कुनकुरी में अग्रवाल समाज का प्रदर्शन, नगर पंचायत अध्यक्ष विनयशील गुप्ता के खिलाफ एफआईआर की मांग,,देखें तस्वीरें

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कुनकुरी, 11 सितम्बर 2025/ कुनकुरी शहर में आज अग्रवाल समाज ने नगर पंचायत अध्यक्ष विनयशील गुप्ता की फेसबुक पोस्ट से नाराज होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। समाज के लोगों ने रैली निकालते हुए पुतला दहन किया और थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर विनयशील के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। अग्र समाज के संभागीय अध्यक्ष पवन अग्रवाल ने कहा कि “गणेश विसर्जन के दौरान हुए सड़क हादसे में चार लोगों की मौत हुई थी। इस पर 50 लाख रुपए मुआवजा मांगना जायज है, लेकिन किसी एक समाज के लिए अलग मांग करना और यह कहना कि फलाने समाज की कीमत इतनी और अन्य समाज की कीमत इतनी—यह बिल्कुल गलत है। राजनीति जातिवाद की नहीं होनी चाहिए। जातिवाद में बयान देने से समाज में विद्वेष फैलता है। इसी कारण आज पूरे संभाग के सभी जिलों के थानों में एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।” अग्र समाज के जिला सचिव अमित अग्रवाल ने विनयशील गुप्ता के फेसबुक पोस्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “बगीचा के जुरूडांड में हुई घटना में सरकार ने मृतकों के वारिसों को पांच-पांच लाख रुपए का मुआवजा दिया। उससे असंतुष्ट होकर विनयशील ने फेसबुक पर समाज को टारगेट करते हुए टिप्पणी की कि अग्रवाल समाज के व्यक्ति की जान की कीमत 50 लाख और अन्य समाज—जिनमें उन्होंने तीन-चार समाजों का नाम लिया—उनकी कीमत पांच लाख। आखिर अग्रवाल समाज को टारगेट करने का उद्देश्य क्या था, यह मैं समझ नहीं पा रहा हूं। उनकी इस टिप्पणी से पूरे अग्रवाल समाज में आक्रोश व्याप्त है।” वहीं, अग्र समाज के जिलाध्यक्ष मुरारीलाल अग्रवाल ने कहा कि “अग्रवाल समाज के लोग सभी राजनीतिक दलों में हैं। विनयशील की टिप्पणी से समाज में नाराजगी है और हम उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए थाने पहुंचे हैं।” फिलहाल, कुनकुरी थाने में अग्रवाल समाज ने थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंप दिया है। पुलिस ने विनयशील गुप्ता के खिलाफ शिकायत दर्ज कर ली है। बता दें कि 2 सितम्बर को बगीचा थानांतर्गत ग्राम जुरूडांड में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान एक तेज रफ्तार बोलेरो वाहन भीड़ में घुस गया था। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई और करीब 22 लोग घायल हुए थे। घटना के बाद कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार से मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख रुपए और गंभीर घायलों को 10-10 लाख रुपए का मुआवजा देने की मांग की थी। इसी मुद्दे पर नगर पंचायत अध्यक्ष विनयशील गुप्ता ने सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ लगातार मुखर होकर टिप्पणी कर रहे हैं।

भारत के राष्ट्रीय अध्यापक विनोबा भावे की जयंती पर विशेष लेख,पढ़ें विनायक से विनोबा तक का सफर

