ऐतिहासिक प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर, दोकड़ा में आज होगा देव स्नान महोत्सव, पूरी धाम की परंपराओं संग होगी भव्य पूजा

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जशपुर/दोकड़ा,11जून 2025 –  ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर, दोकड़ा में आज देव स्नान महोत्सव का भव्य आयोजन होने जा रहा है। यह आयोजन पूरी धाम, ओडिशा की पारंपरिक विधियों के अनुसार संपन्न किया जाएगा। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी हजारों श्रद्धालु इस आयोजन में भाग लेने के लिए दूर-दूर से पहुंच रहे हैं। इस पावन अवसर पर मंदिर प्रांगण में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। कीर्तन मंडलियों की सुमधुर भजनों की ध्वनि से वातावरण भक्तिमय हो उठेगा। मंदिर समिति ने कार्यक्रम की तैयारियां पूर्ण कर ली हैं और सुरक्षा व सुविधा व्यवस्था भी सुदृढ़ की गई है। कार्यक्रम का विस्तृत विवरण इस प्रकार है: दोपहर 1:00 बजे – मंगल आरती एवं कीर्तन मंडली का शुभारंभ 1:30 बजे – पहुंडी (भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं देवी सुभद्रा की विशेष शोभायात्रा) 2:30 बजे – देव स्नान (भगवानों का पवित्र जल से अभिषेक) 3:30 बजे – महाप्रभु श्रृंगार एवं गजानन वेश दर्शन 4:00 बजे – आरती एवं पुष्पांजलि अर्पण 4:30 बजे – महाप्रसाद वितरण रथयात्रा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि श्री जगन्नाथ रथयात्रा का प्रारंभ दोकड़ा में वर्ष 1942 में हुआ था। इसकी नींव स्वर्गीय सुदर्शन सतपथी एवं उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय सुशीला सतपथी ने रखी थी। यह परंपरा आज भी श्रद्धा और भक्ति के साथ निभाई जा रही है। इस वर्ष भी विशाल रथ का निर्माण ओडिशा के प्रसिद्ध संबलपुर से आए कारीगरों द्वारा किया जा रहा है। रथ की कारीगरी और अलंकरण दर्शनीय है, जो स्थानीय संस्कृति और ओडिशा की परंपरा का समावेश प्रस्तुत करता है। स्थानीय जनमानस में उत्साह ग्रामवासी, श्रद्धालु एवं भक्तजन इस उत्सव को लेकर अत्यंत उत्साहित हैं। विशेष तौर पर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह दिन एक आध्यात्मिक पर्व के रूप में मनाया जा रहा है। क्षेत्र के धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने भी महोत्सव को सफल बनाने में अपना योगदान दिया है।

 बड़ी खबर : जशपुर के तांबाकछार जंगल से आयशर प्रो गाड़ी में अर्जुन वृक्ष की लकड़ी तस्करी पकड़ी गई, ग्रामीणों ने हाइड्रा को भी रोका,क्या है अर्जुन वृक्ष?

