रजौटी गांव में पशुओं पर महामारी का साया: हफ्ते भर में 5 बैलों की मौत, ग्रामीणों में दहशत

रजौटी गांव में पशुओं पर महामारी का साया: हफ्ते भर में 5 बैलों की मौत, ग्रामीणों में दहशत

कुनकुरी : जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रजौटी में इन दिनों पशुओं में एक अज्ञात बीमारी ने महामारी का रूप ले लिया है। पिछले एक सप्ताह के भीतर गांव में पांच बैलों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य पशु अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। पशुओं के पैरों में सूजन और मवाद भरने के कारण उनकी स्थिति तेजी से बिगड़ रही है।

​इन किसानों ने खोया अपना पशुधन

समाजिक कार्यकर्ता जेवियर कुजूर से ​प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव के प्रभावित किसानों में शामिल हैं:
​दिलीप तिर्की: एक सप्ताह पहले 2 बैलों की मौत।
​करम साय: 5 दिन पहले 1 बैल की मौत।
​सिलवानुस तिग्गा: शनिवार को 1 बैल की मौत।इसी तरह एक और किसान के 1 बैल की मौत हुई।
​विनय तिर्की: 1 बछिया और 1 बछड़े की स्थिति गंभीर है।
​वर्तमान में विनय तिर्की के अन्य पशु भी गंभीर रूप से बीमार बताए जा रहे हैं।

​बीमारी के लक्षण: पैरों में सूजन और मवाद

​ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं के पैरों में अचानक सूजन आ रही है। सूजन बढ़ने के बाद उनमें मवाद भर जाता है, जिससे पशु चलने-फिरने और खाने-पीने में असमर्थ हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह कोई संक्रामक बीमारी है जो तेजी से फैल रही है।

पड़ोसी विकासखंड के ​पशु चिकित्सक की सराहनीय पहल, विभाग से गुहार

​इस संकट की घड़ी में बगीचा विकासखंड के रनपुर क्षेत्र के डॉक्टर महेश राम ग्रामीणों के लिए मददगार साबित हो रहे हैं। वे पशुओं का नि:शुल्क इलाज कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके उपचार से अब तक 8 से 10 पशुओं की हालत सुधरी है लेकिन उनका कार्यक्षेत्र दूसरा है।

​पशुपालन विभाग से कैंप लगाने की मांग
​पशुओं की लगातार हो रही मौत से ग्राम पंचायत रजौटी के ग्रामीण बेहद डरे हुए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और पशुपालन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

उनका कहना है कि:
​विभाग द्वारा गांव में विशेष स्वास्थ्य शिविर (Camp) लगाया जाए।
​बीमार पशुओं की जांच कर बीमारी के सही कारणों का पता लगाया जाए।
​गरीब किसानों को मुफ्त दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं ताकि अन्य पशुओं को बचाया जा सके।

ऐसे में ​समय रहते यदि विभाग ने ध्यान नहीं दिया, तो यह बीमारी आसपास के अन्य गांवों में भी फैल सकती है, जिससे क्षेत्र के किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ सकती है।