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आचार्य विनोबा भावे / जयंती पर विशेष आलेख जन्म : 11 सितंबर 1895 मृत्यु : 15 नवंबर 1982   आज भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और गांधीवादी नेता, संत विनोबा भावे को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन। इन्हें महात्मा गांधी का आध्यात्मिक उत्तराधिकारी माना जाता है, और भारत का राष्ट्रीय अध्यापक भी कहा जाता है, जिस कारण लोग संत विनोबा भावे को आचार्य कहकर भी संबोधित करते हैं।   आचार्य विनोबा भावे का जन्म 11 सितंबर, 1895 को महाराष्ट्र के कोलाबा ज़िले के गागोड गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका मूल नाम ‘विनायक नरहरि भावे’ था। उनके पिता का नाम नरहरि शंभू राव व माता का नाम रुक्मिणी देवी था। उनकी माता एक विदुषी महिला थी। आचार्य विनोबा भावे का ज़्यादातर समय धार्मिक कार्य व आध्यात्म में बीतता था। बचपन में वह अपनी मां से संत तुकाराम, संत ज्ञानेश्वर और भगवत् गीता की कहानियां सुनते थे। इसका प्रभाव, उनके जीवन पर काफी गहरा पड़ा और इस वजह से उनका रुझान, आध्यात्म की तरफ बढ़ गया।   आगे चलकर विनोबा भावे ने रामायण, कुरान, बाइबल, गीता जैसे अनेक धार्मिक ग्रंथों का, गहन अध्ययन किया। वह एक कुशल राजनीतिज्ञ, और अर्थशास्त्री भी थे। उनका संपूर्ण जीवन साधू, सन्यासियों व तपस्वी की तरह बीता। इसी कारण, उनको संत कहकर संबोधित किया जाने लगा।   वह इंटर की परीक्षा देने के लिए 25 मार्च, 1916 को मुंबई जाने वाली रेलगाड़ी में सवार हुए, परंतु उस समय उनका मन स्थिर नहीं था। उन्हें लग रहा था कि वह जीवन में जो करना चाहते हैं, वह डिग्री द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता। उनके जीवन का लक्ष्य, कुछ और ही था।   अभी उनकी गाड़ी सूरत पहुंची ही थी कि उनके मन में हलचल होने लगी। गृहस्थ जीवन या सन्यास, उनका मन दोनों में से किसी एक को नहीं चुन पा रहा था। तब थोड़ा विचार करने के बाद, उन्होंने संन्यासी बनने का निर्णय लिया, और हिमालय की ओर जाने वाली गाड़ी में सवार हो गए।   1916 में मात्र 21 वर्ष की आयु में, उन्होंने घर छोड़ दिया और साधु बनने के लिए, काशी नगरी पहुंच गए। वहां पहुंचकर, उन्होंने महान पंडितों के सानिध्य में, शास्त्रों का गहन अध्ययन किया। उस समय, स्वतंत्रता आंदोलन भी अपनी चरम सीमा पर था।   महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से लौटकर भारत आ गए थे। तब विनोबा जी ने अहमदाबाद के कोचरब आश्रम में, गांधी जी से पहली मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उनका जीवन बदल गया और उन्होंने अपना पूरा जीवन गांधीजी को समर्पित कर दिया।   1921 से 1942 तक, वह अनेकों बार जेल गए। उन्होंने 1922 में नागपुर में सत्याग्रह किया, जिसके बाद उनको गिरफ्तार कर लिया गया। 1930 में विनोबा जी ने, गांधीजी के नेतृत्व में नमक सत्याग्रह को अंजाम दिया। 11 अक्टूबर, 1940 को प्रथम सत्याग्रही के रूप में गांधी जी ने विनोबा भावे को चुना।   समय के साथ गांधीजी और विनोबा जी के संबंध काफी मज़बूत होते गए। वह गांधी जी के आश्रम में रहने लगे, और वहां की गतिविधियों में हिस्सा लेने लगे। आश्रम में ही उनको विनोबा नाम मिला।   विनोबा भावे ने गरीबी को खत्म करने के लिए, काम करना शुरू किया। 1950 में उन्होंने, सर्वोदय आंदोलन आरंभ किया। इसके तहत, उन्होंने ‘भूदान आंदोलन’ की शुरुआत की। 1951 में, जब वह आंध्रप्रदेश का दौरा कर रहे थे, तब उनकी मुलाकात, कुछ हरिजनों से हुई, जिन्होंने विनोबा जी से 80 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की विनती की।   विनोबा जी ने ज़मींदारों से आगे आकर अपनी ज़मीन दान करने का निवेदन किया, जिसका काफी ज़्यादा असर देखने को मिला और कई ज़मींदारों ने अपनी ज़मीनें दान में दीं। वहीं इस आंदोलन को पूरे देश में प्रोत्साहन मिला। 17 सितम्बर 1992 को हज़ारीबाग़ में इनके नाम पर “विनोबा भावे विश्वविद्यालय” इनके भूदान आंदोलन से प्राप्त जमीन पर स्थापित किया गया। विनोबा भावे जी को भूदान आंदोलन में सबसे ज्यादा जमीन हज़ारीबाग़ में मिली थी।   1959 में उन्होंने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए, ब्रह्म विद्या मंदिर की स्थापना की। स्वराज शास्त्र, गीता प्रवचन और तीसरी शक्ति उनकी लिखी किताबों में से प्रमुख है।   नवंबर 1982 में विनोबा भावे गंभीर रूप से बीमार हो गए और उन्होंने अपने जीवन को त्यागने का फैसला किया। उन्होंने जैन धर्म के संलेखना-संथारा के रूप में भोजन और दवा को त्याग दिया और इच्छा पूर्वक मृत्यु को अपनाने का निर्णय लिया। 15 नवंबर, 1982 को विनोबा भावे ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

