जशपुर में कृषि क्रांति 2.0: विधायक गोमती साय ने किया तीन दिवसीय भव्य मेले का आगाज़, देश भर की कंपनियों की नजर जशपुर के काजू और जीरा फूल चावल पर

VID 20260323 WA0009

जशपुर में कृषि क्रांति 2.0: विधायक गोमती साय ने किया तीन दिवसीय भव्य मेले का आगाज़, देश भर की कंपनियों की नजर जशपुर के काजू और जीरा फूल चावल पर कुनकुरी (जशपुर) | 23 मार्च 2026 खास बातें (Highlights): उद्घाटन: पत्थलगांव विधायक गोमती साय ने फीता काटकर मेले की शुरुआत की। आयोजन: कुनकुरी कृषि महाविद्यालय में तीन दिवसीय ‘कृषि क्रांति एक्सपो 2.0’। बड़ी डील: जीरा फूल चावल, काजू, टाऊ और आम की खरीदी के लिए कंपनियों ने दिखाया भारी उत्साह। मकसद: किसानों और बड़ी कंपनियों के बीच सीधा व्यापारिक संवाद (Buyer-Seller Meet)। जशपुर – छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में खेती-किसानी को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है। कुनकुरी स्थित कृषि महाविद्यालय के प्रांगण में तीन दिवसीय ‘कृषि क्रांति एक्सपो 2.0’ का शानदार आगाज हुआ। इस भव्य मेले का उद्घाटन मुख्य अतिथि पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय ने किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जशपुर की माटी में पैदा होने वाली फसलों की खुशबू अब सात समंदर पार तक जाएगी। कंपनियों और किसानों का सीधा संवाद इस एक्सपो की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ देश भर की नामी कृषि आधारित कंपनियां सीधे किसानों से रूबरू हो रही हैं। जिला प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए किसानों ने बताया कि अब उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना होगा। वे अपनी उपज की गुणवत्ता और मार्केटिंग को लेकर सीधे कंपनियों से चर्चा कर रहे हैं। कलेक्टर रोहित व्यास की ‘ब्रांड जशपुर’ रणनीति कलेक्टर रोहित व्यास ने जानकारी दी कि यह ‘कृषि क्रांति एक्सपो’ का दूसरा वर्ष है। उन्होंने कहा— “जशपुर जिले में पैदा होने वाली फसलों और फलों के प्रोडक्ट्स की मांग अब देशभर में होने लगी है। यह एक ऐसा मंच है जहाँ क्रेता और विक्रेता के बीच सीधा संवाद हो रहा है, जिससे किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके।” इन उत्पादों की मची है धूम मेले के मीटिंग हॉल में जशपुर के खास उत्पादों को लेकर कंपनियों के बीच जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। विशेष रूप से निम्नलिखित उत्पादों की ट्रेडिंग और मार्केटिंग पर सत्र चल रहे हैं: जीरा फूल सुगंधित चावल: अपनी खुशबू के लिए मशहूर। काजू और टाऊ: जशपुर की पहचान बन चुके ये उत्पाद। रामतिल और मूंगफली: व्यापारिक संभावनाओं से भरपूर। दशहरी और आम्रपाली आम: सीजन से पहले ही कंपनियों ने खरीदी में दिलचस्पी दिखाई है। एक्सपर्ट्स दे रहे हैं ट्रेनिंग तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले में केवल प्रदर्शनी ही नहीं, बल्कि विभिन्न तकनीकी सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को आधुनिक खेती, फसलों की प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग के गुर सिखाए जा रहे हैं।

जशपुर में 2.10 लाख अवैध ईंटें जब्त, पर ‘तस्वीरें’ गायब; क्या अपनी किरकिरी बचाने के लिए खनिज विभाग ने चली चाल?

