खुशखबरी: निःसंतान दंपतियों के सूने आंगन में खिलेगी मुस्कान, कांसाबेल में 10 मई को लगेगा निःशुल्क जांच एवं परामर्श शिविर

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खुशखबरी: निःसंतान दंपतियों के सूने आंगन में खिलेगी मुस्कान, कांसाबेल में 10 मई को लगेगा निःशुल्क जांच एवं परामर्श शिविर रायगढ़/जशपुर: आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव और प्रदूषण के कारण निःसंतानता एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। इसी समस्या के समाधान और जागरूकता के उद्देश्य से अपेक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं आईवीएफ सेंटर, रायगढ़ द्वारा जशपुर जिले के कांसाबेल में एक विशाल स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर का विवरण दिनांक: 10 मई 2026 (रविवार) स्थान: श्री सनातन धर्मशाला, कांसाबेल, जिला – जशपुर (छ.ग.) विशेषज्ञ: सुप्रसिद्ध इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. रश्मि गोयल पलायन की मजबूरी होगी खत्म, घर के पास मिलेगा आधुनिक इलाज अक्सर देखा जाता है कि सही जानकारी के अभाव में दंपती इलाज कराने में देरी कर देते हैं, जिससे उम्र बढ़ने पर गर्भधारण की संभावनाएं कम हो जाती हैं। डॉ. रश्मि गोयल ने बताया: “हमारा लक्ष्य है कि कांसाबेल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को विश्वस्तरीय इलाज के लिए महानगरों की ओर पलायन न करना पड़े। रायगढ़ में ही अब सभी एडवांस तकनीकें उपलब्ध हैं, जिससे अपेक्स हॉस्पिटल पूरे छत्तीसगढ़ में अधिकतम सफलता दर (Success Rate) देने में सफल रहा है।”   सामाजिक सोच बदलने पर जोर: पुरुष भी हो सकते हैं जिम्मेदार डॉ. रश्मि ने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा करते हुए कहा कि समाज में आज भी बांझपन के लिए केवल महिलाओं को दोषी माना जाता है, जबकि वैज्ञानिक सर्वे के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक मामलों में पुरुष बांझपन जिम्मेदार होता है। यह शिविर इस रूढ़िवादी सोच को बदलने और लोगों को सही समय पर वैज्ञानिक इलाज अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। शिविर में मिलने वाली सुविधाएं इस ओपीडी शिविर में आने वाले मरीजों को विशेष लाभ दिए जाएंगे: निःशुल्क परामर्श: विशेषज्ञ डॉ. रश्मि गोयल द्वारा व्यक्तिगत सलाह। निःशुल्क वीर्य जांच (Semen Analysis): पुरुषों के लिए फ्री टेस्टिंग की सुविधा। उन्नत तकनीक की जानकारी: आईवीएफ (IVF) और अन्य आधुनिक उपचारों पर मार्गदर्शन। अग्रिम पंजीयन अनिवार्य भीड़ और असुविधा से बचने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने अग्रिम पंजीयन (Registration) की सलाह दी है। इच्छुक व्यक्ति नीचे दिए गए नंबरों पर संपर्क कर अपना नाम दर्ज करा सकते हैं: 📞 9329142515 📞 9329915091 APEX हॉस्पिटल की यह पहल जशपुर जिले के उन परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई है, जो लंबे समय से संतान सुख की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

