गए थे लकड़ी चुराने,हाथी ने जान ले ली,वन विभाग ने चोरी की लकड़ी समेत तीन बाईक बरामद की,डीएफओ जितेंद्र ने दी अहम जानकारी

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जशपुर – लैलूंगा शहर के अंदर घूमने वाले लोनर हाथी ने जंगल में लकड़ी चोरी करने गए एक ग्रामीण को कुचलकर मार डाला।डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि बीट फारेस्ट ऑफिसर ने घटना से पहले ग्रामीणों को हाथी के होने की सूचना देते हुए जंगल से खदेड़ा था लेकिन मृतक दुबारा जंगल चला गया था।घटना रविवार शाम की बताई जा रही है। दरअसल, जशपुर जिले के 4 रेंज  तपकरा,पत्थलगांव,कुनकुरी और बगीचा रेंज के गांवों में विगत दो दशकों से हाथी-मानव द्वंद्व चल रहा है।ताजा घटना तपकरा रेंज के अम्बाकछार गांव से लगे जंगल में घटी है जहां रविवार की शाम को डोंगादरहा गांव का अमीर एक्का उम्र 50 वर्ष जंगल में लकड़ी चोरी करने गया था।जहां लैलूंगा रेंज से तपकरा रेंज में आये हाथी से सामना हुआ और हाथी ने उसे कुचलकर मार डाला।   वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लोनर हाथी पर ड्रोन से नजर रखी जा रही थी और उसके विचरण क्षेत्र के आसपास के गांवों में लोगों को अलर्ट भी किया जा रहा था। वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय खबर जनपक्ष को बताया कि ग्रामीणों के द्वारा नशे में और जिद में जंगल जाने के कारण ज्यादातर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं।बीते 10 सालों से वन विभाग द्वारा जागरूकता कार्यक्रम करने का असर रहा कि हाल के वर्षों में हाथी-मानव संघर्ष में कमी आई है।इस मामले में चूंकि जंगल में लकड़ी चोरी करने 4 लोग घुसे थे जिनके खिलाफ वन अधिनियम की कार्रवाई की जा रही है।तीन मोटरसाइकिल और चोरी की हुई लकड़ी बरामद किया गया है।मृतक का शव बरामद कर पोस्टमार्टम पश्चात शव परिजनों को सौंप दिया गया है।

CRPF 76 जवानों की शहीदी पर उनके गाँव पहुंचा,दी श्रद्धांजलि,अब हर वर्ष इसी दिन ताड़मेटला के शहीदों को करेंगे याद

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जशपुर –  जिले के बरांगजोर गांव का बेटा शहीद लेओस खेस के स्मारक में सीआरपीएफ ने शहीद की विधवा,ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के साथ शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।आज ही के दिन 6 अप्रैल 2010 को दंतेवाड़ा के ताड़मेटला गांव में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के 76 जवानों की निर्मम हत्या की थी।जिसमें सिपाही लेओस खेस शहीद हुए। दरअसल,सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल आईपीएस अनीस दयाल सिंह के निर्देशानुसार व साकेत कुमार सिंह,IPSमहानिरीक्षक छत्तीसगढ़ सेक्टर, राज कुमार,उप महानिरीक्षक ग्रुप सेंटर बिलासपुर के मार्गदर्शन में आज के दिन चिंतलनार ताड़मेटला नक्सली हमले में शहीद हुए सभी 76 जवानों के गांवों में सीआरपीएफ के अधिकारी पहुंचकर उन्हें अपनी श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे हैं।इसी कड़ी में कुनकुरी थाना इलाके के बरांगजोर गांव में भी लेओस खेस के शहीद स्मारक पर ग्रुप सेंटर बिलासपुर से असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार ,इंस्पेक्टर मोहम्मद परवेज जवानों के साथ पहुंचे हैं। असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार ने इस मौके पर बताया कि 62 बटालियन के शहीद सिपाही लेओस खेस का जन्म 1 मार्च 1968 को हुआ था। 26 दिसम्बर 1995 में लेओस ग्रुप केंद्र रामपुर और 62 बटालियन में तैनात रहे।दंतेवाड़ा में तैनाती के दौरान 6 अप्रैल 2010 को चिंतलनार से नक्सली गतिविधियों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए तलाशी अभियान में अपनी पार्टी के साथ निकले थे।तभी ताड़मेटला गांव में घात लगाए बैठे नक्सलियों ने उनकी पार्टी पर हमला कर दिया जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के बहादुर सिपाही लेओस खेस समेत 76 जवान शहीद हो गए।जिन्हें याद करते हुए परिवार के लोग भावुक हो रहे हैं और अपने बेटे/भाई के बलिदान पर गर्व भी कर रहे हैं। इससे पहले सीआरपीएफ की ओर से शहीद की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर सलामी दी गई।फिर असिस्टेंट कमांडेंट ने शहीद लेओस की विधवा कलिस्ता को शाल ओढ़ाकर सम्मानित करते हुए हौसला बढ़ाया। कलिस्ता अपनी दो बेटियों के साथ अपने पति को याद करते हुए बार-बार भावुक हो रही थी।गांव के सरपँच पेत्रुस खेस ने इस मौके पर कहा कि आज के दिन मेरा दोस्त देश के लिए उग्रवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गया।यह परिवार के लिए काफी दुखदायी है।हम सब गांव के लोग देश के अपनी जान देने वाले जवान के परिवार के साथ खड़े हैं और शहीद की पत्नी को हर राष्ट्रीय पर्व में मुख्य अतिथि बनाकर उनका सम्मान भी करते हैं। शहीद जवान की बहन सरोज खेस ने कहा कि मुझे मेरे भाई की शहादत पर गर्व है।उसकी कुर्बानी बेकार नहीं गई है।उसकी वीरता की कहानी सुनकर बेटी भी फौज में जाने की तैयारी कर रही है।