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📍 जशपुर/बगीचा, 11 जून 2025 जशपुर जिले के बगीचा क्षेत्र से जंगल तस्करी की एक बड़ी और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। तांबाकछार के सघन जंगल से लाखों की औषधीय लकड़ी तस्करी करते हुए एक आयशर प्रो गाड़ी पकड़ी गई है। इस गाड़ी में पूरे के पूरे अर्जुन पेड़ के लट्ठे लदे हुए पाए गए, जो कि बहुमूल्य औषधीय वृक्षों में गिने जाते हैं। 🌳 क्या है अर्जुन वृक्ष की खासियत? अर्जुन पेड़ (Terminalia arjuna) भारतीय आयुर्वेद में हृदय रोगों के इलाज के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। इसकी छाल से दवाएं बनती हैं जो ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने, हृदय को मजबूत रखने और कोलेस्ट्रॉल घटाने में काम आती हैं। ऐसे में इसकी तस्करी न केवल वन संपदा का दोहन है, बल्कि देश की पारंपरिक औषधीय विरासत पर भी कुठाराघात है। 🚛 तस्करी में प्रयुक्त वाहन और घटनाक्रम: तस्करी में प्रयुक्त आयशर प्रो गाड़ी को ग्रामीणों की सतर्कता और वन विभाग की तत्परता से जब्त कर लिया गया है। यह गाड़ी रायपुर नंबर की है और इसके चालक व श्रमिक मौके से फरार हो गए। लकड़ी की लोडिंग में प्रयुक्त हाइड्रा मशीन को तस्कर भगा ले गए थे, लेकिन ग्रामीणों ने सूझबूझ से उसे रास्ते में रोक दिया, जो अब वहीं खड़ी है। 🌲 वन विभाग का बयान और रहस्य बना मौन: इस पूरे मामले में बगीचा रेंजर अशोक सिंह ने घटना की पुष्टि की है। वहीं SDO ईश्वर कुजूर ने सुबह तक कोई भी बयान देने से इंकार किया है, उनका कहना है कि “मुल्यांकन के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।” 🤔 बड़े सवाल, गहरी जड़ें: यह घटना सिर्फ एक गाड़ी पकड़ने की नहीं, बल्कि जशपुर के जंगलों में फैले अवैध लकड़ी तस्करी रैकेट की गवाही है। यह स्पष्ट हो गया है कि अर्जुन जैसे औषधीय पेड़ की सुनियोजित कटाई हो रही है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इन पेड़ों पर नजर किसकी है? कहीं स्थानीय तस्करों की आड़ में कोई बड़ा नेटवर्क तो जंगलों को उजाड़ने में लगा नहीं? 🗣️ ग्रामीणों की मांग – हो उच्च स्तरीय जांच तांबाकछार सहित जशपुर के अन्य वनों में बीते कुछ महीनों में औषधीय पेड़ों की कटाई के कई मामले सामने आ चुके हैं। ग्रामीण अब उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। 🔍 जशपुर का जंगल सिर्फ हरियाली नहीं, जीवनदायिनी औषधियों का भंडार है – उसे बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।  

आंखों-देखी: केरसई पंचायत – विकास के इंतज़ार में खड़ा एक आदिवासी गांव : जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड के दौरे से लौटकर संतोष चौधरी,संपादक ख़बर जनपक्ष