**कुनकुरी: शिक्षिका पर लगा मासूम से बाल उत्पीड़न का आरोप, CWC की शिकायत पर पुलिस ने शुरू की कार्रवाई**

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**कुनकुरी: शिक्षिका पर लगा मासूम से बाल उत्पीड़न का आरोप, CWC की शिकायत पर पुलिस ने शुरू की कार्रवाई** **कुनकुरी (जशपुर): जशपुर जिले के कुनकुरी थाना क्षेत्र से बाल उत्पीड़न का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) को मिली एक शिकायत के बाद पुलिस ने नियम विरुद्ध तरीके से ढाई साल के बच्चे को रखने और उसके साथ मारपीट करने के मामले में जाँच शुरू कर दी है। ### **CWC और चाइल्ड लाइन की टीम पहुँची थाना** पुलिस सूत्रों के अनुसार, चाइल्ड लाइन के अधिकारी सालियाटोली निवासी एक शिक्षिका के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए बच्चे को लेकर कुनकुरी थाने पहुँचे हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उक्त शिक्षिका द्वारा न केवल नियमों के विरुद्ध बच्चे को पाला जा रहा था, बल्कि उसके साथ मारपीट भी की जा रही थी। फिलहाल बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण (Medical Examination) कराया जा रहा है ताकि चोटों की पुष्टि हो सके। ### **पति का दावा: सेवा भाव से कर रहे थे पालन-पोषण** दूसरी ओर, शिक्षिका के पति ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि: * बच्चा अनाथ था और उसके नाना-नानी को उसके पालन-पोषण में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। * परिजनों ने ही बच्चे के बेहतर भविष्य और पढ़ाई-लिखाई के लिए उसे हमें सौंपा था। * बच्चा अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में जा रहा था। * उन्होंने तर्क दिया कि बच्चे की शरारतों पर केवल सामान्य डांट-डपट की जाती थी, जिसे किसी ने गलत मंशा से गंभीर शिकायत का रूप दे दिया है। **जाँच में जुटी पुलिस** कुनकुरी पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जाँच तेज कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्चे को रखने की कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं और मारपीट के आरोपों में कितनी सच्चाई है। पुलिस का कहना है कि जाँच के आधार पर जल्द ही अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। AI GENERATED FOTO

EXCLUSIVE: VIP ईंट भट्ठा से खड़ा हुआ अवैध कमाई का साम्राज्य? लखपति दीदी नहीं करोड़पति दादा बनने का खुला खेल !

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EXCLUSIVE: VIP ईंट भट्ठा से खड़ा हुआ अवैध कमाई का साम्राज्य? लखपति दीदी नहीं करोड़पति दादा बनने का खुला खेल ! जशपुर :  जिले में खनिज माफियाओं का जलवा  बरकरार है। एक तरफ सरकार महिलाओं को “लखपति दीदी” बनाकर सुर्खियां बटोर रही है, तो दूसरी तरफ जमीन पर कुछ लोग सिस्टम की आंखों में धूल झोंककर “करोड़पति दादा” बनने का खेल खुलेआम खेल रहे हैं। मामला फरसाबहार विकासखंड के प्रसिद्ध कांवरधाम के सामने संचालित VIP ईंट भट्ठा का है, जिसके मालिक बताए जा रहे हैं लल्लू प्रजापति। तस्वीरों में दिख रहा यह भट्ठा कोई सामान्य कारोबार नहीं, बल्कि नियमों को ठेंगा दिखाकर खड़ा किया गया एक पूरा “अवैध उद्योग” नजर आता है। बाहर से आए, अंदर से सेटिंग – खेल पूरा सिस्टमेटिक! बताया जा रहा है कि भट्ठा संचालक और मजदूर छत्तीसगढ़ के नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के निवासी हैं। सस्ती मजदूरी, बिना अनुमति चिमनी भट्ठा, नदी से मुफ्त पानी, बिना रॉयल्टी की मिट्टी, अवैध कोयले का इस्तेमाल — ये सारे फैक्टर मिलकर इस अवैध कारोबार को सोने की खान बना रहे हैं। खुद संचालक के अनुसार, महीने भर पहले खनिज विभाग के एक फील्ड अधिकारी ने  कार्रवाई की और एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। यानी करोड़ों के खेल में “नाखून काटने” जैसी कार्रवाई! 20 लाख ईंट हर साल, करोड़ों का टर्नओवर! स्थानीय जनप्रतिनिधियों का दावा है कि यह भट्ठा पिछले 10-12 सालों से बिना पंचायत की अनुमति के चल रहा है। हर साल करीब 20 लाख से ज्यादा ईंटों का उत्पादन, और प्रति ईंट 5 रुपए के हिसाब से सीधा 1 करोड़ से ज्यादा का कारोबार। यानि छत्तीसगढ़ की मिट्टी और पानी से बाहर के लोग करोड़पति बन रहे हैं… और जिम्मेदार सिस्टम खामोश है। पंपशाला कांवरधाम के सामने भारी मात्रा में अवैध कोयला पड़ा है। ईंट पकाने के चेंबर फिर से भरे जा रहे हैं, लेकिन खनिज विभाग की नजरें अब तक इस ओर टेढ़ी नहीं हुईं हैं। CM के गृह जिले में ही नियमों की धज्जियां! सबसे बड़ा सवाल – जब यह सब कुछ मुख्यमंत्री के गृह जिले में हो रहा है, तो बाकी जगहों का क्या हाल होगा? वाह भाई वाह – कागजों में कार्रवाई, जमीन पर धंधा जारी । यही है जशपुर का “VIP मॉडल”! अब क्या होगा? फिलहाल लोग इंतजार में हैं उस “औपचारिक खबर” का, जिसमें बताया जाएगा कि “प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की, ईंट जब्त की गई…” लेकिन असली सवाल वही है — क्या इस बार सिर्फ खबर बनेगी, या सच में सिस्टम जागेगा?

