कुनकुरी: थाना परिसर के टावर पर युवती ने लगाई फांसी; मोबाइल पर सुसाइड वीडियो देखने की थी आदी, कांग्रेस ने उठाए सवाल, मजिस्ट्रीयल जांच और CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की मांग

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कुनकुरी। थाना क्षेत्र के धुमाडांड गांव की एक 22 वर्षीय युवती नीलिमा लकड़ा (पिता रामचरण लकड़ा) ने कुनकुरी थाने के सामने स्थित टावर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस संवेदनशील मामले में अब सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस पूरी घटना को संदेहास्पद बताते हुए पुलिस प्रशासन से मजिस्ट्रीयल जांच की मांग की है। ​परिजनों के अनुसार मोबाइल की लत और मानसिक अस्वस्थता मृतिका की मां पुष्पा लकड़ा के अनुसार, नीलिमा पिछले काफी समय से मानसिक रूप से अस्वस्थ थी। उसे मोबाइल पर फांसी लगाने से जुड़े आत्मघाती वीडियो देखने की गंभीर लत थी। मना करने पर भी वह नहीं मानती थी। साल भर पहले भी उसने एक बार ऐसा ही आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास किया था। घटना से एक दिन पहले वह अपनी 3 साल की बेटी का [दस्तावेज़] बनवाने मां के साथ अस्पताल आई थी, जहाँ से वह अचानक लापता हो गई थी। ​डायल 112 को कॉल कर ली थी परीक्षा पुलिस के अनुसार, रात करीब 3 बजे पेट्रोलिंग टीम को मिलने के बाद वह घर की तरफ रवाना हुई थी। लेकिन तड़के 4 बजे उसने खुद 112 नंबर पर कॉल कर कहा कि “थाने में कोई नहीं है।” जब टीम पहुंची तो उसने कहा कि वह सिर्फ यह देखना चाहती थी कि पुलिस कितनी जल्दी आती है। सुबह करीब 5 बजे जब उसे टावर पर चढ़ा देखा गया, तो पुलिस ने फोन पर बात कर उसे नीचे उतरने के लिए मना भी लिया था, लेकिन अचानक मोबाइल पर कोई वीडियो देखते हुए उसने फांसी लगा ली। ​एडिशनल एसपी का बयान घटना की सूचना मिलते ही एडिशनल एसपी राकेश पाटनवार मौके पर पहुंचे। उन्होंने मीडिया को बयान देते हुए कहा, “युवती मानसिक रूप से विक्षिप्त थी और वह मोबाइल पर सुसाइड से संबंधित वीडियो देखा करती थी। पुलिस इस पूरे मामले पर वैधानिक आगे की कार्रवाई कर रही है।” ​घटना पर विपक्ष सक्रिय, उठाए गंभीर सवाल इस पूरी घटना को लेकर विपक्ष पूरी तरह सक्रिय हो गया है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष यू.डी. मिंज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विधानसभा मुख्यालय में घटी है, जो कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक मृतिका कुनकुरी थाने में रिपोर्ट लिखाने जा रही थी। ऐसे में बार-बार थाने जाना और फिर थाना परिसर के वायरलेस टावर पर चढ़कर फांसी लगा लेना अत्यधिक संदेहास्पद है। ​इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, महिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती संगीता सिन्हा और पूर्व जनजातीय आयोग के चेयरमैन भानुप्रताप सिंह ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। कांग्रेस ने मांग की है कि घटना और उससे पहले मृतिका के थाने आने-जाने के सभी सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को सार्वजनिक किया जाए और पूरे मामले की मजिस्ट्रीयल जांच कराई जाए।

