# जशपुर कलेक्टर का युगांतकारी निर्णय: 70 साल बाद पहाड़ी कोरवाओं को मिलेगी उनकी ‘माटी’, छल से कब्जाई 31 एकड़ जमीन वापसी का आदेश

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# जशपुर कलेक्टर का युगांतकारी निर्णय: 70 साल बाद पहाड़ी कोरवाओं को मिलेगी उनकी ‘माटी’, छल से कब्जाई 31 एकड़ जमीन वापसी का आदेश AI GENERATED जशपुर . आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को लेकर जशपुर के कलेक्टर न्यायालय ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो पूरे प्रदेश के लिए ‘नजीर’ बन गया है। कलेक्टर रोहित व्यास ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए, वर्ष 1955 में छल-कपट के जरिए कब्जाई गई **पहाड़ी कोरवा** (राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र मानी जाने वाली विशेष पिछड़ी जनजाति) की **31.31 एकड़** भूमि के हस्तांतरण को ‘शून्य’ घोषित कर दिया है। यह फैसला इस मायने में क्रांतिकारी है कि इसने दशकों पुराने उस भ्रम को तोड़ दिया है कि ‘आदिवासी से आदिवासी’ के बीच हुए पुराने जमीन सौदों को चुनौती नहीं दी जा सकती। अधिवक्ता सत्यप्रकाश तिवारी अति पिछड़ी जनजाति (पहाड़ी कोरवा) के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। कलेक्टर न्यायालय में उनकी पैनी और तथ्यपरक पैरवी के कारण ही 70 साल पुराने इस पेचीदा मामले में न्याय की जीत संभव हो सकी। उन्होंने न्यायालय के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा कि किस प्रकार भोली-भाली जनजाति के लोगों को कानूनी दांव-पेच और धर्मांतरित व्यक्तियों द्वारा छल का शिकार बनाकर उनकी पैतृक संपत्ति हड़पी गई थी। ### **क्यों ऐतिहासिक है यह फैसला? (प्रमुख बिंदु)** न्यायालय ने सूक्ष्म कानूनी बारीकियों और दस्तावेजों का अध्ययन कर निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले:  * **धारा 170(ख) का कवच:** न्यायालय ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 170(ख) का दायरा अत्यंत व्यापक है। इसमें ‘प्रत्येक व्यक्ति’ शब्द शामिल है, जिसका अर्थ है कि यदि खरीदार आदिवासी भी है, लेकिन उसने छल या नियमों का उल्लंघन कर जमीन ली है, तो उसे संरक्षण नहीं मिलेगा।  * **1959 के पूर्व के नियमों का उल्लंघन:** कलेक्टर ने पाया कि 1959 की संहिता से पहले भी **मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1954** प्रभावी थी। उस समय भी जमीन हस्तांतरण की सूचना सक्षम अधिकारी को देना अनिवार्य था, जिसका पालन नहीं किया गया।  * **अवैध बैनामा:** तत्कालीन कलेक्टर या अधिकृत अधिकारी की अनिवार्य अनुमति के बिना किया गया विक्रय पत्र (रजिस्ट्री) कानूनी रूप से ‘अकृत एवं शून्य’ है।  * **कब्जा बनाम कागज:** न्यायालय ने स्वीकार किया कि भले ही कागजों में नाम हेरफेर से बदला गया, लेकिन जमीन पर आज भी भौतिक कब्जा पीड़ित पहाड़ी कोरवाओं का ही है। ### ** भूमि सुरक्षा पर बड़ा फैसला** अधिवक्ता सत्यप्रकाश तिवारी ने फैसले के बाद मीडिया को बताया कि: “यह आदेश उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो धर्मांतरण की आड़ में या आदिवासी पहचान का लाभ उठाकर विशेष पिछड़ी जनजातियों की जमीनों को कपटपूर्ण तरीके से हड़प रहे हैं। जशपुर कलेक्टर का यह फैसला उन हजारों आदिवासियों के लिए उम्मीद की किरण है जिनकी जमीनें दशकों पहले नियमों को ताक पर रखकर छीनी गई थीं।” ### **अंतिम आदेश: राजस्व रिकॉर्ड में सुधार के निर्देश** कलेक्टर जशपुर ने अनुविभागीय अधिकारी (SDO) के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया है। उन्होंने राजस्व विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं कि ग्राम करदनापाठ की विवादित 31.31 एकड़ भूमि को तत्काल मूल भू-स्वामी के विधिक वारिसों (भन्जू एवं अन्य) के नाम पर दर्ज (Mutation) कर रिकॉर्ड अपडेट किया जाए। छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह फैसला विशेष पिछड़ी जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु एक मील का पत्थर साबित होगा। यह जीत केवल भन्जू और उनके परिवार की नहीं, बल्कि उन सभी आदिम जनजातियों की है जो अपनी जमीन और पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