IMG 20260318 WA0023

जशपुर में 2.10 लाख अवैध ईंटें जब्त, पर ‘तस्वीरें’ गायब; क्या अपनी किरकिरी बचाने के लिए खनिज विभाग ने चली चाल? प्रेस नोट की हकीकत जानने पत्रकारों का दल जाएगा पम्पशाला जशपुरनगर, 18 मार्च 2026 – जिले में अवैध उत्खनन के खिलाफ खनिज विभाग की ‘बड़ी कार्रवाई’ अब सवालों के घेरे में है। फरसाबहार के ग्राम पमशाला में प्रीतमलाल प्रजापति के ईंट भट्ठे पर 2 लाख 10 हजार नग अवैध ईंटें जब्त करने का दावा तो किया गया है, लेकिन पत्रकारों के मैसेज के बाद भी इस पूरी कार्रवाई की फोटो या वीडियो विभाग ने जनसंपर्क कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराई है। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या विभाग ने अपनी पिछली विफलताओं और सोशल मीडिया पर हो रही किरकिरी को दबाने के लिए केवल कागजी आंकड़ों का सहारा लेकर ‘हेडलाइन मैनेजमेंट’ किया है? किरकिरी खत्म करने वाली कार्रवाई या महज ‘प्रेस नोट’ का खेल?   आमतौर पर खनिज विभाग जब भी बड़ी कार्रवाई करता है, तो मौके की तस्वीरें और वीडियो साक्ष्य के तौर पर मीडिया को दिए जाते हैं। पमशाला जैसे मामले में, जहां 2 लाख से ज्यादा ईंटें और ‘VIP’ ब्रांड के भट्ठे पर कार्रवाई की बात कही जा रही है, वहां विजुअल्स,फोटोज का न होना शंका पैदा करता है। जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ समय से अवैध परिवहन को लेकर विभाग की काफी आलोचना हो रही थी, जिससे बचने के लिए जनसंपर्क विभाग के माध्यम से यह समाचार प्रसारित कराया गया हो सकता है। क्या है खान एवं खनिज अधिनियम 1957 की ‘धारा 21’ और इसका विस्तार? AI जनरेटेड इस मामले में विभाग ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। आइए समझते हैं कि यह धारा कितनी शक्तिशाली है और इसके तहत क्या कार्रवाई होती है: 1. अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध (Section 21.1): यह धारा स्पष्ट करती है कि जो कोई भी इस अधिनियम की शर्तों का उल्लंघन कर खनिज (जैसे ईंट के लिए मिट्टी) का उत्खनन, परिवहन या भंडारण करता है, उसे 5 साल तक की जेल या 5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक का जुर्माना (या दोनों) हो सकता है। 2. जब्त सामग्री पर सरकारी कब्ज़ा (Section 21.4): इस उपधारा के तहत, यदि कोई अधिकारी अवैध खनन पाता है, तो वह न केवल खनिज (ईंटें), बल्कि उसमें इस्तेमाल हुए औजार, मशीनरी और वाहनों को भी जब्त कर सकता है। 3. मूल्य की वसूली (Section 21.5): यदि अवैध रूप से निकाला गया खनिज कहीं और भेज दिया गया है, तो सरकार उस व्यक्ति से उस खनिज का बाजार मूल्य और रॉयल्टी वसूलने का हक रखती है। 4. पुलिस और मजिस्ट्रेट की शक्ति: धारा 21 के तहत दर्ज मामलों में प्रशासन को यह शक्ति होती है कि वह आरोपी के खिलाफ सीधे कोर्ट में मामला चलाए। यह एक गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में भी आ सकता है यदि उल्लंघन गंभीर प्रकृति का हो। स्थानीय लोगों के सवाल स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई तो हुई है, लेकिन “VIP” मार्क वाले ईंट भट्ठों के असली मालिकों पर हाथ डालने के बजाय विभाग केवल छोटे मोहरों पर कार्रवाई कर इतिश्री कर लेता है। अब फोटो और वीडियो का न होना इस शक को और पुख्ता कर रहा है कि कहीं पर्दे के पीछे कोई ‘सेटिंग’ तो नहीं चल रही? अवैध ईंट भट्ठे बीस सालों से चल रहे हैं जिसमें बीजेपी और कांग्रेस दोनों की सरकारें रहीं हैं।कांग्रेस कार्यकाल में एक भी भट्ठे पर खनिज विभाग ने यदि कोई कार्रवाई की भी हो तो उसे सार्वजनिक नहीं किया। बहरहाल,खनिज विभाग ने कार्रवाई का दावा कर अपनी पीठ तो थपथपा ली है, लेकिन बिना विजुअल साक्ष्यों के यह खबर दावों और हकीकत के बीच झूल रही है। क्या वाकई 2.10 लाख ईंटें जब्त हुई हैं या यह केवल अपनी किरकिरी रोकने के लिए ‘सरकारी पीआर’ का हिस्सा है? बड़ा सवाल: अगर कार्रवाई इतनी पारदर्शी और सख्त थी, तो विभाग के पास इसकी एक भी फोटो या वीडियो क्यों नहीं है? नोट : इस खबर में प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई है । AI GAMINI 

न्याय के मंदिर में बाल श्रम का आरोप: न्यायालय परिसर में शौचालय निर्माण में बच्चों से काम कराने की शिकायत, पुलिस जांच में जुटी