मुस्लिम समाज के विकास में महिलाओं की सक्रिय भूमिका और हज का वैश्विक महत्व

मुस्लिम समाज के विकास में महिलाओं की सक्रिय भूमिका और हज का वैश्विक महत्व अब्दुल केसर इस्लाम एक ऐसा धर्म है जो न्याय, समानता और मानव गरिमा पर आधारित है। इतिहास गवाह है कि मुस्लिम महिलाओं ने शिक्षा, राजनीति, समाज सेवा और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान समय में यह आवश्यक है कि महिलाओं को केवल घरेलू दायरे तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें समाज के विकास में सक्रिय भागीदारी का अवसर दिया जाए। कुरआन और हदीस में महिलाओं के सम्मान और अधिकारों पर विशेष बल दिया गया है। इस्लाम महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने, आत्मनिर्भर बनने तथा समाज के निर्माण में योगदान देने की अनुमति देता है। महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण किसी भी समाज की प्रगति का आधार महिलाओं की शिक्षा है। एक शिक्षित महिला केवल अपने परिवार को ही नहीं बल्कि पूरे समाज को जागरूक और मजबूत बनाती है। आधुनिक समय में मुस्लिम महिलाओं ने विज्ञान, चिकित्सा, प्रशासन, शिक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। महिलाओं का सशक्तिकरण केवल अधिकारों की मांग नहीं, बल्कि समाज की उन्नति की आवश्यकता है। जब महिलाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलते हैं, तब समाज अधिक संतुलित और प्रगतिशील बनता है। आर्थिक क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका इस्लाम महिलाओं को व्यापार और आर्थिक गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति देता है। हज़रत खदीजा इसका सर्वोत्तम उदाहरण हैं, जिन्होंने व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की। आर्थिक रूप से सशक्त महिला अपने परिवार और समाज दोनों को मजबूत बनाती है। आज के समय में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी आवश्यक है, क्योंकि इससे परिवारों की स्थिति बेहतर होती है और समाज में आत्मनिर्भरता बढ़ती है। सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी महिलाओं को केवल घर तक सीमित रखना समाज के लिए हानिकारक है। इस्लाम महिलाओं को सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने का अधिकार देता है। इतिहास में अनेक मुस्लिम महिलाओं ने नेतृत्व और समाज सुधार में योगदान दिया है। महिलाओं की निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी समाज को अधिक न्यायपूर्ण और संतुलित बनाती है। हज का महत्व और वैश्विक संदेश हज इस्लाम का एक महान धार्मिक आयोजन है जो विश्वभर के मुसलमानों को एकता, समानता और भाईचारे का संदेश देता है। हज के दौरान विभिन्न देशों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग एक साथ इकट्ठा होते हैं और यह सिद्ध करते हैं कि इस्लाम मानव समानता का धर्म है। मक्का में लाखों मुसलमान एक साथ इबादत करते हैं, जिससे यह संदेश मिलता है कि जाति, रंग, भाषा और राष्ट्रीयता से ऊपर उठकर सभी इंसान बराबर हैं। महिलाओं और हज से जुड़े आधुनिक परिवर्तन हाल के वर्षों में महिलाओं की हज यात्रा को लेकर कई सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं। सऊदी अरब सरकार द्वारा महिलाओं को बिना महरम के हज की अनुमति देना महिलाओं के प्रति बदलते सामाजिक दृष्टिकोण का प्रतीक माना गया है। इस निर्णय ने महिलाओं को धार्मिक स्वतंत्रता और आत्मविश्वास प्रदान किया है। अब महिलाएँ शिक्षा, रोजगार और धार्मिक यात्राओं में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इस्लाम और महिलाओं की गरिमा इस्लाम का वास्तविक संदेश महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर प्रदान करना है। महिलाओं को केवल पारिवारिक भूमिका तक सीमित करना इस्लाम की मूल भावना के विरुद्ध है। समाज तभी प्रगति कर सकता है जब महिलाओं और पुरुषों दोनों को समान अवसर दिए जाएँ। महिलाओं की भागीदारी से समाज अधिक मजबूत, संतुलित और विकसित बनता है। इस तरह, महिलाओं का सशक्तिकरण केवल सामाजिक या आर्थिक विकास का विषय नहीं है, बल्कि यह नैतिक और आध्यात्मिक उन्नति से भी जुड़ा हुआ है। जब महिलाएँ आत्मविश्वास और स्वतंत्रता के साथ समाज में सक्रिय भूमिका निभाती हैं, तब पूरा समाज प्रगति और स्थिरता की ओर अग्रसर होता है। इस्लाम महिलाओं को सम्मान, शिक्षा, सुरक्षा और अधिकार प्रदान करता है। इसलिए आवश्यक है कि समाज महिलाओं को समान अवसर दे और उन्हें राष्ट्र तथा समाज निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करे।

