मुख्यमंत्री विष्णुदेव की कृपा से किसान को मिला पट्टा,फिर भी नहीं बेच पा रहा धान,,,सुशासन पर बड़ा सवाल

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पटवारी–पोर्टल की जुगलबंदी में पिसता किसान: बी-1 खसरा गड़बड़ी से धान अटका, मुख्यमंत्री के गृहजिले में सुशासन पर उठा बड़ा सवाल जशपुर,13/012026 – जिले के कांसाबेल तहसील का एक किसान बी वन में दर्ज आधिकारिक खसरे नम्बर के कारण न तो सरकार को धान बेच पा रहा है, न सोलर पैनल लगवा पा रहा है,न ही अपनी खेती को बढ़ाने के लिए बैंक से लोन ले पा रहा है। दरअसल,तिलंगा गांव का किसान दिलबंधु तिर्की को पिता की मृत्यु के बाद भाइयों के बीच जमीन बंटवारे के बाद पट्टा नहीं मिल रहा था।जिसको लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को अपनी तकलीफ बताई। मुख्यमंत्री कार्यालय बगिया के त्वरित सक्रियता से पटवारी ने किसान का पट्टा बनाकर दे दिया। अब परेशानी तब खड़ी हो गई जब दिलबंधन तिर्की अपनी खेती का धान बेचने के लिए पंजीयन कराने सहकारी समिति गया।जहां देखा गया की पट्टे में दर्ज खसरा नंबर सरकार के भू रिकॉर्ड से बिल्कुल अलग है। दरअसल, वर्ष 2022–23 की बंटवारा सूची में खाता विभाजन पूरी तरह वैधानिक रूप से हुआ था। बंटवारे के आधार पर दर्ज खसरा नंबर हैं— 666/6, 666/9, 666/1 ठ, 666/13, 666/15, 666/20, 672/7, 666/5, 666/8, 666/11, 666/1 ण, 666/17, 666/19, 672/1उ। इन खसरा नंबरों के आधार पर बंटवारा सूची पूरी तरह सही है। यही नहीं, इसी आधार पर ऋण पुस्तिका भी विधिवत जारी की गई, जिसे 23 जून 2025 को पटवारी द्वारा प्रदान किया गया था। लेकिन समस्या तब सामने आई जब किसान ने ऑनलाइन बी-1 रिकॉर्ड निकाला। बी-1 में खसरा नंबर 666/2, 666/12, 666/16, 666/21, 666/5, 666/17 दर्ज मिले, जो न तो बंटवारा सूची से मेल खाते हैं और न ही ऋण पुस्तिका से। इसी तकनीकी विसंगति के कारण सहकारी समिति ने किसान का धान पंजीयन करने से इंकार कर दिया। नतीजतन, किसान का धान आज भी घर में रखा हुआ है। इस संबंध में जब किसान पटवारी के पास गया तो पटवारी ने साफ कह दिया कि खसरा नंबर पट्टे वाले ही पोर्टल पर चढ़ाया लेकिन नहीं लिया।अब खसरा नंबर चेंज नहीं हो सकता।पटवारी की दो टूक बातें सुनकर किसान हताश हो गया और उसका पंजीयन नहीं होने से धान घर में रखा हुआ है।   इस संबंध में जब हमने हल्का पटवारी विक्की गुप्ता से फोन पर बात की तो उन्होंने कहा कि दिलबंधन तिर्की के साथ ही उसके दो भाइयों का भी खसरा नंबर पोर्टल में बदल गया है। ऐसा कइयों का हुआ है।जो खसरा नंबर बी वन में दिख रहा है, वही मान्य है।किसान सीमांकन करा सकता है लेकिन किसान इस बात को समझ नहीं पा रहा है। वहीं पीड़ित किसान ने बताया कि पटवारी के मनमानी से तंग आकर नायब तहसीलदार कांसाबेल के न्यायालय में खसरा नंबर को ठीक करने के लिए आवेदन दिया गया है।जो बी वन में खसरा नंबर है,वह मेरे भाइयों की जमीन है।ऐसे में भविष्य में विवाद पैदा हो सकता है।किसान ने पटवारी पर तहसीलदार के आदेश नहीं मानने और किसान का धान नहीं बिकने पर हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई कराने की मांग की है।   बहरहाल,यह बड़ा सवाल है कि ऐसे में विष्णु का सुशासन कैसे सफल होगा कि एक किसान सरकारी सिस्टम के कारण अपना धान नहीं बेच पा रहा है? यह स्थापित लोकल्याणकारी राज्य में शासन की योजनाओं का लाभ हितग्राही को पहुंचा कर देना है न कि उसे दफ्तरों के चक्कर लगवाने हैं। अब देखना है कि मुख्यमंत्री के गृहजिले में ऐसे किसानों को न्याय कब तक मिलेगा या कागजी घोड़े दौड़ते रहेंगे।

भूख हाथियों को धान मंडी तक खींच लाई,छत्तीसगढ़ में 20 रातों से धान की बोरियां उठाकर जंगल ले जा रहे जंगली हाथी