मुख्यमंत्री ने 8 साल की बच्ची को दिया नया जीवन,अँतड़ी में आलपिन चले जाने से बच्ची का जीवन खतरे में,रायपुर में हुआ ईलाज, सीएम कैंप बगिया से मरीजों को मिल रहा नया जीवन

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जशपुर – खाना खाने के बाद,दांत साफ करते समय आलपीन  निगल जाने से संकट में फंसी 8 साल की बच्ची को सीएम कैम्प बगिया की पहल से नया जीवन मिला है। रायपुर के डीकेएस अस्पताल में सफल आपरेशन के बाद बच्ची घर लौट कर स्वास्थ्य लाभ ले रही है। मरीज के माता पिता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का अभार जताया है। जिले के फरसाबहार ब्लाक के डोंगादरहा निवासी संध्या राउत के पिता रविशंकर ने बताया कि लगभग 1 माह पूर्व संध्या खाना खाने के बाद आलपिन से दांत साफ करते समय उसे निगल गई। जिस समय आलपीन मासूम के पेट में गया वह खुला हुआ था। पेट की अंतड़ियों में फंसी आलपीन के चुभने से मासूम को भयंकर दर्द होने लगा। दर्द से बैचेन संध्या का रो रो कर बुरा हाल हो गया। संध्या के माता पिता ने उसकी जान बचाने के लिए स्थानीय अस्पताल में जांच कराया। चिकित्सकों ने एक्सरे के माध्यम से पेट में फंसे हुए आलपीन का पता लगाया और इसे निकालने की भी कोशिश की लेकिन इसमें वे सफल नहीं हो सके। चिकित्सकों ने रवि शंकर को किसी बड़े अस्पताल में ले जा कर,आपरेशन कराने की सलाह दी लेकिन आर्थिक तंगी ने रवि शंकर का रास्ता रोक लिया। ऐसे में उन्होनें संध्या के उपचार में सहायता के लिए जिले के कांसाबेल ब्लाक के बगिया में स्थित सीएम कैम्प में गुहार लगाई। मासूम की गंभीर स्थिति को देखते हुए सीएम कैम्प ने तत्काल स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया और उसके उपचार के लिए रायपुर के डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में व्यवस्था की। यहां चिकित्सकों ने पीड़ित संध्या की जांच करने के बाद,पेट का आपरेशन कर,अंतड़ी में फंसे हुए पिन को बाहर निकाल कर,उसे नया जीवनदान दिया है,और समुचित इलाज कराकर वापस घर लौट आई है। पथरी का भी हुआ उपचार पेट में फंसे हुए आलपीन के दर्द से परेशान संध्या को जब उपचार के लिए मातापिता डीकेएस अस्पताल लेकर पहुंचे तो डाक्टरों ने जांच के दौरान पाया कि मासूम संध्या को पथरी की भी समस्या है जो आगे चल कर,उसके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। आलपीन निकालने के साथ ही चिकित्सकों ने संध्या को पथरी की समस्या से भी निजात दिला दीlबच्ची की जान बचाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का परिजनों ने आभार जताया है।

C.A.A. पर भारत में चर्चाओं की ढेर से यह सच निकलकर आया सामने,मुसलमानों का डर कितना सही कितना गलत,,,पढ़िए ‘जनपक्ष’ की यह विशेष रिपोर्ट