*जशपुर में बेमौसम बारिश से फसल बचाने किसान भाइयों को कृषि विभाग की बड़ी सलाह *

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*जशपुर में बेमौसम बारिश से फसल बचाने किसान भाइयों को कृषि विभाग की बड़ी सलाह * *जशपुर, 14 मई 2026/* विगत सप्ताह हुई लगातार बारिश के कारण खेतों में जलभराव से *उद्यानिकी फसलों को नुकसान* की आशंका बढ़ गई है। बेमौसम बारिश से बीमारी और कीट प्रकोप तेजी से फैलने का खतरा है। इसे देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए *7 सूत्रीय सलाह* जारी की है। *विशेषज्ञों की मुख्य सलाह:*  1. *पानी निकासी:* खेत में पानी 6-8 घंटे से ज्यादा न रुके। तुरंत नाली बनाएं। जलभराव से जड़ सड़न व फफूंद रोग बढ़ते हैं। बीमारी पर *Mancozeb, Copper Oxychloride, Carbendazim* दवा का उपयोग करें। 2. *पौधों को सहारा:* बांस/रस्सी से स्टेकिंग करें। पौधे व फल जमीन न छुएं, इससे बारिश की छींटों से रोग कम फैलता है। 3. *मल्चिंग:* सूखी घास, पुआल या प्लास्टिक मल्च लगाएं। मिट्टी के छींटे पत्तों पर नहीं पड़ेंगे और फल फटना कम होगा। 4. *रोगग्रस्त पत्तियां हटाएं:* नीचे की पीली/काली पत्तियां काटकर खेत से बाहर करें। बारिश के तुरंत बाद *pruning न करें*, सूखे मौसम में करें। 5. *सिंचाई:* लंबे सूखे के बाद अचानक ज्यादा सिंचाई न करें। 6. *दवा उपयोग:* कृषि विशेषज्ञों की सलाह से ही अनुशंसित फफूंदनाशक व कीटनाशक का उपयोग करें। 7. *फसल बीमा:* खरीफ में टमाटर, बैंगन, मिर्च, अदरक, केला, पपीता, अमरूद तथा रबी में टमाटर, बैंगन, फूलगोभी, पत्तागोभी, प्याज व आलू का *फसल बीमा अवश्य कराएं*। इससे बेमौसम बारिश व प्राकृतिक घटनाओं से नुकसान पर दावा किया जा सकेगा। विशेषज्ञों ने कहा कि बादल छाए रहने से फसलों को पर्याप्त धूप नहीं मिलने पर रोग फैलने की संभावना बढ़ जाती है। समय पर उचित प्रबंधन से आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है।

बड़ी खबर: जांजगीर में ‘विषाक्त’ तरबूज का कहर, 1 बच्चे की मौत, 4 जिंदगी की जंग लड़ रहे

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बड़ी खबर: जांजगीर में ‘विषाक्त’ तरबूज का कहर, 1 बच्चे की मौत, 4 जिंदगी की जंग लड़ रहे घुरकोट गांव में पसरा मातम: शादी की खुशियां मातम में बदलीं, फूड पॉइजनिंग ने ली 15 वर्षीय किशोर की जान। जांजगीर-चांपा के घुरकोट गांव से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ मामा के घर आए पांच बच्चों ने जैसे ही तरबूज खाया, उनकी खुशियां चीख-पुकार में बदल गईं। फूड पॉइजनिंग की आशंका के चलते एक बच्चे की मौत हो गई है, जबकि चार अन्य बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती हैं। 📍 घटनाक्रम: दोपहर 12 बजे खाया तरबूज, 2 बजे बिगड़ी हालत रिश्तेदारी में आए पांचों बच्चों ने सोमवार दोपहर को घर में रखा तरबूज खाया था। सेवन के ठीक 2 घंटे बाद बच्चों के शरीर में जहर फैलने के लक्षण दिखने लगे: लक्षण: अत्यधिक उल्टी-दस्त और सांस लेने में गंभीर तकलीफ (Respiratory Distress)। कैजुअल्टी: 15 वर्षीय अखिलेश धीवर ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। वर्तमान स्थिति: हितेश, नरेंद्र, पिंटू और एक अन्य का इलाज जारी है; स्थिति स्थिर बताई जा रही है। 🔬 वैज्ञानिक दृष्टिकोण: क्या तरबूज जानलेवा हो सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार, तरबूज का सेवन सामान्यतः सुरक्षित है, लेकिन इस मामले में ‘फूड पॉइजनिंग’ के पीछे तीन बड़े वैज्ञानिक कारण हो सकते हैं: नाइट्रेट और रसायनों का ओवरडोज: तरबूज को तेजी से लाल और मीठा करने के लिए अक्सर Lead Chromate, Methanol Yellow या Nitrate के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इनका अधिक स्तर सीधे नर्वस सिस्टम और श्वसन तंत्र पर हमला करता है। बैक्टीरियल संदूषण (Contamination): यदि तरबूज पहले से कटा हुआ था या अस्वच्छ परिस्थितियों में रखा था, तो उसमें Salmonella या Listeria जैसे घातक बैक्टीरिया पनप सकते हैं। ऑर्गन फॉस्फेट (Pesticides): खेती के दौरान इस्तेमाल किए गए कीटनाशकों का अवशेष यदि छिलके के जरिए गूदे तक पहुंच जाए, तो यह फेफड़ों और हृदय की गति को रोक सकता है 🩺 प्रशासनिक एक्शन और मेडिकल बुलेटिन कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। “प्रारंभिक जांच में यह फूड पॉइजनिंग का मामला है। बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होना इस बात का संकेत है कि टॉक्सिन का असर गहरा था। हमने विसरा सुरक्षित रख लिया है और खाद्य नमूनों को लैब भेजा गया है।” — डॉ. एस. कुजुर, सिविल सर्जन ⚠️ सावधान! फल खाते समय बरतें ये सुरक्षा नियम इस घटना ने पूरे प्रदेश को अलर्ट कर दिया है। डॉक्टरों ने आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी की है: चमकीले फलों से बचें: बहुत ज्यादा लाल या अप्राकृतिक रूप से मीठे तरबूज रसायनों से भरे हो सकते हैं। धोकर ही काटें: फल को काटने से पहले उसे कम से कम 15 मिनट पानी में भिगोकर रखें। ताजा खाएं: कटे हुए फल को लंबे समय तक बाहर या असुरक्षित न रखें। सफेद पाउडर: यदि तरबूज की सतह पर सफेद पाउडर जैसा कुछ दिखे, तो उसे कतई न खरीदें।