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भूख हाथियों को धान मंडी तक खींच लाई,छत्तीसगढ़ में 20 रातों से धान की बोरियां उठाकर जंगल ले जा रहे जंगली हाथी सार – जैसे ही अंधेरा घिरता है, ग्रामीणों को हाथियों के आने की खबर मिल जाती है। इसके बाद धान खरीदी केंद्र के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो जाते हैं। लोग मोबाइल कैमरों से उस दृश्य को रिकॉर्ड करते हैं, जहां विशालकाय हाथी शांति से धान की बोरियां उठाकर जंगल की ओर लौट जाते हैं। रायगढ़,09 जनवरी,2025 रायगढ़ जिले में ग्राम बंगुरसिया के धान खरीदी केंद्र में इन दिनों एक अनोखा लेकिन बेहद चिंताजनक दृश्य देखने को मिल रहा है। लगातार 15 से 20 दिनों से हर रात जंगली हाथियों का झुंड धान मंडी तक पहुंच रहा है और वहां से धान की बोरियां उठाकर जंगल की ओर ले जा रहा है। यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि जंगलों में बदलती स्थिति और भूखे वन्यजीवों की मजबूरी की तस्वीर है। रात होते ही जुटती है ग्रामीणों की भीड़ जैसे ही अंधेरा घिरता है, ग्रामीणों को हाथियों के आने की खबर मिल जाती है। इसके बाद धान खरीदी केंद्र के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो जाते हैं। लोग मोबाइल कैमरों से उस दृश्य को रिकॉर्ड करते हैं, जहां विशालकाय हाथी शांति से धान की बोरियां उठाकर जंगल की ओर लौट जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि हाथी अब तक किसी तरह की तोड़फोड़ या आक्रामकता नहीं दिखा रहे हैं। वन विभाग सतर्क, हाथी मित्र दल तैनात वन विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। हाथी मित्र दल की टीम मौके पर तैनात है, जो हाथियों की गतिविधियों की मॉनिटरिंग कर रही है और उन्हें सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर वापस भेजने का प्रयास कर रही है। हालांकि, हाथियों का बार-बार लौट आना यह संकेत देता है कि जंगलों में उनके लिए पर्याप्त भोजन नहीं बचा है। तस्वीरें बता रही हैं जंगल की सच्चाई हाथियों के ये वीडियो और तस्वीरें साफ संदेश दे रही हैं कि जंगल भले ही हाथियों का प्राकृतिक घर हों, लेकिन वहां भोजन का संकट गहराता जा रहा है। जंगलों में घटता प्राकृतिक आहार, बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप और विकास गतिविधियां हाथियों को इंसानी इलाकों की ओर खींच रही हैं। गणेश के स्वरूप गजराज संकट में भारत में हाथी को भगवान गणेश के रूप में पूजा जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में यही पूजनीय जीव आज अपने अस्तित्व और भोजन के लिए संघर्ष करता नजर आ रहा है। मानव-हाथी द्वंद्व बढ़ने का सबसे बड़ा कारण जंगल में इंसानों की बढ़ती दखलअंदाजी और हाथियों की भोजन तलाश में बस्तियों तक पहुंच है। सिर्फ नुकसान की नहीं, चेतावनी की खबर बंगुरसिया की धान मंडी में उठती धान की बोरियां केवल सरकारी नुकसान की कहानी नहीं कहतीं, बल्कि यह भविष्य के बड़े टकराव की चेतावनी भी हैं। यदि जंगलों में हाथियों के लिए भोजन और सुरक्षित रास्ते नहीं बनाए गए, तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। स्थायी समाधान जरूरी वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए जंगलों में प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता बढ़ाना,हाथी कॉरिडोर का संरक्षण,और मानव बस्तियों से हाथियों की सुरक्षित दूरी सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है। यह खबर हाथियों की नहीं, हमारी जिम्मेदारी की कहानी भी है।

आरटीओ चाचा की अटैची से उड़ाए लाखों! भतीजी ने बॉयफ्रेंड संग रची चोरी की खौफनाक स्क्रिप्ट

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**आरटीओ चाचा की अटैची से उड़ाए लाखों! भतीजी ने बॉयफ्रेंड संग रची चोरी की खौफनाक स्क्रिप्ट** जशपुर,09 जनवरी 2025 कहते हैं लालच जब हदें पार कर जाए तो रिश्ते, भरोसा और इज्जत—सब कुछ बिखर जाता है। जशपुर जिले के नारायणपुर थाना क्षेत्र से सामने आई यह कहानी किसी फिल्मी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं, जहाँ आरटीओ चाचा विजय निकुंज की अटैची में रखे लाखों रुपए और सोने की ज्वेलरी पर भतीजी की नजर पड़ी—और यहीं से शुरू हुआ अपराध का खतरनाक सफर। आईफोन की चाह… और पहली चोरी कहानी की शुरुआत होती है तब, जब कॉलेज में पढ़ने वाली भतीजी मिनल निकुंज साफ-सफाई के बहाने चाचा के कमरे में पहुंचती है। दीवान के भीतर रखी एक अटैची खोलते ही उसकी आंखें चौंधिया जाती हैं—नगद नोटों के बंडल और चमकता सोना। पहले सिर्फ आईफोन खरीदने के लिए दो लाख रुपए उठाए गए। किसी को भनक नहीं लगी… और यहीं से उसका हौसला बढ़ता गया। बॉयफ्रेंड की एंट्री, अपराध को मिली रफ्तार सोशल मीडिया से शुरू हुआ प्यार, जल्द ही लिव-इन रिलेशनशिप में बदल चुका था। बॉयफ्रेंड अनिल प्रधान को जब पैसों की भनक लगी, तो लालच ने दोनों को एक ही राह पर ला खड़ा किया—अपराध की राह। फिर एक-एक कर अटैची से पैसे निकलते रहे… पिकनिक, पार्टी, होटल, शराब—सब चलता रहा। पूरा सूटकेस ही उड़ा ले गए लेकिन असली खेल तब हुआ, जब भतीजी ने दादी से चाबी चुराई और पूरी अटैची ही बॉयफ्रेंड और उसके साथियों के हवाले कर दी। अटैची खुली—तो निकले 15 लाख नगद, सोने के बिस्किट और जेवरात। इसके बाद शुरू हुआ अय्याशी का दौर— रायपुर में विला बुक हुआ, जन्मदिन मनाया गया, लाखों उड़ाए गए और चोरी के पैसों से 25 लाख की लग्जरी कार खरीद ली गई। सोना बेचा, पैसा बांटा… लेकिन किस्मत ने नहीं दिया साथ आरोपी सोने के बिस्किट बेचने ओडिशा तक पहुंच गए। पैसा आपस में बांटा गया। मगर जल्द ही आरटीओ चाचा को चोरी की भनक लग गई और पुलिस में मामला दर्ज हो गया। इधर, चोरी के माल पर हाथ साफ करने वालों के बीच ही एक और चोरी हो गई, जब उनके किराए के मकान से बाकी सोना भी गायब हो गया। रांची के होटल में टूटा सपनों का महल पुलिस की साइबर टीम और मुखबिरों ने लोकेशन ट्रेस की। आखिरकार रांची के एक होटल में भतीजी और बॉयफ्रेंड को दबोच लिया गया। पूछताछ में पूरा काला सच सामने आया—रिश्तों से गद्दारी, लालच और अपराध की पूरी कहानी। 51 लाख की चोरी, सलाखों के पीछे पांच आरोपी अब तक इस मामले में पांच आरोपी जेल पहुंच चुके हैं।मीनल निकुंज,अनिल प्रधान ,अभिषेक इंद्रवार (28 वर्ष),लंकेश्वर बड़ाईक (35 वर्ष),अलीशा भगत (29 वर्ष)। पुलिस ने हरियर कार, नगद रकम, सोने के बिस्किट, ज्वेलरी और मोबाइल फोन बरामद कर लिए हैं। चोरी गए माल की कुल कीमत 51 लाख रुपए से अधिक आंकी गई है। सबक साफ है… यह कहानी सिर्फ एक चोरी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है— लालच जब रिश्तों पर भारी पड़ जाए, तो अंजाम सिर्फ सलाखें होती हैं।