IMG 20260310 WA0013

न्याय के मंदिर में बाल श्रम का आरोप: न्यायालय परिसर में शौचालय निर्माण में बच्चों से काम कराने की शिकायत, पुलिस जांच में जुटी जशपुर/कुनकुरी  10/04/2026 – न्याय का प्रतीक माने जाने वाले न्यायालय परिसर में ही बाल श्रम का गंभीर आरोप सामने आने से हड़कंप मच गया है। कुनकुरी स्थित व्यवहार न्यायालय परिसर के अंदर शौचालय निर्माण कार्य में कथित तौर पर बाल श्रमिकों से काम कराए जाने की शिकायत मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार कुनकुरी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विष्णु कुलदीप ने इस संबंध में कुनकुरी थाने में फोन के जरिए शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि न्यायालय परिसर के अंदर चल रहे शौचालय निर्माण कार्य में नाबालिग बालकों से मजदूरी कराई जा रही है, जो कानूनन अपराध है। शिकायत मिलते ही पुलिस टीम व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित निर्माण स्थल पर पहुंची और वहां काम करवा रहे ठेकेदार के मैनेजर को पूछताछ के लिए थाने ले गई। पुलिस ने मौके पर मौजूद बालकों से भी उनकी उम्र और पहचान संबंधी जानकारी ली। बार एसोसिएशन अध्यक्ष एडवोकेट विष्णु कुलदीप ने मीडिया से चर्चा में कहा कि न्यायालय परिसर, न्याय का मंदिर कहा जाता है, वहां बच्चों से जोखिम भरे निर्माण कार्य कराना बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार के खिलाफ बाल श्रम अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने तीन बालकों के नाम बताते हुए कहा कि इस मामले में पुलिस की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। यदि विधिसम्मत कार्रवाई नहीं होती है तो इस पर बार एसोसिएशन कड़ी आपत्ति दर्ज कराएगा। साथ ही अध्यक्ष ने कोर्ट के प्रवेश द्वार के बगल में मिट्टी डंप करने पर भी आपत्ति उठाई है। इधर पुलिस पूछताछ में कथित बाल श्रमिकों में से दो युवकों ने अपनी उम्र 18 वर्ष बताई है, जबकि एक ने स्वयं को नाबालिग बताया है। बालिग बताने वाले आयुष तिर्की ने पुलिस को अपना आधार कार्ड भी प्रस्तुत किया है, जबकि दूसरे युवक का आधार कार्ड मंगाया गया है। वहीं एक बालक ने अपनी उम्र 16 वर्ष बताई है, जिसकी पुष्टि के लिए पुलिस दस्तावेजों की जांच कर रही है। बाल श्रम अधिनियम के तहत क्या हो सकती है कार्रवाई भारत में बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम 2016 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का कार्य कराना पूरी तरह प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक या जोखिम भरे कार्यों में लगाना भी अपराध की श्रेणी में आता है। यदि जांच में यह साबित होता है कि नाबालिग से निर्माण कार्य कराया गया है, तो ठेकेदार या जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है, जिसमें— *6 महीने से 2 साल तक की जेल* *20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना* *या दोनों सजा एक साथ दी जा सकती है।* साथ ही संबंधित बालक को श्रम विभाग के माध्यम से संरक्षण और पुनर्वास की प्रक्रिया में भी शामिल किया जा सकता है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दस्तावेजों के आधार पर बालकों की वास्तविक उम्र की पुष्टि की जा रही है। जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

जशपुर बस हादसा: प्रशासन की सख्ती के बाद भी जांच से दूर रहे यात्री बस संचालक, रंजीता स्टेडियम में केवल स्कूल बसें पहुंचीं

IMG 20260308 WA0008

जशपुर बस हादसा: प्रशासन की सख्ती के बाद भी जांच से दूर रहे यात्री बस संचालक, रंजीता स्टेडियम में केवल स्कूल बसें पहुंचीं   जशपुर – गोड़अम्बा में हुए  ‘अनमोल’ बस हादसे के बाद, जिसमें 5 लोगों की जान गई और 24 घायल हुए, जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। कलेक्टर रोहित व्यास और एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह के कड़े निर्देशों के बाद रविवार को जिले की सभी बसों की फिटनेस और दस्तावेजों की जांच के लिए विशेष शिविर लगाया गया। हालांकि, इस अभियान में यात्री बस संचालकों की बेरुखी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रंजीता स्टेडियम में सुबह से डटे रहे अफसर प्रशासनिक निर्देशानुसार, रविवार सुबह 10 बजे जशपुर के रंजीता स्टेडियम में जिले की सभी बसों को भौतिक सत्यापन के लिए बुलाया गया था। जिला परिवहन अधिकारी (DTO) विजय निकुंज और उनकी टीम मौके पर मौजूद थी। स्कूल बसों की उपस्थिति: निर्देश मिलते ही स्कूल बसें समय पर स्टेडियम पहुंचीं और उनके फिटनेस व दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई। यात्री बसें नदारद: हैरानी की बात यह रही कि पूरे जिले से एक को छोड़कर दूसरा कोई भी यात्री बस संचालक बस लेकर जांच के लिए स्टेडियम नहीं पहुंचा। प्रशासन की चेतावनी: होगी कड़ी कार्रवाई यात्री बस संचालकों की इस सामूहिक अनुपस्थिति को प्रशासन ने अनुशासनहीनता और यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ माना है। जिला परिवहन अधिकारी विजय निकुंज ने स्पष्ट किया कि जांच से बचने वाले बस संचालकों को बख्शा नहीं जाएगा। परिवहन विभाग अब इन बसों की सड़क पर धरपकड़ कर कड़ी वैधानिक कार्रवाई करने की तैयारी में है। ड्राइवर संघ ने गिनाईं मजबूरियां: फिटनेस के लिए अंबिकापुर का चक्कर चेकिंग के बीच एक बड़ा मुद्दा फिटनेस सेंटर की कमी का भी उठा। ड्राइवर संघ के अध्यक्ष फिरन यादव ने मीडिया से चर्चा में बताया कि जशपुर जिले में फिटनेस सर्टिफिकेट बनाने की सुविधा नहीं है। “हजारों रुपये खर्च कर और कई दिनों की परेशानी झेलकर हमें फिटनेस के लिए अंबिकापुर जाना पड़ता है। हमने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।” पोर्टल विश्लेषण: सवाल सुरक्षा का हादसे के बाद प्रशासन का जागना सराहनीय है, लेकिन यात्री बस संचालकों का जांच शिविर से गायब रहना बताता है कि शायद सिस्टम में अब भी ‘खौफ’ की कमी है। क्या बसें अनफिट हैं? क्या कागजात अधूरे हैं? या फिर संचालकों को प्रशासनिक आदेशों की परवाह नहीं? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में होने वाली कार्रवाई से तय होंगे। बने रहें हमारे पोर्टल के साथ, जशपुर की हर छोटी-बड़ी खबर के लिए।