*हाथियों के बीच फंसे बुजुर्गों को वन विभाग ने बचाया* *पत्थलगांव परिक्षेत्र में 11 हाथियों के दल के बीच साहसिक रेस्क्यू, जनहानि टली*

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*हाथियों के बीच फंसे बुजुर्गों को वन विभाग ने बचाया* *पत्थलगांव परिक्षेत्र में 11 हाथियों के दल के बीच साहसिक रेस्क्यू, जनहानि टली* जशपुर वनमण्डल के परिक्षेत्र पत्थलगांव अंतर्गत ग्राम तिलडेगा क्षेत्र में हाथियों के दल के विचरण के दौरान एक बड़ी घटना सामने आई, जिसमें वन विभाग की तत्परता से दो बुजुर्गों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। DFO शशिकुमार ने बताया कि 24 मार्च 2026 की दरम्यानी रात को 11 हाथियों का एक दल कक्ष क्रमांक पी.एफ. 959 नंदनझरिया क्षेत्र में सारसमार एवं नंदनझरिया होते हुए तिलडेगा बस्ती के समीप पहुँच गया। इस दौरान हाथियों ने तिलडेगा भदरापारा निवासी जय कुमार नाग (40 वर्ष) के खेत में बने आवासीय घर को नुकसान पहुँचाना शुरू कर दिया। उस समय घर के अंदर उनके माता-पिता  बितन नाग (65 वर्ष) एवं श्रीमती राजमति नाग (60 वर्ष) मौजूद थे। हाथियों की आहट सुनकर जय कुमार नाग किसी तरह बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुँचे और तुरंत वन विभाग के गश्ती दल एवं रैपिड रिस्पॉन्स टीम (आरआरटी) को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुँचकर तत्काल कार्रवाई शुरू की। बी.एफ.ओ. दिनेश कुमार (बालाझर), बी.एफ.ओ. श्रीमती अनिता तेन्दुआ (तमता), आरआरटी सदस्य राम बिलास नाग, रविशंकर पैंकरा एवं रमेश पैंकरा तथा वाहन चालक पियारू लकड़ा ने समन्वित प्रयास करते हुए हाथियों को सुरक्षित रूप से खदेड़ा। काफी प्रयासों के बाद टीम ने घर के भीतर फंसे बुजुर्ग दंपत्ति का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उन्हें शासकीय वाहन से सुरक्षित गांव में पहुंचाया। इस साहसिक एवं त्वरित कार्रवाई के कारण किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। *लगातार निगरानी में है हाथियों का दल* – वर्तमान में 11 हाथियों का यह दल तिलडेगा क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए सुखरापारा परिसर के कक्ष क्रमांक आर.एफ. 958 में विचरण कर रहा है। वन विभाग द्वारा दल की सतत निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचाव किया जा सके। वन विभाग ने क्षेत्र के ग्रामीणों से अपील की है कि वे सतर्क रहें, विशेषकर रात्रि के समय अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें तथा किसी भी प्रकार की सूचना तुरंत वन विभाग को दें। वन विभाग जशपुर द्वारा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और जन-सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय प्रयास किए जा रहे हैं।

जशपुर में कृषि क्रांति 2.0: विधायक गोमती साय ने किया तीन दिवसीय भव्य मेले का आगाज़, देश भर की कंपनियों की नजर जशपुर के काजू और जीरा फूल चावल पर

