जशपुर में स्वास्थ्य क्रांति: सरकारी सुविधाओं के विस्तार के बीच ‘अपेक्स हॉस्पिटल’ ने थामी निःसंतान दंपतियों की राह, अब नहीं जाना होगा बड़े शहर

जशपुर/कांसाबेल: जशपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। एक ओर जहाँ शासन-प्रशासन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर अपेक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, रायगढ़ जैसे संस्थान विशेषज्ञ सेवाओं की कमी को दूर कर मरीजों का बड़े शहरों की ओर पलायन रोकने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। कांसाबेल में 10 मई को निसंतान दंपत्तियों के लिए बड़ा शिविर लगाया गया है
जिले में बढ़ती सरकारी सुविधाएं
राज्य सरकार जशपुर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के प्रति बेहद संवेदनशील है। जिले में स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं:
मेडिकल कॉलेज की स्थापना: मुख्यमंत्री श्री साय का बड़ा सपना – जिले को चिकित्सा शिक्षा और उपचार का बड़ा केंद्र बनाना,जो साकार होने जा रहा है।
200 बिस्तर वाला मातृ-शिशु अस्पताल (गिनाबहार): माताओं और बच्चों को समर्पित आधुनिक चिकित्सा सुविधा देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ी पहल की है।कार्य प्रगति पर है।
ब्लॉक स्तर पर सुदृढ़ीकरण: सभी विकासखंडों के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
चुनौती: विशेषज्ञ उपचार के लिए अब भी पलायन
इन अभूतपूर्व सरकारी कोशिशों के बावजूद, बांझपन (Infertility) जैसे जटिल और सुपरस्पेशलिटी उपचार के लिए आज भी जिले के मरीजों को रायपुर, बिलासपुर या विशाखापत्तनम जैसे महानगरों की ओर रुख करना पड़ता है। आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव के कारण कई दंपती बीच में ही इलाज छोड़ देते हैं।
अपेक्स हॉस्पिटल की बड़ी पहल
इसी रिक्तता को भरने के लिए अपेक्स हॉस्पिटल रायगढ़ ने एक बड़ी पहल की है। जिले के निःसंतान दंपतियों को उनके घर के पास ही विश्वस्तरीय तकनीक उपलब्ध कराने के लिए 10 मई 2026 (रविवार) को श्री सनातन धर्मशाला, कांसाबेल में निःशुल्क जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
चिकित्सा नहीं, मिशन है ‘संतान सुख’
इनफर्टिलिटी के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाली डॉ. रश्मि गोयल केवल एक चिकित्सक के रूप में ही नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक के रूप में इस शिविर का नेतृत्व कर रही हैं। डॉ. रश्मि का मानना है कि निःसंतानता केवल एक शारीरिक स्थिति नहीं, बल्कि एक दंपती का गहरा भावनात्मक संघर्ष है। उनका स्पष्ट कहना है कि— “आधुनिक तकनीक ने अब नामुमकिन को मुमकिन बना दिया है, बशर्ते लोग लोक-लाज और डर को त्यागकर सही समय पर सही सलाह लें।” डॉ. रश्मि विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में वैज्ञानिक जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका विचार है कि जब एक घर में किलकारी गूंजती है, तो वह केवल एक परिवार की खुशी नहीं बल्कि समाज की सकारात्मकता की जीत होती है। इसी समर्पण के कारण वे महानगरों की सुख-सुविधाओं के बजाय स्वयं जशपुर जैसे अंचलों में पहुंचकर मरीजों को अपनी सेवाएं दे रही हैं, ताकि हर आर्थिक वर्ग का व्यक्ति आधुनिक उपचार का लाभ उठा सके।





