मुख्यमंत्री के जिले में धान खरीदी पर घमासान, 9 जनवरी को 46 केंद्रों में कांग्रेस का जिला-व्यापी “धान खरीदी किसान न्याय आंदोलन”

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मुख्यमंत्री के जिले में धान खरीदी पर घमासान, 9 जनवरी को 46 केंद्रों में कांग्रेस का जिला-व्यापी “धान खरीदी किसान न्याय आंदोलन” जशपुर,08/01/2026 मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नमी, कटौती, अवैध वसूली और बिचौलियों के जरिए धान खरीदी के आरोपों को लेकर जशपुर जिला कांग्रेस कमेटी ने 9 जनवरी शुक्रवार को जिले-व्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। कांग्रेस के अनुसार जिले के सभी 46 धान खरीदी केंद्रों में एक साथ सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। यह जिला-व्यापी “धान खरीदी किसान न्याय आंदोलन” जिला कांग्रेस अध्यक्ष यूडी मिंज के नेतृत्व में होगा। कार्यक्रम के वरिष्ठ मार्गदर्शक प्रदेश महासचिव एवं जिला कांग्रेस प्रभारी भानु प्रताप सिंह होंगे, जो आंदोलन को संगठनात्मक और रणनीतिक दिशा देंगे। कांग्रेस ने आंदोलन के लिए संयोजक और सह-संयोजक भी तय किए हैं। पूर्व विधायक विनय भगत को मुख्य संयोजक बनाते हुए जशपुर जिला एवं जशपुर विधानसभा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज सागर यादव को कुनकुरी विधानसभा का सह-संयोजक बनाया गया है। वहीं पत्थलगांव विधानसभा में प्रदेश महासचिव एवं जिला पंचायत सदस्य आरती सिंह को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। युवा कांग्रेस प्रभारी रवि शर्मा, महिला कांग्रेस प्रभारी रत्ना पैकरा, सेवा दल एवं सभी प्रकोष्ठों को भी आंदोलन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। कांग्रेस का दावा है कि जिले के सभी 46 धान खरीदी केंद्रों में पार्टी की ओर से प्रभारी नियुक्त किए गए हैं, जो ब्लॉक अध्यक्षों और ब्लॉक प्रभारियों के साथ मिलकर आंदोलन को सफल बनाएंगे और किसानों के साथ खड़े रहेंगे। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के जिले में ही किसानों के साथ खुलेआम लूट हो रही है। धान खरीदी केंद्रों में नमी के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। शासन द्वारा निर्धारित 40.680 किलोग्राम (बारदाना सहित) के मानक की अनदेखी कर अधिक तौल की जा रही है। कई केंद्रों पर बिचौलियों के माध्यम से धान खरीदी होने से किसानों को सीधे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। विरोध करने पर किसानों से दुर्व्यवहार किया जा रहा है, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री महेश त्रिपाठी ने बताया कि 22 दिसंबर 2025 को इन गड़बड़ियों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक किसी भी दोषी पर कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस का आरोप है कि धान खरीदी में फैली अव्यवस्था और भ्रष्टाचार को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। कांग्रेस ने मांग की है कि धान की तौल निर्धारित 40.680 किलोग्राम के मानक के अनुसार की जाए, बिचौलियों के जरिए खरीदी पर तत्काल रोक लगे और राइस मिलों को विशेष निगरानी में रखा जाए, जहां से पिक-अप के माध्यम से धान मंडी आने की शिकायतें मिल रही हैं। साथ ही किसानों से दुर्व्यवहार करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो तथा नमी के नाम पर होने वाली अवैध वसूली पूरी तरह बंद की जाए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि 9 जनवरी का धरना-प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन यदि किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पार्टी ने कहा कि अन्नदाता के साथ हो रहे अन्याय को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और किसान न्याय की यह लड़ाई आखिरी दम तक लड़ी जाएगी।

