# जशपुर कलेक्टर का युगांतकारी निर्णय: 70 साल बाद पहाड़ी कोरवाओं को मिलेगी उनकी ‘माटी’, छल से कब्जाई 31 एकड़ जमीन वापसी का आदेश

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# जशपुर कलेक्टर का युगांतकारी निर्णय: 70 साल बाद पहाड़ी कोरवाओं को मिलेगी उनकी ‘माटी’, छल से कब्जाई 31 एकड़ जमीन वापसी का आदेश AI GENERATED जशपुर . आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को लेकर जशपुर के कलेक्टर न्यायालय ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो पूरे प्रदेश के लिए ‘नजीर’ बन गया है। कलेक्टर रोहित व्यास ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए, वर्ष 1955 में छल-कपट के जरिए कब्जाई गई **पहाड़ी कोरवा** (राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र मानी जाने वाली विशेष पिछड़ी जनजाति) की **31.31 एकड़** भूमि के हस्तांतरण को ‘शून्य’ घोषित कर दिया है। यह फैसला इस मायने में क्रांतिकारी है कि इसने दशकों पुराने उस भ्रम को तोड़ दिया है कि ‘आदिवासी से आदिवासी’ के बीच हुए पुराने जमीन सौदों को चुनौती नहीं दी जा सकती। अधिवक्ता सत्यप्रकाश तिवारी अति पिछड़ी जनजाति (पहाड़ी कोरवा) के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। कलेक्टर न्यायालय में उनकी पैनी और तथ्यपरक पैरवी के कारण ही 70 साल पुराने इस पेचीदा मामले में न्याय की जीत संभव हो सकी। उन्होंने न्यायालय के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा कि किस प्रकार भोली-भाली जनजाति के लोगों को कानूनी दांव-पेच और धर्मांतरित व्यक्तियों द्वारा छल का शिकार बनाकर उनकी पैतृक संपत्ति हड़पी गई थी। ### **क्यों ऐतिहासिक है यह फैसला? (प्रमुख बिंदु)** न्यायालय ने सूक्ष्म कानूनी बारीकियों और दस्तावेजों का अध्ययन कर निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले:  * **धारा 170(ख) का कवच:** न्यायालय ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 170(ख) का दायरा अत्यंत व्यापक है। इसमें ‘प्रत्येक व्यक्ति’ शब्द शामिल है, जिसका अर्थ है कि यदि खरीदार आदिवासी भी है, लेकिन उसने छल या नियमों का उल्लंघन कर जमीन ली है, तो उसे संरक्षण नहीं मिलेगा।  * **1959 के पूर्व के नियमों का उल्लंघन:** कलेक्टर ने पाया कि 1959 की संहिता से पहले भी **मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1954** प्रभावी थी। उस समय भी जमीन हस्तांतरण की सूचना सक्षम अधिकारी को देना अनिवार्य था, जिसका पालन नहीं किया गया।  * **अवैध बैनामा:** तत्कालीन कलेक्टर या अधिकृत अधिकारी की अनिवार्य अनुमति के बिना किया गया विक्रय पत्र (रजिस्ट्री) कानूनी रूप से ‘अकृत एवं शून्य’ है।  * **कब्जा बनाम कागज:** न्यायालय ने स्वीकार किया कि भले ही कागजों में नाम हेरफेर से बदला गया, लेकिन जमीन पर आज भी भौतिक कब्जा पीड़ित पहाड़ी कोरवाओं का ही है। ### ** भूमि सुरक्षा पर बड़ा फैसला** अधिवक्ता सत्यप्रकाश तिवारी ने फैसले के बाद मीडिया को बताया कि: “यह आदेश उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो धर्मांतरण की आड़ में या आदिवासी पहचान का लाभ उठाकर विशेष पिछड़ी जनजातियों की जमीनों को कपटपूर्ण तरीके से हड़प रहे हैं। जशपुर कलेक्टर का यह फैसला उन हजारों आदिवासियों के लिए उम्मीद की किरण है जिनकी जमीनें दशकों पहले नियमों को ताक पर रखकर छीनी गई थीं।” ### **अंतिम आदेश: राजस्व रिकॉर्ड में सुधार के निर्देश** कलेक्टर जशपुर ने अनुविभागीय अधिकारी (SDO) के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया है। उन्होंने राजस्व विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं कि ग्राम करदनापाठ की विवादित 31.31 एकड़ भूमि को तत्काल मूल भू-स्वामी के विधिक वारिसों (भन्जू एवं अन्य) के नाम पर दर्ज (Mutation) कर रिकॉर्ड अपडेट किया जाए। छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह फैसला विशेष पिछड़ी जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु एक मील का पत्थर साबित होगा। यह जीत केवल भन्जू और उनके परिवार की नहीं, बल्कि उन सभी आदिम जनजातियों की है जो अपनी जमीन और पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

जशपुर में 2.10 लाख अवैध ईंटें जब्त, पर ‘तस्वीरें’ गायब; क्या अपनी किरकिरी बचाने के लिए खनिज विभाग ने चली चाल?