स्वस्थ भारत का आधार – सनातन विज्ञान है क्या ? पानी पर दस हजार घंटे से ज्यादा बोलने वाले जल विज्ञानी वैभव साठे का विशेष साक्षात्कार 

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स्वस्थ रहेगा भारत तभी तो बढ़ेगा भारत अभियान चला रहे WATER SCIENTIST,FOOD SCIENTIST वैभव साठे जिन्हें वैभव दादा के नाम से जाना जाता है, जिनके के साथ ख़बर जनपक्ष के संपादक संतोष चौधरी ने बातचीत की : संतोष चौधरी : वैभव  जी, आप झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के वंशज हैं और वर्तमान में पूरे भारत में ‘स्वस्थ रहेगा भारत तभी बढ़ेगा भारत’ अभियान चला रहे हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है? वैभव साठे: देखिए, विरासत केवल शौर्य की नहीं होती, वह उत्तरदायित्व की भी होती है। मेरा उद्देश्य भारत को केवल आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी सशक्त बनाना है। आज हम विकास की दौड़ में तो आगे निकल रहे हैं, लेकिन हमारा शरीर बीमारियों का घर बनता जा रहा है। जब तक देश का नागरिक भीतर से स्वस्थ नहीं होगा, तब तक राष्ट्र की प्रगति स्थायी नहीं हो सकती। संतोष चौधरी : आपने जशपुर में ‘सीता रसोई’ और रामचरितमानस आधारित आहार प्रणाली की चर्चा की है। एक जलविज्ञानी और आधुनिक शिक्षित व्यक्ति के नाते आप इसे कैसे देखते हैं? वैभव साठे: यह विडंबना है कि जिसे हम ‘पुराना’ कहकर छोड़ रहे हैं, उसे नासा (NASA) जैसे संस्थान डीकोड कर रहे हैं। रामचरितमानस में वर्णित आहार की शुचिता और सीता रसोई की पद्धति केवल खाना पकाने का तरीका नहीं, बल्कि ‘पोषण विज्ञान’ है। इसमें अग्नि, पात्र (बर्तन) और मानसिक भाव का जो संतुलन बताया गया है, वह हमारे शरीर के सात चक्रों को प्रभावित करता है। आज का मॉडर्न न्यूट्रिशन साइंस अब जाकर समझ रहा है कि भोजन की ऊर्जा केवल कैलोरी में नहीं, बल्कि उसके ‘प्राण’ में होती है। संतोष चौधरी : आप जापान की एक विशेष वाटर मेडिकल डिवाइस और ‘जल विज्ञान’ पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बात करते हैं। यह साधारण पानी से अलग कैसे है? वैभव साठे: हम पानी को केवल ‘साफ’ (RO या फिल्टर) करने के पीछे भाग रहे हैं, लेकिन साफ पानी और ‘जीवित’ पानी में फर्क होता है। जापान की इस तकनीक से जो जल निकलता है, वह क्षारीय (Alkaline) होता है: जो शरीर के एसिडिक कचरे को खत्म करता है।माइक्रो-क्लस्टर्ड है: यानी यह पानी बहुत पतला होता है, जो कोशिकाओं के भीतर तक जाकर पोषण पहुँचाता है।एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर: यह गंगा के गोमुख या ग्लेशियर वाटर की तरह ऊर्जावान होता है। और एक बड़ी बात बताता हूँ, जैसे गोमूत्र में विषैले तत्वों को मारने की शक्ति होती है, वैसी ही सूक्ष्म शक्ति इस जल में वैज्ञानिक प्रक्रिया से पैदा की जाती है। इंदौर जैसी घटनाओं से हमें सीखना होगा कि दूषित जल केवल बीमारी नहीं, मृत्यु का कारण भी बन सकता है।इसलिए क्रिकेट कैप्टन शुभमन भी तीन लाख की मशीन साथ लेकर इंदौर आए थे।यहां जशपुर में भी इस मेडिकल डिवाइस को लेकर लोग स्वस्थ जीवन जीना शुरू कर दिए हैं। संतोष चौधरी : अघोरेश्वर पीठ सोगड़ा में बाबा संभव राम ने आपके साथ ‘मर्म चिकित्सा’ शिविर की बात की है। यह क्या है? वैभव साठे: मर्म चिकित्सा हमारे सनातन विज्ञान की वह पद्धति है जिसमें बिना किसी दवा के, शरीर के विशेष ऊर्जा बिंदुओं को स्पर्श कर असाध्य रोगों का उपचार किया जाता है। सोगड़ा में महाकाली का दर्शन करना और पूज्य बाबा का आशीर्वाद मिलना मेरे अभियान के लिए गौरव की बात है। हम जल्द ही ऐसे शिविर लगाएंगे जहाँ लोग प्राचीन भारतीय चिकित्सा और आधुनिक जल विज्ञान के मेल से खुद को पुनर्जीवित कर सकेंगे। संतोष चौधरी : अंत में देशवासियों के लिए आपका क्या संदेश है? वैभव साठे: बस इतना ही कहूँगा— “जल को जान लो, नहीं तो जल आपकी जान ले लेगा।” अपनी जड़ों की ओर लौटिए, तकनीक का उपयोग शरीर को सजाने के लिए नहीं, उसे स्वस्थ रखने के लिए कीजिए। धन्यवाद।