क्रशर प्लांट के विरोध में उतरे ग्रामीण,कूटरचना कर ले ली लीज!प्रशासन ने स्थिति नियंत्रण में लिया

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जशपुर,07/01/2026 – जिले के बागबहार थाना क्षेत्र अंतर्गत कुकरभुका कोयलापहाड़ी गांव में प्रस्तावित पत्थर खदान और क्रशर प्लांट की स्थापना को लेकर मंगलवार को ग्रामीणों का जबरदस्त विरोध सामने आया है । सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के महिला-पुरुष हाथों में नारे लिखी तख्तियां लेकर सड़क पर उतर आए और क्रशर प्लांट के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया।   ग्रामीणों का कहना है कि  जंगल, पहाड़ और पेड़-पौधे ही उनकी जीवनरेखा आस्था और आजीविका का आधार हैं, लेकिन कथित तौर पर दस्तावेजों में कूटरचना कर लंबी अवधि की लीज लेकर यहां पत्थर खदान और क्रशर प्लांट स्थापित किया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्लांट के समीप स्थित गौठान की भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया गया है, साथ ही डभरी को पाटने का भी काम हुआ है। साथ ही स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि क्रशर प्लांट से उड़ने वाली धूल से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ेगा और पूरा गांव प्रदूषण की चपेट में आ जाएगा। ग्रामीणों का दावा है कि वर्ष 2009 में कथित रूप से फर्जी ग्रामसभा कर लगभग 10 एकड़ भूमि लीज पर ली गई, जहां अब प्लांट लगाया जा रहा है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जिस पहाड़ की कटाई की जा रही है, उसे आदिवासी समाज ग्राम देवता के रूप में पूजता आ रहा है। आरोप है कि प्लांट के लिए बड़े-बड़े पेड़ों की कटाई की गई और पहाड़ियों को काटकर रास्ता बनाया गया है, जिससे धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचा है। मामले को और गंभीर बनाते हुए ग्रामीणों ने प्लांट संचालक द्वारा जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया है। इसके विरोध में ग्रामीणों ने बागबहार थाना में लिखित ज्ञापन सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पत्थलगांव एसडीएम ऋतुराज सिंह बिसेन, एसडीओपी ध्रुवेश जायसवाल, बागबहार तहसीलदार कृष्णमूर्ति दीवान, पत्थलगांव नायब तहसीलदार भीष्म पटेल सहित अन्य अधिकारी पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और पूरे मामले को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की है कि पत्थर खदान और क्रशर प्लांट की अनुमति तत्काल निरस्त की जाए, ताकि जंगल, पर्यावरण और आदिवासी आस्था की रक्षा हो सके ।

*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर में स्वास्थ्य क्रांति, दो वर्षों में बदली जिले की तस्वीर, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की मिली बड़ी सौगात….*

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*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर में स्वास्थ्य क्रांति, दो वर्षों में बदली जिले की तस्वीर, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की मिली बड़ी सौगात….* जशपुर, 19 दिसंबर 2025/मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में जशपुर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं ने ऐतिहासिक परिवर्तन का साक्षी बना है। कभी सीमित संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझने वाला यह जिला आज आधुनिक चिकित्सा ढांचे, सुदृढ़ आपात सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण प्रदेश के अग्रणी जिलों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जशपुर की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। पहले जहां दूरस्थ अंचलों के लोगों को सामान्य उपचार और सुरक्षित प्रसव के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब जिले में ही उच्च स्तरीय उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। डायलिसिस जैसी जटिल सेवाएं, जो कभी कल्पना से परे थीं, अब जिलेवासियों के लिए सुलभ होती जा रही हैं। *दो वर्षो में मिली स्वास्थ्य के क्षेत्र में मिलीं जिले को कई ऐतिहासिक सौगातें* मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। जशपुर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए वित्त विभाग से 359 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक स्वीकृति मिलना जिले के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इसके साथ ही 220 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक अस्पताल के निर्माण के लिए 32 करोड़ रुपये की मंजूरी ने जिले में उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था की नींव रख दी है।अखिल भारतीय कल्याण आश्रम परिसर में 35 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक चिकित्सालय का निर्माण कार्य तीव्र गति से जारी है, जो भविष्य में जशपुर को एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। वहीं नर्सिंग शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 8.78 करोड़ रुपये की लागत से नर्सिंग कॉलेज भवन निर्माण को स्वीकृति दी गई है, जिससे जिले को प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित होगी। *मातृ-शिशु स्वास्थ्य को मिली प्राथमिकता* मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करते हुए कुनकुरी में 50 बिस्तरों वाले मातृ-शिशु अस्पताल का निर्माण 8.77 करोड़ रुपये की लागत से प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त जिले में 14 करोड़ रुपये की लागत से फिजियोथेरेपी महाविद्यालय तथा कुनकुरी में 2 करोड़ 62 लाख रुपये से नेचुरोपैथी भवन निर्माण की स्वीकृति ने स्वास्थ्य सेवाओं को बहुआयामी बनाया है।वहीं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर जिले के फरसाबहार मुख्यालय में बहुत जल्द सत्य साईं मातृत्व शिशु चिकित्सालय की स्थापना होगी जो जिले वासियों के साथ पड़ोसी राज्यों को भी इसकी सुविधाएं मुहैया होगी। यह नागलोग क्षेत्र वासियों के लिए बड़ी सौगात है।अब स्वास्थय के क्षेत्र में लोगों के लिए यह वरदान साबित होगी। *जिले में आपातकालीन सेवाओं को मिली नई गति* मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के निर्देश पर जिले में आपात चिकित्सा सेवाओं का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। स्वास्थ्य आपात स्थितियों में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के लिए जिले को 10 नई 108 संजीवनी एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। अब जिले में कुल 24 संजीवनी एक्सप्रेस एंबुलेंस जीवनरक्षक सेवा प्रदान कर रही हैं। इसके अलावा 102 महतारी एक्सप्रेस की 18 एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाकर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित कर रही हैं। प्रत्येक विकासखंड में शव वाहन की उपलब्धता ने कठिन समय में ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत दी है। *नए स्वास्थ्य केंद्रों की सौगात से ग्रामीण क्षेत्रों को मिला संबल* जिले के स्वास्थ्य ढांचे को जमीनी स्तर पर मजबूत करते हुए कोतबा में 4 करोड़ 37 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण की स्वीकृति दी गई है। साथ ही जिले के फरसाबहार तहसील के पेटामारा (अंकिरा) एवं गांझियाडीह, दुलदुला तहसील के करडेगा एवं सीरिमकेला तथा कुनकुरी तहसील के केराडीह में 5 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना को मंजूरी मिली है,जो ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ जाएगी। आज जशपुर स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में किए गए ये ऐतिहासिक प्रयास जिले को एक मजबूत, सक्षम और आधुनिक स्वास्थ्य मॉडल के रूप में स्थापित कर रहे हैं। यह परिवर्तन केवल अधोसंरचना का नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक है।

