह से तो नहीं हैं। जशपुर पुलिस की सतर्कता ने रोकी बड़ी तस्करी यह पुलिस की सतर्कता और चुस्ती का परिणाम है कि इतने बड़े पैमाने पर हो रही गांजे की तस्करी को बीच में ही रोका जा सका। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से न केवल मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगी है, बल्कि इससे जुड़े बड़े नेटवर्क का भी पर्दाफाश होने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने मामले में शामिल पुलिसकर्मियों की प्रशंसा करते हुए उन्हें नगद इनाम देने की घोषणा की है। गिरफ्तार किए गए तस्करों से आगे की पूछताछ जारी है और इस पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने के लिए जांच गहनता से की जा रही है। पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा, “हमारी कार्रवाई नशे के खिलाफ जारी रहेगी। तस्करी करने वाले चाहे जिस भी तरीके का इस्तेमाल करें, जशपुर पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए हरसंभव कदम उठाएगी। जनता से अपील है कि अगर उनके आसपास किसी भी तरह की अवैध गतिविधि हो रही है, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।” यह कार्रवाई नशे के अवैध व्यापार के खिलाफ जशपुर पुलिस की लगातार चल रही मुहिम का हिस्सा है, जो मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए प्रतिबद्ध है।  

विष्णु के सुशासन की सुंदर तस्वीर बनकर कैसे आगे बढ़ रहा घुघरी पँचायत? पढ़िए विकास की यह कहानी,,,

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*विष्णु के सुशासन में तेजी से बदल रही गांव की तस्वीर* *विकास और समाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में ग्राम पंचायत घुघरी विकास और बदलाव की नई परिभाषा गढ़ रहा* *महिला सशक्तिकरण के तहत् स्व सहायता समूहों की 412 महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया* जशपुर 10 अक्टूबर 2024/छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में  राज्य के गांवों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। शासन के प्रयासों और पंचायती राज योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश के गांव अब विकास और समाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में नई कहानियां लिख रहे हैं। ऐसी ही एक कहानी है जशपुर जिले के बगीचा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत घुघरी की। जिला मुख्यालय जशपुर से 93 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव विकास और बदलाव की नई परिभाषा गढ़ रहा है। यहां पंचायत की बैठकों में जनभागीदारी के माध्यम से गांव के हर चुनौतीका समाधान किया जाता है। गांव में 567 लोगों का राशन कार्ड बनाया गया हैं जिनमें 37 एपीएल कार्ड, 407 बीपीएल कार्ड शामिल हैं। आंगनबाड़ी केन्द्र के माध्यम से 216 बच्चों को पोषण का लाभ मिल रहा है। धात्री और गर्भवती महिलाओं के लिए भी पोषण की व्यवस्था की गई है। समाजिक सुरक्षा के लिए 2 लाख 10 हजार खर्च किए गए हैं। साथ ही 342 लोगों को पेंशन योजनाओं से जोड़ा गया है। घुघरी निवासी मंगरी बाई ने बताया कि उन्हें हर महिना 500 रूपए पेंशन मिलती है। उसी पैसे से अपना जीवन यापन करती हैं। परिवार के पालन पोषण करने में सहायता मिल रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत् 56 जरूरतमंद परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए गए हैं। 483 परिवारों के मनरेगा जॉब कार्ड बनाए गए हैं। पीछे दो वर्षाे में मनरेगा के 20 व्यक्तिगत तालाबों का निर्माण कराया गया है। ग्राम पंचायत घुघरी के विनोद राम ने बताया कि उनके गांव में अक्टूबर और नवम्बर में मनरेगा का कार्य चालू होता है। उसमें गांव के लोग काम करने जाते हैं। गांव के लोगों का जॉब कार्ड है। मनरेगा में कार्य करके सभी परिवार मिलकर 28 हजार रूपए कमा लेते हैं। इसे घर परिवार अच्छा से चल रहा है। महिला सशक्तिकरण के उददेश्य से 36 स्व सहायता समूहों का गठन कर 412 महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। ग्राम पंचायत घुघरी की यह कहानी संवरते छत्तीसगढ़ के सुरक्षित होते भविष्य की कहानी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने राष्ट्रीय डाक दिवस पर दी बधाई,जानिए डिजिटल युग में डाक विभाग की भूमिका ,,,