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जशपुर में 2.10 लाख अवैध ईंटें जब्त, पर ‘तस्वीरें’ गायब; क्या अपनी किरकिरी बचाने के लिए खनिज विभाग ने चली चाल? प्रेस नोट की हकीकत जानने पत्रकारों का दल जाएगा पम्पशाला जशपुरनगर, 18 मार्च 2026 – जिले में अवैध उत्खनन के खिलाफ खनिज विभाग की ‘बड़ी कार्रवाई’ अब सवालों के घेरे में है। फरसाबहार के ग्राम पमशाला में प्रीतमलाल प्रजापति के ईंट भट्ठे पर 2 लाख 10 हजार नग अवैध ईंटें जब्त करने का दावा तो किया गया है, लेकिन पत्रकारों के मैसेज के बाद भी इस पूरी कार्रवाई की फोटो या वीडियो विभाग ने जनसंपर्क कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराई है। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या विभाग ने अपनी पिछली विफलताओं और सोशल मीडिया पर हो रही किरकिरी को दबाने के लिए केवल कागजी आंकड़ों का सहारा लेकर ‘हेडलाइन मैनेजमेंट’ किया है? किरकिरी खत्म करने वाली कार्रवाई या महज ‘प्रेस नोट’ का खेल?   आमतौर पर खनिज विभाग जब भी बड़ी कार्रवाई करता है, तो मौके की तस्वीरें और वीडियो साक्ष्य के तौर पर मीडिया को दिए जाते हैं। पमशाला जैसे मामले में, जहां 2 लाख से ज्यादा ईंटें और ‘VIP’ ब्रांड के भट्ठे पर कार्रवाई की बात कही जा रही है, वहां विजुअल्स,फोटोज का न होना शंका पैदा करता है। जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ समय से अवैध परिवहन को लेकर विभाग की काफी आलोचना हो रही थी, जिससे बचने के लिए जनसंपर्क विभाग के माध्यम से यह समाचार प्रसारित कराया गया हो सकता है। क्या है खान एवं खनिज अधिनियम 1957 की ‘धारा 21’ और इसका विस्तार? AI जनरेटेड इस मामले में विभाग ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। आइए समझते हैं कि यह धारा कितनी शक्तिशाली है और इसके तहत क्या कार्रवाई होती है: 1. अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध (Section 21.1): यह धारा स्पष्ट करती है कि जो कोई भी इस अधिनियम की शर्तों का उल्लंघन कर खनिज (जैसे ईंट के लिए मिट्टी) का उत्खनन, परिवहन या भंडारण करता है, उसे 5 साल तक की जेल या 5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक का जुर्माना (या दोनों) हो सकता है। 2. जब्त सामग्री पर सरकारी कब्ज़ा (Section 21.4): इस उपधारा के तहत, यदि कोई अधिकारी अवैध खनन पाता है, तो वह न केवल खनिज (ईंटें), बल्कि उसमें इस्तेमाल हुए औजार, मशीनरी और वाहनों को भी जब्त कर सकता है। 3. मूल्य की वसूली (Section 21.5): यदि अवैध रूप से निकाला गया खनिज कहीं और भेज दिया गया है, तो सरकार उस व्यक्ति से उस खनिज का बाजार मूल्य और रॉयल्टी वसूलने का हक रखती है। 4. पुलिस और मजिस्ट्रेट की शक्ति: धारा 21 के तहत दर्ज मामलों में प्रशासन को यह शक्ति होती है कि वह आरोपी के खिलाफ सीधे कोर्ट में मामला चलाए। यह एक गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में भी आ सकता है यदि उल्लंघन गंभीर प्रकृति का हो। स्थानीय लोगों के सवाल स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई तो हुई है, लेकिन “VIP” मार्क वाले ईंट भट्ठों के असली मालिकों पर हाथ डालने के बजाय विभाग केवल छोटे मोहरों पर कार्रवाई कर इतिश्री कर लेता है। अब फोटो और वीडियो का न होना इस शक को और पुख्ता कर रहा है कि कहीं पर्दे के पीछे कोई ‘सेटिंग’ तो नहीं चल रही? अवैध ईंट भट्ठे बीस सालों से चल रहे हैं जिसमें बीजेपी और कांग्रेस दोनों की सरकारें रहीं हैं।कांग्रेस कार्यकाल में एक भी भट्ठे पर खनिज विभाग ने यदि कोई कार्रवाई की भी हो तो उसे सार्वजनिक नहीं किया। बहरहाल,खनिज विभाग ने कार्रवाई का दावा कर अपनी पीठ तो थपथपा ली है, लेकिन बिना विजुअल साक्ष्यों के यह खबर दावों और हकीकत के बीच झूल रही है। क्या वाकई 2.10 लाख ईंटें जब्त हुई हैं या यह केवल अपनी किरकिरी रोकने के लिए ‘सरकारी पीआर’ का हिस्सा है? बड़ा सवाल: अगर कार्रवाई इतनी पारदर्शी और सख्त थी, तो विभाग के पास इसकी एक भी फोटो या वीडियो क्यों नहीं है? नोट : इस खबर में प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई है । AI GAMINI 

जशपुर: कुनकुरी में जैन मुनिश्री प्रमाण सागर का भव्य मंगल प्रवेश, मीडिया को दी नसीहत— “युद्ध की चर्चा छोड़, शांति का पुरुषार्थ करें”