रजौटी गांव में पशुओं पर महामारी का साया: हफ्ते भर में 5 बैलों की मौत, ग्रामीणों में दहशत

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रजौटी गांव में पशुओं पर महामारी का साया: हफ्ते भर में 5 बैलों की मौत, ग्रामीणों में दहशत ​कुनकुरी : जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रजौटी में इन दिनों पशुओं में एक अज्ञात बीमारी ने महामारी का रूप ले लिया है। पिछले एक सप्ताह के भीतर गांव में पांच बैलों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य पशु अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। पशुओं के पैरों में सूजन और मवाद भरने के कारण उनकी स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। ​इन किसानों ने खोया अपना पशुधन समाजिक कार्यकर्ता जेवियर कुजूर से ​प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव के प्रभावित किसानों में शामिल हैं: ​दिलीप तिर्की: एक सप्ताह पहले 2 बैलों की मौत। ​करम साय: 5 दिन पहले 1 बैल की मौत। ​सिलवानुस तिग्गा: शनिवार को 1 बैल की मौत।इसी तरह एक और किसान के 1 बैल की मौत हुई। ​विनय तिर्की: 1 बछिया और 1 बछड़े की स्थिति गंभीर है। ​वर्तमान में विनय तिर्की के अन्य पशु भी गंभीर रूप से बीमार बताए जा रहे हैं। ​बीमारी के लक्षण: पैरों में सूजन और मवाद ​ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं के पैरों में अचानक सूजन आ रही है। सूजन बढ़ने के बाद उनमें मवाद भर जाता है, जिससे पशु चलने-फिरने और खाने-पीने में असमर्थ हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह कोई संक्रामक बीमारी है जो तेजी से फैल रही है। पड़ोसी विकासखंड के ​पशु चिकित्सक की सराहनीय पहल, विभाग से गुहार ​इस संकट की घड़ी में बगीचा विकासखंड के रनपुर क्षेत्र के डॉक्टर महेश राम ग्रामीणों के लिए मददगार साबित हो रहे हैं। वे पशुओं का नि:शुल्क इलाज कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके उपचार से अब तक 8 से 10 पशुओं की हालत सुधरी है लेकिन उनका कार्यक्षेत्र दूसरा है। ​पशुपालन विभाग से कैंप लगाने की मांग ​पशुओं की लगातार हो रही मौत से ग्राम पंचायत रजौटी के ग्रामीण बेहद डरे हुए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और पशुपालन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि: ​विभाग द्वारा गांव में विशेष स्वास्थ्य शिविर (Camp) लगाया जाए। ​बीमार पशुओं की जांच कर बीमारी के सही कारणों का पता लगाया जाए। ​गरीब किसानों को मुफ्त दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं ताकि अन्य पशुओं को बचाया जा सके। ऐसे में ​समय रहते यदि विभाग ने ध्यान नहीं दिया, तो यह बीमारी आसपास के अन्य गांवों में भी फैल सकती है, जिससे क्षेत्र के किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ सकती है।

ग्राउंड रिपोर्ट: आधी रात को उठा दर्द, फिर शुरू हुआ ‘मौत’ से मुकाबला; स्वास्थ्य कर्मियों की मुस्तैदी ने बचाई 80 जानें