तलाक-ए-हसन शरीअत की नज़र से : न्याय, जवाबदेही और नैतिक सुधार

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तलाक-ए-हसन शरीअत की नज़र से : न्याय, जवाबदेही और नैतिक सुधार निर्मल कुमार भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 26 नवम्बर 2025 को मुस्लिम पर्सनल लॉ के अंतर्गत तलाक-ए-हसन की प्रथा की संवैधानिकता और सामाजिक प्रभावों का गहन परीक्षण करते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया । यह वह क्षण था जब देश ने एक बार फिर देखा कि कैसे अदालतें परंपरा, शरीअत और आधुनिक कानून के संगम पर खड़ी होकर समकालीन समाज के लिए संतुलित रास्ता तलाशती हैं। तलाक-ए-हसन, इस्लामी न्यायविदों के अनुसार, ऐसा तलाक है जिसमें एक निश्चित प्रतीक्षा अवधि और पुनर्मिलन का अवसर निहित रहता है। इसमें पति और पत्नी को अपने वैवाहिक संबंध पर पुनर्विचार करने का समय दिया जाता है। पहली तथा दूसरी बार उच्चारण के बाद विवाह अभी भी पुनर्स्थापित किया जा सकता है, परन्तु तीसरे उच्चारण के बाद यह तलाक अंतिम और अपरिवर्तनीय हो जाता है । इसे तलाक-ए-बिद्दत की तुलना में अधिक विचारशील, मर्यादित और गरिमापूर्ण प्रक्रिया माना गया है, क्योंकि इसमें दम्पत्ति को समय और सम्भावना दी जाती है। आज के डिजिटल समाज में, जब रिश्ते तेजी से बनते और बिखरते हैं, यह मॉडल न्यायपालिका के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करता है कि व्यक्तिगत कानून केवल धार्मिक आज्ञा नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना के आधार पर भी समझे जाने चाहिए। अदालत ने स्पष्ट रूप से यह दर्शाया कि धार्मिक ढाँचे के भीतर भी शालीनता, सुनवाई और महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि रहनी चाहिए। न्यायालय का हस्तक्षेप : प्रक्रिया की त्रुटियाँ और पीड़ित पक्ष की असुरक्षा सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-हसन के मामले में हस्तक्षेप इस दृष्टि से भी आवश्यक पाया कि कई मामलों में प्रक्रिया की विसंगतियाँ पीड़ित पक्ष, विशेषतः महिलाओं, को न्याय के लिए उच्चतम अदालत तक जाने को बाध्य कर देती हैं । अदालत का कक्ष एक ऐसे मंच में बदल जाता है जहाँ पुरुष-प्रधान निर्णय-प्रक्रिया उजागर होती है और महिलाओं की आवाज़ अक्सर पीछे छूट जाती है। मुख्य याचिका में अदालत ने उस पति से कठोर प्रश्न किए जिसने बिना हस्ताक्षर वाले नोटिस के माध्यम से अपने अधिवक्ता से तलाक दिलाने की चेष्टा की। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि वैवाहिक विघटन की प्रक्रिया में प्रतिनिधि-संप्रेषण (delegation) की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि इससे प्रक्रिया की पवित्रता और महिला की गरिमा प्रभावित होती है । न्यायमूर्ति सूर्यकांत का प्रश्न — “क्या आप अपने वकील को निर्देश दे सकते हैं, पर अपनी पत्नी का सामना करने का साहस नहीं?” शायद इस मुकदमे की सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति बनकर उभरा। अदालत ने पति को निर्देशित किया कि वह अपनी पत्नी हीना और बच्चे के साथ संवाद स्थापित करे, स्वयं निर्णय व्यक्त करे और शरीअत में अपेक्षित जिम्मेदारी निभाए । हीना ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि दस्तावेज़-अस्पष्टता के कारण उसके बेटे के स्कूल प्रवेश, पासपोर्ट नवीनीकरण और अभिरक्षा जैसे मुद्दों पर गंभीर अड़चनें उत्पन्न हुईं। अदालत ने तत्परता से राहत प्रदान की और आवश्यक अंतरिम आदेश जारी किए । शरिया और संविधान का संगम : समानता, गरिमा और स्वतंत्रता 2017 की प्रसिद्ध शायरा बानो बनाम भारत संघ मामले में तलाक-ए-बिद्दत को अवैधानिक घोषित किया गया था। इसी संदर्भ में न्यायालय ने तलाक-ए-हसन पर गहराई से विचार करते हुए कहा कि यदि तलाक को धार्मिक प्रावधानों के अनुसार क्रियान्वित करना है, तो हर चरण का शुद्ध पालन अनिवार्य है । अदालत ने यह भी कहा कि तीसरे पक्ष द्वारा तलाक भेजना न केवल असंवैधानिक है बल्कि महिला-सम्मान, एजेंसी और अधिकारिता को भी नुकसान पहुँचाता है। सभा-कक्ष में यह बहस केवल तलाक की तकनीकी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रही; यह महिलाओं की आवाज़, सुरक्षा, वित्तीय अस्तित्व और पुनर्विवाह-समान अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक भी बन गई। जब धार्मिक नियमों का गलत उपयोग होता है, तब स्त्री अक्सर सबसे बड़ा नुकसान झेलती है — आर्थिक, सामाजिक और मानसिक तीनों स्तरों पर। अदालत ने इसी बिंदु पर जोर देते हुए कहा कि इस्लामी सिद्धांत न्याय और करुणा पर आधारित हैं, और यदि प्रक्रिया महिला को असुरक्षित बनाती है, तो उसका सुधार नैतिक दायित्व है।   तलाक-ए-हसन का व्यापक प्रभाव: सुधार, पुनर्मिलन और सामाजिक संदेश अदालत ने एआईएमपीएलबी तथा जमीयत-उलमा-ए-केरल को भी इस बहस का हिस्सा बनने की अनुमति दी, ताकि इस्लामी विवाह-क़ानूनों पर समग्र दृष्टिकोण स्थापित हो सके । इस्लामी शिक्षाओं में ‘सुलह’ सर्वोत्तम मार्ग मानी जाती है, और तलाक-ए-हसन इसी सिद्धांत के निकट है। यह सुनवाई भारतीय समाज के लिए एक सबक के रूप में सामने आई कि न्याय का मक़सद दंड नहीं, बल्कि संरक्षण और संतुलन स्थापित करना है। धार्मिक विधान चाहे जितना पुराना हो, उसका उपयोग मानव गरिमा की रक्षा के अनुरूप होना चाहिए। क़ुरआन स्पष्ट कहता है कि महिला को मेहर, पोस्ट-डाइवोर्स मेंटेनेंस, और सम्पत्ति-स्वामित्व का अधिकार प्राप्त है। तलाक की प्रक्रिया में उसे किसी भी प्रकार से अपमानित या निष्कासित करना इस्लामी सिद्धांत के विरुद्ध है । हीना जैसी महिलाएँ इस न्यायिक प्रक्रिया की प्रतीक बन गई हैं, जिन्होंने अपनी आवाज़ दबने नहीं दी — और अदालत ने दिखाया कि कानून उनके साथ खड़ा है यह फैसला केवल एक मुकदमा नहीं, बल्कि भारतीय न्यायिक इतिहास में शरिया, संवैधानिक समानता और महिला-गरिमा के बीच संतुलन का उदाहरण है। तलाक-ए-हसन पर यह निर्णय बताता है कि धर्म और कानून टकराव नहीं, बल्कि संवाद और सुधार के माध्यम बन सकते हैं। यह केस हमें याद दिलाता है कि न्याय का वास्तविक उद्देश्य सबसे कमजोर को सबसे अधिक सुरक्षा देना है। (लेखक निर्मल कुमार सामाजिक एवं धार्मिक मामलों के जानकार हैं।यह उनके निजी विचार हैं।)