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जशपुर में कृषि क्रांति 2.0: विधायक गोमती साय ने किया तीन दिवसीय भव्य मेले का आगाज़, देश भर की कंपनियों की नजर जशपुर के काजू और जीरा फूल चावल पर कुनकुरी (जशपुर) | 23 मार्च 2026 खास बातें (Highlights): उद्घाटन: पत्थलगांव विधायक गोमती साय ने फीता काटकर मेले की शुरुआत की। आयोजन: कुनकुरी कृषि महाविद्यालय में तीन दिवसीय ‘कृषि क्रांति एक्सपो 2.0’। बड़ी डील: जीरा फूल चावल, काजू, टाऊ और आम की खरीदी के लिए कंपनियों ने दिखाया भारी उत्साह। मकसद: किसानों और बड़ी कंपनियों के बीच सीधा व्यापारिक संवाद (Buyer-Seller Meet)। जशपुर – छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में खेती-किसानी को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है। कुनकुरी स्थित कृषि महाविद्यालय के प्रांगण में तीन दिवसीय ‘कृषि क्रांति एक्सपो 2.0’ का शानदार आगाज हुआ। इस भव्य मेले का उद्घाटन मुख्य अतिथि पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय ने किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जशपुर की माटी में पैदा होने वाली फसलों की खुशबू अब सात समंदर पार तक जाएगी। कंपनियों और किसानों का सीधा संवाद इस एक्सपो की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ देश भर की नामी कृषि आधारित कंपनियां सीधे किसानों से रूबरू हो रही हैं। जिला प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए किसानों ने बताया कि अब उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना होगा। वे अपनी उपज की गुणवत्ता और मार्केटिंग को लेकर सीधे कंपनियों से चर्चा कर रहे हैं। कलेक्टर रोहित व्यास की ‘ब्रांड जशपुर’ रणनीति कलेक्टर रोहित व्यास ने जानकारी दी कि यह ‘कृषि क्रांति एक्सपो’ का दूसरा वर्ष है। उन्होंने कहा— “जशपुर जिले में पैदा होने वाली फसलों और फलों के प्रोडक्ट्स की मांग अब देशभर में होने लगी है। यह एक ऐसा मंच है जहाँ क्रेता और विक्रेता के बीच सीधा संवाद हो रहा है, जिससे किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके।” इन उत्पादों की मची है धूम मेले के मीटिंग हॉल में जशपुर के खास उत्पादों को लेकर कंपनियों के बीच जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। विशेष रूप से निम्नलिखित उत्पादों की ट्रेडिंग और मार्केटिंग पर सत्र चल रहे हैं: जीरा फूल सुगंधित चावल: अपनी खुशबू के लिए मशहूर। काजू और टाऊ: जशपुर की पहचान बन चुके ये उत्पाद। रामतिल और मूंगफली: व्यापारिक संभावनाओं से भरपूर। दशहरी और आम्रपाली आम: सीजन से पहले ही कंपनियों ने खरीदी में दिलचस्पी दिखाई है। एक्सपर्ट्स दे रहे हैं ट्रेनिंग तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले में केवल प्रदर्शनी ही नहीं, बल्कि विभिन्न तकनीकी सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को आधुनिक खेती, फसलों की प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग के गुर सिखाए जा रहे हैं।

जशपुर में 2.10 लाख अवैध ईंटें जब्त, पर ‘तस्वीरें’ गायब; क्या अपनी किरकिरी बचाने के लिए खनिज विभाग ने चली चाल?