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ग्राउंड रिपोर्ट: आधी रात को उठा दर्द, फिर शुरू हुआ ‘मौत’ से मुकाबला; स्वास्थ्य कर्मियों की मुस्तैदी ने बचाई 80 जानें कुनकुरी (जशपुर) केराडीह बाजार में गुरुवार की शाम सब कुछ सामान्य था। कोई दो गुपचुप खा रहा था तो कोई पांच। किसी को अंदाजा नहीं था कि स्वाद का यह चस्का चंद घंटों बाद जान पर बन आएगा। गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात जब पूरा इलाका सो रहा था, तभी कई घरों में चीख-पुकार मच गई। किसी के पेट में मरोड़ उठी, तो कोई उल्टियां करने लगा। सुबह होते-होते आधे दर्जन से ज्यादा गांवों का हाल बेहाल हो चुका था। मितानिन और नर्स बनीं ‘फरिश्ता’ जब डड़गांव में घर-घर से उल्टियों की आवाजें आने लगीं, तब स्थानीय मितानिन ने मोर्चा संभाला। उसने देखा कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही है। मितानिन ने बिना वक्त गंवाए तुरंत नर्स को खबर दी और खुद पीड़ितों को घर-घर जाकर ORS का घोल पिलाना शुरू किया। सूचना मिलते ही नर्स भी दौड़ते हुए गांव पहुंची और बीएमओ कुनकुरी को अलर्ट किया। बीएमओ ने खुद संभाला मोर्चा, गांवों में ही शुरू हुआ इलाज जैसे ही बीएमओ डॉ. श्रीमती के. कुजूर को पता चला कि केवल एक नहीं, बल्कि सात-आठ गांवों से ऐसे ही मामले आ रहे हैं, उन्होंने तत्काल स्वास्थ्य अमले को अलर्ट कर खुद मैदान में उतरने का फैसला किया। गांव में ड्रिप: अस्पतालों में भीड़ न बढ़े और मरीजों को तुरंत राहत मिले, इसके लिए डॉक्टरों की टीम ने घरों में ड्रिप (बोतल) चढ़ाना शुरू कर दिया। रेस्क्यू: गंभीर रूप से निढाल हो चुके मरीजों को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल शिफ्ट किया गया। मरीजों की जुबानी: “स्वाद ने कर दिया था लाचार” अस्पताल में भर्ती मरीजों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया— “हमने तो बस 2-4 गुपचुप खाए थे, लेकिन रात 2 बजे के बाद जो हालत हुई, लगा कि अब नहीं बचेंगे।” मरीजों और उनके परिजनों की आंखों में अब राहत के आंसू हैं। वे डॉ. कुजूर, नर्सों और मितानिनों का हाथ जोड़कर धन्यवाद कर रहे हैं, जिन्होंने देवदूत बनकर उनकी जान बचाई। दोषियों पर होगी कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग ने इस पूरी घटना की रिपोर्ट तैयार कर ली है। दाराखरिका गांव के उस गुपचुप विक्रेता, जिसके कारण 80 से ज्यादा लोगों की जान जोखिम में पड़ी, उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। खाद्य विभाग की टीम भी जल्द ही क्षेत्र में सैम्पलिंग शुरू करेगी।  

विशेष शिविर : डॉ. रश्मि गोयल अग्रसेन भवन कुनकुरी में संतानोत्पत्ति पर देंगी परामर्श, दंपत्तियों की जांच के लिए निःशुल्क पंजीयन शुरू