सुशासन सप्ताह के अंतिम दिन जोकारी में विकासखंड स्तरीय शिविर, 17 आवेदनों में 5 का मौके पर निराकरण

VID 20260227 WA0011

सुशासन सप्ताह के अंतिम दिन जोकारी में विकासखंड स्तरीय शिविर, 17 आवेदनों में 5 का मौके पर निराकरण कुनकुरी – सुशासन सप्ताह के अंतिम दिन कुनकुरी विकासखंड के ग्राम जोकारी में विकासखंड स्तरीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की शुरुआत छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा-अर्चना के साथ हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जनपद पंचायत अध्यक्षा श्रीमती सुशीला साय उपस्थित रहीं। शिविर में कुल 17 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 5 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया, जबकि शेष 12 आवेदनों को संबंधित विभागों को अग्रेषित कर शीघ्र समाधान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्राप्त आवेदनों में फौती-नामांतरण, आधार कार्ड केवाईसी, आयुष्मान कार्ड केवाईसी तथा महतारी वंदन योजना से जुड़े प्रकरण शामिल रहे। मुख्य अतिथि श्रीमती सुशीला साय ने कहा कि शिविर में एक भी शिकायत प्राप्त नहीं होना और 17 आवेदनों का आना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में सुशासन प्रभावी ढंग से लागू है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी प्रसन्नता जताई कि अब महिलाएं व्यवसाय के क्षेत्र में आगे आ रही हैं। कुनकुरी क्षेत्र में मत्स्य पालन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से आर्थिक विकास को गति मिली है। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विकासवादी सोच का परिणाम बताया। जनपद पंचायत सीईओ प्रमोद सिंह ने बताया कि सुशासन सप्ताह के तहत कुनकुरी विकासखंड की चार ग्राम पंचायतों में ब्लॉक स्तर के शिविर आयोजित किए गए। शासन की मंशानुसार क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है और आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शिविर में जनपद पंचायत सीईओ प्रमोद सिंह, बीईओ सुदर्शन पैंकरा, एसडीओ पीएचई विनोद मिश्रा, जोकारी पंचायत की सरपंच मंजू भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं भाजपा पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर ग्रामीणों में संतोष का वातावरण देखा गया।

PART 1 : “VIP” ईंट के आका कौन ? अवैध बंगला भट्ठों पर मेहरबानी या मिलीभगत! बंद हुए तो जनता को होगी परेशानी, जिम्मेदार अधिकारियों का चौंकाने वाला तर्क