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जशपुर में 2.10 लाख अवैध ईंटें जब्त, पर ‘तस्वीरें’ गायब; क्या अपनी किरकिरी बचाने के लिए खनिज विभाग ने चली चाल? प्रेस नोट की हकीकत जानने पत्रकारों का दल जाएगा पम्पशाला जशपुरनगर, 18 मार्च 2026 – जिले में अवैध उत्खनन के खिलाफ खनिज विभाग की ‘बड़ी कार्रवाई’ अब सवालों के घेरे में है। फरसाबहार के ग्राम पमशाला में प्रीतमलाल प्रजापति के ईंट भट्ठे पर 2 लाख 10 हजार नग अवैध ईंटें जब्त करने का दावा तो किया गया है, लेकिन पत्रकारों के मैसेज के बाद भी इस पूरी कार्रवाई की फोटो या वीडियो विभाग ने जनसंपर्क कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराई है। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या विभाग ने अपनी पिछली विफलताओं और सोशल मीडिया पर हो रही किरकिरी को दबाने के लिए केवल कागजी आंकड़ों का सहारा लेकर ‘हेडलाइन मैनेजमेंट’ किया है? किरकिरी खत्म करने वाली कार्रवाई या महज ‘प्रेस नोट’ का खेल?   आमतौर पर खनिज विभाग जब भी बड़ी कार्रवाई करता है, तो मौके की तस्वीरें और वीडियो साक्ष्य के तौर पर मीडिया को दिए जाते हैं। पमशाला जैसे मामले में, जहां 2 लाख से ज्यादा ईंटें और ‘VIP’ ब्रांड के भट्ठे पर कार्रवाई की बात कही जा रही है, वहां विजुअल्स,फोटोज का न होना शंका पैदा करता है। जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ समय से अवैध परिवहन को लेकर विभाग की काफी आलोचना हो रही थी, जिससे बचने के लिए जनसंपर्क विभाग के माध्यम से यह समाचार प्रसारित कराया गया हो सकता है। क्या है खान एवं खनिज अधिनियम 1957 की ‘धारा 21’ और इसका विस्तार? AI जनरेटेड इस मामले में विभाग ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। आइए समझते हैं कि यह धारा कितनी शक्तिशाली है और इसके तहत क्या कार्रवाई होती है: 1. अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध (Section 21.1): यह धारा स्पष्ट करती है कि जो कोई भी इस अधिनियम की शर्तों का उल्लंघन कर खनिज (जैसे ईंट के लिए मिट्टी) का उत्खनन, परिवहन या भंडारण करता है, उसे 5 साल तक की जेल या 5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक का जुर्माना (या दोनों) हो सकता है। 2. जब्त सामग्री पर सरकारी कब्ज़ा (Section 21.4): इस उपधारा के तहत, यदि कोई अधिकारी अवैध खनन पाता है, तो वह न केवल खनिज (ईंटें), बल्कि उसमें इस्तेमाल हुए औजार, मशीनरी और वाहनों को भी जब्त कर सकता है। 3. मूल्य की वसूली (Section 21.5): यदि अवैध रूप से निकाला गया खनिज कहीं और भेज दिया गया है, तो सरकार उस व्यक्ति से उस खनिज का बाजार मूल्य और रॉयल्टी वसूलने का हक रखती है। 4. पुलिस और मजिस्ट्रेट की शक्ति: धारा 21 के तहत दर्ज मामलों में प्रशासन को यह शक्ति होती है कि वह आरोपी के खिलाफ सीधे कोर्ट में मामला चलाए। यह एक गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में भी आ सकता है यदि उल्लंघन गंभीर प्रकृति का हो। स्थानीय लोगों के सवाल स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई तो हुई है, लेकिन “VIP” मार्क वाले ईंट भट्ठों के असली मालिकों पर हाथ डालने के बजाय विभाग केवल छोटे मोहरों पर कार्रवाई कर इतिश्री कर लेता है। अब फोटो और वीडियो का न होना इस शक को और पुख्ता कर रहा है कि कहीं पर्दे के पीछे कोई ‘सेटिंग’ तो नहीं चल रही? अवैध ईंट भट्ठे बीस सालों से चल रहे हैं जिसमें बीजेपी और कांग्रेस दोनों की सरकारें रहीं हैं।कांग्रेस कार्यकाल में एक भी भट्ठे पर खनिज विभाग ने यदि कोई कार्रवाई की भी हो तो उसे सार्वजनिक नहीं किया। बहरहाल,खनिज विभाग ने कार्रवाई का दावा कर अपनी पीठ तो थपथपा ली है, लेकिन बिना विजुअल साक्ष्यों के यह खबर दावों और हकीकत के बीच झूल रही है। क्या वाकई 2.10 लाख ईंटें जब्त हुई हैं या यह केवल अपनी किरकिरी रोकने के लिए ‘सरकारी पीआर’ का हिस्सा है? बड़ा सवाल: अगर कार्रवाई इतनी पारदर्शी और सख्त थी, तो विभाग के पास इसकी एक भी फोटो या वीडियो क्यों नहीं है? नोट : इस खबर में प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई है । AI GAMINI 

जशपुर: कुनकुरी में जैन मुनिश्री प्रमाण सागर का भव्य मंगल प्रवेश, मीडिया को दी नसीहत— “युद्ध की चर्चा छोड़, शांति का पुरुषार्थ करें”