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आज कुनकुरी में सजेगा उम्मीदों का आंगन: सुबह 10 बजे से निःसंतान दंपत्तियों के लिए शुरू हो रहा है अपेक्स हॉस्पिटल का विशेष शिविर कुनकुरी (जशपुर): आज रविवार, 12 अप्रैल की सुबह कुनकुरी और आसपास के क्षेत्र के निःसंतान दंपत्तियों के लिए खुशियों की नई सौगात लेकर आई है। रायगढ़ के प्रसिद्ध अपेक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं आईवीएफ सेंटर द्वारा आयोजित निःशुल्क जांच एवं परामर्श शिविर आज सुबह 10 बजे से अग्रसेन भवन में शुरू होने जा रहा है। डॉ. रश्मि गोयल करेंगी निःशुल्क परामर्श इस शिविर में प्रदेश की जानी-मानी इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. रश्मि गोयल मौजूद रहेंगी। वे उन दंपत्तियों की जांच करेंगी जो लंबे समय से संतान सुख की प्रतीक्षा कर रहे हैं। डॉ. रश्मि ने बताया कि अक्सर लोग जानकारी के अभाव में या झिझक के कारण इलाज में देरी कर देते हैं, जिससे समस्या बढ़ जाती है। “शहर हो या गांव, हर जगह बांझपन की समस्या बढ़ी है। हमने पहले भी कुनकुरी में कैंप लगाए हैं जिससे कई परिवारों के घर में खुशियां आई हैं। हमारा मकसद है कि लोगों को बड़े शहरों में भटकना न पड़े और उन्हें यहीं सही इलाज मिले।” – डॉ. रश्मि गोयल 80% सफलता दर के साथ जगाई नई आस अपेक्स हॉस्पिटल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 80 प्रतिशत सफलता दर है। आधुनिक तकनीकों और बेहतर इलाज की वजह से यह अस्पताल पूरे छत्तीसगढ़ में इनफर्टिलिटी के इलाज के लिए भरोसे का प्रतीक बन चुका है। शिविर में विशेष रूप से: निःशुल्क सलाह दी जाएगी। निःशुल्क वीर्य जाँच की सुविधा उपलब्ध रहेगी। पुरुष बांझपन और महिला बांझपन के कारणों पर विस्तार से चर्चा होगी। जरूरी जानकारी: आज का समय: सुबह 10:00 बजे से स्थान: अग्रसेन भवन, कुनकुरी (जिला जशपुर) पंजीयन के लिए तुरंत कॉल करें: 93291-42515, 93299-15091 अपील: बांझपन कोई अभिशाप या बीमारी नहीं है, बल्कि एक चिकित्सकीय समस्या है जिसे सही इलाज से ठीक किया जा सकता है। समाज में फैली गलत धारणाओं को छोड़ें और आज ही इस शिविर का लाभ उठाएं।

निःसंतान दंपत्तियों के लिए उम्मीद की नई किरण: 80% सफलता दर के साथ ‘अपेक्स हॉस्पिटल’ का विशेष कैंप कल कुनकुरी में

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निःसंतान दंपत्तियों के लिए उम्मीद की नई किरण: 80% सफलता दर के साथ ‘अपेक्स हॉस्पिटल’ का विशेष कैंप कल कुनकुरी में **कुनकुरी (जशपुर):** संतान सुख की राह देख रहे परिवारों के लिए एक बड़ी और उत्साहजनक खबर है। पूरे छत्तीसगढ़ में निःसंतानता के इलाज में **80 प्रतिशत की रिकॉर्ड सफलता दर (Success Rate)* हासिल करने वाला **अपेक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं आईवीएफ सेंटर, रायगढ़, कल यानी 12 अप्रैल 2026 को कुनकुरी में एक विशाल निःशुल्क शिविर आयोजित कर रहा है। कुनकुरी के अग्रसेन भवन में होगा समाधान रविवार को आयोजित इस शिविर में इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ **डॉ. रश्मि गोयल** स्वयं मौजूद रहेंगी। डॉ. रश्मि का मानना है कि इलाज में सफलता तभी मिलती है जब सही समय पर सही तकनीक का चुनाव हो।   “निःसंतानता का ग्राफ शहरों और गांवों में एक समान रूप से बढ़ रहा है। कुनकुरी में पिछले कैंपों के सफल परिणामों ने हमारा उत्साह बढ़ाया है। हमारा लक्ष्य है कि 80% की इस सफलता दर का लाभ ग्रामीण अंचलों के उन दंपत्तियों को भी मिले जो महानगरों का खर्च नहीं उठा सकते।” – **डॉ. रश्मि गोयल**  क्यों खास है यह शिविर **80% सफलता दर का भरोसा:** अपेक्स हॉस्पिटल अपनी उन्नत तकनीकों के दम पर अधिकांश मामलों में सकारात्मक परिणाम देने में सफल रहा है। * **पलायन पर रोक:** अब इलाज के लिए दिल्ली-मुंबई जाने की जरूरत नहीं, विश्वस्तरीय आईवीएफ तकनीक अब आपके क्षेत्र के पास उपलब्ध है। **निःशुल्क सुविधाएं:** कैंप में **वीर्य जाँच (Semen Analysis)** और विशेषज्ञ परामर्श पूरी तरह **निःशुल्क** रहेगा। **भ्रांतियों का अंत:** डॉ. रश्मि गोयल उन सामाजिक कुरीतियों को भी दूर करेंगी जहाँ केवल महिलाओं को दोषी माना जाता है। **शिविर विवरण व पंजीयन:** **स्थान:** अग्रसेन भवन, कुनकुरी, जिला – जशपुर **दिनांक:** 12 अप्रैल 2026 (रविवार) * **हेल्पलाइन नंबर:** **9329142515, 9329915091** **विशेष नोट:** अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, उच्च सफलता दर और पिछले कैंपों की लोकप्रियता को देखते हुए भीड़ बढ़ने की संभावना है। अतः असुविधा से बचने के लिए मरीज दिए गए नंबरों पर अपना अग्रिम पंजीयन (Advance Registration) तुरंत सुनिश्चित करें।