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(जनपक्ष : सेंट्रल डेस्क) भारत में CAA इन दिनों खूब चर्चा में है।इस नए नागरिकता कानून को लेकर कई भ्रांतियां भी पैदा हो गई हैं।जिन्हें देखते हुए ‘जनपक्ष’ ने इस मुद्दे पर अध्ययनशील बुद्धिजीवियों से बात की।बातों से जो प्रतिक्रियाएं,जो प्रश्न निकल कर लोगों के जेहन में तेजी से घूम रही हैं उनका प्रतिवाद या कहें जवाब यूँ मिला है। प्रतिक्रिया संख्या एक  सीएए विभाजनकारी है, मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने के लिए है, भेदभाव करता है क्योंकि नागरिकता धर्म पर आधारित है। यह श्रीलंकाई तमिलों के खिलाफ है और ध्रुवीकरण तथा समुदायों के बीच मनमुटाव पैदा करने का एक प्रयास है। काउंटर सीएए मुसलमानों के खिलाफ नहीं है। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) 2019 एक ऐसा कानून है जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धर्म के आधार पर उत्पीड़न से भागकर आए अल्पसंख्यकों की दुर्दशा को संबोधित करता है। सीएए का उद्देश्य इन उत्पीड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को शीघ्रता से नागरिकता प्रदान करना है। सीएए भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने का उल्लंघन नहीं करता है और न ही यह किसी भारतीय नागरिक के नागरिकता अधिकार को प्रभावित करता है। यह दावा कि सीएए किसी विशेष समुदाय के खिलाफ है, निराधार है। यह नागरिकता देने का कानून है, किसी की नागरिकता छीनने का नहीं। भारत में मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अनुसार, दुनिया के किसी भी देश से किसी भी धर्म का कोई भी व्यक्ति कानूनी रूप से भारत की यात्रा/प्रवास कर सकता है । इसके अलावा 1955 अधिनियम की तीसरी अनुसूची या धारा 5 के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 6 में उल्लिखित शर्तों को पूरा करने पर भारतीय नागरिक भी बन सकता है। सीएए को किसी ख़ास वजह से जान बूझ कर रमज़ान महीने की शुरुआत में लागू किया गया ऐसा बिलकुल भी नहीं है। यह केवल पड़ोसी देशों के विभिन्न अन्य उत्पीड़ित समुदायों को नागरिकता देने से संबंधित है जिसके लिए प्रक्रिया काफी समय से चल रही थी। इस संबंध में भारतीय मुसलमान किसी भी तरह से प्रभावित नहीं हैं। जहां तक बात है श्रीलंकाई तमिलियों की तो सीएए दुनिया भर के मुद्दों का सर्वव्यापी समाधान नहीं है और भारतीय संसद से दुनिया के विभिन्न देशों में होने वाले संभावित उत्पीड़न पर कार्यवाही करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। जहां तक श्रीलंका का सवाल है, केंद्र सरकार ने उक्त विषय को अलग से और स्वतंत्र रूप से निपटाया है, जिसकी संबंधित मुद्दे से कोई तुलना नहीं है। भारत सरकार हमेशा एक विशिष्ट समस्या के समाधान के लिए काम करती रही है। 1947 के बाद से भारत सरकार ने अलग-अलग समय पर, सभी दलों की अलग-अलग सरकारों ने श्रीलंकाई नागरिकों को नागरिकता प्रदान की है। ऐसे 4 लाख 61 हजार लोगों को नागरिकता दी गई. उन श्रीलंकाई शरणार्थियों में से दो लाख 16 हजार शरणार्थी वापिस श्री लंका भी लौट गये। जब भी उत्पीड़ित शरणार्थियों ने भारत में सुरक्षित शरण के लिए आह्वान किया है, भारत ने हमेशा उनके लिए अपनी बाहें खोल दी हैं। भारत धर्मनिरपेक्ष लोकाचार और समानता में विश्वास करता है, और संविधान विभिन्न धर्मों का पालन करने वाले लोगों को धर्म की स्वतंत्रता की अनुमति देता है। इसके अलावा, ऐसे 50 देश हैं जिनका मोटे तौर पर राज्य धर्म इस्लाम है और उनमें से 11 शरिया कानूनों का पालन करते हैं जो धर्मनिरपेक्षता के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है। “धर्म की स्वतंत्रता” के किसी भी सिद्धांत का उल्लंघन करने के बजाय सीएए वर्गीकृत समुदायों की “धर्म की स्वतंत्रता” की रक्षा करना चाहता है, जिन्हें विशेष पड़ोसी देशों में अपने संबंधित धर्मों को व्यक्त करने और अभ्यास करने के लिए सताया गया है। संविधान के अनुच्छेद 14 द्वारा गारंटीकृत कानूनों