कुनकुरी में सड़क हादसा बना कड़वी सच्चाई का आईना — मर गया सरकारी सिस्टम और मर गई मानवीय संवेदना !

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कुनकुरी,05/12/2025 गुरुवार शाम तपकरा रोड गड़ाकटा में हुए एक सड़क हादसे ने न सिर्फ एक व्यक्ति की जान ले ली, बल्कि यह भी उजागर कर दिया कि इस शहर में सरकारी सिस्टम और मानवीय संवेदना — दोनों की सांसें कब की थम चुकी हैं। दरअसल,कुंजारा निवासी 47 वर्षीय चंद्रिका यादव गुरुवार शाम साढ़े छह बजे अपनी मोटरसाइकिल सड़क किनारे खड़ी कर मोबाइल पर बात कर रहे थे। तभी अचानक पीछे से आई तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। बाइक सवार कथित रूप से नशे में था और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वह पीडब्ल्यूडी विभाग का कर्मचारी बताया जा रहा है। टक्कर इतनी भीषण थी कि चंद्रिका सड़क पर ही गिर पड़ा और तड़पते रहा।   लेकिन असली दर्दनाक कहानी उसके बाद शुरू हुई—घायल चंद्रिका काफी देर तक सड़क पर पड़े-पड़े जान बचाने की उम्मीद लिए तड़पता रहा, मगर न तो 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची, न वहां कार से गुजर रहे शहर के संभ्रांत युवाओं ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। प्रत्यक्षदर्शी विकास यादव के शब्दों में, “जब तक उनमें प्राण थे, कोई मदद के लिए नहीं आया… जब प्राण निकल गए तब सरकारी शववाहन जरूर आ गया।”   कुनकुरी पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।   लेकिन यह सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं… यह सवाल है उस सिस्टम पर जो अक्सर समय पर नहीं जागता, उस समाज पर जो मोबाइल से वीडियो तो बना लेता है, पर गिरते इंसान को उठाने का साहस नहीं करता। कुनकुरी इलाके में यदि जीते जी इलाज नहीं मिलता और मरने के बाद कभी शववाहन भी नसीब नहीं होता, तो यह घटना बयान कर गई कि यहां सरकारी सिस्टम की मौत तो पहले ही हो चुकी थी — अब मानवीय संवेदना भी दम तोड़ चुकी है।