IMG 20260224 WA0007

जशपुर/फरसाबहार – जिले में लाल ईंट के कथित अवैध कारोबार को लेकर अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है आखिर “VIP” ईंट के पीछे असली आका कौन हैं? वर्षों से बंगला ईंट भट्ठों का संचालन खुलेआम जारी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ही इन भट्ठों के संचालन को लेकर ऐसा तर्क दिया जा रहा है, जिसने प्रशासनिक भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल,फरसाबहार राजस्व अनुविभाग में स्थानीय स्तर पर “VIP” ब्रांड की मुहर लगाकर लाल ईंटों की बिक्री धड़ल्ले से किए जाने की जानकारी सामने आई है। सरपंच – सचिव से मिली जानकारी के अनुसार बलुआबहार, पम्पशाला, कंदईबहार इलाके में बिना पंचायत एवं ग्राम सभा की अनुमति के ही व्यावसायिक स्तर पर बंगला ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है। नियमों के मुताबिक इस प्रकार के किसी भी भट्ठे के संचालन के लिए स्थानीय निकायों से वैधानिक अनुमति अनिवार्य होती है, किंतु संबंधित पंचायतों के पास ऐसे किसी भी संचालन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं बताए जा रहे हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर पदस्थ जनप्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों का कहना है कि उनके अभिलेखों में संचालित बंगला ईंट भट्ठों के संबंध में कोई भी वैध स्वीकृति दर्ज नहीं है। इसके बावजूद बीते कई वर्षों से इनका संचालन जारी है, जिससे यह आशंका हो रही है कि कारोबार पूरी तरह से नियमों की अनदेखी कर संचालित किया जा रहा है। मामले को लेकर एक और गंभीर पहलू सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, जब संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से इन भट्ठों के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर चर्चा की जाती है, तो यह तर्क दिया जाता है कि यदि बंगला ईंट भट्ठों को बंद करा दिया गया, तो आम जनता को निर्माण कार्यों में भारी समस्या का सामना करना पड़ेगा। इतना ही नहीं, यह भी कहा जाता है कि ऐसे में चिमनी ईंट निर्माताओं द्वारा ईंटों के दामों में भारी वृद्धि कर दी जाएगी, जिससे बाजार में ईंटों की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। अधिकारियों का यह तर्क अब कई सवालों को जन्म दे रहा है । यदि कोई गतिविधि अवैध है, तो उसे केवल इस आधार पर जारी रहने देना कि उससे बाजार संतुलित बना हुआ है, क्या नियमानुसार उचित है? क्या अवैध संचालन को अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण दिया जा रहा है? ऐसे कई प्रश्न अब स्थानीय नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बनते जा रहे हैं। जानकारों का यह भी कहना है कि क्षेत्र में कोयले के अवैध भंडारण की गतिविधियां भी संचालित होने की सूचना समय-समय पर सामने आती रही हैं। पर्यावरण से जुड़े लोगों का मानना है कि बिना किसी नियामक नियंत्रण के संचालित हो रहे भट्ठे क्षेत्रीय पर्यावरण के लिए भी खतरा बन सकते हैं, लेकिन दबाव एवं भय के कारण लोग खुलकर अपनी बात रखने से बच रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि जांच के नाम पर खनिज विभाग,राजस्व विभाग के अधिकारी प्रतिवर्ष क्षेत्र का दौरा करते हैं, किंतु कार्रवाई सीमित रूप से चालान तक सिमट जाती है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि गतिविधियां अवैध हैं, तो उन्हें केवल आर्थिक दंड लगाकर संचालित रहने देना किस हद तक न्यायसंगत है? वर्तमान स्थिति में यह पूरा मामला प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी बनता जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इन कथित अवैध बंगला ईंट भट्ठों के विरुद्ध कोई ठोस एवं निर्णायक कार्रवाई करते हैं या फिर कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा। सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है “VIP” ईंट के असली आका आखिर हैं कौन? हमारी पड़ताल जारी है,,

ईब नदी पर चल रहे सोना खदानों से नदी का पानी हुआ लाल,परम्परा का हवाला देकर नदी का जीवन खतरे में डाल रहा मानव समूह,सरकार को इसका पता नहीं!