जशपुर में स्वास्थ्य क्रांति: सरकारी सुविधाओं के विस्तार के बीच ‘अपेक्स हॉस्पिटल’ ने निःसंतान दंपतियों की राह की आसान, अब नहीं जाना होगा बड़े शहर

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जशपुर में स्वास्थ्य क्रांति: सरकारी सुविधाओं के विस्तार के बीच ‘अपेक्स हॉस्पिटल’ ने थामी निःसंतान दंपतियों की राह, अब नहीं जाना होगा बड़े शहर जशपुर/कांसाबेल: जशपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। एक ओर जहाँ शासन-प्रशासन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर अपेक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, रायगढ़ जैसे संस्थान विशेषज्ञ सेवाओं की कमी को दूर कर मरीजों का बड़े शहरों की ओर पलायन रोकने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। कांसाबेल में 10 मई को निसंतान दंपत्तियों के लिए बड़ा शिविर लगाया गया है जिले में बढ़ती सरकारी सुविधाएं राज्य सरकार जशपुर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के प्रति बेहद संवेदनशील है। जिले में स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं: मेडिकल कॉलेज की स्थापना: मुख्यमंत्री श्री साय का बड़ा सपना – जिले को चिकित्सा शिक्षा और उपचार का बड़ा केंद्र बनाना,जो साकार होने जा रहा है। 200 बिस्तर वाला मातृ-शिशु अस्पताल (गिनाबहार): माताओं और बच्चों को समर्पित आधुनिक चिकित्सा सुविधा देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ी पहल की है।कार्य प्रगति पर है। ब्लॉक स्तर पर सुदृढ़ीकरण: सभी विकासखंडों के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। चुनौती: विशेषज्ञ उपचार के लिए अब भी पलायन इन अभूतपूर्व सरकारी कोशिशों के बावजूद, बांझपन (Infertility) जैसे जटिल और सुपरस्पेशलिटी उपचार के लिए आज भी जिले के मरीजों को रायपुर, बिलासपुर या विशाखापत्तनम जैसे महानगरों की ओर रुख करना पड़ता है। आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव के कारण कई दंपती बीच में ही इलाज छोड़ देते हैं। अपेक्स हॉस्पिटल की बड़ी पहल इसी रिक्तता को भरने के लिए अपेक्स हॉस्पिटल रायगढ़ ने एक बड़ी पहल की है। जिले के निःसंतान दंपतियों को उनके घर के पास ही विश्वस्तरीय तकनीक उपलब्ध कराने के लिए 10 मई 2026 (रविवार) को श्री सनातन धर्मशाला, कांसाबेल में निःशुल्क जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया जा रहा है। चिकित्सा नहीं, मिशन है ‘संतान सुख’ ​इनफर्टिलिटी के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाली डॉ. रश्मि गोयल केवल एक चिकित्सक के रूप में ही नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक के रूप में इस शिविर का नेतृत्व कर रही हैं। डॉ. रश्मि का मानना है कि निःसंतानता केवल एक शारीरिक स्थिति नहीं, बल्कि एक दंपती का गहरा भावनात्मक संघर्ष है। उनका स्पष्ट कहना है कि— “आधुनिक तकनीक ने अब नामुमकिन को मुमकिन बना दिया है, बशर्ते लोग लोक-लाज और डर को त्यागकर सही समय पर सही सलाह लें।” डॉ. रश्मि विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में वैज्ञानिक जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका विचार है कि जब एक घर में किलकारी गूंजती है, तो वह केवल एक परिवार की खुशी नहीं बल्कि समाज की सकारात्मकता की जीत होती है। इसी समर्पण के कारण वे महानगरों की सुख-सुविधाओं के बजाय स्वयं जशपुर जैसे अंचलों में पहुंचकर मरीजों को अपनी सेवाएं दे रही हैं, ताकि हर आर्थिक वर्ग का व्यक्ति आधुनिक उपचार का लाभ उठा सके।  