बाँझपन के कलंक को मिटाने की मुहिम: कुनकुरी में डॉ. रश्मि गोयल का विशेष शिविर, अब गाँव-गाँव तक पहुँचेगी आधुनिक आईवीएफ तकनीक

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बाँझपन के कलंक को मिटाने की मुहिम: कुनकुरी में डॉ. रश्मि गोयल का विशेष शिविर, अब गाँव-गाँव तक पहुँचेगी आधुनिक आईवीएफ तकनीक कुनकुरी (जशपुर): आधुनिक जीवनशैली और बढ़ता प्रदूषण अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण अंचलों में भी निःसंतानता एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। इसी समस्या की जड़ पर प्रहार करने और सूनी गोद को भरने के संकल्प के साथ अपेक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, रायगढ़ द्वारा 12 अप्रैल 2026 को कुनकुरी में विशेष शिविर लगाया जा रहा है। “शहरी हो या ग्रामीण, हर जगह बढ़ रहा है निःसंतानता का ग्राफ” विख्यात इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. रश्मि गोयल ने बताया कि उनके इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के उन दंपत्तियों तक पहुँचना है जो जानकारी के अभाव में इलाज नहीं करा पाते। उन्होंने कहा: “निःसंतानता अब एक वैश्विक समस्या बन चुकी है। चाहे शहरी क्षेत्र हों या ग्रामीण, दाम्पत्य जीवन में यह तनाव लगातार बढ़ रहा है। कुनकुरी में हमने पहले भी कैंप आयोजित किए हैं, जिनके सुखद परिणाम देखने को मिले हैं। मेरा लक्ष्य है कि ग्रामीण इलाकों के लोगों को भी वही विश्वस्तरीय तकनीक मिले जो महानगरों में मिलती है।” कैंप की मुख्य जानकारी (Quick Facts): तिथि: 12 अप्रैल 2026 (रविवार) स्थान: अग्रसेन भवन, कुनकुरी (जशपुर) विशेष सुविधा: निःशुल्क वीर्य जाँच एवं विशेषज्ञ परामर्श। पंजीयन हेतु संपर्क: 9329142515, 9329915091 अपेक्स हॉस्पिटल: सफलता का पर्याय रायगढ़ का अपेक्स हॉस्पिटल आज पूरे छत्तीसगढ़ में अपनी सर्वाधिक सफलता दर (Success Rate) के लिए जाना जाता है। डॉ. रश्मि गोयल के अनुसार, बांझपन के 50% से अधिक मामलों में पुरुष कारक जिम्मेदार होते हैं, लेकिन सामाजिक दबाव के कारण केवल महिलाओं को दोषी माना जाता है। यह शिविर न केवल इलाज प्रदान करेगा, बल्कि समाज की इस सोच को बदलने का भी काम करेगा। महानगरों की दौड़ से मिलेगी मुक्ति अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बेहतर इलाज की उम्मीद में दिल्ली, मुंबई या बड़े महानगरों की ओर पलायन करते हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। अपेक्स हॉस्पिटल ने रायगढ़ में ही एडवांस आईवीएफ तकनीक उपलब्ध कराकर इस दूरी को खत्म कर दिया है। अब कुनकुरी और आसपास के निवासियों को अपने घर के पास ही विशेषज्ञ सुविधाएं मिल सकेंगी। अपील: अस्पताल प्रबंधन ने सूचित किया है कि उचित व्यवस्था और समय पर परामर्श सुनिश्चित करने के लिए अपना अग्रिम पंजीयन तुरंत कराएं। बांझपन कोई अभिशाप नहीं, एक चिकित्सीय समस्या है जिसका सही समय पर निदान संभव है।

# जशपुर कलेक्टर का युगांतकारी निर्णय: 70 साल बाद पहाड़ी कोरवाओं को मिलेगी उनकी ‘माटी’, छल से कब्जाई 31 एकड़ जमीन वापसी का आदेश