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जशपुर: कुनकुरी में जैन मुनिश्री प्रमाण सागर का भव्य मंगल प्रवेश, मीडिया को दी नसीहत— “युद्ध की चर्चा छोड़, शांति का पुरुषार्थ करें” जशपुर (कुनकुरी) | छत्तीसगढ़ के राजकीय अतिथि, प्रख्यात जैन संत मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज का जशपुर जिले के कुनकुरी शहर में गौरवशाली शुभागमन हुआ। मध्यप्रदेश के भोपाल से पावन तीर्थ सम्मेद शिखर जी के विहार पर निकले मुनिश्री का स्थानीय जैन समाज सहित सर्व समाज ने गाजे-बाजे और पुष्पवर्षा के साथ भव्य स्वागत किया। मुनिश्री के आगमन से पूरे जशपुर वनवासी अंचल में एक सुंदर आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हो गया है। मीडिया से संवाद: “युद्ध की चर्चा से हमें क्या मिलेगा?” कुनकुरी प्रवास के दौरान मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज ने मीडिया से विशेष चर्चा की। विश्व में जारी संघर्षों और नकारात्मकता पर उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा: “हम विहारी हैं और विहार कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के जो संस्कार हैं, जो यहां के लोग प्रेम देते हैं, अच्छे हैं। मेरा संदेश कहेंगे तो मैं यही कहूंगा कि सभी लोग अपने जीवन को सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों में लगाएं। समस्याओं की तरफ देखने की जगह समाधान के रास्ते में कितनी तकनीकी का उपयोग करें पर तकनीकी के आदी ना बनें।” मुनिश्री ने मीडिया की भूमिका पर जोर देते हुए आगे कहा: “मीडिया के माध्यम से इस समय मैं यही कहना चाहूंगा कि युद्ध और संघर्ष की चर्चा करने की जगह शांति की प्रार्थना करें। दिनभर युद्ध की रिपोर्ट प्रसारित कर रहे हैं क्यों ना वैश्विक स्तर पर एक साथ लोगों को शांति की प्रार्थना में लगाएं, जिससे लोगों को सद्बुद्धि आए। युद्ध की चर्चा करने से हमें क्या मिलेगा? हम सकारात्मक भाव तरंग सर्वत्र उत्पन्न करें जो लोग, जो शक्तियां युद्ध के लिए उन्मादी बनी हुई हैं, उनकी बुद्धि नियंत्रित हो तो अच्छा होगा। एक सकारात्मक प्रयास हो सारे विश्व में ही युद्ध की ही चर्चा है हम न युद्ध की चर्चा करें ना युद्ध की चिंता करें। शांति का पुरुषार्थ करें।” श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब, अब जशपुर की ओर विहार मुनिश्री के प्रवचन कार्यक्रम और शंका समाधान सत्र में भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, कुनकुरी नगरपंचायत अध्यक्ष विनयशील ने भी अपनी शंकाओं का समाधान पाया।कुनकुरी के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से आए लोग भी मुनिश्री का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। कुनकुरी युवा संघ के रवि जैन ने बताया कि मुनिश्री का प्रवास कुनकुरी के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने मुनिश्री के निरंतर विहार पर प्रकाश डालते हुए कहा: “बहते पानी को कोई रोक नहीं सकता। मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज का अब कुनकुरी शहर में विहार के बाद जशपुर की ओर विहार होगा, जिसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।” कुनकुरी में धर्म की प्रभावना करने के बाद, मुनिश्री अब सम्मेद शिखर की अपनी यात्रा को जारी रखते हुए जशपुर की ओर प्रस्थान करेंगे। पूरा क्षेत्र उनके दर्शन और वंदन के लिए उत्साहित है।

जशपुर में फगुआ का रंगीन धमाका: “तोर लागिन जान भी देई देबूं” ने मचाई धूम,EX MLA विनय और श्वेता की हिट जोड़ी, यूट्यूब में कमेंट्स की बौछार

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जशपुर में फगुआ का रंगीन धमाका: “तोर लागिन जान भी देई देबूं” ने मचाई धूम जशपुर, 3 मार्च 2026 –  होली के रंगों के बीच जशपुर की धरती से एक बार फिर सांस्कृतिक सरगम गूंज उठी है। जशपुर के पूर्व विधायक Vinay Bhagat और उनकी पत्नी Shweta Bhagat ने आधुनिक नागपुरी फगुआ एलबम “तोर लागिन जान भी देई देबूं” रिलीज कर होली के जश्न में चार चांद लगा दिए हैं। दो मार्च को यूट्यूब पर लॉन्च हुए इस एलबम ने महज 20 घंटे में ही 19 हजार व्यूज़ का आंकड़ा पार कर लिया, जो इसकी लोकप्रियता का प्रमाण है। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर यह गीत तेजी से वायरल हो रहा है और दर्शकों से जबरदस्त सराहना बटोर रहा है। एलबम की सबसे बड़ी खासियत इसकी लोकेशन और सांस्कृतिक प्रस्तुति है। जशपुर की नैसर्गिक सुंदरता, पहाड़, हरियाली और स्थानीय परंपराओं को बेहद खूबसूरती से फिल्माया गया है। शूटिंग Sarna Resort Balachhapar में की गई है, जहां होली के रंग में डूबे लोग स्थानीय पारंपरिक पेय हड़िया (चावल से निर्मित राइस बीयर) को मिट्टी के बर्तनों में पीते और पारंपरिक नृत्य करते नजर आते हैं। यह दृश्य एलबम को पूरी तरह से लोक संस्कृति से जोड़ता है। दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी दिल छू लेने वाली हैं। एक दर्शक बालमुकुंद यादव ने कमेंट करते हुए लिखा, “यह वीडियो बहुत सुंदर है। कभी भोजपुरी गाना में भी बनाइए, आप लोग भोजपुरी हीरो-हीरोइन जैसे दिखते हो।” ऐसे हजारों सकारात्मक कमेंट्स इस एलबम की सफलता की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। एलबम की प्रस्तुति में Vinay Bhagat और Shweta Bhagat मुख्य कलाकार के रूप में नजर आ रहे हैं, जिनका नृत्य और अभिव्यक्ति दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रही है। उनके डांस को जशपुर ही नहीं, बल्कि झारखंड, ओडिशा, असम और बंगाल तक में खूब पसंद किया जाता है। इस एलबम की प्रोड्यूसर श्वेता विनय भगत हैं। गायन की जिम्मेदारी कयूम अब्बास और केशो देवी ने संभाली है, जबकि कैमरा और एडिटिंग का कार्य अरुण कुमार ने किया है। सह कलाकार संगम और दिव्या ने भी अपने अभिनय से गीत में जीवंतता भर दी है। होली के इस खास मौके पर “तोर लागिन जान भी देई देबूं” ने यह साबित कर दिया है कि क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति में भी वह ताकत है जो सीमाओं को पार कर दिलों को जोड़ सकती है। जशपुर की धरती से निकला यह रंगीन फगुआ गीत अब पूरे पूर्वी भारत में अपनी छाप छोड़ता नजर आ रहा है।