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जशपुर: कुनकुरी में जैन मुनिश्री प्रमाण सागर का भव्य मंगल प्रवेश, मीडिया को दी नसीहत— “युद्ध की चर्चा छोड़, शांति का पुरुषार्थ करें” जशपुर (कुनकुरी) | छत्तीसगढ़ के राजकीय अतिथि, प्रख्यात जैन संत मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज का जशपुर जिले के कुनकुरी शहर में गौरवशाली शुभागमन हुआ। मध्यप्रदेश के भोपाल से पावन तीर्थ सम्मेद शिखर जी के विहार पर निकले मुनिश्री का स्थानीय जैन समाज सहित सर्व समाज ने गाजे-बाजे और पुष्पवर्षा के साथ भव्य स्वागत किया। मुनिश्री के आगमन से पूरे जशपुर वनवासी अंचल में एक सुंदर आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हो गया है। मीडिया से संवाद: “युद्ध की चर्चा से हमें क्या मिलेगा?” कुनकुरी प्रवास के दौरान मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज ने मीडिया से विशेष चर्चा की। विश्व में जारी संघर्षों और नकारात्मकता पर उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा: “हम विहारी हैं और विहार कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के जो संस्कार हैं, जो यहां के लोग प्रेम देते हैं, अच्छे हैं। मेरा संदेश कहेंगे तो मैं यही कहूंगा कि सभी लोग अपने जीवन को सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों में लगाएं। समस्याओं की तरफ देखने की जगह समाधान के रास्ते में कितनी तकनीकी का उपयोग करें पर तकनीकी के आदी ना बनें।” मुनिश्री ने मीडिया की भूमिका पर जोर देते हुए आगे कहा: “मीडिया के माध्यम से इस समय मैं यही कहना चाहूंगा कि युद्ध और संघर्ष की चर्चा करने की जगह शांति की प्रार्थना करें। दिनभर युद्ध की रिपोर्ट प्रसारित कर रहे हैं क्यों ना वैश्विक स्तर पर एक साथ लोगों को शांति की प्रार्थना में लगाएं, जिससे लोगों को सद्बुद्धि आए। युद्ध की चर्चा करने से हमें क्या मिलेगा? हम सकारात्मक भाव तरंग सर्वत्र उत्पन्न करें जो लोग, जो शक्तियां युद्ध के लिए उन्मादी बनी हुई हैं, उनकी बुद्धि नियंत्रित हो तो अच्छा होगा। एक सकारात्मक प्रयास हो सारे विश्व में ही युद्ध की ही चर्चा है हम न युद्ध की चर्चा करें ना युद्ध की चिंता करें। शांति का पुरुषार्थ करें।” श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब, अब जशपुर की ओर विहार मुनिश्री के प्रवचन कार्यक्रम और शंका समाधान सत्र में भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, कुनकुरी नगरपंचायत अध्यक्ष विनयशील ने भी अपनी शंकाओं का समाधान पाया।कुनकुरी के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से आए लोग भी मुनिश्री का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। कुनकुरी युवा संघ के रवि जैन ने बताया कि मुनिश्री का प्रवास कुनकुरी के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने मुनिश्री के निरंतर विहार पर प्रकाश डालते हुए कहा: “बहते पानी को कोई रोक नहीं सकता। मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज का अब कुनकुरी शहर में विहार के बाद जशपुर की ओर विहार होगा, जिसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।” कुनकुरी में धर्म की प्रभावना करने के बाद, मुनिश्री अब सम्मेद शिखर की अपनी यात्रा को जारी रखते हुए जशपुर की ओर प्रस्थान करेंगे। पूरा क्षेत्र उनके दर्शन और वंदन के लिए उत्साहित है।

न्याय के मंदिर में बाल श्रम का आरोप: न्यायालय परिसर में शौचालय निर्माण में बच्चों से काम कराने की शिकायत, पुलिस जांच में जुटी

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न्याय के मंदिर में बाल श्रम का आरोप: न्यायालय परिसर में शौचालय निर्माण में बच्चों से काम कराने की शिकायत, पुलिस जांच में जुटी जशपुर/कुनकुरी  10/04/2026 – न्याय का प्रतीक माने जाने वाले न्यायालय परिसर में ही बाल श्रम का गंभीर आरोप सामने आने से हड़कंप मच गया है। कुनकुरी स्थित व्यवहार न्यायालय परिसर के अंदर शौचालय निर्माण कार्य में कथित तौर पर बाल श्रमिकों से काम कराए जाने की शिकायत मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार कुनकुरी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विष्णु कुलदीप ने इस संबंध में कुनकुरी थाने में फोन के जरिए शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि न्यायालय परिसर के अंदर चल रहे शौचालय निर्माण कार्य में नाबालिग बालकों से मजदूरी कराई जा रही है, जो कानूनन अपराध है। शिकायत मिलते ही पुलिस टीम व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित निर्माण स्थल पर पहुंची और वहां काम करवा रहे ठेकेदार के मैनेजर को पूछताछ के लिए थाने ले गई। पुलिस ने मौके पर मौजूद बालकों से भी उनकी उम्र और पहचान संबंधी जानकारी ली। बार एसोसिएशन अध्यक्ष एडवोकेट विष्णु कुलदीप ने मीडिया से चर्चा में कहा कि न्यायालय परिसर, न्याय का मंदिर कहा जाता है, वहां बच्चों से जोखिम भरे निर्माण कार्य कराना बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार के खिलाफ बाल श्रम अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने तीन बालकों के नाम बताते हुए कहा कि इस मामले में पुलिस की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। यदि विधिसम्मत कार्रवाई नहीं होती है तो इस पर बार एसोसिएशन कड़ी आपत्ति दर्ज कराएगा। साथ ही अध्यक्ष ने कोर्ट के प्रवेश द्वार के बगल में मिट्टी डंप करने पर भी आपत्ति उठाई है। इधर पुलिस पूछताछ में कथित बाल श्रमिकों में से दो युवकों ने अपनी उम्र 18 वर्ष बताई है, जबकि एक ने स्वयं को नाबालिग बताया है। बालिग बताने वाले आयुष तिर्की ने पुलिस को अपना आधार कार्ड भी प्रस्तुत किया है, जबकि दूसरे युवक का आधार कार्ड मंगाया गया है। वहीं एक बालक ने अपनी उम्र 16 वर्ष बताई है, जिसकी पुष्टि के लिए पुलिस दस्तावेजों की जांच कर रही है। बाल श्रम अधिनियम के तहत क्या हो सकती है कार्रवाई भारत में बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम 2016 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का कार्य कराना पूरी तरह प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक या जोखिम भरे कार्यों में लगाना भी अपराध की श्रेणी में आता है। यदि जांच में यह साबित होता है कि नाबालिग से निर्माण कार्य कराया गया है, तो ठेकेदार या जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है, जिसमें— *6 महीने से 2 साल तक की जेल* *20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना* *या दोनों सजा एक साथ दी जा सकती है।* साथ ही संबंधित बालक को श्रम विभाग के माध्यम से संरक्षण और पुनर्वास की प्रक्रिया में भी शामिल किया जा सकता है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दस्तावेजों के आधार पर बालकों की वास्तविक उम्र की पुष्टि की जा रही है। जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