संडे स्पेशल : देश में कट्टरता बढ़ी, पर ‘मानवतावादी कट्टरता’ की मिसाल बने यातायात निरीक्षक विशाल कुजूर — दो मजदूरों की पीड़ा ने पुलिस अधिकारी को रुला दिया

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देश में कट्टरता बढ़ी, पर ‘मानवतावादी कट्टरता’ की मिसाल बने यातायात निरीक्षक विशाल कुजूर — दो मजदूरों की पीड़ा ने पुलिस अधिकारी को रुला दिया   रायपुर (छत्तीसगढ़ ) – समाज में कट्टरता अक्सर नकारात्मक रूप में देखी जाती है, लेकिन जब यही कट्टरता मानवता के प्रति समर्पण बन जाए तो वह समाज को रोशन करने का काम करती है। रायपुर में पदस्थ यातायात निरीक्षक विशाल कुजूर ऐसी ही ‘कट्टर मानवता’ की मिसाल बनकर सामने आए हैं। शनिवार की शाम उनके व्यवहार और एक भावुक घटना से यह स्पष्ट हो गया कि व्यवस्था संभालने वाले हाथ यदि संवेदनाओं से भरे हों तो किसी की कठिन यात्रा भी आसान बनाई जा सकती है।   दरअसल, इन्स्पेक्टर विशाल कुजूर द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक घटना ने लोगों को झकझोर दिया। रोज की तरह जब वे अपने क्षेत्र में यातायात व्यवस्था देख रहे थे, तभी उनके मुंशी ने दो थके-हारे युवकों को देखकर संदेह जताया और उन्हें बातचीत के लिए बुलाया। बात करने पर पता चला कि दोनों युवक — प्रदीप और संतोष — उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले के एक अंदरूनी गांव से मछली पकड़ने के काम के लिए किसी एजेंट के माध्यम से गोवा ले जाए गए थे।   तीन महीने काम करने के बावजूद उन्हें तनख्वाह नहीं मिली। जब उन्होंने विरोध किया तो जहाज मालिक ने मारपीट कर उन्हें वहां से भगा दिया। भय के कारण ये दोनों गोवा पुलिस तक नहीं गए। जेब में 100 रुपये तक नहीं थे। किसी तरह ट्रेन के बाथरूम में छिपते-छिपाते वे नागपुर पहुँचे, और फिर वहाँ से पाँच दिनों तक पैदल चलकर रायपुर पहुँचे।   दोनों डरे हुए थे, टूटी-फूटी हिंदी बोल रहे थे, और पिछले 7 दिनों की भूख और मुश्किलें उनके चेहरों पर साफ दिख रही थीं। उनका आधार कार्ड, फोन और अन्य दस्तावेज गोवा में ही कंपनी के मालिक के पास बंधक पड़े थे। इनके घरवालों का मोबाइल भी कवरेज की कमी के कारण स्विच ऑफ मिला। स्थिति जानकर विशाल कुजूर ने तुरंत भोजन कराया, कुछ आर्थिक मदद की और दोनों का झारसुगुड़ा तक का टिकट बनवाकर उन्हें ट्रेन में बैठाया। साथ ही अपना मोबाइल नंबर दिया और स्थानीय थाना में शिकायत करने के लिए कहा। दोनों युवकों ने इसकी हामी भरी।   लेकिन इन्स्पेक्टर विशाल को सबसे अधिक भावुक कर देने वाली बात तब सामने आई, जब उन्होंने पूछा कि 8 दिनों तक बिना पैसे के खाना कैसे खाया? दोनों ने सिर झुकाकर जवाब दिया— “नागपुर से रायपुर तक रेलवे ट्रैक के किनारे गिरे पैकेट जमा करके खाते हुए आए हैं…”   इस जवाब ने अधिकारी का दिल दहला दिया। उन्होंने लिखा— “कल इन दो दोस्तों ने सचमुच रुला दिया… अब बस उनके कॉल का इंतज़ार है।”   कुजूर ने लोगों से अपील की है कि रास्ते में ऐसे किसी जरूरतमंद को देखें तो जरूर पूछें और मदद करें। उन्होंने यह भी याद किया कि कोरोना काल में जब वे कुनकुरी थाना प्रभारी थे, तब जशपुर और कुनकुरी के लोगों ने पैदल लौट रहे मजदूरों की जो मिसाल पेश की थी, वह आज भी यादगार है।   दिलचस्प संयोग यह कि 22 नवंबर 2025 को घटी यह घटना उसी तारीख की याद दिलाती है जब 2017 में — ठीक 22 नवंबर को — इन्स्पेक्टर विशाल की पोस्टिंग कुनकुरी थाना में हुई थी। मानवता के प्रति ऐसी कट्टरता ही आज के समय में समाज को जोड़ने और लोगों के जीवन में आशा की लौ जलाने का काम करती है।

विष्णु सरकार की छवि बिगाड़ने वाले अधिकारियों की तानाशाही पर पत्रकारों ने खोला मोर्चा,मुकेश नायक की पीड़ा छापनेवाले पत्रकारों को टारगेट करने पर मामला गरमाया