नहीं रहे पी. के. बजाज, ‘लोटपोट’ को ऊँचाइयों तक पहुंचाने वाले युगपुरुष को भावभीनी श्रद्धांजलि

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नहीं रहे पी. के. बजाज, ‘लोटपोट’ को ऊँचाइयों तक पहुंचाने वाले युगपुरुष को भावभीनी श्रद्धांजलि  नई दिल्ली – हिंदी बाल-पत्रकारिता जगत के लिए अत्यंत दुखद समाचार सामने आया है। लोकप्रिय बाल पत्रिका लोटपोट को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाले वरिष्ठ प्रकाशक पी. के. बजाज का निधन हो गया है। उनके निधन की जानकारी प्रख्यात कार्टूनिस्ट एवं ‘मोटू पतलू’ के सर्जक डॉ. हरविंदर मांकड़ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से साझा की। डॉ. मांकड़ ने भावुक शब्दों में लिखा कि आज मन भारी है और शब्द साथ नहीं दे रहे। उन्होंने बताया कि पी. के. बजाज ने अपने पूज्य पिता ए. पी. बजाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ‘लोटपोट’ और मायापुरी जैसी पत्रिकाओं को देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनके नेतृत्व में ये पत्रिकाएं पाठकों के बीच सबसे अधिक पढ़ी और सराही जाने वाली पत्रिकाओं में शामिल रहीं। नए रचनाकारों के संरक्षक थे बजाज जी डॉ. मांकड़ के अनुसार, पी. के. बजाज केवल एक प्रकाशक नहीं थे, बल्कि वे प्रतिभाओं को पहचानने वाले साधक थे। नए रचनाकारों को अवसर देना, उनकी प्रतिभा पर विश्वास करना और उन्हें आगे बढ़ाने का साहस देना उनकी कार्यशैली का स्वाभाविक हिस्सा था। उन्होंने बताया कि उनका बजाज जी से 47 वर्षों का आत्मीय संबंध रहा। उनके जीवन की पहली बड़ी पहचान ‘मोटू पतलू’ को प्रकाशित करने का श्रेय भी बजाज जी को ही जाता है। आज यह किरदार घर-घर में मुस्कुराहट बाँट रहा है तो उसमें बजाज जी का विश्वास, आशीर्वाद और दूरदर्शिता शामिल है। संघर्ष में देखा संभावना, अनजान को दी पहचान डॉ. मांकड़ ने अपने संदेश में लिखा कि जब वे संघर्ष के दौर में थे, तब बजाज जी ने उनमें संभावना देखी। जब वे अनजान थे, तब उन्होंने पहचान दी। हर मोड़ पर उन्होंने संबल और हौसला प्रदान किया। उनके निधन से बाल साहित्य, कॉमिक्स और पत्रिका प्रकाशन जगत में शोक की लहर है। ‘लोटपोट’ का हर पन्ना, हर मुस्कुराता चेहरा और हर छपी हुई रेखा मानो उन्हें नमन कर रही है। ईश्वर से प्रार्थना की जा रही है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिजनों व शुभचिंतकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। सेलिब्रिटी क्लब ऑफ इंडिया की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

*कुनकुरी में चोरी की बाइकों का बड़ा जाल टूटा, दुर्ग / कुनकुरी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 24 बाइक बरामद, आरोपी का नेटवर्क बेनकाब*