कुनकुरी थाना: खाकी के आंगन में महकी नारी शक्ति, अनोखे अंदाज में मनाया गया महिला दिवस

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कुनकुरी थाना: खाकी के आंगन में महकी नारी शक्ति, अनोखे अंदाज में मनाया गया महिला दिवस कुनकुरी – समाज की सुरक्षा में दिन-रात तैनात रहने वाले हाथों ने जब सम्मान में फूल थामे और पुलिस परिवार के पुरुषों ने जब सेवा की कमान संभाली, तो कुनकुरी थाना परिसर एक मिसाल बन गया। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यहाँ केवल एक कार्यक्रम नहीं हुआ, बल्कि नारी शक्ति के प्रति कृतज्ञता का एक ऐसा उत्सव मना जिसे देख हर कोई गदगद हो उठा। सम्मान और आत्मीयता का अनूठा संगम कार्यक्रम के मुख्य अतिथि SDOP विनोद कुमार मंडावी और थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राकेश यादव ने महिला पुलिस कर्मियों को पुष्प गुच्छ भेंट कर उनके अटूट साहस को सलाम किया। उत्सव का आगाज महिला पुलिस कर्मियों द्वारा केक काटकर किया गया। इस दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पुलिसिया अनुशासन के बीच खुशियों के रंग भर दिए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने महिलाओं के जज्बे को नई उड़ान दी: SDOP विनोद कुमार मंडावी: “आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। विशेषकर पुलिस विभाग में उनकी भूमिका कानून व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के बीच एक मजबूत सेतु का काम करती है।” TI राकेश यादव: “यह दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि संकल्प का है। महिला पुलिस कर्मियों की निष्ठा समाज के लिए प्रेरणा है और हम उनके अधिकारों व सशक्तिकरण के प्रति सदैव प्रतिबद्ध हैं।” जब पुरुषों ने संभाली जिम्मेदारी: एक भावुक पहल इस आयोजन की सबसे प्रेरक और अनूठी बात यह रही कि पहली बार पुलिस परिवार की महिलाओं के लिए इसे ‘ऐतिहासिक क्षण’ बनाया गया। > खास बात: पूरे कार्यक्रम के दौरान खाने-पीने से लेकर संगीत और मेहमाननवाजी तक की सारी व्यवस्था पुरुष पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने संभाली। यह उनके बीच के आपसी प्रेम, सम्मान और समानता के भाव को प्रदर्शित करने वाला एक सशक्त संदेश था। एक सकारात्मक बदलाव की लहर कुनकुरी थाने में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि जब कार्यस्थल एक परिवार बन जाता है, तो वहां सम्मान और सुरक्षा की भावना अपने आप प्रबल हो जाती है। पुलिस परिवार की महिलाओं ने इस सम्मान को अपने जीवन का सबसे गौरवशाली क्षण बताया।

जशपुर बस हादसा: प्रशासन की सख्ती के बाद भी जांच से दूर रहे यात्री बस संचालक, रंजीता स्टेडियम में केवल स्कूल बसें पहुंचीं