IMG 20260210 WA0032

मेरे देश की धरती सोना उगले,उगले हीरे मोती,,,हमारे जशपुर जिले में फरसाबहार तहसील क्षेत्र की धरती सोना उगल रही है।जिसकी स्पीड बढ़ाने के लिए स्वर्ण माफिया सक्रिय हो गए हैं।बीते तीन दिनों की हमारी पड़ताल में मानव समूह ईब नदी के लिए खतरा बन चुके हैं हालांकि इस अवैध कारोबार के पीछे के चेहरे तक पहुंचने की हमारी कोशिश नाकाम रही है। जशपुर (फरसाबहार) जशपुर जिले में अवैध रेत खदानों की खबरें आम हैं, लेकिन अब जिले की जीवनदायिनी ईब नदी अवैध सोना खनन की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। फरसाबहार तहसील के धौरासांड गांव से होकर बहने वाली ईब नदी पम्पशाला, कोताईबीरा कपाट द्वार और लावाकेरा होते हुए ओडिशा राज्य में प्रवेश करती है। इसी पूरे क्षेत्र में नदी के तटों और आसपास की सरकारी व निजी जमीनों को जेसीबी और ट्रैक्टरों से खोदकर, मिट्टी के ढेर बनाए जा रहे हैं और ओपन टनल सिस्टम के जरिए मिट्टी को सीधे नदी में बहाया जा रहा है। इस प्रक्रिया में सोने के कण बेहद नाममात्र निकल रहे हैं, लेकिन उसके बदले लाखों गुना ज्यादा मिट्टी नदी को गंदला और बीमार कर रही है। धौरासांड से लेकर लावाकेरा तक ईब नदी का पानी लगातार खराब हो रहा है। हालात यह हैं कि लावाकेरा गांव के लोगों का कहना है कि अब नदी में मछली मिलना मुश्किल हो गया है, निस्तार के लिए पानी उपयोग लायक नहीं रहा और पशुओं को भी साफ पानी नसीब नहीं हो पा रहा। मीडिया को देख भागे, सवालों से बचते दिखे खननकर्ता जब इस अवैध गतिविधि की पड़ताल के लिए टीम मौके पर पहुंची, तो उससे पहले ही सोनाजोरी नाला में भी पांच अवैध सोना खदानें संचालित होती मिलीं। एक स्थान सीनाजोरी पुल के पास भोकलू राम की जमीन से जेसीबी द्वारा खोदी गई मिट्टी नदी किनारे डाली जा रही थी, जिसे बाद में उसका परिवार नदी में बहाकर स्वर्ण कण चुनता है।जिसका कहना है कि बंजर जमीन को खेती लायक बनाने के लिए जमीन की मिट्टी नदी में डालकर सोना मिल रहा है जिससे जेसीबी,ट्रैक्टर का खर्चा निकल जाएगा।इसमें गलत क्या है? मैं नहीं जानता। हालांकि, धौरासांड ईब नदी के किनारे जैसे ही मीडिया मौके पर पहुंची, अधिकांश लोग मौके से भाग खड़े हुए। मोटर पंप बंद कर दिए गए और काम रोक दिया गया। दो मजदूरों को रोककर बातचीत शुरू की गई, तब उनके बुलाने पर 5 से 10 लोग सामने आए। यह व्यवहार खुद ही इस बात की ओर इशारा करता है कि सब कुछ “परंपरा” के नाम पर इतना सरल नहीं है। आजीविका का तर्क, लेकिन नुकसान नदी का खनन में लगे लोगों का कहना है कि गांव में रोजगार का कोई साधन नहीं है। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा धौरासांड से दाईजबहार तक ईब नदी पर पुल निर्माण की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक काम शुरू नहीं हुआ। मजदूरी नहीं मिलने और सोना निकालने की पुरानी परंपरा का हवाला देकर वे इसे अपनी आजीविका का एकमात्र साधन बता रहे हैं। यह तर्क अपनी जगह है, लेकिन सवाल यह है कि क्या रोजगार के नाम पर पूरी नदी को बर्बाद कर देना जायज़ है? सरपंच अनजान, पंचायत से नहीं ली गई अनुमति मामले में धौरासांड की सरपंच दशमती पैंकरा से बात करने पर चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। सरपंच ने कहा कि उन्हें पंचायत क्षेत्र में वर्षों से चल रही सोने की खदानों की कोई जानकारी नहीं है। न तो पंचायत से किसी प्रकार की अनुमति ली गई है और न ही कोई टैक्स जमा किया गया है। सरपंच ने साफ कहा कि नदी में मिट्टी बहाना गलत है। वहीं, एसडीएम ओंकारेश्वर सिंह ने कहा कि वे मौका मुआयना के बाद ही इस पर कोई ठोस टिप्पणी कर पाएंगे। पर्यावरण नियम क्या कहते हैं? पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की Sustainable Sand Mining Management Guidelines 2016 भले ही रेत और लघु खनिजों के लिए हों, लेकिन इनके मूल सिद्धांत साफ हैं— नदी के प्राकृतिक बहाव और पारिस्थितिकी तंत्र से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए नदी तटों को काटकर या मिट्टी बहाकर खनन करना पर्यावरणीय अपराध है बिना अनुमति, बिना आकलन और बिना पुनर्स्थापन योजना के कोई भी खनन अवैध माना जाता है नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) भी कई मामलों में स्पष्ट कर चुका है कि नदी के सक्रिय प्रवाह क्षेत्र में खनन पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन है। नतीजा क्या होगा? एक तरफ स्वर्ण माफिया ग्रामीणों को सरकार के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी ओर ग्रामीण इसे अपनी मजबूरी और परंपरा बताकर जारी रखने की बात कह रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि अगर यही हाल रहा तो ईब नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। अब सवाल साफ है— क्या प्रशासन समय रहते कार्रवाई कर ईब नदी को बचाएगा, या फिर सोने की कुछ चमकदार रेत के लिए जशपुर अपनी जीवनदायिनी नदी खो देगा?

*जशपुर में तानाशाह अफसरशाही एवं भ्रष्टाचार को लेकर सड़क पर उतरे हजारों ग्रामीण, तहसीलदार हटाओ, सन्ना बचाओ के लगे नारे। खुड़िया क्षेत्र में सांकेतिक धरना प्रदर्शन एवं जनसंवाद कार्यक्रम हुआ सम्पन्न,नेताओं के साथ आम जनमानस ने सरकार को बदनाम करने का अफसरों पर लगाए कई गम्भीर आरोप* देखिए पूरी खबर