कांसाबेल में ‘उम्मीद की किरण’: निःसंतानता के बढ़ते आंकड़ों के बीच अपेक्स हॉस्पिटल की बड़ी पहल

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जशपुर (छत्तीसगढ़): भारत में बदलती जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों के कारण निःसंतानता (Infertility) की दर तेजी से बढ़ रही है। इसी दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए अपेक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं आईवीएफ सेंटर, रायगढ़ द्वारा आगामी 10 मई 2026 (रविवार) को श्री सनातन धर्मशाला, कांसाबेल में एक विशेष निःशुल्क परामर्श ओपीडी का आयोजन किया जा रहा है।वैज्ञानिकों के अनुसार, जब प्रजनन दर 2.1 से नीचे जाती है, तो इसका मतलब है कि आबादी में निःसंतानता और देरी से माता-पिता बनने का चलन बढ़ गया है। छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 1.8 पर आना यह संकेत देता है कि यहाँ के दंपतियों को चिकित्सकीय सहायता और जागरूकता की आवश्यकता है। ​विशेषज्ञ राय: डॉ. रश्मि गोयल का दृष्टिकोण ​अपेक्स हॉस्पिटल की इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. रश्मि गोयल इस शिविर में मरीजों को व्यक्तिगत परामर्श देंगी। उन्होंने बताया: ​”आज के युग में तनाव और प्रदूषण के कारण बांझपन आम है। सर्वे बताते हैं कि 50% से अधिक मामलों में पुरुष कारक जिम्मेदार होते हैं, फिर भी दोष महिलाओं को दिया जाता है। हमारा उद्देश्य इस सोच को बदलना और सही समय पर आधुनिक इलाज (जैसे IVF) उपलब्ध कराना है।” ​शिविर की मुख्य विशेषताएं ​यह ओपीडी विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए है जो महानगरों के महंगे इलाज तक नहीं पहुँच पाते। ​निःशुल्क वीर्य जाँच: पुरुषों के लिए फ्री टेस्टिंग की सुविधा। ​पंजीयन: असुविधा से बचने के लिए 9329142515 या 9329915091 पर कॉल करें। ​लक्ष्य: जशपुर के लोगों को महानगरों की ओर पलायन करने से रोकना। ​अपेक्स हॉस्पिटल: सफलता का पर्याय ​रायगढ़ का अपेक्स हॉस्पिटल अपनी उन्नत तकनीकों के कारण पूरे छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक ‘सक्सेस रेट’ देने वाले केंद्रों में गिना जाता है। जशपुर जिले में पूर्व में भी लगाए गए सफल शिविरों की कड़ी में यह एक और महत्वपूर्ण प्रयास है। ​समय रहते सही सलाह ही खुशियों का आधार है। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो 10 मई को कांसाबेल पहुंचें। भारत में बांझपन की स्थिति: क्या कहते हैं आंकड़े? भारत सरकार के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, देश के विभिन्न राज्यों में बांझपन और प्रजनन दर (TFR) के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। राज्य / क्षेत्र प्रजनन दर (TFR) स्थिति छत्तीसगढ़ 1.8 रिप्लेसमेंट लेवल (2.1) से नीचे महाराष्ट्र 1.7 शहरीकरण के कारण गिरावट पश्चिम बंगाल 1.6 देश में सबसे कम प्रजनन दरों में से एक उत्तर प्रदेश 2.4 अभी भी तुलनात्मक रूप से अधिक वैज्ञानिकों के अनुसार, जब प्रजनन दर 2.1 से नीचे जाती है, तो इसका मतलब है कि आबादी में निःसंतानता और देरी से माता-पिता बनने का चलन बढ़ गया है। छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 1.8 पर आना यह संकेत देता है कि यहाँ के दंपतियों को चिकित्सकीय सहायता और जागरूकता की आवश्यकता है। विशेषज्ञ राय: डॉ. रश्मि गोयल का दृष्टिकोण अपेक्स हॉस्पिटल की इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. रश्मि गोयल इस शिविर में मरीजों को व्यक्तिगत परामर्श देंगी। उन्होंने बताया: “आज के युग में तनाव और प्रदूषण के कारण बांझपन आम है। सर्वे बताते हैं कि 50% से अधिक मामलों में पुरुष कारक जिम्मेदार होते हैं, फिर भी दोष महिलाओं को दिया जाता है। हमारा उद्देश्य इस सोच को बदलना और सही समय पर आधुनिक इलाज (जैसे IVF) उपलब्ध कराना है।” शिविर की मुख्य विशेषताएं यह ओपीडी विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए है जो महानगरों के महंगे इलाज तक नहीं पहुँच पाते। निःशुल्क वीर्य जाँच: पुरुषों के लिए फ्री टेस्टिंग की सुविधा। पंजीयन: असुविधा से बचने के लिए 9329142515 या 9329915091 पर कॉल करें। लक्ष्य: जशपुर के लोगों को महानगरों की ओर पलायन करने से रोकना। अपेक्स हॉस्पिटल: सफलता का पर्याय रायगढ़ का अपेक्स हॉस्पिटल अपनी उन्नत तकनीकों के कारण पूरे छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक ‘सक्सेस रेट’ देने वाले केंद्रों में गिना जाता है। जशपुर जिले में पूर्व में भी लगाए गए सफल शिविरों की कड़ी में यह एक और महत्वपूर्ण प्रयास है। समय रहते सही सलाह ही खुशियों का आधार है। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो 10 मई को कांसाबेल पहुंचें।