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*कुनकुरी में चोरी की बाइकों का बड़ा जाल टूटा, दुर्ग / कुनकुरी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 24 बाइक बरामद, आरोपी का नेटवर्क बेनकाब* *कुनकुरी*– जशपुर जिले के कुनकुरी से बड़ी खबर सामने आई है, जहां चोरी की मोटरसाइकिलों के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। दुर्ग पुलिस ने कुनकुरी पुलिस के सहयोग से बड़ी कार्रवाई करते हुए CG 07 नंबर की 24 चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। इस कार्रवाई से वाहन चोर गिरोह में हड़कंप मच गया है। कुनकुरी थाना प्रभारी निरीक्षक राकेश यादव ने बताया कि दुर्ग पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुनकुरी इलाके में एक व्यक्ति बेहद सस्ते दामों पर चोरी की बाइक बेच रहा है। सूचना मिलते ही दुर्ग पुलिस की टीम कुनकुरी पहुंची। वहीं SSP डॉ० लाल उमेद सिंह के नेतृत्व में ASP राकेश कुमार पाटनवार के मार्गदर्शन में दुर्ग और कुनकुरी पुलिस टीम ने घर-घर दबिश देकर अलग-अलग स्थानों से होंडा साइन, स्प्लेंडर, स्कूटी समेत कुल 24 चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद कीं। आरोप है कि आरोपी आधार कार्ड लेकर कागजात बनवाने के नाम पर अतिरिक्त पैसे भी वसूलते थे। इस मामले में मुख्य मास्टर माइंड आरोपी पप्पा राव को दुर्ग पुलिस अपने साथ लेकर आई थी, वहीं कुनकुरी से दो अन्य खरीददार आरोपी सेवक राम प्रजापति उर्फ रवि राम, दूसरा मनोज राम को पंडरीपानी क्रेशर प्लांट से गिरफ्तार कर लिया गया है। बरामद सभी वाहनों के साथ दोनों आरोपियों को भी आगे की कार्रवाई के लिए भिलाई रवाना किया गया है। वहीं प्रारंभिक जांच में यह एक संगठित चोरी गिरोह का मामला प्रतीत हो रहा है, जिसके तार अन्य जिलों से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब नेटवर्क, खरीददारों और वाहनों के असली मालिकों की पहचान में जुटी है।यह भी जानकारी मिली है कि जिस क्रेशर प्लांट से चोरी की बाइक बेचे जाने के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार हुए हैं वे प्लांट के कर्मचारी हैं।वहीं पप्पा राव पोकलेन का इंजीनियर था,जो हर बार दुर्ग जिले से बाइक चोरी कर लाता था।दुर्ग पुलिस के खुलासे के बाद और भी जानकारी सामने आ सकती है। जशपुर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि सस्ते दामों में मिलने वाले संदिग्ध वाहनों से बचें और किसी भी शंका की सूचना तुरंत पुलिस को दें। मामले में आगे और खुलासों की उम्मीद है।

PART 1 : “VIP” ईंट के आका कौन ? अवैध बंगला भट्ठों पर मेहरबानी या मिलीभगत! बंद हुए तो जनता को होगी परेशानी, जिम्मेदार अधिकारियों का चौंकाने वाला तर्क

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जशपुर/फरसाबहार – जिले में लाल ईंट के कथित अवैध कारोबार को लेकर अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है आखिर “VIP” ईंट के पीछे असली आका कौन हैं? वर्षों से बंगला ईंट भट्ठों का संचालन खुलेआम जारी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ही इन भट्ठों के संचालन को लेकर ऐसा तर्क दिया जा रहा है, जिसने प्रशासनिक भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल,फरसाबहार राजस्व अनुविभाग में स्थानीय स्तर पर “VIP” ब्रांड की मुहर लगाकर लाल ईंटों की बिक्री धड़ल्ले से किए जाने की जानकारी सामने आई है। सरपंच – सचिव से मिली जानकारी के अनुसार बलुआबहार, पम्पशाला, कंदईबहार इलाके में बिना पंचायत एवं ग्राम सभा की अनुमति के ही व्यावसायिक स्तर पर बंगला ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है। नियमों के मुताबिक इस प्रकार के किसी भी भट्ठे के संचालन के लिए स्थानीय निकायों से वैधानिक अनुमति अनिवार्य होती है, किंतु संबंधित पंचायतों के पास ऐसे किसी भी संचालन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं बताए जा रहे हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर पदस्थ जनप्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों का कहना है कि उनके अभिलेखों में संचालित बंगला ईंट भट्ठों के संबंध में कोई भी वैध स्वीकृति दर्ज नहीं है। इसके बावजूद बीते कई वर्षों से इनका संचालन जारी है, जिससे यह आशंका हो रही है कि कारोबार पूरी तरह से नियमों की अनदेखी कर संचालित किया जा रहा है। मामले को लेकर एक और गंभीर पहलू सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, जब संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से इन भट्ठों के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर चर्चा की जाती है, तो यह तर्क दिया जाता है कि यदि बंगला ईंट भट्ठों को बंद करा दिया गया, तो आम जनता को निर्माण कार्यों में भारी समस्या का सामना करना पड़ेगा। इतना ही नहीं, यह भी कहा जाता है कि ऐसे में चिमनी ईंट निर्माताओं द्वारा ईंटों के दामों में भारी वृद्धि कर दी जाएगी, जिससे बाजार में ईंटों की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। अधिकारियों का यह तर्क अब कई सवालों को जन्म दे रहा है । यदि कोई गतिविधि अवैध है, तो उसे केवल इस आधार पर जारी रहने देना कि उससे बाजार संतुलित बना हुआ है, क्या नियमानुसार उचित है? क्या अवैध संचालन को अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण दिया जा रहा है? ऐसे कई प्रश्न अब स्थानीय नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बनते जा रहे हैं। जानकारों का यह भी कहना है कि क्षेत्र में कोयले के अवैध भंडारण की गतिविधियां भी संचालित होने की सूचना समय-समय पर सामने आती रही हैं। पर्यावरण से जुड़े लोगों का मानना है कि बिना किसी नियामक नियंत्रण के संचालित हो रहे भट्ठे क्षेत्रीय पर्यावरण के लिए भी खतरा बन सकते हैं, लेकिन दबाव एवं भय के कारण लोग खुलकर अपनी बात रखने से बच रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि जांच के नाम पर खनिज विभाग,राजस्व विभाग के अधिकारी प्रतिवर्ष क्षेत्र का दौरा करते हैं, किंतु कार्रवाई सीमित रूप से चालान तक सिमट जाती है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि गतिविधियां अवैध हैं, तो उन्हें केवल आर्थिक दंड लगाकर संचालित रहने देना किस हद तक न्यायसंगत है? वर्तमान स्थिति में यह पूरा मामला प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी बनता जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इन कथित अवैध बंगला ईंट भट्ठों के विरुद्ध कोई ठोस एवं निर्णायक कार्रवाई करते हैं या फिर कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा। सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है “VIP” ईंट के असली आका आखिर हैं कौन? हमारी पड़ताल जारी है,,