डॉ. ग्रेस ने जुमाइकेला में स्कूली बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य और लक्ष्य निर्धारण के दिए टिप्स

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जशपुर,10 सितम्बर 2025 –  ख्यातिप्राप्त मनोचिकित्सक डॉ. ग्रेस कुजूर मंगलवार को कांसाबेल विकासखंड के जुमईकेला स्थित डॉन बोस्को इंग्लिश मीडियम स्कूल और जनता हायर सेकेंडरी स्कूल की विशेष कार्यशाला में पहुँचीं। इस अवसर पर विद्यालयों के प्राचार्यों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यशाला में डॉ. ग्रेस ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझाते हुए बुद्धि बढ़ाने के कई उपयोगी टिप्स दिए। उन्होंने मोबाइल फोन के जिम्मेदाराना उपयोग की बात करते हुए कहा कि “मोबाइल को पढ़ाई और ज्ञान बढ़ाने का साधन बनाना चाहिए, न कि केवल मनोरंजन का।’’ साथ ही उन्होंने स्क्रीन टाइम को कम करने और उसका सही उपयोग करने के उपाय भी बताए। डॉ. ग्रेस ने छात्रों को जीवन में लक्ष्य निर्धारण और मानसिक तैयारी पर जोर देते हुए कहा कि चाहे कोई भी सपना हो—डॉक्टर, इंजीनियर, पुलिस अधिकारी, शिक्षक या किसान बनने का—उसे हासिल करने के लिए पहले मानसिक रूप से तैयार होना जरूरी है। उन्होंने चेतन और अवचेतन मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को सरल भाषा में समझाते हुए बताया कि जब हम किसी लक्ष्य के बारे में लगातार सोचते हैं तो हमारा दिमाग उसी दिशा में काम करने लगता है। इस अवसर पर डॉन बोस्को इंग्लिश मीडियम स्कूल के प्रिंसिपल पॉल तिर्की ने कहा कि “छात्र जीवन सीखने का काल है और इसे दिमाग से सीखा जाता है।” वहीं जनता हायर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल कांति तिर्की ने छात्रों को डॉ. ग्रेस की बातों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी भी साझा की गई कि डॉ. ग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को समर्थन देने के लिए अपनी जीवनगाथा पर बन रही फिल्म ‘अर्पण’ को समर्पित किया है। मानसिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले व्यक्तित्व आज के युग में विरले ही देखने को मिलते हैं। आभार व्यक्त करने मंच पर पहुँची छात्रा आलिया ने कहा कि इस कार्यशाला ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और लक्ष्य निर्धारण के प्रति एक नई दृष्टि दी।

स्टेट हाइवे पर गणेश विसर्जन जुलूस पर तेज रफ्तार बोलेरो चढ़ी, 3 की मौत, 22 से ज्यादा घायल

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उल्लास का माहौल मातम में बदला, घायलों में एक दर्जन की हालत गंभीर, आरोपी चालक गिरफ्तार जशपुर (छत्तीसगढ़)03 सितम्बर 2025 – छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में गणेश विसर्जन का जुलूस उस वक्त मातम में बदल गया जब एक तेज रफ्तार बोलेरो अनियंत्रित होकर भीड़ में घुस गई। यह हादसा बगीचा थाना क्षेत्र के जुरुडांड गांव में बीती रात करीब साढ़े दस बजे हुआ। घटना में 3 लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि 22 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इनमें से एक दर्जन से ज्यादा की हालत गंभीर बताई जा रही है। कैसे हुआ हादसा? जानकारी के मुताबिक, ग्रामीण गणेश प्रतिमा का ग्राम भ्रमण कर विसर्जन करने तालाब की ओर जा रहे थे। इसी दौरान अंबिकापुर से कुनकुरी की ओर जा रही बोलेरो ने अचानक भीड़ को अपनी चपेट में ले लिया। वाहन की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई लोग हवा में उछलकर दूर जा गिरे और कई लोग वाहन के नीचे कुचल गए। घटना के बाद गुस्साए लोगों ने चालक की जमकर पिटाई कर दी, जबकि वाहन में सवार अन्य लोग मौके से फरार हो गए। मृतकों की पहचान   इस दर्दनाक हादसे में जिनकी मौत हुई है, उनमें – अरविंद (19 वर्ष), पिता तोबियस केरकेट्टा विपिन कुमार प्रजापति (17 वर्ष), पिता देवनारायण खिरोवती यादव (32 वर्ष), पत्नी हरीश यादव शामिल हैं। घायलों का उपचार जारी घायलों को तुरंत बगीचा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां बीएमओ डॉ. सुनील लकड़ा और उनकी टीम ने पूरी रात इलाज किया। गंभीर घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया है। इस बीच सीएमएचओ डॉ. जी.एस. जात्रा ने पूरे स्वास्थ्य अमले को अलर्ट पर रखा है और घायलों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। मौके पर विधायक, कलेक्टर और एसएसपी हादसे की खबर मिलते ही जशपुर विधायक रायमुनि भगत रात में ही अस्पताल पहुंचीं और घायलों व परिजनों से मुलाकात कर हर संभव मदद का आश्वासन दिया। वहीं जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास और एसएसपी शशिमोहन सिंह भी देर रात अस्पताल पहुंचे। कलेक्टर ने बताया कि प्रशासन की ओर से मेडिकल ऑफिसर और दो नायब तहसीलदार को अंबिकापुर भेजा गया है ताकि घायलों के इलाज में किसी तरह की कमी न हो। पुलिस ने बोलेरो व चालक को पकड़ा एसएसपी शशिमोहन सिंह ने बताया कि बोलेरो और उसके चालक को पुलिस ने पकड़ लिया है। “प्रकरण की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” पूरे इलाके में शोक गणेश उत्सव के उल्लास के बीच हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। जहां तालाब से लौटते ग्रामीणों को उत्सव का समापन करना था, वहीं अचानक हुए हादसे ने पूरे क्षेत्र में मातम का माहौल पैदा कर दिया।