रजौटी गांव में पशुओं पर महामारी का साया: हफ्ते भर में 5 बैलों की मौत, ग्रामीणों में दहशत

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रजौटी गांव में पशुओं पर महामारी का साया: हफ्ते भर में 5 बैलों की मौत, ग्रामीणों में दहशत ​कुनकुरी : जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रजौटी में इन दिनों पशुओं में एक अज्ञात बीमारी ने महामारी का रूप ले लिया है। पिछले एक सप्ताह के भीतर गांव में पांच बैलों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य पशु अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। पशुओं के पैरों में सूजन और मवाद भरने के कारण उनकी स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। ​इन किसानों ने खोया अपना पशुधन समाजिक कार्यकर्ता जेवियर कुजूर से ​प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव के प्रभावित किसानों में शामिल हैं: ​दिलीप तिर्की: एक सप्ताह पहले 2 बैलों की मौत। ​करम साय: 5 दिन पहले 1 बैल की मौत। ​सिलवानुस तिग्गा: शनिवार को 1 बैल की मौत।इसी तरह एक और किसान के 1 बैल की मौत हुई। ​विनय तिर्की: 1 बछिया और 1 बछड़े की स्थिति गंभीर है। ​वर्तमान में विनय तिर्की के अन्य पशु भी गंभीर रूप से बीमार बताए जा रहे हैं। ​बीमारी के लक्षण: पैरों में सूजन और मवाद ​ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं के पैरों में अचानक सूजन आ रही है। सूजन बढ़ने के बाद उनमें मवाद भर जाता है, जिससे पशु चलने-फिरने और खाने-पीने में असमर्थ हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह कोई संक्रामक बीमारी है जो तेजी से फैल रही है। पड़ोसी विकासखंड के ​पशु चिकित्सक की सराहनीय पहल, विभाग से गुहार ​इस संकट की घड़ी में बगीचा विकासखंड के रनपुर क्षेत्र के डॉक्टर महेश राम ग्रामीणों के लिए मददगार साबित हो रहे हैं। वे पशुओं का नि:शुल्क इलाज कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके उपचार से अब तक 8 से 10 पशुओं की हालत सुधरी है लेकिन उनका कार्यक्षेत्र दूसरा है। ​पशुपालन विभाग से कैंप लगाने की मांग ​पशुओं की लगातार हो रही मौत से ग्राम पंचायत रजौटी के ग्रामीण बेहद डरे हुए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और पशुपालन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि: ​विभाग द्वारा गांव में विशेष स्वास्थ्य शिविर (Camp) लगाया जाए। ​बीमार पशुओं की जांच कर बीमारी के सही कारणों का पता लगाया जाए। ​गरीब किसानों को मुफ्त दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं ताकि अन्य पशुओं को बचाया जा सके। ऐसे में ​समय रहते यदि विभाग ने ध्यान नहीं दिया, तो यह बीमारी आसपास के अन्य गांवों में भी फैल सकती है, जिससे क्षेत्र के किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ सकती है।

मोटर पंप चोरी के मामले में दो आरोपी में से एक ने की खुदकुशी,परिजनों ने हत्या का संदेह जताया,पुलिस को पीएम रिपोर्ट का इंतजार