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रायपुर, 10 अक्टूबर 2024: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय डाक दिवस के अवसर पर भारतीय डाक विभाग के सभी कर्मियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि भारतीय डाक विभाग, देश की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित सरकारी डाक प्रणाली, आज भी अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। हर साल 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय डाक दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिससे इस विभाग द्वारा देश के विकास में दिए गए अमूल्य योगदान को सम्मानित किया जाता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारतीय डाक सेवा आज भी दुनिया के सबसे बड़े डाक नेटवर्क के रूप में जानी जाती है। यह सेवा न केवल शहरों में बल्कि ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में भी संचार का महत्वपूर्ण साधन बनी हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डिजिटल युग के इस दौर में भी भारतीय डाक ने अपनी प्रासंगिकता बनाए रखी है और यह सेवा ई-कॉमर्स, बैंकिंग और डिजिटल इंडिया जैसी सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने डाक विभाग की अन्य सेवाओं की सराहना की, जैसे बैंकिंग सुविधा, जोकि ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में सहायक रही है। उन्होंने कहा कि यह विभाग न केवल संचार के क्षेत्र में बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रीय डाक दिवस, डाक सेवाओं की उपयोगिता और उनकी भूमिका का स्मरण कराता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि आधुनिक तकनीक के बावजूद, डाक सेवा का महत्व बना हुआ है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां डिजिटल संसाधन सीमित हैं।भारतीय डाक सेवा दुनिया का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क है। राष्ट्रीय डाक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने डाक विभाग को देश के नागरिकों के साथ बेहतर संचार और सेवाओं को जोड़ने के लिए धन्यवाद दिया और उनके समर्पण की सराहना की।  

नक्सल मोर्चे पर पीएम मोदी ने की सीएम साय की तारीफ, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की मुलाक़ात,राज्य की विकास योजनाओं और नक्सल उन्मूलन पर की चर्चा

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नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2024: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से उनके निवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में बीते नौ महीनों के दौरान किए गए प्रमुख विकास कार्यों की जानकारी दी, जिनमें कृषि, शिक्षा और कौशल विकास पर केंद्रित पहलों का विशेष उल्लेख किया गया। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हुए हालिया सफल ऑपरेशनों की जानकारी भी प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य में आठ लाख आवासों की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह योजना लाखों परिवारों को आवासीय सुरक्षा और स्थिरता प्रदान कर रही है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस पहल की सराहना की और इसे राज्य के विकास में एक अहम कदम बताया। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री साय ने राज्य में माओवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिलों में हाल ही में सफलतापूर्वक संपन्न ऑपरेशन का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें 31 नक्सलियों का सफाया किया गया, जो राज्य में अब तक का सबसे बड़ा नक्सल विरोधी अभियान रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सफलता के लिए सुरक्षा बलों की प्रशंसा की और इसे राज्य में शांति बहाली और विकास के मार्ग की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बताया। मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को आदिवासी क्षेत्रों में युवाओं के कौशल उन्नयन के लिए चलाई जा रही योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं के अंतर्गत युवाओं को तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे रोजगार के बेहतर अवसरों से जुड़ सकें और राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास में योगदान दे सकें। कृषि के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ में डिजिटल तकनीक और उन्नत कृषि विधियों के इस्तेमाल से किसानों की उत्पादकता और आय में बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास प्रधानमंत्री के “विकसित भारत 2047” के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, और छत्तीसगढ़ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य में आदिवासी बच्चों के लिए मातृभाषा में शिक्षा की व्यवस्था की गई है, जिससे उनकी शैक्षणिक प्रगति में सुधार हो रहा है। साथ ही, तकनीकी शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि राज्य के बच्चे आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित हो सकें और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। प्रधानमंत्री मोदी ने छत्तीसगढ़ सरकार के इन प्रयासों की सराहना की और राज्य की प्रगति के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का विकास मॉडल अन्य राज्यों के लिए प्रेरणादायक है और इसे और भी सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार पूर्ण समर्थन देगी। मुख्यमंत्री साय की यह मुलाकात राज्य के विकास और नक्सल उन्मूलन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।  