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पत्रकार मुकेश नायक की अपील पर कुनकुरी में पत्रकारों की आपात बैठक, जिला प्रशासन पर फूटा आक्रोश — मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा ज्ञापन, जनसम्पर्क व्हाट्सएप ग्रुप लेफ्ट कर पत्रकारों ने संघर्ष का बिगुल फूंका   जशपुर/कुनकुरी जशपुर जिले में पत्रकार मुकेश नायक के साथ हुई अमानवीय और संवेदनहीन घटना को लेकर गुरुवार को कुनकुरी में पत्रकारों की जिला स्तरीय आपात बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिले के सभी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया से जुड़े पत्रकार मौजूद रहे। बैठक में प्रशासनिक उदासीनता, गलत तथ्यों के प्रसार और पत्रकारों को दबाव में लेने के बढ़ते प्रयासों को लेकर व्यापक आक्रोश देखा गया। स्वास्थ्य विभाग झूठ बोल रहा है,मुझ पर दवाब बनाना बंद करें – मुकेश की भावुक अपील बैठक में पत्रकार मुकेश नायक ने बताया कि 17 नवंबर को ओडिशा के सुंदरगढ़ अस्पताल में जन्मे उनके नवजात शिशु की मौत हो गई। अस्पताल की शव वाहन सेवा अंतरराज्यीय सीमा पार नहीं कर सकती थी, इसलिए वे छत्तीसगढ़ की 102 मुक्तांजली वाहन सेवा से सहयोग की उम्मीद में बार-बार कॉल करते रहे, लेकिन न फोन रिसीव हुआ, न कोई सहायता मिली। सीएमएचओ से आश्वासन मिलने के बाद भी 102 सेवा ने साफ कह दिया कि वे शव परिवहन नहीं करते। अंततः मजबूरी में उन्हें नवजात के शव को मोटरसाइकिल से घर लाना पड़ा। मुकेश नायक ने कहा कि “इतना कष्ट झेलने के बाद भी जनसम्पर्क विभाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर झूठा दावा कर दिया कि स्वास्थ्य विभाग ने मुझे फोन किया पर मैंने रिसीव नहीं किया। यह असत्य बयान मेरे दर्द पर नमक छिड़कने जैसा है।व्हाट्सएप कॉल करके मुझपर मामला ठंडा करने का दवाब बनाया जा रहा है।”   पत्रकारों ने प्रशासनिक तानाशाही पर जताया तीखा विरोध   पत्रकारों ने कहा कि यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति का दुख नहीं, बल्कि पूरे जिले में फैली संवेदनहीन कार्यशैली की पहचान है। बैठक में जनसम्पर्क विभाग के एक व्हाट्सएप ग्रुप को लेकर भी कड़ी नाराज़गी व्यक्त की गई। पत्रकारों ने बताया कि इस ग्रुप को अक्सर पत्रकारों को अप्रत्यक्ष रूप से धमकाने, दबाव बनाने और प्रशासनिक पक्ष को थोपने के “टूल” के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।पत्रकारों ने जनसंपर्क व्हाट्सएप ग्रुप का स्क्रीनशॉट दिखाते हुए कहा कि 25 साल के इतिहास में नौकरशाही इस हद तक बेकाबू नहीं हुई थी। चर्चा के बाद पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हो रहे इस अतिक्रमण के विरोध में जिले के सभी पत्रकारों ने सामूहिक रूप से जनसंपर्क व्हाट्सएप ग्रुप लेफ्ट कर अपना पहला औपचारिक विरोध दर्ज कराया।   मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तैयार — दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नाम एक विस्तृत ज्ञापन भेजा जाएगा। ज्ञापन में इन मांगों को शामिल किया गया है — पत्रकार मुकेश नायक के साथ हुए अमानवीय व्यवहार की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच गलत जानकारी प्रसारित करने वाले तथा संवेदनहीन रवैया अपनाने वाले दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई जिले में “प्रशासनिक आतंकवाद” की बढ़ती प्रवृत्ति पर तत्काल रोक शासन की छवि खराब करने वाले अधिकारियों को जशपुर जिले से हटाया जाए स्वास्थ्य सेवाओं और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाए पत्रकारों ने कहा कि यदि एक पत्रकार को न्याय नहीं मिलता, तो आम जनता की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।   बैठक में उपस्थित पत्रकार वरिष्ठ पत्रकार विष्णु नारायण जोशी, विनोद शर्मा, रविन्द्र थवाईत, संतोष चौधरी, राजेश पांडेय, विकास पांडे, दीपक वर्मा, प्रदीप तिग्गा, नवीन ओझा, दीपक सिंह, संजीत यादव, प्रियल जिंदल, सागर जोशी, कुंदन सिंह, शैलेन्द्र चिंतानवीस, एजाज खान, धवलेश्वर सिंह, मयंक शर्मा, तरुण शर्मा, सुनील सिन्हा, निरंजन मोहंती, रुद्रदामन पाठक, नीतीश यादव, राजेश राम भगत, मुकेश नायक, सोनू जायसवाल सहित अनेक पत्रकार उपस्थित रहे।वहीं इस मामले पर विजय त्रिपाठी, रमेश शर्मा, प्रशांत सहाय, योगेश थवाईत, सुरेन्द्र चेतवानी, शिव प्रताप सिंह, मिथलेश साहू, श्याम चौहान समेत कई वरिष्ठ पत्रकारों ने भी प्रशासनिक तानाशाही पर तीखा विरोध दर्ज किया है। पत्रकारों ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष मुकेश नायक को न्याय दिलाने के साथ-साथ जिले में प्रशासनिक जवाबदेही की स्थापना के लिए है। उन्होंने कहा कि “जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और जिले में मानवीय व जवाबदेह प्रशासन सुनिश्चित नहीं होता, तब तक यह मुद्दा लगातार उठाया जाएगा।”