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मोटर पंप चोरी के मामले में दो आरोपी में से एक ने की खुदकुशी,परिजनों ने हत्या का संदेह जताया,पुलिस को पीएम रिपोर्ट का इंतजार जशपुर – 9 अप्रैल को कुनकुरी थाना क्षेत्र के ढोढ़ीडांड गांव में युवक नकुल राम चौहान की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला चर्चा में बना हुआ है। इस बीच गांव की सरपंच श्रीमती कलिस्ता तिर्की ने मृतक को के साथ किसी भी प्रकार की मारपीट या प्रताड़ना नहीं किए जाने की बात कही। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 7 अप्रैल को गांव में पंप चोरी के मामले को लेकर गाँव में सामान्य रूप से चर्चा की गई थी वही सरपंच के द्वारा थाना जानें कि सलाह देते हुए आवेदन देने के लिए आवेदन बना कर पुलिस थाना कुनकुरी भेजे थे । इस चर्चा में गांव के जिम्मेदार लोगों की मौजूदगी में रामलाल नागवंशी को बुलाकर समझाइश दी गई थी । सरपंच श्रीमती  कलिस्ता तिर्की ने कहा कि “जिसका पम्प – पाईप चोरी हुआ था उन्ही के द्वारा मेरे घर दुकान पास रामलाल नागवंशी एवं नकुल राम लेकर आए थे। उनसे घटना कि जानकारी संबंध में पूछा गया और दोनो अपनी गलती स्वीकार किये। यह प्रक्रिया गांव की परंपरा के अनुरूप थी। किसी भी प्रकार की मारपीट नहीं की गई। परिजनों द्वारा लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह गलत और निराधार हैं।” उन्होंने आगे कहा कि पंचायत का मकसद केवल सुधार और समाज के उत्थान की दिशा में पहल करना है। वहां मौजूद अन्य लोगों ने भी सरपंच के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि, बैठक पूरी तरह शांतिपूर्ण रही और किसी प्रकार का दबाव या हिंसा नहीं हुई । ग्रामीणों का कहना है कि गांव में छोटे – मोटे मामलों को आपसी सहमति और समझाइश से सुलझाने की परंपरा रही है , ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे। घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि 9 अप्रैल की सुबह तक मृतक अपने घर पर मौजूद था । मृतक की पत्नी के अनुसार, सुबह करीब 8 बजे तक वह घर पर था, लेकिन दोपहर को सूचना मिली कि गांव के शर्मा बगीचे में उसका शव पाया गया है। शव राम बढ़ई के बागान के अंदर अमरूद के पेड़ के नीचे संदिग्ध अवस्था में मिला, जहां पतली रस्सी और नीले रंग के कपड़े से गले में फंदा लगा हुआ था।   घटना की जानकारी मिलते ही कुनकुरी पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर अंतिम संस्कार करा दिया है। फिलहाल पुलिस को पीएम रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि बिना तथ्यों के आधार पर लगाए जा रहे आरोपों से गांव की छवि प्रभावित हो रही है। उन्होंने भरोसा जताया है कि पुलिस जांच में सच्चाई सामने आएगी और बेवजह लगाए गए आरोप स्वतः खारिज हो जाएंगे। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है और पीएम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। गांव में शांति व्यवस्था बनी हुई है, वहीं प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

*हाथियों के बीच फंसे बुजुर्गों को वन विभाग ने बचाया* *पत्थलगांव परिक्षेत्र में 11 हाथियों के दल के बीच साहसिक रेस्क्यू, जनहानि टली*