एसडब्ल्यूजेयू का जिला कार्यकारिणी घोषित,राहुल सिन्हा बने adhyksh

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रायपुर,02 सितंबर 2025 – पत्रकारिता एवं पत्रकार हितों के लिए समर्पित भारत के सबसे बड़े और पुराने राष्ट्रीय संगठन “इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन ” से सम्बध्द “स्टेट वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन छत्तीसगढ़” के जिला कार्यकारिणी की घोषणा एक सितंबर 2025 को की गई। सोमवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं प्रभारी जिला रायपुर दिलीप साहू की अनुशंसा से प्रदेश अध्यक्ष पी सी रथ ने अनुभवी पत्रकार राहुल सिन्हा (आकाशवाणी) को जिला अध्यक्ष, जिला सचिव के पद पर लविंदर पाल सिंघोत्रा व कोषाध्यक्ष अमित बाघ (आईएनडी 24) को मनोनीत किया। रायपुर जिला ईकाई में दो उपाध्यक्ष खोमन साहू ( विस्तार न्यूज) एवं अंबिका मिश्रा, दो सह-सचिव विक्की पंजवानी एवं वर्षा यादव ( झूठा सच ) बनाए गए हैं। जिला रायपुर के लिए मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सुधीर वर्मा ( स्वदेश न्यूज ) तथा जिज्ञासा चंद्रा (साधना न्यूज) को दिया गया है। राजधानी रायपुर जिला कार्यकारिणी सदस्यों में अजय रघुवंशी, आकाश शुक्ला, अंकुश शर्मा, निधि प्रसाद, स्वप्निल गौरखेड़े, स्नेहिल सराफ, श्रवण तम्बोली, खुशबू ठाकरे, हिमांशु पटेल, कुलभूषण ठाकुर, मोनिका दुबे शामिल हैं। संगठन सचिव सुधीर आज़ाद तम्बोली ने बताया कि संगठन विस्तार के लिए प्रदेश भर में सदस्यता अभियान जारी है, जिसमें रायपुर समेत प्रदेश के सभी जिलों से सदस्य जुड़ते जा रहे है, रायपुर जिला पदाधिकारियों तथा कार्यकारिणी की घोषणा पश्चात अब जल्द ही सभी जिलों में कार्यकारिणी गठित किया जा रहा है।