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# जशपुर कलेक्टर का युगांतकारी निर्णय: 70 साल बाद पहाड़ी कोरवाओं को मिलेगी उनकी ‘माटी’, छल से कब्जाई 31 एकड़ जमीन वापसी का आदेश AI GENERATED जशपुर . आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को लेकर जशपुर के कलेक्टर न्यायालय ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो पूरे प्रदेश के लिए ‘नजीर’ बन गया है। कलेक्टर रोहित व्यास ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए, वर्ष 1955 में छल-कपट के जरिए कब्जाई गई **पहाड़ी कोरवा** (राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र मानी जाने वाली विशेष पिछड़ी जनजाति) की **31.31 एकड़** भूमि के हस्तांतरण को ‘शून्य’ घोषित कर दिया है। यह फैसला इस मायने में क्रांतिकारी है कि इसने दशकों पुराने उस भ्रम को तोड़ दिया है कि ‘आदिवासी से आदिवासी’ के बीच हुए पुराने जमीन सौदों को चुनौती नहीं दी जा सकती। अधिवक्ता सत्यप्रकाश तिवारी अति पिछड़ी जनजाति (पहाड़ी कोरवा) के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। कलेक्टर न्यायालय में उनकी पैनी और तथ्यपरक पैरवी के कारण ही 70 साल पुराने इस पेचीदा मामले में न्याय की जीत संभव हो सकी। उन्होंने न्यायालय के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा कि किस प्रकार भोली-भाली जनजाति के लोगों को कानूनी दांव-पेच और धर्मांतरित व्यक्तियों द्वारा छल का शिकार बनाकर उनकी पैतृक संपत्ति हड़पी गई थी। ### **क्यों ऐतिहासिक है यह फैसला? (प्रमुख बिंदु)** न्यायालय ने सूक्ष्म कानूनी बारीकियों और दस्तावेजों का अध्ययन कर निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले:  * **धारा 170(ख) का कवच:** न्यायालय ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 170(ख) का दायरा अत्यंत व्यापक है। इसमें ‘प्रत्येक व्यक्ति’ शब्द शामिल है, जिसका अर्थ है कि यदि खरीदार आदिवासी भी है, लेकिन उसने छल या नियमों का उल्लंघन कर जमीन ली है, तो उसे संरक्षण नहीं मिलेगा।  * **1959 के पूर्व के नियमों का उल्लंघन:** कलेक्टर ने पाया कि 1959 की संहिता से पहले भी **मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1954** प्रभावी थी। उस समय भी जमीन हस्तांतरण की सूचना सक्षम अधिकारी को देना अनिवार्य था, जिसका पालन नहीं किया गया।  * **अवैध बैनामा:** तत्कालीन कलेक्टर या अधिकृत अधिकारी की अनिवार्य अनुमति के बिना किया गया विक्रय पत्र (रजिस्ट्री) कानूनी रूप से ‘अकृत एवं शून्य’ है।  * **कब्जा बनाम कागज:** न्यायालय ने स्वीकार किया कि भले ही कागजों में नाम हेरफेर से बदला गया, लेकिन जमीन पर आज भी भौतिक कब्जा पीड़ित पहाड़ी कोरवाओं का ही है। ### ** भूमि सुरक्षा पर बड़ा फैसला** अधिवक्ता सत्यप्रकाश तिवारी ने फैसले के बाद मीडिया को बताया कि: “यह आदेश उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो धर्मांतरण की आड़ में या आदिवासी पहचान का लाभ उठाकर विशेष पिछड़ी जनजातियों की जमीनों को कपटपूर्ण तरीके से हड़प रहे हैं। जशपुर कलेक्टर का यह फैसला उन हजारों आदिवासियों के लिए उम्मीद की किरण है जिनकी जमीनें दशकों पहले नियमों को ताक पर रखकर छीनी गई थीं।” ### **अंतिम आदेश: राजस्व रिकॉर्ड में सुधार के निर्देश** कलेक्टर जशपुर ने अनुविभागीय अधिकारी (SDO) के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया है। उन्होंने राजस्व विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं कि ग्राम करदनापाठ की विवादित 31.31 एकड़ भूमि को तत्काल मूल भू-स्वामी के विधिक वारिसों (भन्जू एवं अन्य) के नाम पर दर्ज (Mutation) कर रिकॉर्ड अपडेट किया जाए। छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह फैसला विशेष पिछड़ी जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु एक मील का पत्थर साबित होगा। यह जीत केवल भन्जू और उनके परिवार की नहीं, बल्कि उन सभी आदिम जनजातियों की है जो अपनी जमीन और पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।