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*हाथियों के बीच फंसे बुजुर्गों को वन विभाग ने बचाया* *पत्थलगांव परिक्षेत्र में 11 हाथियों के दल के बीच साहसिक रेस्क्यू, जनहानि टली* जशपुर वनमण्डल के परिक्षेत्र पत्थलगांव अंतर्गत ग्राम तिलडेगा क्षेत्र में हाथियों के दल के विचरण के दौरान एक बड़ी घटना सामने आई, जिसमें वन विभाग की तत्परता से दो बुजुर्गों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। DFO शशिकुमार ने बताया कि 24 मार्च 2026 की दरम्यानी रात को 11 हाथियों का एक दल कक्ष क्रमांक पी.एफ. 959 नंदनझरिया क्षेत्र में सारसमार एवं नंदनझरिया होते हुए तिलडेगा बस्ती के समीप पहुँच गया। इस दौरान हाथियों ने तिलडेगा भदरापारा निवासी जय कुमार नाग (40 वर्ष) के खेत में बने आवासीय घर को नुकसान पहुँचाना शुरू कर दिया। उस समय घर के अंदर उनके माता-पिता  बितन नाग (65 वर्ष) एवं श्रीमती राजमति नाग (60 वर्ष) मौजूद थे। हाथियों की आहट सुनकर जय कुमार नाग किसी तरह बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुँचे और तुरंत वन विभाग के गश्ती दल एवं रैपिड रिस्पॉन्स टीम (आरआरटी) को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुँचकर तत्काल कार्रवाई शुरू की। बी.एफ.ओ. दिनेश कुमार (बालाझर), बी.एफ.ओ. श्रीमती अनिता तेन्दुआ (तमता), आरआरटी सदस्य राम बिलास नाग, रविशंकर पैंकरा एवं रमेश पैंकरा तथा वाहन चालक पियारू लकड़ा ने समन्वित प्रयास करते हुए हाथियों को सुरक्षित रूप से खदेड़ा। काफी प्रयासों के बाद टीम ने घर के भीतर फंसे बुजुर्ग दंपत्ति का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उन्हें शासकीय वाहन से सुरक्षित गांव में पहुंचाया। इस साहसिक एवं त्वरित कार्रवाई के कारण किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। *लगातार निगरानी में है हाथियों का दल* – वर्तमान में 11 हाथियों का यह दल तिलडेगा क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए सुखरापारा परिसर के कक्ष क्रमांक आर.एफ. 958 में विचरण कर रहा है। वन विभाग द्वारा दल की सतत निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचाव किया जा सके। वन विभाग ने क्षेत्र के ग्रामीणों से अपील की है कि वे सतर्क रहें, विशेषकर रात्रि के समय अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें तथा किसी भी प्रकार की सूचना तुरंत वन विभाग को दें। वन विभाग जशपुर द्वारा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और जन-सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय प्रयास किए जा रहे हैं।

बादलखोल से बगीचा तक: शिव बाबा को मिला भाजपा पि.व.मोर्चा का बड़ा दायित्व

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बादलखोल से बगीचा तक: शिव बाबा को मिला भाजपा पि.व.मोर्चा का बड़ा दायित्व बगीचा (जशपुर) –  वनवासी अंचल बादलखोल में भारतीय जनता पार्टी का झंडा मजबूती से गाड़ने वाले जनप्रिय नेता शिव कुमार यादव को भारतीय जनता पार्टी के पिछड़ा वर्ग मोर्चा का बगीचा मंडल अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति पिछड़ा वर्ग मोर्चा जशपुर के जिलाध्यक्ष अनूप नारायण सिंह द्वारा की गई। देखिए सूची विकास की राह में संघर्ष का दूसरा नाम बन चुके शिव कुमार यादव—जिन्हें क्षेत्र में लोग स्नेह से शिव बाबा कहते हैं—ने एक बार फिर अपनी नेतृत्व क्षमता साबित की है। संगठन के भीतर सक्रियता और जनसमस्याओं को लेकर सतत संघर्ष उनकी पहचान बन चुका है। उपसरपंच पद पर दूसरी बार निर्विरोध जीत जनपद पंचायत बगीचा की ग्राम पंचायत गायलूँगा में 8 मार्च को संपन्न उपसरपंच चुनाव में शिव कुमार यादव ने निर्विरोध जीत दर्ज कर दूसरी बार यह पद हासिल किया। इससे पहले वे निर्विरोध पंच भी चुने जा चुके हैं। वरिष्ठ नेताओं का आभार नवनियुक्त मंडल अध्यक्ष शिव कुमार यादव ने नई जिम्मेदारी मिलने पर मोर्चा जिलाध्यक्ष अनूप नारायण सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष भरत सिंह सहित सभी वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। गांव की आवाज बने ‘शिव बाबा’ शिव बाबा सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि गांव की आवाज बन चुके हैं। सड़क, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर उनके संघर्ष और धरना-प्रदर्शनों ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाया है। भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में वे गांव के समग्र विकास को अपनी प्राथमिकता मानते हैं। नियुक्ति पर जश्न   उनकी नियुक्ति की खबर मिलते ही पूरे गांव में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी मनाई, एक-दूसरे को गुलाल लगाया और मिठाइयां बांटी। संघर्ष से सफलता तक—शिव बाबा की कहानी गायलूँगा से लेकर पूरे बगीचा क्षेत्र तक शिव बाबा के संघर्षों की गूंज सुनाई देती है। सड़क हो, बिजली हो या अन्य बुनियादी जरूरतें—वे हर मुद्दे पर जनता के साथ खड़े नजर आते हैं। उनका मिलनसार स्वभाव और हर दुख-सुख में गांववासियों के साथ रहने की प्रवृत्ति ही उन्हें सबसे अलग बनाती है।