हिमालय अभियान पर निकली जशपुर की युवा टीम,कलेक्टर रोहित व्यास ने दी शुभकामनाएं

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जशपुर, 31 अगस्त 2025/ जशपुर से एक विशेष पर्वतारोहण दल हिमालयी अभियान के लिए रवाना हुआ है। दल में शामिल जशपुर के युवा पर्वतारोही हैं – रवि सिंह, तेजल भगत, रूसनाथ भगत, सचिन कुजुर और प्रतीक नायक। इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू है – आदिवासी संस्कृति और उसकी जड़ों से जुड़ाव। जशपुर की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय परंपराओं, प्रकृति-आधारित जीवनशैली और सामूहिकता की भावना से है। हिमालय की ऊँचाइयों पर इन युवाओं का पहुँचना केवल एक खेल उपलब्धि नहीं बल्कि इस बात का प्रतीक है कि कैसे आदिवासी समाज अपनी सांस्कृतिक ताकत और प्रकृति से गहरे रिश्ते को लेकर दुनिया के सामने खड़ा हो रहा है। दल के सदस्य अपनी संस्कृति और साहस अपने साथ लिए हिमालय की ओर बढ़ रहे हैं।   यह अभियान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन से संचालित हो रहा है। दल जशपुर से रांची के लिए रवाना हुआ, जहां से वे ट्रेन द्वारा दिल्ली पहुँचेंगे। दिल्ली से आगे टीम जगतसुख पहुँचेगी, जहाँ वे 4 सितम्बर तक की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके बाद 5 सितम्बर को टीम आधार शिविर (Base Camp) की ओर प्रस्थान करेगी।   दल को विदा करने के लिए जशपुर जिला प्रशासन एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। जशपुर कलेक्टर श्री रोहित व्यास, जशपुर के डीएफओ श्री शशि कुमार, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार और एसडीएम श्री विश्वास मस्के ने टीम को शुभकामनाएँ दीं और उनके सुरक्षित एवं सफल अभियान की कामना की।   इस अवसर पर कलेक्टर श्री व्यास ने कहा कि जशपुर की युवा प्रतिभाएँ इस अभियान के द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले और प्रदेश का नाम रोशन करने में योगदान प्रदान कर रही हैं। वहीं डीएफओ श्री शशि कुमार ने इसे जिले की उभरती खेल एवं साहसिक गतिविधियों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। विशेष रूप से, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, जो स्वयं एक अनुभवी पर्वतारोही हैं, ने दल के युवाओं को पर्वतारोहण और ट्रेकिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने सुरक्षा उपायों, ऊँचाई पर स्वास्थ्य प्रबंधन और टीम भावना की अहमियत पर बल देते हुए बच्चों को प्रेरित किया।   जशपुर के लोग भी इस अभियान को लेकर उत्साहित और गर्वित हैं। साथ ही स्थानीय जय जंगल कंपनी जो इस एक्सपीडिशन के स्पान्सर में से एक है, के संस्थापक समर्थ जैन का कहना है कि यह दल पूरे जिले के लिए प्रेरणा है और आने वाली पीढ़ियों को पर्वतारोहण तथा साहसिक खेलों की ओर अग्रसर करेगा। जगह-जगह लोग बच्चों के हौसले और साहस की चर्चा कर रहे हैं और सभी को उम्मीद है कि वे हिमालय से सफलता और गौरव की नई कहानियाँ लेकर लौटेंगे।   इस अभियान का नेतृत्व पर्वतारोही स्वप्निल राचेलवार एवं राहुल ओगरा कर रहे हैं।   साथ ही इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण संदेश है – पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति की दिशा में जागरूकता। यह पहल न केवल युवाओं को प्रकृति से जोड़ने का कार्य करेगी, बल्कि उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। हिमालय अभियान से यह संदेश भी जाएगा कि साहसिक खेलों और पर्वतारोहण के माध्यम से समाज को एक नई दिशा दी जा सकती है। इससे न केवल जशपुर बल्कि पूरे राज्य में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