नवा रायपुर: मुख्यमंत्री ने जननी माँ जसमनी का आशीर्वाद लेकर अर्धांगनी के साथ किया गृहप्रवेश

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रायपुर, 5 अक्टूबर 2024/ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने नवरात्रि के पावन अवसर पर आज विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना कर नवा रायपुर में नवनिर्मित नए मुख्यमंत्री निवास में गृहप्रवेश किया। मुख्यमंत्री ने अपनी अर्धांगनी श्रीमती कौशल्या देवी साय के साथ मंत्रोच्चार और शंख ध्वनि के बीच पूजा-अर्चना की। उन्होंने अपनी माता श्रीमती जसमनी देवी से आशीर्वाद ग्रहण कर गृह प्रवेश किया।इस दौरान श्री साय के भाईबन्धु और बेटे-बेटी भी साथ रहे। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रानी डेका काकोटी, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वन मंत्री केदार कश्यप, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, पूर्व राज्यपाल श्री रमेश बैस सहित अनेक विधायक और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। गृहप्रवेश कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों ने मुख्यमंत्री को बधाई और शुभकामनाएं दी।

*प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की उन्नति जय जवान-जय किसान के नारे को कर रही है सार्थक : विष्णु देव साय*

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*प्रदेश के किसानों की ओर से मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का जताया आभार* *प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जारी की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 18वीं किस्त* *छत्तीसगढ़ के 24 लाख 98 हजार से अधिक किसानों के खातों में पीएम किसान सम्मान निधि के 566 करोड़ 77 लाख रुपए अंतरित* रायपुर 05 अक्टूबर 2024// प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज महाराष्ट्र के वाशिम जिले से देश के लगभग 9 करोड़ 40 लाख से अधिक किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 18वीं किस्त के रूप में 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे उनके खाते में अंतरित की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के 18वीं किस्त के ऑनलाइन अंतरण कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के 18वीं किस्त के रूप में प्रदेश के 24 लाख 98 हजार से अधिक किसानों के खातों में 566 करोड़ 77 लाख रुपए से अधिक की राशि अंतरित होने पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। श्री साय ने इस मौके पर प्रदेश के किसानों को बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के 17 वीं किश्त की तुलना में इस बार 66 हजार 485 अधिक किसानों ने योजना का लाभ उठाया है। इससे पहले भी 16 वीं किश्त की तुलना में 17वीं किश्त का लाभ उठाने वाले किसानों की संख्या 01 लाख 11 हजार 518 अधिक थी। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना की किश्त-दर-किश्त लाभान्वित होने वाले किसानों की संख्या में बढ़ोतरी होना इस बात का प्रमाण है कि भारत के कृषि क्षेत्र में कितनी तेजी से प्रगति हो रही है। यह मोदी सरकार पर किसानों के मजबूत भरोसे का भी प्रमाण है। श्री साय ने कहा कि 18 वीं किश्त के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के जो किसान भाई-बहन आज लाभान्वित हो रहे हैं, उनमें 02 लाख 49 हजार 867 वन-पट्टा धारक हैं और 30 हजार 408 किसान पीवीटीजी योजना के अंतर्गत लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में किसानों की उन्नति जय जवान-जय किसान के नारे को सार्थक कर रही है। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  टंकराम वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायकगण मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा,  ईश्वर साहू, गुरु खुशवंत साहेब और डॉ. रामप्रताप मौजूद रहे।