की समान सुरक्षा का मतलब यह नहीं है कि सभी कानून चरित्र में सामान्य और लागू होने में सार्वभौमिक होने चाहिए और राज्य के पास अब कानून के प्रयोजनों के लिए व्यक्तियों या चीजों को अलग करने और वर्गीकृत करने की शक्ति नहीं है। नागरिकता के लिए आवश्यक आवश्यकताओं को सुरक्षित करने के लिए वर्गीकरण के लिए कानून बनाने का अधिकार संसद को वैध रूप से है। असंख्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, अपने अनुभव से समृद्ध और लोगों की इच्छा से मजबूत होकर, विधायिका को अपने ज्ञान का प्रयोग करने में काफी स्वतंत्रता प्राप्त है। किसी विशेष वस्तु या उद्देश्य की प्राप्ति के लिए बनाए गए कानून को सर्वमान्य होने की आवश्यकता नहीं है। विधायिका यह निर्धारित कर सकती है कि इस तरह के कानून के दायरे में वह किन श्रेणियों को शामिल करेगी और केवल इसलिए कि कुछ श्रेणियां उसी स्तर पर खड़े होने का दावा करती हैं, जो कानून में शामिल नहीं हैं, वही कानून को प्रस्तुत नहीं करेगा जो कि किया गया है। किसी भी तरह से भेदभावपूर्ण या अधिकारातीत तरीके से अधिनियमित किया गया सीएए की अधिसूचना कई हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद की गई थी। 2020 में अधिनियम पारित होने के बाद से यह प्रक्रिया जारी थी। महात्मा गांधी ने 26 सितंबर, 1947 को एक प्रार्थना सभा में घोषणा की थी कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू और सिख यदि वहां नहीं रहना चाहते हैं, तो उन्हें भारत लौट आना चाहिए और उन्हें स्वीकार करना भारत सरकार का कर्तव्य है। उन्हें रोजगार, मतदान का अधिकार देना और खुशहाल बनाना भी भारत सरकार का पहला कर्तव्य है।   यह नागरिकता देने का कानून है, नागरिकता छीनने का नहीं। यह अधिनियम पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करता है। अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी भी भारतीय नागरिक, विशेषकर मुसलमानों को प्रभावित करता हो। मुस्लिम समुदाय देश का अभिन्न अंग है और सीएए उनकी नागरिकता पर बिल्कुल भी प्रभाव नहीं डालता है। वे भारत के नागरिक बने रहेंगे. ध्रुवीकरण के लिए निहित दलों द्वारा अधिनियम के संबंध में गलत सूचना फैलाई जा रही है। यह धर्मनिरपेक्षता के पोषित सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं करता है। उत्तरपूर्वी राज्यों में प्रतिक्रियाएं संख्या दो CAA असम समझौते के खिलाफ है। सीएए असम के स्वदेशी समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। सीएए से उनकी संवैधानिक, राजनीतिक, भाषाई, सांस्कृतिक और पहचान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।CAA से बांग्लादेश से आए करीब 15-20 लाख लोगों को असम में नागरिकता मिलेगी। सीएए हिंदू बांग्लादेशियों के लिए असम में प्रवेश … Read more

बेमौसम बारिश से फसलों का भारी नुकसान, मुख्यमंत्री साय ने कहा- ‘किसान भाइयों को मायूस होने की जरूरत नहीं , नुकसान का आकलन किया जा रहा’

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. फसलों को भारी नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है. जिसके लिए एक तरफ जहां पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा है कि  “राजनांदगांव व कवर्धा ज़िलों सहित पूरे छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुक़सान पहुंचा है। राज्य सरकार से अनुरोध है कि किसानों को तत्काल मुआवजा दिया जाए। यथाशीघ्र नुक़सान का आंकलन करके बीमा की राशि भी दिलवाई जाए।” वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स पर कहा कि “बेमौसम बारिश और ओले गिरने से फसलों को हानि हुई है। पर इससे किसान भाइयों को मायूस होने की जरूरत नहीं है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है। हमारी सरकार किसानों के हितों के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।” यानि बेमौसम बारिश से हताहत हुए सभी किसानों को मुआवजा दिया जाएगा. जिसके लिए नुकसान का आकलन भी शुरू किया जा चुका है.