जशपुर से हिमालय तक: जनजातीय युवाओं की ऐतिहासिक चढ़ाई की तैयारी

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जशपुर –  26 अगस्त 2025/ छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला जो अब तक अपनी हरियाली, झरनों और शांत वनों के लिए प्रसिद्ध रहा है, देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर की स्थापना के बाद अब एक और नई पहचान बनाने जा रहा है।जिले के आदिवासी युवा हिमालय की चोटियों पर अल्पाइन तरीके की रॉक क्लाइम्बिंग चढ़ाई के लिए निकलने की तैयारी कर रहे हैं। मियार वैली ट्राइबल अल्पाइन एक्सपेडिशन 2025 केवल एक पर्वतारोहण अभियान नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश और देश के लिए गर्व और उम्मीद की कहानी बन रहा है। इस अभियान के लिए अंतिम चरण में पाँच युवाओं का चयन किया गया है, जिनकी अपनी-अपनी कहानियाँ प्रेरणादायक हैं। रुसनाथ भगत जो एम.ए. हिस्ट्री के छात्र और एनसीसी कैडेट हैं, शहर में अपने लोकप्रिय नेपोलियन चाउमिन सेंटर चलाते हैं और कंटेंट क्रिएशन में भी सक्रिय हैं। तेजल भगत एम.एससी. बॉटनी की छात्रा, अपने गाँव बस्ता में एकता क्लब के ज़रिए शिक्षा और बाल अधिकारों के लिए काम करती हैं। सचिन कुजूर, एम.ए. हिस्ट्री के छात्र, जय हो एनजीओ से जुड़े रह चुके हैं और सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के साथ-साथ मंडार, एक पारंपरिक जनजातीय वाद्य, बजाने में माहिर हैं। प्रतीक, बी.कॉम स्नातक और एनएसएस वॉलंटियर, खेती करना पसंद करते हैं और परिवार का सहारा बनने के लिए बर्तन की दुकान में काम भी कर चुके हैं। वहीं रवि सिंह, बाइक मैकेनिक और साइकिलिंग के शौकीन, ने हाल ही में जशपुर का पहला देशदेखा क्लाइम्बिंग को. नामक एडवेंचर गाइडिंग कार्य बाकी प्रशिक्षित युवाओं के साथ शुरू किया है। टीम को जशपुर के जंगलों और आसपास की चट्टानों में कठोर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहाँ उन्हें कैंपिंग, ट्रैड क्लाइम्बिंग, रूट ओपनिंग, वाइल्डरनेस फर्स्ट एड और माउंटेन एथिक्स जैसी अहम तकनीकें सिखाई जा रही हैं। प्रशिक्षण की कमान स्वप्निल शिरीष रचेलवार, अमेरिका से डेव गेट्स, रनर्सग्च से सागर दुबे, प्रसिद्ध भारतीय कोच प्रतीक निनवाने वर्तमान में यू मुम्बा कबड्डी टीम के प्रमुख फिटनेस कोच और काफी मीडिया से ईशान गुप्ता जैसे अनुभवी प्रशिक्षकों के हाथों में है। यह प्रशिक्षण केवल शारीरिक तैयारी नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर भी केंद्रित है। जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार के इस अभियान को स्थानीय लोगों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़े पैमाने पर समर्थन मिला है। विश्व की सबसे बड़ी पर्वतारोहण उपकरण निर्माता कंपनी पेटज़ल ने भारत में अपने साझेदार अलाइड सेफ्टी इक्विपमेंट के साथ मिलकर आधिकारिक उपकरण प्रायोजक की भूमिका निभाई है। अद्वेनोम एडवेंचर और जय जंगल ने पौष्टिक और ऑर्गेनिक भारतीय शैली के एडवेंचर फ़ूड उपलब्ध कराने का जिम्मा उठाया है। रनर्सग्च्, एक प्रतिष्ठित एथलीट कोचिंग ब्रांड, टीम की शारीरिक और मानसिक मजबूती पर काम कर रहा है। इसके साथ स्पेन की प्रसिद्ध बार्सिलोना क्लाइम्ब्स और मिस्टिक हिमालयन ट्रेल्स ने गाइडिंग और बेसकैंप गतिविधियों में सहयोग दिया है। इस अभियान का संचालन पहाड़ी बकरा एडवेंचर कर रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ का प्रमुख औद्योगिक समूह हिरा ग्रुप इस पहल से प्रेरित होकर आधिकारिक प्रायोजक बना है। रेकी ऑउटडोर्स ने टीम को आधिकारिक पर्वतीय परिधान मुहैया कराए हैं, जबकि रेडपांडा ऑउटडोर्स और गोल्डन बोल्डर्स ने उपकरण सपोर्ट दिया है। आदि कैलाश वेलनेस पार्टनर के रूप में टीम के स्वास्थ्य और रिकवरी में सहयोग कर रहा है। मुख्य प्रायोजकों के अलावा कुल मिलाकर 15 कंपनियों ने अपना सहयोग प्रदान कर इसे शुरुआत से ही एक सफल अभियान बना दिया है। जशपुर से निकले ये पाँच युवा अब हिमालय की मियार वैली की ऊँचाइयों को छूने के सपने के साथ आगे बढ़ रहे हैं। ज्ञात रहे कि यह टीम 31 अगस्त को जशपुर से हिमाचल प्रदेश की ओर गंतव्य के लिए निकलेगी। एक महीने के इस अभियान पर जनजातीय युवक देश-विदेश के प्रसिद्ध माउंटेन क्लाइम्बर्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लीडर के तौर पर प्रतिभाग करेंगे। यह पहल केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश और देश के लिए एक प्रेरणा है। यह साबित कर रही है कि अवसर और सहयोग मिलने पर जंगलों और गाँवों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्वतारोही तैयार हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान आने वाले समय में भारतीय हिमालयी पर्वतारोहण की दिशा बदल सकता है और अगली पीढ़ी के अल्पाइन क्लाइम्बर्स इन्हीं अप्रत्याशित इलाकों से निकल सकते हैं। यह केवल एक चढ़ाई नहीं, बल्कि बदलाव की चढ़ाई है।