अधिकार से परिणाम की ओर: मनरेगा को VBGRAM-G से बदलने का तर्क

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(अधिकार से परिणाम की ओर: मनरेगा को VBGRAM-G से बदलने का तर्क)   नीरवा मेहता के विचार   सार्वजनिक नीतियों का मूल्यांकन भावना, पुरानी यादों या राजनीतिक प्रतीकों के आधार पर नहीं, बल्कि उनके वास्तविक परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए। मनरेगा को विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण अधिनियम, 2025 (VB GRAM G) से बदलने के निर्णय पर स्वाभाविक रूप से विरोध हुआ है। आलोचकों का कहना है कि यह नया कानून अधिकारों को कमजोर करता है, राज्यों पर बोझ डालता है, केंद्र के हाथों में सत्ता का केंद्रीकरण करता है और महात्मा गांधी की विरासत को मिटा देता है। लेकिन ये आपत्तियाँ नीति के वास्तविक स्वरूप से अधिक राजनीतिक मानसिकता को दर्शाती हैं।   VB GRAM G पर सबसे बड़ा आरोप यह है कि यह अधिकार आधारित ढाँचे को तोड़ देता है। यह तर्क इस गलत मान्यता पर आधारित है कि कानूनी अधिकार अपने आप सशक्तिकरण में बदल जाता है। मनरेगा के लगभग दो दशकों के अनुभव ने इस सोच की सीमाओं को उजागर कर दिया है। मजदूरी में लगातार देरी, काम की अधूरी मांग, खराब गुणवत्ता की परिसंपत्तियाँ और असमान क्रियान्वयन ने धीरे-धीरे उस अधिकार को खोखला कर दिया, जिसे न्यायसंगत माना गया था। जो अधिकार समय पर, व्यापक स्तर पर और निरंतर रूप से लागू ही न हो सके, वह व्यवहार में अधिकार नहीं रह जाता। VB GRAM G राज्य की रोज़गार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी खत्म नहीं करता, बल्कि उसे नए तरीके से संरचित करता है—समयसीमा तय करके, परिणामों से वित्त पोषण जोड़कर और जवाबदेही को संस्थागत रूप देकर। यह अधिकारों का कमजोर होना नहीं, बल्कि उनकी व्यावहारिक सुधार प्रक्रिया है।   इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नया कानून भारत की विकास सोच में एक आवश्यक बदलाव को दर्शाता है। मनरेगा को तीव्र ग्रामीण संकट के दौर में एक राहत योजना के रूप में तैयार किया गया था। लेकिन यदि संकट आधारित रोज़गार को स्थायी नीति बना दिया जाए, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ठहराव को सामान्य बना देता है। VB GRAM G अल्पकालिक रोज़गार को आजीविका निर्माण, कौशल विकास और उत्पादक परिसंपत्तियों से जोड़ता है। केवल काम के दिनों की गिनती से हटकर स्थायी आय और आजीविका पर जोर देना इस सच्चाई को स्वीकार करता है कि गरिमा केवल काम मिलने से नहीं, बल्कि आय की स्थिरता, उत्पादकता और सामाजिक उन्नति से आती है। जो कल्याणकारी व्यवस्था खुद को समय के साथ नहीं बदलती, वह गरीबी खत्म करने के बजाय निर्भरता को बढ़ावा देती है।   राज्यों पर बढ़ते वित्तीय बोझ की चिंता भी गहराई से देखने पर टिकती नहीं। पुराने ढाँचे में राज्यों को केंद्रीय फंड में देरी, अनियोजित देनदारियों और लागत साझा करने के विवादों का सामना करना पड़ता था। VB GRAM G स्पष्ट वित्तीय भूमिकाएँ, मध्यम अवधि की योजना और परिणाम आधारित वित्तपोषण लाता है। वास्तविक वित्तीय संघवाद की नींव ही पूर्वानुमेयता है। इससे राज्यों को संकट प्रबंधन के बजाय योजनाबद्ध ढंग से काम करने का अवसर मिलता है, जिससे उनकी प्रशासनिक स्वायत्तता मजबूत होती है।   इसी तरह, अत्यधिक केंद्रीकरण का आरोप राष्ट्रीय मानकों और सूक्ष्म प्रबंधन के बीच के अंतर को समझने में चूक करता है। इतने बड़े पैमाने की योजना में पारदर्शिता, पात्रता और निगरानी के लिए एकसमान मानक जरूरी हैं। स्थानीय संस्थाएँ अब भी कार्यों की पहचान करेंगी, परियोजनाएँ लागू करेंगी और क्रियान्वयन की निगरानी करेंगी। फर्क सिर्फ इतना है कि अब प्रदर्शन और जवाबदेही पर जोर दिया गया है। इतिहास बताता है कि बिना निगरानी के विकेंद्रीकरण का लाभ अक्सर श्रमिकों से ज्यादा बिचौलियों को मिला है। VB GRAM G इसी संरचनात्मक दोष को ठीक करने की कोशिश करता है।   सबसे भावनात्मक आलोचना महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर है। यह तर्क नीति की वास्तविक प्रभावशीलता के बजाय प्रतीकवाद को प्राथमिकता देता है। गांधी की आर्थिक सोच उत्पादक श्रम, आत्मनिर्भरता, विकेंद्रीकृत विकास और नैतिक जिम्मेदारी पर आधारित थी। उनके नाम को बनाए रखते हुए प्रणालीगत अक्षमताओं को स्वीकार करना उनकी विरासत का सम्मान नहीं है। इसके विपरीत, टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों, स्थानीय उद्यम और आजीविका की स्थिरता पर आधारित कार्यक्रम गांधीवादी सिद्धांतों के कहीं अधिक अनुरूप है, बजाय इसके कि केवल जीविका-भर काम को अंतिम लक्ष्य मान लिया जाए।   हर सुधार का विरोध होता है, खासकर जब वह जमी-जमाई राजनीतिक धारणाओं को चुनौती देता है। लेकिन सामाजिक नीति को समय में जकड़कर नहीं रखा जा सकता। भारत की जनसंख्या संबंधी दबाव, वित्तीय सीमाएँ और विकास की आकांक्षाएँ ऐसे साधनों की मांग करती हैं जो मापनीय और ठोस परिणाम दें। VB GRAM G ग्रामीण रोज़गार नीति को इनपुट आधारित अधिकार से हटाकर परिणाम आधारित गारंटी की ओर ले जाने का एक सचेत प्रयास है। इस बदलाव के लिए सतर्कता, निरंतर सुधार और अनुशासित क्रियान्वयन जरूरी होगा। लेकिन सुधार का विरोध करना उससे भी बड़ी विफलता होगी।   असल विकल्प करुणा और दक्षता या अधिकार और सुधार के बीच नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या हम ऐसी कल्याणकारी व्यवस्था चाहते हैं जो बदलती वास्तविकताओं के साथ खुद को ढाले, या फिर ऐसी जो पुरानी संरचनाओं से चिपकी रहे, भले ही उनकी सीमाएँ उजागर हो चुकी हों। VB GRAM G सोच के इसी विकास का संकेत है। इसका लक्ष्य सार्वजनिक खर्च को टिकाऊ ग्रामीण समृद्धि में बदलना है। राष्ट्रीय बहस की दिशा राजनीतिक नॉस्टैल्जिया नहीं, बल्कि यही लक्ष्य तय करना चाहिए। लेखक के बारे में: निरवा मेहता एक राजनीतिक विश्लेषक और स्तंभकार हैं, जो सार्वजनिक नीति, शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका लेखन सत्ता संरचनाओं, राज्य के व्यवहार और भारत तथा वैश्विक संदर्भ में नीतिगत फैसलों के दीर्घकालिक प्रभावों पर केंद्रित रहता है।

*नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त होने पर जशपुर में जश्न, पार्टी नेताओं ने जताई खुशी*

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*नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त होने पर जशपुर में जश्न, पार्टी नेताओं ने जताई खुशी* जशपुर छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा के प्रभारी एवं बिहार सरकार के मंत्री श्री नितिन नबीन के भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त होने पर जशपुर जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं में भारी उत्साह देखा गया। इस अवसर पर जशपुर जिले के विभिन्न स्थानों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़े, मिठाइयां बांटी और एक-दूसरे को बधाई देकर खुशी मनाई। इस दौरान पार्टी नेताओं ने कहा कि नितिन नबीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना संगठन की मजबूती और कार्यकर्ता आधारित राजनीति की जीत है। उनके नेतृत्व में भाजपा देशभर में और अधिक सशक्त होकर जनहित के कार्यों को आगे बढ़ाएगी। पूर्व प्रदेश महामंत्री *कृष्ण कुमार राय* ने कहा कि नितिन नबीन का छत्तीसगढ़ प्रभारी के रूप में कार्यकाल अत्यंत सफल और प्रेरणादायी रहा है। उनके प्रभारी रहते छत्तीसगढ़ में संगठनात्मक ढांचे को मजबूती मिली, कार्यकर्ताओं में नया उत्साह आया और भाजपा ने जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की। अब उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पूरे देश में पार्टी को इसी तरह सशक्त नेतृत्व मिलेगा। पूर्व राज्यसभा सांसद *रणविजय सिंह जूदेव* ने कहा कि नितिन नबीन एक अनुभवी, दूरदर्शी और संगठन के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित नेता हैं। उनका राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना भाजपा के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। जशपुर विधायक *रायमुनी भगत* ने कहा कि यह नियुक्ति पूरे भाजपा परिवार के लिए गर्व का विषय है। नितिन नबीन के नेतृत्व में पार्टी गरीब, किसान, महिला और आदिवासी समाज के कल्याण के लिए और अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करेगी। पत्थलगांव विधायक *गोमती साय* ने कहा कि नितिन नबीन का लंबा संगठनात्मक अनुभव और कार्यशैली भाजपा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। इससे कार्यकर्ताओं में नया जोश और आत्मविश्वास पैदा हुआ है। जिला पंचायत अध्यक्ष *सालिक साय* ने कहा कि नितिन नबीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना आदिवासी एवं ग्रामीण अंचलों के विकास को भी नई दिशा देगा। उनके नेतृत्व में सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास का संकल्प और मजबूत होगा। भाजपा जिलाध्यक्ष *भरत सिंह* ने कहा कि जशपुर जिले के सभी कार्यकर्ता इस ऐतिहासिक निर्णय से अत्यंत उत्साहित हैं। नितिन नबीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना पार्टी की संगठनात्मक शक्ति और अनुशासन का प्रतीक है। उनके नेतृत्व में भाजपा राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य को और दृढ़ता से आगे बढ़ाएगी। उक्त जानकारी देते हुए जिला भाजपा मीडिया प्रभारी फैज़ान सरवर खान ने बताया कि जशपुर बस स्टैंड में कार्यक्रम के समय मुख्य रूप से बलरामपुर जिला संगठन प्रभारी ओमप्रकाश सिन्हा, नगरपालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जनपद अध्यक्ष गंगा राम भगत, संतोष सिंह, मुकेश सोनी, शरद चौरसिया, पिंटू गोस्वामी, रागिनी भगत, सुधीर पाठक, रविन्द्र पाठक, विनोद निकुंज, विजय सहाय, राजा सोनी, आकाश गुप्ता, दीपक गुप्ता, सज्जू खान, नीतीश गुप्ता, राहुल गुप्ता, नागेंद्र भगत सहित भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।