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जशपुर बस हादसा: प्रशासन की सख्ती के बाद भी जांच से दूर रहे यात्री बस संचालक, रंजीता स्टेडियम में केवल स्कूल बसें पहुंचीं   जशपुर – गोड़अम्बा में हुए  ‘अनमोल’ बस हादसे के बाद, जिसमें 5 लोगों की जान गई और 24 घायल हुए, जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। कलेक्टर रोहित व्यास और एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह के कड़े निर्देशों के बाद रविवार को जिले की सभी बसों की फिटनेस और दस्तावेजों की जांच के लिए विशेष शिविर लगाया गया। हालांकि, इस अभियान में यात्री बस संचालकों की बेरुखी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रंजीता स्टेडियम में सुबह से डटे रहे अफसर प्रशासनिक निर्देशानुसार, रविवार सुबह 10 बजे जशपुर के रंजीता स्टेडियम में जिले की सभी बसों को भौतिक सत्यापन के लिए बुलाया गया था। जिला परिवहन अधिकारी (DTO) विजय निकुंज और उनकी टीम मौके पर मौजूद थी। स्कूल बसों की उपस्थिति: निर्देश मिलते ही स्कूल बसें समय पर स्टेडियम पहुंचीं और उनके फिटनेस व दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई। यात्री बसें नदारद: हैरानी की बात यह रही कि पूरे जिले से एक को छोड़कर दूसरा कोई भी यात्री बस संचालक बस लेकर जांच के लिए स्टेडियम नहीं पहुंचा। प्रशासन की चेतावनी: होगी कड़ी कार्रवाई यात्री बस संचालकों की इस सामूहिक अनुपस्थिति को प्रशासन ने अनुशासनहीनता और यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ माना है। जिला परिवहन अधिकारी विजय निकुंज ने स्पष्ट किया कि जांच से बचने वाले बस संचालकों को बख्शा नहीं जाएगा। परिवहन विभाग अब इन बसों की सड़क पर धरपकड़ कर कड़ी वैधानिक कार्रवाई करने की तैयारी में है। ड्राइवर संघ ने गिनाईं मजबूरियां: फिटनेस के लिए अंबिकापुर का चक्कर चेकिंग के बीच एक बड़ा मुद्दा फिटनेस सेंटर की कमी का भी उठा। ड्राइवर संघ के अध्यक्ष फिरन यादव ने मीडिया से चर्चा में बताया कि जशपुर जिले में फिटनेस सर्टिफिकेट बनाने की सुविधा नहीं है। “हजारों रुपये खर्च कर और कई दिनों की परेशानी झेलकर हमें फिटनेस के लिए अंबिकापुर जाना पड़ता है। हमने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।” पोर्टल विश्लेषण: सवाल सुरक्षा का हादसे के बाद प्रशासन का जागना सराहनीय है, लेकिन यात्री बस संचालकों का जांच शिविर से गायब रहना बताता है कि शायद सिस्टम में अब भी ‘खौफ’ की कमी है। क्या बसें अनफिट हैं? क्या कागजात अधूरे हैं? या फिर संचालकों को प्रशासनिक आदेशों की परवाह नहीं? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में होने वाली कार्रवाई से तय होंगे। बने रहें हमारे पोर्टल के साथ, जशपुर की हर छोटी-बड़ी खबर के लिए।