छत्तीसगढ़ में शुरू हुआ डॉ. हरविंदर मांकड़ की नई फिल्म ‘अर्पण’ का सफर, ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को समर्पित,

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कुनकुरी (जशपुर, छत्तीसगढ़): 22/08/2025 कुनकुरी की धरती पर आयोजित एक अद्वितीय और यादगार संध्या ने पूरे जशपुर ज़िले के लिए एक ऐतिहासिक पल रच दिया। इस अवसर पर प्रसिद्ध लेखक, कार्टूनिस्ट और फिल्म निर्देशक डॉ. हरविंदर मांकड़ को जी.के. साइकोथेरेपी एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर द्वारा विशेष रूप से मुंबई से आमंत्रित किया गया।   आदिवासी नृत्य से हुआ स्वागत डॉ. मांकड़ के आगमन पर सबसे पहले केरसई गाँव की आदिवासी जनजाति ने परंपरागत कर्मा नृत्य प्रस्तुत किया। इस नृत्य में आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली। स्थानीय कलाकारों ने ढोल-नगाड़ों और लोकगीतों की थाप पर डॉ. मांकड़ का स्वागत कर कार्यक्रम को और भी गरिमामयी बना दिया। आदिवासी समाज की कला और संस्कृति को इस अवसर पर विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया, जिसे देखकर सभी अतिथि भाव-विभोर हो उठे। इसके बाद महान कार्टूनिस्ट कुनकुरी जीके साइकोथेरेपी एंड रिहैबिलिटी सेंटर पहुंचे जहां छत्तीसगढ़ और झारखंड से पहुंचे लोगों ने आत्मीय स्वागत किया।मुख्य अतिथि के रूप में श्री मांकड़ ने विशिष्ट अतिथियों दीपक बड़ा,रोशन किरो ,नितेश महतो के साथ दीप जलाकर अर्पण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। श्री मांकड़ ने ‘प्योर सोल चिल्ड्रेन’ कुमारी नीति के हाथों अपनी किताब Journey of Soul का विमोचन हुआ। इसके बाद डॉ. हरविंदर मांकड़ ने अपनी प्रेरणादायी मोटिवेशनल क्लास में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा – “बच्चे सभी ईश्वर की अनुपम देन हैं। इन्हें भरपूर प्यार दीजिए, ये किसी से कम नहीं हैं। बस इन्हें सही इलाज और अपनापन दीजिए, यही इनकी असली ताक़त बनेगी।” उनके शब्दों ने न केवल विशेष बच्चों के अभिभावकों के दिलों को छुआ, बल्कि हर उस व्यक्ति को नई सोच दी जो समाज सेवा और मानवता की राह पर चलना चाहता है। विशेष बच्चों के उपचार में मील का पत्थर मानी जाने वाली डॉ. ग्रेस कुजूर ने अपने विचार रखते हुए कहा –“डॉ. हरविंदर मांकड़ का कुनकुरी आना किसी करिश्मे से कम नहीं है। उनका यहां आना और हमें अपना कीमती समय देना, हमारे लिए सौभाग्य की बात है। वे जिस आत्मीयता से विशेष बच्चों से जुड़े, वह इस क्षेत्र के लिए प्रेरणादायी है।” नई फिल्म “अर्पण” का निर्माण शुरू इस अवसर पर यह भी घोषणा की गई कि डॉ. हरविंदर मांकड़ कुनकुरी में ही डॉ. ग्रेस कुजूर पर एक डॉक्यूमेंट्री फिक्शन फिल्म का निर्माण कर रहे हैं। इस फिल्म का नाम है – “अर्पण”। यह फिल्म छत्तीसगढ़ के पर्यावरण अभियानों को बढ़ावा देने और प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को समर्पित है। इस फिल्म को स्वयं डॉ. हरविंदर मांकड़ ने लिखा और निर्देशित किया है। फिल्म के माध्यम से न केवल डॉ. ग्रेस कुजूर की अनूठी सेवाओं को दिखाया जाएगा, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया जाएगा कि प्रकृति और मानवता का संरक्षण साथ-साथ चलना चाहिए।   छत्तीसगढ़ की सुंदरता की सराहना की कार्यक्रम का संचालन  संतोष चौधरी ने किया। उन्होंने बताया कि डॉ. मांकड़ छत्तीसगढ़ की सुंदरता से गहराई तक प्रभावित हुए हैं। डॉ. मांकड़ के शब्दों में –“मैंने छत्तीसगढ़ से अधिक सुंदर जगह आज तक नहीं देखी। कुनकुरी की धरती सचमुच स्वर्ग के समान है। यहाँ की सादगी, अपनापन और प्राकृतिक सौंदर्य मन को छू लेने वाला है।” कुनकुरी के गणमान्य नागरिक और गायक अजय मूंदड़ा ने बताया कि यह ऐतिहासिक शाम न केवल विशेष बच्चों और उनके परिवारों के जीवन में नई उम्मीद लेकर आई, बल्कि पूरे जशपुर ज़िले के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई। आदिवासी कला, संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और मानवता की महक से सजी इस संध्या ने यह संदेश दिया कि सच्ची समृद्धि तभी संभव है जब हम समाज और प्रकृति दोनों को समानता और प्रेम के साथ आगे बढ़ने का अवसर दें। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने मोटू पतलू कॉमिक सीरीज लिखनेवाले लेखक और उन्हें उकेरनेवाले कार्टूनिस्ट डॉ हरविंदर को अपने संस्मरण बताए।