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विशेष रिपोर्ट :  11 जून 2025 जशपुर जिले का केरसई पंचायत — स्टेट हाईवे-17 के दोनों ओर फैला एक गांव जो मानो विकास के द्वार पर खड़ा होकर अब भी दस्तक की प्रतीक्षा कर रहा है। स्कूल है, बैंक है, व्यापारिक सुविधा है, लेकिन दो सबसे बुनियादी ज़रूरतें – सड़क और पानी – आज भी गांववालों की पहुंच से बाहर हैं। मुख्य सड़क से जैसे ही बड़का बस्ती और नवाटोली की ओर कदम बढ़ते हैं, एक उखड़ी, गड्ढों से भरी सीमेंट कांक्रीट की सड़क मानो यह बताने लगती है कि असली लड़ाई अब शुरू होती है। थोड़ी ही दूर पर बैराटोली की एक महिला मिलती है, जो रास्ता दिखाते हुए बताती है – “यही कच्चा रास्ता है, बाबू।” रास्ता जैसे-जैसे आगे बढ़ता है, दृश्य एक आदिम समाज की झलक देता है – बरगद के पेड़ के नीचे बैठी एक बुज़ुर्ग महिला, पास में उसका नशे में धुत बेटा, ऊपर टीले पर मिट्टी का घर और सामने से आती आंगनबाड़ी सहायिका जो पांच नन्हें बच्चों को लेकर लौट रही थी। वह कहती है, “सरकार ने सब दिया, लेकिन सड़क देना भूल गई।” बड़का बस्ती की आंगनबाड़ी तक पहुँचने पर दुश्वारी और बढ़ जाती है। कार्यकर्ता बताती हैं कि बच्चों के लिए पानी आसपास के घरों से मांगकर लाना पड़ता है। टंकी है, लेकिन केवल हवा से भरी — सपनों की तरह खोखली। हालांकि आंगनबाड़ी का कक्ष और रसोई स्वच्छ और सुसज्जित हैं, लेकिन सड़क की बदहाली उस सुंदरता पर धूल फेंक देती है। गांव की महिलाएं और बच्चे बताते हैं कि यहां साइकिल या बाइक से गिरना आम बात है। बरसात में स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है। बीमार या गर्भवती महिलाओं को खाट पर उठाकर एक किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। कई बार इलाज पहुंचने से पहले मौत दस्तक दे देती है। युवक कैलाश तिर्की बताते हैं, “नेता लोग चुनाव के वक्त आते हैं, सड़क का वादा कर जाते हैं, और फिर गायब हो जाते हैं।” लेकिन इस बार एक उम्मीद जगी है – गोपाल कश्यप नाम का एक स्थानीय युवक बीडीसी बना है, जो सचमुच कुछ करना चाहता है। गांववालों की आवाज़ बनकर वह खुद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिल चुका है, इंजीनियरों को लेकर मुआयना करवा चुका है। ब्लॉक डेवलपमेंट कमेटी मेंबर गोपाल कश्यप कहते हैं – “मैं खुद भी आदिवासी हूं, मैं इन लोगों की तकलीफ समझता हूं। इन ग्रामीणों के साथ मुख्यमंत्री निवास बगिया जाकर मुख्यमंत्री जी से सड़क और पानी को लेकर ज्ञापन दिया। उनकी पहल से सड़क के लिए अनुपूरक बजट में प्रस्ताव भेजा गया है और पानी के लिए भी जगह चिन्हित कर ली है। जल्द ही पीएचई विभाग के साथ मिलकर बोरिंग कराएंगे।” बड़का बस्ती में 80 घर हैं और सभी उरांव आदिम जनजाति से हैं। वे शिक्षित हैं, लेकिन सहज, शांत और संघर्ष से अधिक इंतज़ार को जीवन का हिस्सा मानने वाले लोग हैं। केरसई पंचायत की यह तस्वीर केवल एक गांव की नहीं है, यह उस भारत की झलक है जो विकास के नक्शे पर चिन्हित तो है, लेकिन अब भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्षरत है। यहां की मिट्टी में अब भी उम्मीद की जड़ें हैं — बस ज़रूरत है, उस जड़ को सींचने वाले हाथों की।

बिलासपुर ब्रेकिंग न्यूज: शनिचरी बाजार में भीषण अग्निकांड, 2 दर्जन दुकानें जलकर खाक – लाखों का नुकसान

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बिलासपुर, 4 जून — शहर के व्यस्ततम शनिचरी बाजार में तड़के सुबह भीषण आग लग गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग सुबह करीब 3 बजे लगी, जिसने देखते ही देखते बाजार की दो दर्जन से अधिक दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग की चपेट में तेल, कॉस्मेटिक, किराना समेत कई प्रकार की दुकानें आ गईं, जिससे लाखों रुपए का माल जलकर खाक हो गया। आग की भयावहता इतनी थी कि बाजार में धुएं और लपटों का गुबार दूर से ही दिखाई दे रहा था। फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने के लिए घंटों मशक्कत की। दमकल विभाग की संयुक्त टीम ने पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन तंग गलियों की वजह से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्राथमिक रूप से आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, हालांकि सटीक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। सिटी कोतवाली पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और फिलहाल क्षेत्र को सुरक्षा की दृष्टि से सील कर दिया गया है। इस भीषण अग्निकांड से दुकानदारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने जीवन भर की पूंजी इन दुकानों में लगाई थी, जो चंद घंटों में जलकर राख हो गई। प्रशासन से राहत की उम्मीद पीड़ित दुकानदारों ने प्रशासन से तत्काल राहत और मुआवजे की मांग की है। जिला प्रशासन की टीम भी मौके पर पहुंच चुकी है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। इस दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर बाजारों में अग्नि सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पंचायत सचिव पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, कण्डोरा में बिना कार्य के उड़ाए गए लाखों रुपये,सचिव छिप रहा लेकिन भरत सिंह ने मीडिया से की बात

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📍 कुनकुरी (जशपुर), 28 मई 2025 ग्राम पंचायत कण्डोरा में विकास कार्यों को लेकर बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। पंचायत सचिव सुशील तिर्की पर फर्जी हस्ताक्षर, गबन और कमीशन के गंभीर आरोप लगे हैं। यह आरोप पूर्व सरपंच रामदीन और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए हैं, जिन्होंने पंचायत में हुए कार्यों और लेन-देन की जांच की मांग की है। पूर्व सरपंच का कहना है कि सीसी रोड और नाली निर्माण के नाम पर करीब 7 लाख रुपये की राशि निकाली गई, लेकिन आज तक धरातल पर कोई कार्य शुरू नहीं हुआ। इसके अलावा, गौण खनिज मद की 12.80 लाख रुपये की राशि के दुरुपयोग का भी आरोप है। आरोप है कि यह राशि बिना स्पष्ट प्रक्रिया के अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी गई, जिनमें से भरत सिंह को पांच लाख, सचिव खुद के खाते में एक लाख अस्सी हजार रुपए और एक खाता अज्ञात बताया गया है। भरत सिंह कौन है ? सोशल मीडिया में भरत सिंह के खाते में 5 लाख रुपए डाले जाने को लेकर जिले में खूब चर्चा है।दरअसल,भरत सिंह ग्राम पंचायत कंडोरा के महुआटोली गांव के निवासी हैं जो चूड़ा मिल चलाते है।ये वो नहीं हैं जो वर्तमान में भाजपा के जशपुर जिले के अध्यक्ष हैं।भरत सिंह से जब हमने बात की तो उनका कहना था कि निर्माण कार्य में मटेरियल सप्लाई हुआ था जिसका पैसा मेरे खाते में आया है। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि योजनाओं की राशि निकालने के लिए पूर्व सरपंच के फर्जी हस्ताक्षर किए गए। रामदीन का कहना है कि जब उन्होंने बैंक स्टेटमेंट और दस्तावेजों की जांच की, तब इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ।रामदीन ने यह भी बताया कि सचिव इतना होशियार है कि सरपंच के मानदेय की राशि भी निकालकर खा गया। इसके अलावा, 15वें वित्त आयोग मद से स्वीकृत दो कार्यों (एक नाली और एक सीसी रोड) की राशि लगभग 7 लाख रुपये भी आहरित कर ली गई, लेकिन मौके पर किसी भी तरह का कार्य नज़र नहीं आता। ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने सचिव के खिलाफ नाराजगी जताते हुए उच्चस्तरीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव ने अपने पद का दुरुपयोग कर सरकारी धन की भारी हेराफेरी की है, जिससे गांव विकास से वंचित रह गया है। प्रशासन से अब इस पूरे मामले में त्वरित जांच की अपेक्षा की जा रही है, ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सके और पंचायत की पारदर्शिता बनी रहे।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सौगात: जशपुर में 18.46 करोड़ से बनेंगी 6 नई सड़कें, मधेश्वर पहाड़ तक पक्के रास्ते से पहुंचेंगे शिवभक्त

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धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, ग्रामीण आवागमन होगा सुलभ, जनता में खुशी की लहर जशपुर, 23 मई 2025 – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर जशपुर जिले को एक और बड़ी सौगात मिली है। राज्य शासन द्वारा जिले में 6 प्रमुख सड़कों के निर्माण के लिए 18 करोड़ 46 लाख 87 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे न केवल ग्रामीण अंचलों के लोगों को आवागमन में सुगमता मिलेगी, बल्कि विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग माने जाने वाले मधेश्वर पहाड़ तक श्रद्धालुओं की आसान पहुंच सुनिश्चित होगी। मधेश्वर मंदिर तक पक्की सड़क – धार्मिक पर्यटन को लगेगा पंख कुनकुरी क्षेत्र के मयाली नेचर कैंप से लेकर मधेश्वर मंदिर और जोकारी से मधेश्वर पहाड़ तक पक्की सड़क का निर्माण होना है। इस पहल से न सिर्फ शिवभक्तों की आस्था की राहें आसान होंगी, बल्कि क्षेत्रीय धार्मिक पर्यटन को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। जोकारी और भंडरी पंचायत के ग्रामीणों में इस खबर से गहरी प्रसन्नता है और लोग मुख्यमंत्री की जय-जयकार कर रहे हैं। ये हैं स्वीकृत सड़कों के विवरण – 1. चटकपुर से रेंगारबहार (2.46 किमी) – ₹2.89 करोड़ 2. कुनकुरी-औरीजोर-मतलूटोली-पटेलापारा (2.54 किमी) – ₹3.01 करोड़ 3. NH-43 से मयाली डेम तक (2.28 किमी) – ₹2.85 करोड़ 4. मयाली नेचर कैंप से मधेश्वर मंदिर (2.20 किमी) – ₹2.71 करोड़ 5. रानीबंध चौक–चिडराटांगर–पंडरीआमा–उपरकछार (3.44 किमी) – ₹3.29 करोड़ 6. जोकारी से मधेश्वर पहाड़ (2.88 किमी) – ₹3.68 करोड़   “अब जशपुर में विकास की नई राह खुल रही है। श्रद्धा, सुविधा और समर्पण के संग मुख्यमंत्री की यह सौगात सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि ग्रामीण जनजीवन को जोड़ने वाला भविष्य का पुल है।” – नरेश नंदे, वरिष्ठ अधिवक्ता व विचारक जशपुर जिला प्रशासन सक्रिय, जल्द होगा कार्य प्रारंभ कलेक्टर रोहित व्यास ने बताया कि निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ करने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री का लक्ष्य है कि प्रत्येक गांव और धार्मिक स्थल तक पक्की और सुरक्षित सड़क पहुंचे ताकि आमजन को विकास का सीधा लाभ मिले। मुख्यमंत्री का वादा – “सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सबको साथ लेकर चलेंगे” मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पहले ही स्पष्ट किया था कि जशपुर जिले को बुनियादी सुविधाओं में आत्मनिर्भर बनाना उनकी प्राथमिकता है। सड़क निर्माण की यह नई श्रृंखला विष्णु के सुशासन मॉडल का प्रत्यक्ष प्रमाण है।  

उरांव महिलाओं ने दिखाई शौर्यगाथा की झलक, पारंपरिक ‘जनी शिकार’ का किया प्रदर्शन, पांच दिवसीय सम्मेलन में संस्कृति, परंपरा और अस्तित्व की रक्षा का लिया संकल्प, हजारों महिलाओं ने पुरुष वेश में नगाड़ों की थाप पर किया जुलूस, धर्मांतरण के खिलाफ गरजे गणेश राम भगत

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जशपुर,23 मई 2025 – जशपुरनगर के तेतरटोली में 18 से 22 मई तक हिन्दू उरांव महिला समिति के बैनर तले एक पांच दिवसीय महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य उरांव समाज की महिलाओं को अपनी पारंपरिक संस्कृति, लोकगीत, नृत्य और जातिगत परंपराओं से जोड़ना था, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी मूल पहचान और गौरवशाली विरासत को समझ सकें। कार्यक्रम के अंतिम दिन ऐतिहासिक ‘जनी शिकार’ परंपरा का प्रतीकात्मक प्रदर्शन हुआ, जिसमें हजारों महिलाओं ने पारंपरिक पुरुष वेश में हाथों में पारंपरिक हथियार लेकर नगाड़ों की थाप पर शहर में विशाल रैली निकाली। यह प्रदर्शन रोहतासगढ़ की उस गौरवशाली गाथा की याद दिलाने के लिए था, जब उरांव महिलाओं ने अपने शौर्य से मुगलों को तीन बार पराजित किया था। आमसभा में जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने धर्मांतरण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि छोटा नागपुर क्षेत्र को ‘ईसाई राज’ में बदलने की साजिशें लगातार चल रही हैं, लेकिन समाज अब जागरूक हो चुका है। उन्होंने डीलिस्टिंग कानून की मांग को दोहराते हुए सरकार से इस पर ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। फोटो: पारंपरिक परिधान में दंत चिकित्सक डॉ कांति प्रधान अन्य सामाजिक नेताओं के साथ रैली में सभा में झारखंड के संदीप उरांव और अंबिकापुर से आए डॉ. आज़ाद भगत ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि यदि जनजातीय समाज अपनी भाषा, परंपरा और रीति-रिवाजों को नहीं भूले, तो धर्मांतरण जैसी चुनौतियों से सहजता से निपटा जा सकता है। इस मौके पर गणेश राम भगत ने जशपुर रेल परियोजना में अवरोध उत्पन्न करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह जनभावना से जुड़ा मामला है, और ऐसे तत्वों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने संरक्षित जंगलों में अंधाधुंध पेड़ कटाई पर नाराजगी जाहिर करते हुए उसकी जांच की मांग की तथा बारिश में वृक्षारोपण का आह्वान किया। इस आयोजन में हज़ारों की संख्या में महिलाएं और समाजजन शामिल हुए। तेज धूप में रैली में शामिल लोगों के सेवा में शहर के सामाजिक संगठनों ने भी भागीदारी निभाई। संवेदना फाउंडेशन, श्री बालाजी जन कल्याण समिति, और गुड मॉर्निंग ग्रुप जैसे संगठनों ने रैली में शामिल लोगों को पानी, शीतल पेय और फल वितरित कर सेवा भाव का परिचय दिया। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक जागरूकता का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता, जनजागरण और आत्मगौरव की मिसाल भी प्रस्तुत कर गया।

शराब का ऐसा साइड इफेक्ट! 7 साल पहले बेटे की हत्या कर सेप्टिक टैंक में दफनाया शव, अब खुला खौफनाक राज – पिता गिरफ्तार

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धमतरी,21 मई 2025 –  धमतरी जिले के भोयना गांव से एक दिल को दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। सात साल पहले लापता हुए युवक की असलियत उस वक्त सामने आई, जब एक बंद गोदाम के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान नरकंकाल बरामद हुआ। पुलिस जांच में इस कंकाल की कहानी जब खुलकर सामने आई, तो सब हैरान रह गए – यह हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि युवक के ही सौतेले पिता ने की थी। ऐसे हुआ खुलासा 17 मई को अर्जुनी थाना अंतर्गत भोयना गांव के एक बंद गोदाम में स्थित सेप्टिक टैंक की सफाई कराई जा रही थी। सफाई के दौरान जब सफाईकर्मियों को अंदर नरकंकाल दिखाई दिया, तो उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। अर्जुनी पुलिस मौके पर पहुंची और कंकाल को बाहर निकालकर जांच शुरू की। एफएसएल टीम और पुलिस को कंकाल कई साल पुराना प्रतीत हुआ, जिससे मामला रहस्यमयी बन गया।   पिता ने ही किया था कत्ल पुलिस जांच में सामने आया कि नरकंकाल गांव के ही एक युवक का था, जो 7 साल पहले अचानक लापता हो गया था। जब पुलिस ने परिजनों और ग्रामीणों से पूछताछ की, तो शक की सुई मृतक के सौतेले पिता राममिलन ध्रुव पर जाकर टिकी। गहन पूछताछ में उसने जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी पिता ने बताया कि उसका सौतेला बेटा आए दिन शराब पीकर उससे झगड़ा करता था। घटना वाले दिन भी दोनों के बीच कहासुनी हुई और मारपीट तक नौबत पहुंच गई। इसी दौरान बेटे का सिर दीवार से टकरा गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उस समय घर में कोई और मौजूद नहीं था। घबराए राममिलन ने अपराध छिपाने के लिए बेटे के शव को लोहे की छड़ से बांधकर बंद पड़े गोदाम के सेप्टिक टैंक में दफना दिया और पूरे मामले को दबा दिया।   पुलिस ने किया गिरफ्तार राज खुलने के बाद अर्जुनी थाना पुलिस ने आरोपी पिता राममिलन ध्रुव को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। क्या कहती है यह घटना? यह घटना न सिर्फ एक परिवार के भीतर पनपते तनाव और नफरत की कहानी है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक चेतावनी है। जब घर के भीतर रिश्तों की दीवारें ही दरकने लगें, तो परिणाम कितना भयावह हो सकता है, इसका यह जीता-जागता उदाहरण है।

कबीर आश्रम के कब्जे की ज़मीन पर बिजली विभाग का निर्माण कार्य रोकने धरने पर बैठे कबीरपंथी,आज दूसरा दिन

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कुनकुरी/जशपुर,17 मई 2025 – डुग़डुगिया स्थित कबीर आश्रम की वर्षों पुरानी कब्जे की जमीन को कबीरपंथी सरकारी दखल के बाद आक्रोशित हैं।बिजली विभाग का संभागीय ट्रांसफार्मर स्टेशन कबीरपंथ की उस जमीन पर बन रहा है, जो वर्षों से कबीर मेला डांड के रूप में सरगुजा,झारखंड के सीमावर्ती जिलों के लोगों के एकाेत्तरी चौका,सत्संग की जगह थी। दरअसल,1950 ईस्वी से डुग़डुगिया में नेशनल हाईवे से लगा कबीर कुटिया (आज कबीर आश्रम) महंत हीरादास बाबा की कुटिया थी। आज  पचहत्तर सालों से यहां सदगुरू कबीर का दिया अनवरत जलता आ रहा है।मानवता,भाईचारे का संदेश देते हुए यह आश्रम विवादों से घिरा हुआ भी है। कबीरपंथ की आमीन माता संघ की अध्यक्षा सुशीला दास बताती हैं कि जब यह सब जंगल था तब यहां महंत हीरादास दुर्गम क्षेत्र में आकर आदिवासियों,गैर आदिवासियों के बीच सत्य का मार्ग बताने इस स्थान पर आए।बाद के वर्षों में यह आस्था का केंद्र बना।आबादी बढ़ने के साथ लोग कुनकुरी की शासकीय जमीनों पर अतिक्रमण कर मकान बनाने लगे लेकिन कबीर पंथियों ने चट्टान से लेकर करीब दस एकड़ की जमीन पर अतिक्रमण होने नहीं दिया। सुशीला दास स्व दिलीप सिंह जूदेव को याद करते हुए बताती हैं कि बीस – बाईस साल पहले महंत हीरादास का वसीयत छल कपट से विश्वनाथ सिंह  ने बनवाकर उनकी मृत्यु के बाद डेढ़ एकड़ जमीन को कई प्रभावशाली लोगों को बेच दिया।इस बात को लेकर हम लोग कुमार साहब से मिले और उन्होंने पूरी बात समझने के बाद मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को चिट्ठी लिखी। मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को जांच के आदेश दिए।फिर कलेक्टर कोर्ट में केस लड़े।कलेक्टर कोर्ट ने वसीयत को फर्जी पाया और बिक्री की हुई जमीन की रजिस्ट्री शून्य कर दी।इसके बाद मामला कमिश्नर कोर्ट में चला और कलेक्टर के आदेश को पलट दिया गया।हमने फिर राजस्व बोर्ड बिलासपुर में अपील की,सुनवाई चल रही है।इस मामले में बीते पच्चीस साल से भाजपा हो या कांग्रेस की सरकार सभी ने कबीर पंथ को पूरा सहयोग किया।हालांकि शहर के कुछ लोगों की नजर जमीन पर थी।वर्तमान सरकार के आते ही कबीर आश्रम को परेशान करना शुरू किए और मेलाडांड की जमीन को 1990 से बिजली विभाग को आबंटित करने का कागज दिखाकर हथिया लिया गया।जिसपर कबीरपंथियो ने प्रशासन की बात को मात भी लिया किंतु ठेकेदार और बिजली विभाग के अधिकारियों ने कबीर आश्रम से हुई बात से मुकरते हुए जबरन निर्माण कार्य करा रहे हैं।वहीं कुछ भाजपा नेताओं के दबाव में हमारे द्वारा घेरा किया गया था,उसे उखाड़कर ठेकेदार ले गया।यही नहीं आश्रम की जमीन पर भाजपा नेताओं के इशारे पर भुवनेश्वर यादव को तहसील ऑफिस से स्टे भी दे दिया गया ताकि हम अपनी जमीन को सुरक्षित न कर सकें। धरने पर बैठे कबीर पंथी सीधे तौर पर आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा की अभी की सरकार हिंदुत्व की बात करती है लेकिन कबीर पंथियों को हिंदू क्यों नहीं मानती है? हमारी आस्था पर रोज चोट क्यों पहुंचाया जा रहा है? बहरहाल,इस मामले में विवाद गहराता जा रहा है।अभी मुट्ठीभर कबीर पंथी धरने पर बैठे हैं।समय रहते शासन प्रशासन इस विवाद को सुलझा लेना चाहिए नहीं तो इस धरना प्रदर्शन में कबीरपंथियो की संख्या इतनी ना बढ़ जाए कि स्थिति संभालने के लिए सरकार को मुश्किल हो जाए।

“ऑपरेशन सिंदूर” की गौरवगाथा को समर्पित तिरंगा यात्रा, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रहेंगे शामिल चराईडाँड़ से आम्बाबगीचा तक निकलेगा जनगौरव का सैलाब, सेना की वीरता को मिलेगा सम्मान

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जशपुर,16 मई 2025 सेना के साहस, शौर्य और पराक्रम की प्रतीक “ऑपरेशन सिंदूर” की स्मृति में 17 मई 2025 को सुबह 11 बजे एक ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह यात्रा चराईडाँड़ मंदिर से शुरू होकर आम्बा बगीचा बाजारडाँड़ तक निकाली जाएगी। इस गौरवमयी कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय श्री विष्णु देव साय स्वयं शामिल होकर वीर जवानों को नमन करेंगे और जनमानस को देशभक्ति के रंग में रंगेंगे। तिरंगा यात्रा का उद्देश्य न केवल भारतीय सेना के अदम्य साहस को जन-जन तक पहुंचाना है, बल्कि राष्ट्रभक्ति, एकता और अखंडता का संदेश देना भी है। “ऑपरेशन सिंदूर” में सेना ने पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए दुश्मन के मंसूबों को नेस्तनाबूद किया था। अब इस सफलता को आमजन के बीच लेकर जाने की बारी है। कार्यक्रम विवरण: स्थान: चराईडाँड़ मंदिर से आम्बा बगीचा बाजारडाँड़ तिथि: 17 मई 2025 समय: प्रातः 11:00 बजे से  भाजपा की अपील,,आइए, हम सब मिलकर इस तिरंगा यात्रा को ऐतिहासिक बनाएं और हमारे जवानों को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करें।