BLACK FRIDAY : छत्तीसगढ़ में सड़क हादसे में 10 लोगों की मौत, 50 से अधिक घायल

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BLACK FRIDAY : छत्तीसगढ़ में सड़क हादसे में 10 लोगों की मौत, 50 से अधिक घायल छत्तीसगढ़ में शुक्रवार को सड़क हादसों ने बड़ा कहर बरपाया। जशपुर और बलौदाबाजार जिलों में हुए दो अलग-अलग भीषण सड़क हादसों में कुल 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक यात्री घायल हो गए। घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। जशपुर: ब्रेक फेल होने से बस पलटी, 5 की मौत जशपुर जिले में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। झारखंड के कुरडेग से कुनकुरी आ रही अनमोल बस (CG 14 G 0263) करडेगा चौकी क्षेत्र के गोड़अंबा गांव में अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में 5 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 17 से अधिक लोग घायल हो गए। स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह करीब 9:45 बजे ढलान के दौरान बस का ब्रेक फेल हो गया। बस में सवार एक यात्री ने बस रोकने के लिए कहा, तभी कंडक्टर ने चिल्लाकर बताया कि ब्रेक फेल हो गया है। कुछ ही क्षण बाद बस अनियंत्रित होकर सुरेंद्र साय के निर्माणाधीन प्रधानमंत्री आवास में पलट गई। बस में दो दर्जन से अधिक यात्री सवार थे। घटना के बाद गोड़अंबा गांव के दिगंबर यादव ने तुरंत मदद की पहल की। उनके साथ सरपंच पति शिवशंकर साय, उपसरपंच दशरथ प्रसाद यादव और प्रभाशंकर यादव ने प्रशासन को सूचना दी और राहत कार्य शुरू कराया। जेसीबी की मदद से बस हटाकर यात्रियों को बाहर निकाला गया। करीब 11 बजे एसडीएम नंदजी पांडे, एसडीओपी विनोद मंडावी समेत प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। प्रशासनिक वाहनों और 7 एम्बुलेंस की मदद से घायलों को अस्पताल भेजा गया। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर कुनकुरी डॉ. के. कुजूर ने हादसे में 5 लोगों की मौत की पुष्टि की है। मृतकों में पति-पत्नी और पिता-पुत्र शामिल हैं। मृतकों के नाम महेश राम (45), ग्राम मकरीबंधा, तहसील दुलदुला बिमला (42), ग्राम मकरीबंधा (पति-पत्नी) संपति देवी (52), जिला सिमडेगा, झारखंड दिगेश्वर (40), ग्राम ढोढी, तहसील कुरडेग, जिला सिमडेगा घनश्याम (5 माह), ग्राम ढोढी (पिता-पुत्र) घायलों का इलाज कुनकुरी, जिला अस्पताल और अन्य अस्पतालों में किया जा रहा है। 4 गंभीर घायलों को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। हादसे की सूचना मिलने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पत्नी कौशल्या देवी साय कुनकुरी अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने घायलों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर इलाज व सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि यह हादसा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र में हुआ है। बलौदाबाजार: नेशनल हाईवे पर बस को ट्रक ने मारी टक्कर, 5 की मौत इधर बलौदाबाजार जिले में रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे पर भी भीषण सड़क हादसा हो गया। दरचुरा के पास RBS यात्री बस को पीछे से तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। बताया जा रहा है कि बस सवारी चढ़ाने के लिए सड़क किनारे रुकी हुई थी, तभी पीछे से आ रहे ट्रक ने बस को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस सड़क से नीचे खेत में जा घुसी। इस हादसे में 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 35 से अधिक यात्री घायल हो गए। घायलों को सिमगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है, जबकि गंभीर घायलों को रायपुर रेफर किया गया है। सिमगा पुलिस मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव कार्य में जुटी हुई है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही हैं। छत्तीसगढ़ में शुक्रवार को हुए इन दो बड़े सड़क हादसों में कुल 10 लोगों की जान चली गई, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। प्रशासन दोनों घटनाओं की जांच में जुटा हुआ है।  

कुनकुरी में अवैध शराब पर कानून का खौफ, अहाता संचालक शुभम रंगे हाथ गिरफ्तार

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कुनकुरी में अवैध शराब पर कानून का खौफ, अहाता संचालक शुभम रंगे हाथ गिरफ्तार कुनकुरी,03 मार्च 2026 – होली पर्व के मद्देनज़र अवैध शराब कारोबारियों पर पुलिस ने सख्त शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में कुनकुरी पुलिस ने बड़ी और प्रभावशाली कार्रवाई करते हुए सरकारी शराब दुकान के सामने संचालित एक अहाता (चखना दुकान) में छापा मारकर संचालक को अंग्रेजी शराब बेचते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार शाम पुख्ता सूचना के आधार पर टीम ने दबिश दी। छापेमारी के दौरान अहाता संचालक शुभम जायसवाल (32 वर्ष), पिता दीपक जायसवाल, निवासी बगीचा को ग्राहकों को अवैध रूप से अंग्रेजी शराब परोसते हुए पकड़ा गया। मौके से भारी मात्रा में शराब जब्त की गई। आरोपी के खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर की गई। लाल उम्मेद सिंह (डीआईजी व एसएसपी) के निर्देशन में कुनकुरी पुलिस द्वारा नशे के अवैध कारोबारियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राकेश यादव के मार्गदर्शन में प्रधान आरक्षक रामानुज पांडे, आरक्षक जितेंद्र गुप्ता, चंद्रशेखर बंजारे और अजय श्रीवास्तव की टीम ने पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान आरोपी ने बचने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के आगे उसकी एक न चली। इस मामले में स्थानीय लोगों ने अहाता का लायसेंस निरस्त कर संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।अहाता से लगे बंदरा खसरा नाले में गंदगी फैलाने और शराब के बोतलों,डिस्पोजल से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने पर भी कलेक्टर रोहित व्यास से सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि त्योहारों के दौरान अवैध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। कुनकुरी में हुई इस ताबड़तोड़ कार्रवाई ने यह संदेश दे दिया है कि अब अवैध शराब कारोबारियों पर कानून का खौफ साफ नजर आने लगा है और सुशासन कायम रखने के लिए पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है।