देखिए धान की “उल्टी गंगा” — राइस मिल से सीधे खरीदी केंद्र पहुंच रहा धान!प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

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देखिए धान की “उल्टी गंगा” — राइस मिल से सीधे खरीदी केंद्र पहुंच रहा धान! जशपुर से बड़ी खबर जशपुर जिले में धान खरीदी के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर किसानों का धान खरीदी केंद्र से राइस मिल जाता है, लेकिन जशपुर में मामला बिल्कुल उल्टा निकला — राइस मिल से धान निकालकर सीधे खरीदी केंद्र ले जाने की कोशिश पकड़ी गई है। ताजा मामला कांसाबेल विकासखंड का है। यहां बगिया स्थित वेदांश राइस मिल से अवैध रूप से धान निकालकर उसे चोंगरीबहार धान खरीदी केंद्र ले जाया जा रहा था। प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई की। 🚜 दो ट्रैक्टर पकड़े गए, 100 क्विंटल धान जब्त कार्रवाई के दौरान राइस मिल से निकलकर धान खरीदी केंद्र की ओर जा रहे दो ट्रैक्टरों को रोका गया। ट्रैक्टरों में करीब 100 क्विंटल धान लोड था। ट्रैक्टर चालकों मानेश्वर सिदार और यमन बेहरा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि धान राइस मिल से चोंगरीबहार धान खरीदी केंद्र ले जाया जा रहा था। यह कार्रवाई राइस मिल के पास ही, खरीदी केंद्र के रास्ते में की गई। फिलहाल दोनों ट्रैक्टर जब्त कर लिए गए हैं और दस्तावेजों की जांच जारी है। ❓ पुराने धान को नया बताकर खपाने की आशंका प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक आशंका है कि राइस मिल में रखा पुराना धान नए धान के रूप में खरीदी केंद्र में खपाने की कोशिश की जा रही थी। अगर ऐसा साबित होता है, तो यह सीधे-सीधे सरकारी खरीदी प्रणाली से बड़ा खेल माना जाएगा। 🔍 और भी जगहों से मिल रही शिकायतें धान मंडी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सिंगीबहार क्षेत्र की एक राइस मिल से भी आसपास की मंडियों में इसी तरह धान भेजे जाने की चर्चा है।हमारी पड़ताल जारी है। इतना ही नहीं, गड़बड़ी पकड़ने के लिए उपरकछार बेरियर पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे की दिशा भी संदिग्ध बताई जा रही है। कैमरा सड़क की बजाय पुलिस चौकी को कवर कर रहा है। जानकारों का दावा है कि जिला प्रशासन राइस मिलों के सीसीटीवी कैमरे में धान लद रहे विजुअल और धान खरीदी में लगे सीसीटीवी कैमरे से धान उतरते विजुअल की मिलान करे तो बिचौलिए और राइस मिलर बेपर्दा हो जाएंगे। आज दोपहर करीब 2 बजे बेरियर पर कोई भी अधिकारी-कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं था, जिससे ग्रामीणों के आरोपों को और बल मिलता है। 🏛️ संरक्षण का आरोप, बड़ा खेल होने की चर्चा ग्रामीणों और मंडी सूत्रों का दावा है कि यह खेल छोटे स्तर का नहीं, बल्कि बड़े संरक्षण में चल रहा है। चर्चा है कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण राइस मिलरों को मिल रहा है। ⚠️ प्रशासन सख्त, बड़ी कार्रवाई के संकेत अधिकारियों का कहना है कि धान खरीदी में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच के बाद राइस मिल संचालक पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है। 👉 जशपुर में धान खरीदी को लेकर उठे ये सवाल अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ और भी बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।