IMG 20260207 WA0006

*जशपुर में तानाशाह अफसरशाही एवं भ्रष्टाचार को लेकर सड़क पर उतरे हजारों ग्रामीण, तहसीलदार हटाओ, सन्ना बचाओ के लगे नारे। खुड़िया क्षेत्र में सांकेतिक धरना प्रदर्शन एवं जनसंवाद कार्यक्रम हुआ सम्पन्न,नेताओं के साथ आम जनमानस ने सरकार को बदनाम करने का अफसरों पर लगाए कई गम्भीर आरोप* जशपुर/सन्ना – जशपुर जिले के खुड़िया क्षेत्र कहे जाने वाला सन्ना तहसील क्षेत्र के नन्हेसर ग्राम में बीते दिन बगीचा जनपद सदस्य राकेश गुप्ता के द्वारा एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन एवं जनसंवाद का कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमें खुड़िया क्षेत्र में रहने वाले गांव गांव के प्रमुखों को बुलाया गया था जिसमें हजारों की संख्या में आम जनमानस का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जहां क्षेत्रवासियों ने पहले नन्हेसर ग्राम में रैली निकाल कर तहसीलदार रौशनी तिर्की हटाओ – सन्ना बचाओ का नारा लगाने के साथ साथ जल जीवन मिशन योजना के नलों में शुद्ध पानी मांगने, किसानों के साथ अन्याय करना बंद करो जैसे नारा लगाया।जिसके बाद रैली सभा स्थल में पहुंची और फिर जनसंवाद का कार्यक्रम प्रारंभ हुआ जिस जनसंवाद में खुड़िया क्षेत्र के प्रमुखों के अलावा बगीचा से कोरवा समाज की नेत्री शोभापति दीवान,चंद्रदेव ग्वाला,सुखलाल यादव ने सभा को संबोधित किया। जनसंवाद कार्यक्रम में बारी बारी क्षेत्र के दर्जनों ग्राम प्रमुखों ने उठ उठ कर क्षेत्र की समस्याओं को बताया।जिसमें सबसे एक स्वर में बताया कि खुड़िया क्षेत्र के बहुत से गांव में जल जीवन मिशन के तहत लगाया गया घर घर नल जल योजना में एक दिन भी पानी नहीं मिला है जिसे यहां के अधिकारी गलत रिपोर्टिंग करके सरकार को गुमराह कर रहे हैं।दूसरा मामला सन्ना तहसील में पदस्त तहसीलदार रौशनी तिर्की को लेकर भी दर्जनों ग्राम प्रमुखों ने तहसीलदार पर रिश्वतखोरी के अलावा कई गम्भीर गंभीर आरोप लगाए और सन्ना तहसीलदार को सन्ना से हटाए जाने की मांग करने लगे।वहीं इस जनसंवाद कार्यक्रम में कई किसानों का धान भी रकबा के हिसाब से नहीं खरीदने का गम्भीर आरोप लगाया और बचे हुए किसानों का धान पुनः खरीदी करने का मांग किया गया।वहीं सामाजिक सुरक्षा पेंशन,विधवा,वृद्धा,विकलांग पेंशन में भी हो रहे अनियमितता को भी कई बुजुर्गों ने बताया। जनसंवाद कार्यक्रम के अंतिम में क्षेत्र के जनपद सदस्य राकेश गुप्ता ने बताया कि यह कार्यक्रम जशपुर जिले में पदस्थ झूठे और तानाशाह अफसरशाही को लेकर एक सांकेतिक प्रदर्शन था । सरकार की अच्छी – अच्छी योजनाओं को जिले के अधिकारी मिट्टी में मिलाकर सरकार को गुमराह करने का प्रयास करते हैं और झूठी रिपोर्ट भेजते हैं इसी कारण यह जनसंवाद कर सरकार तक सच्चाई पहुंचाने का यह पहल है।मेरे अलावा क्षेत्र में आए दिन कई ग्रामीणों को सन्ना तहसीलदार रौशनी तिर्की के द्वारा परेशान करने शिकायत मिलता रहता है परंतु कार्यवाही नहीं होने से माहौल इस ओर परिवर्तित हो रहा है। *जमकर दहाड़ी कोरवा समाज की नेत्री शोभापति दीवान* उपरोक्त कार्यक्रम में सहयोग देने बगीचा से पहुंची कोरवा समाज की नेत्री शोभापति दीवान ने भी प्रशासन के खिलाफ जमकर बोली उन्होंने कहा कि एक दुष्ट तहसीलदार अधिकारी रौशनी तिर्की पूरे क्षेत्र को तबाह करके रखी है जिसका आए दिन शिकायत मिलता है परंतु इसे ऐसा कौन है जो संरक्षण दे रहा है और इसे सन्ना खुड़िया क्षेत्र को लूटने के लिए बैठाया है अब इस क्षेत्र की नारी शक्ति को जाएंगे कि आवश्यकता है और तहसीलदार को भगाने की आवश्यकता है। *जनजाति सुरक्षा मंच के सैकड़ों कार्यकर्ता दिखे सभा में* जनजाति सुरक्षा मंच के चंद्रदेव ग्वाला और सुखलाल यादव ने भी क्षेत्र में चल रहे काले कारनामों को सभा को संबोधित करते हुए बताया और जनता को आगे बढ़ने का बात कहा।कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में जनजाति सुरक्षा मंच के प्रमुख कार्यकर्ता दिखे जिसमें उल्लेश्वर भगत,हेमनाथ भगत जिससे तेज तर्रार युवा कार्यकर्ताओं का ग्रुप शामिल था। कोरवा समाज के प्रमुख नन्हेसर के अमृत कोरवा ने भी गांव में शुद्ध पानी नहीं मिलने का बात को कहा और तहसीलदार को जल्दी हटाने का मांग किया। कार्यक्रम के अंतिम में सभी ने महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम नायब तहसीलदार तोष कुरमा सिंह को ज्ञापन सौंप कार्यवाही की मांग किया।

*निर्माण कार्यों में लापरवाही नहीं की जाएगी बर्दाश्त — कलेक्टर व्यास**पीडब्ल्यूडी और पीएमजीएसवाई के प्रगतिरत कार्यों की हुई कड़ी समीक्षा*

IMG 20260114 WA0010

*निर्माण कार्यों में लापरवाही नहीं की जाएगी बर्दाश्त — कलेक्टर व्यास* *पीडब्ल्यूडी और पीएमजीएसवाई के प्रगतिरत कार्यों की हुई कड़ी समीक्षा* जशपुर 14 जनवरी 2026/ कलेक्टर  रोहित व्यास ने विगत दिवस कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत संचालित निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने स्वीकृत, प्रगतिरत, निर्माणाधीन तथा अप्रारंभ कार्यों की स्थिति की जानकारी लेते हुए सभी लंबित एवं प्रगति पर चल रहे कार्यों को तेजी से पूर्ण करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जिले में विकास कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों में किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा सभी कार्यों को तय समय-सीमा में पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। इस दौरान बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे। कलेक्टर श्री व्यास ने PWD अंतर्गत कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि जिले में चल रहे सड़क, स्कूल भवन, तहसील भवन, हाई स्कूल भवन, विभिन्न भवनों के उन्नयन कार्य, पहुंच मार्ग, परिवार न्यायालय भवन, नवीन पॉलिटेक्निक भवन, विश्राम गृह भवन सहित अन्य सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समय-सीमा से बाहर चल रहे कार्यों पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों से विलंब के कारण पूछे और निर्माण गति तेज करने के निर्देश दिए। PMGSY अंतर्गत संचालित सड़कों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि पीएम जनमन योजना के तहत बन रही सड़कों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को सुगम एवं सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके। उन्होंने निर्देशित किया कि सड़कों की गुणवत्ता को लेकर किसी भी प्रकार की शिकायत नहीं आनी चाहिए। साथ ही नए स्वीकृत कार्यों की गूगल एंट्री अनिवार्य रूप से कराने के निर्देश दिए, जिससे निर्माण कार्यों की समयबद्ध प्रगति की प्रभावी निगरानी की जा सके।

देखिए धान की “उल्टी गंगा” — राइस मिल से सीधे खरीदी केंद्र पहुंच रहा धान!प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

IMG 20260113 WA0028

देखिए धान की “उल्टी गंगा” — राइस मिल से सीधे खरीदी केंद्र पहुंच रहा धान! जशपुर से बड़ी खबर जशपुर जिले में धान खरीदी के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर किसानों का धान खरीदी केंद्र से राइस मिल जाता है, लेकिन जशपुर में मामला बिल्कुल उल्टा निकला — राइस मिल से धान निकालकर सीधे खरीदी केंद्र ले जाने की कोशिश पकड़ी गई है। ताजा मामला कांसाबेल विकासखंड का है। यहां बगिया स्थित वेदांश राइस मिल से अवैध रूप से धान निकालकर उसे चोंगरीबहार धान खरीदी केंद्र ले जाया जा रहा था। प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई की। 🚜 दो ट्रैक्टर पकड़े गए, 100 क्विंटल धान जब्त कार्रवाई के दौरान राइस मिल से निकलकर धान खरीदी केंद्र की ओर जा रहे दो ट्रैक्टरों को रोका गया। ट्रैक्टरों में करीब 100 क्विंटल धान लोड था। ट्रैक्टर चालकों मानेश्वर सिदार और यमन बेहरा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि धान राइस मिल से चोंगरीबहार धान खरीदी केंद्र ले जाया जा रहा था। यह कार्रवाई राइस मिल के पास ही, खरीदी केंद्र के रास्ते में की गई। फिलहाल दोनों ट्रैक्टर जब्त कर लिए गए हैं और दस्तावेजों की जांच जारी है। ❓ पुराने धान को नया बताकर खपाने की आशंका प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक आशंका है कि राइस मिल में रखा पुराना धान नए धान के रूप में खरीदी केंद्र में खपाने की कोशिश की जा रही थी। अगर ऐसा साबित होता है, तो यह सीधे-सीधे सरकारी खरीदी प्रणाली से बड़ा खेल माना जाएगा। 🔍 और भी जगहों से मिल रही शिकायतें धान मंडी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सिंगीबहार क्षेत्र की एक राइस मिल से भी आसपास की मंडियों में इसी तरह धान भेजे जाने की चर्चा है।हमारी पड़ताल जारी है। इतना ही नहीं, गड़बड़ी पकड़ने के लिए उपरकछार बेरियर पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे की दिशा भी संदिग्ध बताई जा रही है। कैमरा सड़क की बजाय पुलिस चौकी को कवर कर रहा है। जानकारों का दावा है कि जिला प्रशासन राइस मिलों के सीसीटीवी कैमरे में धान लद रहे विजुअल और धान खरीदी में लगे सीसीटीवी कैमरे से धान उतरते विजुअल की मिलान करे तो बिचौलिए और राइस मिलर बेपर्दा हो जाएंगे। आज दोपहर करीब 2 बजे बेरियर पर कोई भी अधिकारी-कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं था, जिससे ग्रामीणों के आरोपों को और बल मिलता है। 🏛️ संरक्षण का आरोप, बड़ा खेल होने की चर्चा ग्रामीणों और मंडी सूत्रों का दावा है कि यह खेल छोटे स्तर का नहीं, बल्कि बड़े संरक्षण में चल रहा है। चर्चा है कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण राइस मिलरों को मिल रहा है। ⚠️ प्रशासन सख्त, बड़ी कार्रवाई के संकेत अधिकारियों का कहना है कि धान खरीदी में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच के बाद राइस मिल संचालक पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है। 👉 जशपुर में धान खरीदी को लेकर उठे ये सवाल अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ और भी बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।