कुनकुरी खेल मैदान में ऐसे मनाया गया स्वतंत्रता दिवस,मुख्यमंत्री का संदेश पढ़ा गया, प्रभात फेरी और सांस्कृतिक कार्यक्रम ने मोहा मन

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  कुनकुरी,16 अगस्त 2025 – स्वतंत्रता दिवस का पर्व इस वर्ष कुनकुरी में ऐतिहासिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। नगर के खेल मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी एवं समारोह की मुख्य अतिथि श्रीमती कौशल्या साय ने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। इस अवसर पर उनकी बड़ी बहन एवं जनपद पंचायत अध्यक्षा श्रीमती सुशीला साय विशेष रूप से उपस्थित रहीं। ध्वजारोहण के बाद श्रीमती कौशल्या साय ने मंच से मुख्यमंत्री का जनता के नाम संदेश पढ़ा। इससे पूर्व नगर के सभी स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने प्रभात फेरी निकालकर शहर का भ्रमण किया। प्रभात फेरी का समापन जय स्तंभ चौक पर हुआ, जहां नगर पंचायत अध्यक्ष श्री विनयशील ने परंपरानुसार जय स्तंभ पर माल्यार्पण कर शहीद स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। जय स्तंभ उन वीर बलिदानियों की स्मृति का प्रतीक है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को आजादी दिलाई।   प्रभात फेरी के बाद खेल मैदान में मुख्य समारोह आयोजित हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि श्रीमती कौशल्या साय, जनपद अध्यक्ष श्रीमती सुशीला साय, नगर पंचायत अध्यक्ष श्री विनयशील सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बच्चों ने देशभक्ति से ओतप्रोत गीत, नृत्य और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिसने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम का संचालन अरविंद मिश्रा ने किया। स्वतंत्रता दिवस समारोह में पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग से सराबोर रहा।

ग्राम पंचायत भंडरी में धूमधाम से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस, नशामुक्ति का लिया संकल्प

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कुनकुरी/भंडरी,16 अगस्त 2025 – ग्राम पंचायत भंडरी में 79वां स्वतंत्रता दिवस बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। पंचायत भवन प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत सरपंच श्री वाल्टर कुजूर और उपसरपंच श्रीमती कविता मिंज की अगुवाई में भारत माता की तस्वीर पर माल्यार्पण और ध्वजारोहण से हुई। इस अवसर पर वार्ड पंच, वरिष्ठजन, महिला-पुरुष सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। समारोह में सरपंच वाल्टर कुजूर ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत आज विभिन्न विचारधाराओं के बीच संघर्ष का सामना कर रहा है, लेकिन जब बात देश की एकता और अखंडता की आती है तो पूरा देश एकजुट होकर हर परिस्थिति का सामना करता है। उन्होंने हाल ही में कश्मीर में निर्दोष नागरिकों की हत्या और उसके बाद पाकिस्तान से हुए संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरा देश सरकार और भारतीय सेना के साथ खड़ा रहा। सरपंच ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों को नमन करते हुए उनकी कुर्बानियों को याद किया। उपसरपंच श्रीमती कविता मिंज ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता आंदोलन में महिला क्रांतिकारियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने भंडरी पंचायत के गांवों में बढ़ती शराबखोरी पर चिंता व्यक्त की और सभी ग्रामीणों को नशा छोड़ने तथा समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में शासन की योजनाओं और बिहान समूह की सराहना करते हुए महिलाओं से इनसे जुड़ने का आग्रह किया। कार्यक्रम के दौरान रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को देशभक्ति से सराबोर कर दिया। अंत में सभी ग्रामीणों ने मिलकर गांव को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया।