गोकुलाष्टमी पर्व के शताब्दी वर्ष पर कंडोरा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब — मूढू बाबा की परंपरा आज भी जीवंत, 100 वर्षों से अटूट आस्था का पर्व

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गोकुलाष्टमी पर्व के शताब्दी वर्ष पर कंडोरा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब — मूढू बाबा की परंपरा आज भी जीवंत, 100 वर्षों से अटूट आस्था का पर्व अष्टमी के दिन आयुष जल से मां यशोदा अपने कान्हा को कराती हैं स्नान संतोष चौधरी जशपुर,12 नवंबर 2025 – महाकुल समाज के आराध्य भक्त प्रहलाद उर्फ मूढू बाबा द्वारा 1925 में प्रारंभ की गई गोकुलाष्टमी बाल लीला की परंपरा इस वर्ष अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। यह अनूठा पर्व आज भी कंडोरा गांव में उसी रीति-रिवाज और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है, जैसा एक शताब्दी पूर्व प्रारंभ हुआ था।आज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में गूंजेगा “जय यादव जय माधव”।   यह बाल लीला सप्तमी की रात से प्रारंभ होती है, जब नौ प्रकार की जड़ी-बूटियों को मिलाकर आयुष जल तैयार किया जाता है। अष्टमी की भोर चार बजे अविवाहित बालक-बालिकाओं को इस आयुष जल से स्नान कराया जाता है, फिर उन्हें तिलक-चंदन लगाकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। चावल के आटे, शकरकंद, छेना और घी से बनी मीठी रोटी तैयार की जाती है, जिसे दही के साथ प्रसाद स्वरूप बच्चों और उपस्थित जनों को वितरित किया जाता है। घर-घर में यही प्रसाद प्रेमपूर्वक परोसा जाता है।       इस बाल लीला का उद्देश्य है — “बालकों की आयु बढ़े तो वंश वृद्धि होगी”, इसी मंगलकामना के साथ महाकुल समाज में गोकुलाष्टमी पर्व मनाया जाता है।   गांव के बुजुर्ग ग्राम पटेल निराकार यादव बताते हैं कि इस परंपरा की शुरुआत स्वर्गीय मूढू बाबा ने की थी, जिन्होंने धर्म, भक्ति और गौसेवा के पथ पर जीवन समर्पित किया। उन्होंने चारों धाम की पैदल यात्रा की थी और प्रायः मथुरा-वृंदावन जाकर गोसेवा में लीन रहते थे। मूढू बाबा कंदोरा और बोडोकछार — दोनों गांवों के जमींदार थे और लगभग 120 एकड़ भूमि के स्वामी थे। उनके तीन पुत्र हुए, जिनमें सबसे छोटे चेतन बोडोकछार में बस गए, जबकि अन्य दो पुत्र कंदोरा में ही रहे। मूढू बाबा ने 1942 में देह त्याग किया।   निराकार यादव बताते हैं कि महाकुल समाज के पूर्वज कृष्णवंशज थे, जो उड़ीसा के संबलपुर क्षेत्र से पलायन कर छत्तीसगढ़ के धर्मजयगढ़, लैलूंगा और आसपास के क्षेत्रों में बस गए। कहा जाता है कि जब उनके सामने खाड़ूंग नदी पड़ी, तो उन्होंने अपने इष्टदेव का सुमिरन किया और नदी सूख गई — जिससे वे सुरक्षित पार हो सके। धीरे-धीरे महाकुल समाज की आबादी बढ़ी और रायगढ़, जशपुर, बिलासपुर सहित पूरे अंचल में फैल गई।   ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार मूढू बाबा का जन्म 1831 में बोडोकछार गांव के मंगल भगत के घर हुआ था। 1910 में उन्होंने कंदोरा में खसरा नंबर 223 के 14 एकड़ 40 डिसमिल क्षेत्र में आम के पौधे लगाए, जो आज “अमराई” के नाम से प्रसिद्ध है। यही स्थान अब महाकुल समाज के यज्ञ नगर – गोकुलधाम के रूप में प्रतिष्ठित है। मूढू बाबा ने उड़िया भाषा में भागवत पुराण, हरिवंश पुराण और महाभारत के पवित्र ग्रंथों का निर्माण करवाया, जो आज भी सुरक्षित हैं और अष्टमी के दिन गोकुलधाम में पूजा के लिए रखे जाते हैं।   मूढू बाबा का जशपुर राज परिवार से गहरा संबंध था। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान राजा देवशरण सिंह जूदेव ने उन्हें राजसी विवाह समारोह का विशेष न्यौता भेजा था, जिसका प्रमाण आज भी मौजूद है।   1963 से कंदोरा की अमराई में गोकुलाष्टमी मेला प्रारंभ हुआ, जो इस वर्ष अपने 62वें वर्ष में है। अब यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में महाकुल समाज की आस्था, एकता और परंपरा का प्रतीक बन चुका है। इस वर्ष के गोकुलाष्टमी शताब्दी पर्व को भव्यता देने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, पद्मश्री जगेश्वर राम यादव, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, प्रांताध्यक्ष परमेश्वर यादव, रणविजय सिंह जूदेव, राधेश्याम राठिया, गोमती साय, रायमुनि भगत और प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जैसे कई प्रमुख अतिथि शामिल हो रहे हैं। प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, वहीं मेले में दुकानदार अपनी दुकानें सजा रहे हैं और मंच की तैयारी अंतिम चरण में है।   गोकुलाष्टमी पूजा समिति के अध्यक्ष रविशंकर यादव, उपाध्यक्ष कुंवर यादव, कोषाध्यक्ष बिन्नू यादव, सचिव विनोद कुमार यादव एवं सह सचिव गुले यादव अपनी कार्यकारिणी के साथ आयोजन की सफलता हेतु सक्रिय रूप से जुटे हैं।   गोकुलधाम की यह 100 वर्षीय परंपरा आज भी न सिर्फ आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह संदेश देती है —“जहां भक्ति है, वहां वंश की समृद्धि और समाज की एकता सदैव बनी रहती है।”

💥 भिंजपुर में दिल दहला देने वाली वारदात – पत्नी ने की पति की हत्या, शव को सूटकेस में भरकर छिपाया! 💥

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जशपुर,10 नवंबर 2025  जशपुर जिले के दुलदुला थाना क्षेत्र के भिंजपुर गांव से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है। यहां एक महिला ने अपने ही पति की हत्या कर उसकी लाश को सूटकेस में बंद कर घर के अंदर छिपा दिया! जब पुलिस ने सूटकेस खोला, तो भीतर से कम्बल में लिपटा शव देखकर हर कोई सन्न रह गया। पूरे गांव में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने बताया कि मृतक का नाम संतोष भगत (43 वर्ष) है, जो गांव में अपनी पत्नी के साथ रहता था। मृतक के भाई विनोद मिंज (45 वर्ष) ने इस सनसनीखेज हत्या का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि संतोष की पत्नी मुंबई में काम करती थी और कुछ दिन पहले ही गांव लौटी थी। दिनांक 7 नवंबर की रात पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर जोरदार झगड़ा हुआ था। इस झगड़े की आवाज उनकी मंझली बेटी ने फोन पर कोरबा से सुनी थी। अगले दिन यानी 8 नवंबर को आरोपी महिला ने खुद अपनी बेटी को फोन कर बताया कि उसने अपने पति को मार डाला है और उसका शव सूटकेस में बंद कर दिया है! यह सुनते ही बेटी घबरा गई और तुरंत अपने पति के साथ गांव पहुंची। उसने बड़े पिताजी को सारी बात बताई और फिर 9 नवंबर को पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और तलाशी के दौरान लाल रंग का ट्रॉली सूटकेस बरामद किया। जब उसे गवाहों की मौजूदगी में खोला गया तो अंदर से संतोष भगत का शव कम्बल में लिपटा मिला। पुलिस ने हत्या का मामला बीएनएस की धारा 103(1) के तहत दर्ज किया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि आरोपी महिला की पहचान कर ली गई है और वह फिलहाल फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम महाराष्ट्र रवाना कर दी गई है। गिरफ्तारी के बाद ही हत्या के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा

माँ समलेश्वरी के आशीर्वाद से प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने 140 लोगों को कराई घर वापसी,कार्तिक उरांव को किया नमन

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  रायपुर,31 अक्टूबर 2026 – माँ समलेशवरी की पावन धरा सारंगढ़ में विराट हिन्दू सम्मेलन का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ।कार्यक्रम में अजय उपाध्याय महाराज के सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम में 140 धर्मांतरित लोगों की घर वापसी हुई।इस आयोजन में प्रमुख अतिथि प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने उपस्थित होकर सभी 140 धर्मांतरित लोगों के पैर पखारकर उन्हें विधिवत सनातन धर्म में वापसी कराई। अपने उद्बोधन में प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा“माँ समलेशवरी की इस पवित्र भूमि पर आज धर्म की पुनःस्थापना का एक गौरवशाली क्षण है। सनातन धर्म केवल एक आस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक उत्कृष्ट पद्धति है जो समरसता, प्रेम और सत्य के मार्ग पर अग्रसर करती है।” प्रबल ने कहा “यह घर वापसी हम परम पूजनीय कार्तिक उरांव को समर्पित करते हैं जिनकी कल जयंती थी, उन्होंने अपना पूरा जीवन जनजाति समाज के संस्कृति के संरक्षण एवं उनके हक के लिए संघर्ष किया। उन्होंने आगे कहा कि – “पूज्य पिताजी कुमार दिलीप सिंह जूदेव जी द्वारा प्रारंभ किया गया घर वापसी अभियान हमारे जीवन का आधार है, और हम इसे जीवन पर्यंत आगे बढ़ाते रहेंगे। यह केवल एक अभियान नहीं बल्कि एक राष्ट्र निर्माण कार्य हैं जो हमारी संस्कृति, परंपरा और आत्मसम्मान का प्रतीक है।”   कार्यक्रम में घर वापसी छत्तीसगढ़ प्रांत की संयोजिका अंजू गबेल का विशेष सहयोग रहा. उन्होंने अपने भाषण में कहा ” छत्तीसगढ़ के युवाओं को अपने धर्म, संस्कृति के लिए एकजुटता से कार्य करने की आवश्यकता है ” कार्यक्रम की अध्यक्षता संजय भूषण पांडेय, अध्यक्ष जिला पंचायत ( सारंगढ़ ) ने की।इस अवसर पर राजकुमार चौधरी, प्रान्त प्रमुख धर्मजागरण , मेहर बाई नायक, स्वाध्याय प्रमुख, केराबाई मनहर,पूर्व विधायक,ज्योति पटेल, जिलाध्यक्ष भाजपा,मुक्ता वर्मा,उषाकला रेख बाई रामनामी, गुलाराम रामनामी, आचार्य श्रीराम भगत रामनामी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।कार्यक्रम को सफल बनाने युवा टीम में मुख्य रूप में रवि तिवारी, किशन गुप्ता, इशांत शर्मा, धीरज सिंह एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रम का सफल संचालन अमित गोगले द्वारा किया गया।इस अवसर पर सभी वक्ताओं ने धर्म, समाज एवं राष्ट्र की एकता के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।

मोंथा चक्रवात का असर अब भी जारी, मौसम विभाग ने फिर दी चेतावनी – कई जिलों में बारिश और वज्रपात का अलर्ट,जशपुर से आई तस्वीरें देखिए

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मोंथा चक्रवात का असर अब भी जारी, मौसम विभाग ने फिर दी चेतावनी – कई जिलों में बारिश और वज्रपात का अलर्ट   रायपुर/जशपुर – चक्रवात मोंथा का असर अब तक खत्म नहीं हुआ है। मौसम विभाग ने बताया है कि छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में आज भी बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है। कई जगहों पर तेज हवा चलने और बिजली गिरने का खतरा है। फोटो: लोरो घाटी में कोहरे और हल्की बारिश से विजिबिलिटी कम,लाइट जलाकर चलते वाहन मौसम विभाग के अनुसार, मोंथा चक्रवात का असर इस समय पूर्वी विदर्भ और दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर एक निम्न दबाव क्षेत्र के रूप में बना हुआ है, जो अब उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। अगले 24 घंटे में यह सिस्टम उत्तर छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्यप्रदेश की ओर बढ़कर एक नया दबाव क्षेत्र बना सकता है। फोटो: बालाछापर नेशनल हाईवे की तस्वीर पिछले 24 घंटे में प्रदेश के कई इलाकों में अच्छी बारिश हुई। बड़े बचेली में सबसे ज्यादा 6 सेमी, भोपालपटनम में 4 सेमी, कुसमी में 3 सेमी, जबकि कुटरू, गंगालूर, भैरमगढ़, दुर्गकोंदल और नारायणपुर में 2 सेमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा औंधी, सामरी, कांसाबेल, उसूर, मानपुर, जगदलपुर, ओरछा, बिहारपुर, कुआकोडा, कटघोरा और बुलबुला में हल्की वर्षा हुई।   जशपुर जिले में सुबह से कोहरा और हल्की बारिश देखने को मिली, जिससे विजिबिलिटी यानी दृश्यता कम हो गई। मौसम विभाग ने जशपुर, बलरामपुर और आसपास के इलाकों के लिए अगले 3 घंटे का अलर्ट जारी किया है। यहां बिजली गिरने, गरज के साथ बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना जताई गई है। फोटो: सुबह 10 बजे हैं,जशपुर शहर का मौसम कोहरे से ढका हुआ,स्ट्रीट लाइट जलते हुए   रायगढ़, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा मरवाही, सुरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर जिलों में भी मध्यम वर्षा की संभावना बताई गई है।   राजधानी रायपुर में आज पूरे दिन बादल छाए रहेंगे और बीच-बीच में हल्की बारिश हो सकती है। तापमान में भी गिरावट आएगी और अधिकतम तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। फोटो: रणजीता स्टेडियम में राज्योत्सव की तैयारी में खराब मौसम का असर दिखता हुआ   मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एक नवंबर तक उत्तर छत्तीसगढ़ यानी जशपुर, बलरामपुर और सरगुजा के इलाके में यह सिस्टम ज्यादा सक्रिय रहेगा। इसलिए किसानों और ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में बिजली गिरने के समय न जाएं और खुले में खड़े न रहें।

जनप्रतिनिधि से दुर्व्यवहार पर तहसीलदार सन्ना की कार्यशैली विवाद में, वीडियो वायरल होने के बाद मामला गरमाया

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जशपुर,30 अक्टूबर 2025 – सन्ना तहसील में पदस्थ महिला तहसीलदार एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। जनपद सदस्य राकेश गुप्ता के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होते ही मामला तूल पकड़ लिया है। इसमें तहसीलदार को जनप्रतिनिधि से तीखे लहजे में बात करते और गुस्से में नसीहत देते हुए देखा जा सकता है।इस वीडियो की पुष्टि ख़बर जनपक्ष नहीं करता है।तहसीलदार की ओर से इस मामले पर कोई बयान अभी सामने नहीं आया है।   जानकारी के अनुसार, हाल ही में एक जमीन विवाद के दौरान जनपद सदस्य राकेश गुप्ता तहसीलदार से चर्चा करने गए थे। इसी दौरान दोनों के बीच कहासुनी हो गई और बात इतनी बढ़ गई कि माहौल तनावपूर्ण बन गया। जनपद सदस्य का कहना है कि तहसीलदार ने जनप्रतिनिधि के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, जो अस्वीकार्य है। पहले भी रह चुकी हैं विवादों में यह कोई पहला मौका नहीं है जब तहसीलदार सन्ना विवादों में आई हों। बगीचा में पदस्थापना के दौरान भी उन पर पटवारियों ने गंभीर आरोप लगाए थे कि उनसे निजी कामों और राशन की मांग की जाती थी। उस समय भी यह मामला चर्चा में रहा था और उनकी कार्यशैली पर सवाल उठे थे। इसके अलावा, अधिवक्ता संघ द्वारा उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया जाना भी विवादों की लंबी सूची में शामिल है।सूत्रों के मुताबिक, कुछ समय पहले तहसील के ही कर्मचारियों ने भी तहसीलदार पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था, जिसके बाद मामला जिला स्तर पर सुलझाया गया था।   राजनीतिक गलियारों में हलचल इस ताजा घटनाक्रम ने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई हलचल मचा दी है। कई संगठन और जनप्रतिनिधि प्रशासन से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। जनपद सदस्य राकेश गुप्ता ने कहा कि किसी भी अधिकारी को जनता के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए, न कि अहंकारपूर्ण व्यवहार करना चाहिए।उन्होंने कहा कि यह मामला शासकीय भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़ा है, जहां निष्पक्षता की अपेक्षा की जा रही थी, लेकिन व्यवहारिक तौर पर भेदभाव झलक रहा है। सोशल मीडिया फेसबुक में यूजर्स तहसीलदार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।वहीं अन्य जनप्रतिनिधियों में भी इस मामले पर तहसीलदार के खिलाफ आक्रोश है। अब नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर जनप्रतिनिधि के साथ दुर्व्यवहार के आरोप के बाद अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। जिला प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन वायरल वीडियो और लगातार बढ़ते जन असंतोष को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस पर जांच या कार्रवाई की घोषणा की जा सकती है।

विशेष लेख : एकता दिवस का महत्व : भारत की एकता और अखंडता की आधारशिला को नमन (निर्मल कुमार)

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विशेष लेख : एकता दिवस का महत्व : भारत की एकता और अखंडता की आधारशिला को नमन (निर्मल कुमार) हर साल 31 अक्टूबर को भारत राष्ट्रीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas) मनाता है, ताकि सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती का सम्मान किया जा सके — एक ऐसे महान नेता जिनकी दूरदृष्टि और दृढ़ निश्चय ने एक एकीकृत भारत की नींव रखी। “भारत के लौह पुरुष” के रूप में प्रसिद्ध पटेल के नेतृत्व में स्वतंत्रता के बाद 560 से अधिक रियासतों का एकीकरण हुआ, जिसने आज के इस अखंड, संप्रभु राष्ट्र को जन्म दिया। एकता दिवस केवल उनकी विरासत को श्रद्धांजलि नहीं है — यह भारत की विविधता में एकता की स्थायी प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि है। लौह पुरुष और भारत का एकीकरण 1947 में जब भारत स्वतंत्र हुआ, तब देश को 560 से अधिक रियासतों का जटिल ताना-बाना विरासत में मिला — प्रत्येक रियासत की अपनी स्वायत्तता और अलग निष्ठाएँ थीं। सरदार पटेल ने इन रियासतों को भारतीय संघ में सम्मिलित करने की चुनौती स्वीकार की — एक ऐसा कार्य जिसके लिए अद्वितीय कूटनीति, साहस और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता थी। उनकी स्थिर दृष्टि और अटूट निश्चय ने उन्हें “लौह पुरुष” का ख़िताब दिलाया। राजनैतिक समझदारी और व्यवहारिकता के संयोजन से पटेल ने हैदराबाद, जूनागढ़ और जम्मू-कश्मीर जैसी महत्वपूर्ण रियासतों का विलय कराया, जिससे भारत की क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित हुई। “एकता के बिना मनुष्यबल कोई शक्ति नहीं है; जब तक वह उचित रूप से संगठित न हो जाए, तब तक वह एक आध्यात्मिक शक्ति नहीं बन सकता।” — सरदार वल्लभभाई पटेल पटेल के लिए राष्ट्र की सच्ची शक्ति केवल सीमाओं में नहीं, बल्कि उसके लोगों की एकता में निहित थी। राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरुआत वर्ष 2014 में भारत सरकार ने सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इसका उद्देश्य नागरिकों में एकता की भावना को पुनर्जीवित करना और पटेल की “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की दृष्टि को सम्मानित करना है। इस दिन देशभर में Run for Unity, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियाँ, और शपथ समारोह आयोजित किए जाते हैं — स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों से लेकर सेना और समुदायों तक। मुख्य समारोह गुजरात के एकता नगर स्थित “Statue of Unity” (182 मीटर ऊँची पटेल की भव्य प्रतिमा) पर आयोजित होता है, जो भारत की शक्ति, साहस और सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। एक दृष्टि जो समय से परे है सरदार पटेल की राजनीतिक बुद्धिमत्ता और दूरदृष्टि आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी स्वतंत्रता के समय थी। उनका सामाजिक समरसता और समावेशिता में विश्वास आज के विभाजित विश्व में भी प्रेरणा देता है। “सत्य और न्याय के मार्ग पर चलो — क्योंकि वही सभी के लिए सही मार्ग है।” — सरदार पटेल ये शब्द हमें याद दिलाते हैं कि भारत के सामाजिक ताने-बाने में न्याय, परस्पर सम्मान और शांति बनाए रखना हमारी साझा जिम्मेदारी है। एकता दिवस उस भारत की भावना को पुनर्स्थापित करता है जो अपनी विविधता में फलता-फूलता है, न कि उसके बावजूद। यह हर नागरिक को राष्ट्र की एकता के प्रति समर्पण की याद दिलाता है और भाषा, क्षेत्र और धर्म के बीच मजबूत बंधन बनाने का आह्वान करता है। आधुनिक भारत में एकता दिवस का महत्व आज जब भारत क्षेत्रीय असमानताओं, सामाजिक विभाजनों और वैचारिक मतभेदों जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब एकता दिवस का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामूहिक प्रगति की भावना का पुनर्जागरण है। हर वर्ष Statue of Unity पर आयोजित समारोह देशभक्ति और गर्व की भावना को फिर से प्रज्वलित करता है। यह संदेश देता है कि भारत चाहे जितना विशाल और विविध क्यों न हो — उसका दिल और आत्मा एक है। “मेरी केवल एक इच्छा है कि भारत एक अच्छा उत्पादक बने और देश में कोई भूखा न रहे, किसी की आँखों में आँसू न हों।” — सरदार पटेल उनका यह विचारशील राष्ट्रवाद सेवा और एकता पर आधारित नेतृत्व का सर्वोत्तम उदाहरण है। एकता की अमर विरासत   राष्ट्रीय एकता दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं है — यह उस शक्ति की याद दिलाता है जो एकता से आती है। यह भारत के संविधान, धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र, और उस कालातीत विचार का प्रतिबिंब है कि एकता ही राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति है।   एक विभाजित होती दुनिया में पटेल का उदाहरण हमें अनुशासन, एकजुटता और सामूहिक नियति में विश्वास का संदेश देता है। हर वर्ष 31 अक्टूबर को जब भारत एकता दिवस मनाता है, तब यह हमें याद दिलाता है कि पटेल की कल्पित एकता कोई स्थिर अवधारणा नहीं, बल्कि एक जीवंत शक्ति है। “कार्य ही पूजा है, श्रम ही ईश्वर है, और जो व्यक्ति सही भावना से कार्य करता है, वह सदा शांत और प्रसन्न रहता है।” — सरदार वल्लभभाई पटेल ये वचन हर पीढ़ी को राष्ट्र की प्रगति और एकता में योगदान देने का आह्वान करते हैं। सरदार पटेल की विरासत इतिहास से परे है — वह भारत की आत्मा में सजीव है। हर वर्ष एकता दिवस यह सुनिश्चित करता है कि यह भावना कभी मंद न पड़े, भारत सदैव एक रहे, और पटेल का सुदृढ़ सामंजस्य सदा हमारा मार्गदर्शक बना रहे। (लेखक निर्मल कुमार सामाजिक,आर्थिक मुद्दों के जानकार हैं।यह उनके निजी विचार हैं।)

जशपुर में 15 अक्टूबर को होगा फिल्म अर्पण का पोस्टर विमोचन, डॉ हरविंदर मांकड़ और आदेश शर्मा रहेंगे विशेष अतिथि

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जशपुर में 15 अक्टूबर को होगा फिल्म अर्पण का पोस्टर विमोचन, डॉ हरविंदर मांकड़ और आदेश शर्मा रहेंगे विशेष अतिथि जशपुर,12 अक्टूबर 2025/ जशपुर की धरती एक बार फिर बड़ी सांस्कृतिक और प्रेरणादायक घटना की साक्षी बनने जा रही है। क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ ग्रेस कुजूर के संघर्षपूर्ण जीवन पर आधारित फिल्म अर्पण का भव्य पोस्टर विमोचन समारोह 15 अक्टूबर को जशपुर में आयोजित होगा। पॉपकॉर्न फ्लिक्स इंडिया के प्रोडक्शन हेड संतोष चौधरी ने बताया कि इस अवसर पर एपीजे अब्दुल कलाम पर पुस्तक लिखने वाले प्रसिद्ध लेखक और लोटपोट पत्रिका के मोटू पतलू के क्रिएटर, सुप्रसिद्ध कार्टूनिस्ट डॉ हरविंदर मांकड़ तथा बालाजी फिल्म्स इंडिया के संस्थापक आदेश शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। खास बात है कि पॉपकॉर्न फ्लिक्स इंडिया की फिल्म अर्पण में नायिका की भूमिका स्वयं डॉ ग्रेस कुजूर ने निभाई है। कार्यक्रम में पूर्व सैनिक भी विशेष रूप से आमंत्रित हैं, क्योंकि डॉ ग्रेस के पिता स्वर्गीय स्तानिसलास कुजूर भारतीय सेना के वीर सैनिक रहे हैं, जिन्होंने चार लड़ाइयां, 1962, 1965, 1971 तथा गोवा मुक्ति संग्राम में अपनी वीरता का प्रदर्शन किया था। डॉ हरविंदर मांकड़ ने कहा कि “जशपुर की खूबसूरत और अनछुई वादियाँ मुझे दोबारा खींच लाई हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी की स्वच्छ पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता अनुकरणीय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पेड़ माँ के नाम अभियान की सफलता देखकर यह फिल्म उसी भावना को समर्पित है।” वहीं, आदेश शर्मा ने भी डॉ ग्रेस के कार्यों से प्रभावित होकर समारोह में शामिल होने की सहमति दी है। वे पिछले 35 वर्षों से मीडिया और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं और तथास्तु इंडिया, वायदूत न्यूज नेटवर्क, बालाजी फिल्म्स के संस्थापक होने के साथ ही दूरदर्शन स्ट्रिंगर फेडरेशन ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव के रूप में कार्यरत हैं। यह समारोह न केवल जशपुर की कला और सौंदर्य को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने वाला साबित होगा, बल्कि डॉ ग्रेस कुजूर के प्रेरक जीवन की कहानी को भी जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम बनेगा।

रायकेरा में दोहरी हत्या से दहशत — सास और दामाद की निर्मम हत्या, गांव में मचा हड़कंप

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रायकेरा गांव में दोहरी हत्या से सनसनी सास और दामाद की देर रात हत्या, गांव में मचा हड़कंप। पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर जांच में जुटी। एक महिला समेत दो संदेहियों से पूछताछ जारी। प्राथमिक जांच में पैसे के लेन-देन का मामला आया सामने।   रायकेरा (रायगढ़)। रायगढ़ जिले के घरघोड़ा थाना क्षेत्र के रायकेरा गांव में देर रात हुए दोहरे हत्याकांड से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। सास और दामाद की हत्या की खबर से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। पुलिस और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंचकर जांच में जुटी हुई है।   घटना देर रात की बताई जा रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, पैसे के लेन-देन को लेकर विवाद हत्या की वजह हो सकती है। पुलिस ने संदेह के आधार पर एक महिला सहित दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।   हत्या की वारदात की जानकारी मिलते ही घरघोड़ा थाना पुलिस ने इलाके को घेर लिया और एफएसएल टीम को मौके पर बुलाकर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की। गांव में बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए हैं, वहीं घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।   पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और हत्या के कारणों की जांच में तेजी लाई जा रही है। थाना प्रभारी के अनुसार, प्राथमिक जांच में आर्थिक लेनदेन को लेकर विवाद सामने आया है, हालांकि पुलिस अन्य सभी बिंदुओं पर भी गहनता से जांच कर रही है।  

हाथी के हमले में महिला की मौत,ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप

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हाथी के हमले में महिला की मौत, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप जशपुर जिले में जंगली हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष कम करने के दावों के बीच एक बुरी खबर आई है,जिसमें जंगली मशरूम बीन रही महिला एक जंगली हाथी की चपेट में आ गई।ग्रामीणों के शोरगुल से जंगली हाथी ने महिला को बुरी तरह घायल कर दिया।स्थानीय ग्रामीणों और वन विभाग की मदद से घायल को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन इलाज के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया। जशपुर,20 सितंबर 2025 – कुनकुरी विकासखंड के कुड़ुकेला जंगलपारा में हाथी के हमले से एक महिला की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार 44 वर्षीय ग्रामीण महिला ज्योति मिंज शुक्रवार की सुबह जंगल से खुखड़ी (जंगली मशरुम) बीनकर लौट रही थी। घर से महज 200 मीटर दूर जंगल की सीमा पर हाथी ने उस पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल हालत में उसे तत्काल कुनकुरी के होलीक्रॉस अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।   घटना से ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी की जानकारी होने के बावजूद वन विभाग की ओर से मुनादी नहीं कराई गई और न ही लोगों को सावधान किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ है। वहीं वन विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि हाथियों के विचरण को लेकर विभिन्न संचार माध्यमों से लोगों को अलर्ट किया जा रहा है।लोग जंगल में जाते समय लापरवाही कर रहे हैं।घटना की सूचना मिलते ही एंबुलेंस से घायल को अस्पताल पहुंचाया गया। इस घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने हाथियों की लगातार आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखने और लोगों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस पर होगा पौधा रोपण,कौशल्या साय ने हर घर में दीप जलाने की अपील की

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जशपुर,15 सितंबर 2025 – सत्रह सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय प्रातः 9 बजे बगिया के श्री फलेश्वर नाथ मंदिर परिसर में पौधा रोपण करेंगी एवं सांय 6 बजे कुनकुरी के छठ घाट में शहरवासियों के साथ दीप प्रज्वलन कर उनके उज्जवल भविष्य की कामना कर राष्ट्र प्रगति की कामना करेंगी। इस मौके पर भव्य कार्यक्रम के साथ छठ घाट को दीपों से सजा कर रोशन किया जाएगा।कुनकुरी के नगरवासियों ने इस आयोजन की तैयारी उत्साहपूर्वक शुरू कर दी है। श्रीमती कौशल्या साय ने समस्त प्रदेश वासियों से अपील किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर को सभी लोग अपने घरों में पौधारोपण कर शाम को दीपक जला कर एकजुटता का संदेश दें और राष्ट्र प्रगति की कामना करें। उन्होनें आगे कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी बीते 11 साल से लगातार देश के विकास के लिए पूरे समर्पण भाव से काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत विश्व गुरू बनने की ओर अग्रसर है। देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा मजबूत हुई है। देश का आर्थिक विकास एक नई उंचाई को छू रहा है। अंर्तराष्ट्रीय मंच में भारत की उपस्थिति पहले से अधिक मजबूत हुई है। बीते दो साल में नक्सल मुक्ति की ओर छत्तीसगढ़ ने तेजी से कदम बढ़ाया है।ऐसे में हम सब प्रदेश वासियों का दायित्व है कि हम जन्म दिवस के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एकजुटता का संदेश देकर उनका उत्साहवर्द्वन करे ताकि वे एक नई उर्जा के साथ देश और देशवासियों की सेवा कर सकें।