घायल गौमाता शहर की सड़क पर तड़पती रही,गौभक्त गुजरते रहे,पुलिस अधिकारी ने गौमाता की ऐसे बचाई जान,वाह रे गौभक्त ! अब कर रहे हैं गुणगान,,

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जशपुर – इंसानियत की एक अद्भुत मिसाल पेश करते हुए जशपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सोनी ने सड़क पर घायल पड़ी एक गाय की मदद कर समाज को जागरूकता और संवेदनशीलता का संदेश दिया है। घटना बीती रात की है, जब जशपुर के हनुमान मंदिर मेन रोड पर एक अज्ञात वाहन ने एक गाय को टक्कर मार दी। दुर्घटना के बाद गाय सड़क पर ही घायल अवस्था में गिर गई, लेकिन वहां से गुजरने वाले राहगीरों ने उसे नजरअंदाज कर दिया। इसी दौरान लगभग 7:30 बजे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सोनी का वाहन उसी मार्ग से गुजर रहा था। जैसे ही उनकी नजर घायल गाय पर पड़ी, उन्होंने तुरंत अपने वाहन को रुकवाया और खुद ही उस गाय की मदद के लिए आगे बढ़े। उन्होंने बिना देरी किए वेटनरी डॉक्टर को बुलाया और गाय का इलाज सुनिश्चित किया। डॉक्टरों की तत्परता और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की मानवीयता के कारण गाय को तुरंत उपचार मिला और उसकी हालत में तेजी से सुधार आया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सोनी का यह कदम न सिर्फ एक घायल जानवर की जान बचाने का काम करता है, बल्कि यह समाज के लिए एक आदर्श उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। उनकी इस मानवीयता और सेवा भावना की सराहना पूरे शहर में हो रही है। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है और सही समय पर सही कदम उठाकर किसी की जान बचाई जा सकती है,चाहे वह बेजुबान हो या फिर जुबानवाला हो। इस नेक कार्य में एडिशनल एसपी के साथ रीडर मुकेश झा, सिटी कोतवाली के पुलिसकर्मी और आम नागरिकों ने भी सहयोग किया। जशपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सोनी ने बेजुबानों की तकलीफ को नजरअंदाज करने की बढ़ती प्रवृत्ति के खिलाफ यह नेक कार्य कर दिखाया है कि इंसानियत और सेवा की भावना को जीवित रखने के लिए हम सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उनकी यह पहल समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है और यह संदेश देती है कि हम सबको ऐसे कार्यों में आगे आकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए।

*ग्रामीणों का हंगामा: जंगल में अवैध कब्जा हटाने पहुंचे, हाथियों के आगमन ने मचाई हलचल,जांच अधूरी छोड़ भागे अफसर*

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जशपुर: महेशपुर के जंगल में रविवार को कुछ ऐसा हुआ जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। एक तरफ जंगलों की सुरक्षा के लिए सैकड़ों ग्रामीणों का हुजूम पहुंचा, तो दूसरी तरफ अचानक हाथियों के झुंड ने सभी को चौंका दिया। यह मामला न केवल ग्रामीणों के साहसिक कदम को दिखाता है, बल्कि वन विभाग की उदासीनता और हाथियों के जंगलों से बाहर निकलने की वजह पर भी सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों के विरोध की वजह महेशपुर के रिजर्व फॉरेस्ट क्रमांक 984 में, झिमकी पंचायत के उपसरपंच ने सैकड़ों एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कर खेती शुरू कर दी थी। इससे महेशपुर के ग्रामीणों में गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने इस अवैध कब्जे को हटाने के लिए एकजुट होकर जंगल की ओर रुख किया। करीब साढ़े चार सौ ग्रामीणों ने एक साथ जंगल में पहुंचकर अपनी नाराजगी जाहिर की और अतिक्रमण हटाने का फैसला लिया। ### **अचानक हाथियों का आगमन** जब ग्रामीण जंगल में आगे बढ़ रहे थे, तभी जंगल में हाथियों के झुंड का आगमन हुआ। ग्रामीणों के लिए यह अनुभव बेहद रोमांचक और डरावना था। हालांकि, ग्रामीणों ने शांतिपूर्वक अपने विरोध को जारी रखा। हाथियों के इस अप्रत्याशित आगमन ने वन विभाग के अधिकारियों को जांच पूरी करने से रोक दिया। ### **वन विभाग की भूमिका** इस मामले में वन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वन समिति के अध्यक्ष अगस्तुस बेक ने बताया कि जंगल में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर जमीन को खेती के लिए तैयार किया जा रहा है। जब ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों को जंगल में ले जाकर यह स्थिति दिखाई, तो अधिकारी भी हक्के-बक्के रह गए।  जांच अधूरी पत्थलगांव रेंजर कृपासिंधु पैंकरा ने बताया कि शिकायत मिलते ही जांच टीम गठित की गई और जमीन की नाप शुरू की गई। लेकिन हाथियों के वन क्षेत्र में आने की वजह से जांच पूरी नहीं हो सकी। रेंजर ने आश्वासन दिया कि जांच पूरी होने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह घटना हसदेव अरण्य के बाद दूसरी बड़ी घटना है जब ग्रामीणों ने जंगल बचाने के लिए कदम उठाया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी भी हद तक जाकर जंगलों की रक्षा करेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने ग्रामीणों की जागरूकता और उनके जंगल प्रेम को उजागर किया है, जो एक सकारात्मक संदेश देता है। इस घटना ने बता दिया कि जंगलों की सुरक्षा के लिए न केवल वन विभाग बल्कि आम जनता को भी सक्रिय होना पड़ेगा। अवैध कब्जे और कटाई को रोकने के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे, ताकि वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की जा सके।

*मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता: जनदर्शन में नागरिक की पीड़ा सुनते ही तुरंत कार्रवाई के निर्देश**एसपी से कहा – गुम हुई पत्नी को ढूंढो*

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रायपुर – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशीलता एक बार फिर सामने आई है। आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित जनदर्शन में राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव निवासी नंदकिशोर ने अपनी पत्नी की गुमशुदगी की पीड़ा को मुख्यमंत्री के सामने रखा। नंदकिशोर ने बताया कि उनकी पत्नी पिछले छह महीनों से लापता है और तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नंदकिशोर की बात को गंभीरता से सुना और तत्काल राजनांदगांव एसपी को फोन कर इस मामले की जांच करने और लापता पत्नी को ढूंढने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री की इस त्वरित प्रतिक्रिया ने फरियादी को आशा की एक नई किरण दी है कि अब उसकी पत्नी का पता जल्द ही चल जाएगा। मुख्यमंत्री साय की जनदर्शन के दौरान नागरिकों की समस्याओं को सुनने और उन्हें जल्द से जल्द हल करने की यह पहल उनकी संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उल्लेखनीय है कि हर गुरुवार को मुख्यमंत्री श्री साय जनदर्शन में लोगों की समस्याएं सुनते हैं और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय रहते हैं। श्री साय ने अपने गृहजिले जशपुर में भी लोगों की समस्याओं के निराकरण के लिए “श्रीराम सदन” में सीएम कैम्प खोलकर जिलेवासियों को रायपुर जाने की परेशानी से भी निजात दिलाई है। यह कदम मुख्यमंत्री की जनसेवा के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। मुख्यमंत्री की इस संवेदनशीलता की सराहना हर ओर की जा रही है, जिससे जनमानस में उनके प्रति विश्वास और बढ़ा है।

 जशपुर में सड़क किनारे पहाड़ी कोरवा महिला ने दिया शिशु को जन्म, समय पर सहायता से सुरक्षित रहे जच्चा-बच्चा

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जशपुर: कुनकुरी तहसील के नारायणपुर गांव में आज सुबह 11 बजे एक असाधारण घटना घटी, जब एक पहाड़ी कोरवा महिला ने सड़क किनारे एक बाउंड्रीवाल के अंदर शिशु को जन्म दिया। इस घटना में मकान मालकिन, दुकानदार और स्वास्थ्यकर्मियों की तत्परता और सहयोग से समय से पहले हुए इस प्रसव में जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित रहे। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर श्रीमती किरण कांति कुजूर ने खबर जनपक्ष  को बताया कि प्रसूता बिंदेश्वरी बाई (21) अपने ससुराल बछरांव जाने के लिए नारायणपुर बस स्टेशन पर बस का इंतजार कर रही थीं। वह पिछले सप्ताह से अपने मायके जाताकोना में थीं और उनके भाई ने उन्हें बाइक से नारायणपुर छोड़ा था। अचानक, बिंदेश्वरी को पेट में तेज दर्द हुआ और वह सड़क किनारे एक बाउंड्रीवाल के अंदर चली गईं, जहां उनका मेम्ब्रेन फूटने से समय से 2 महीने पहले प्रसव हो गया। नवजात बालिका का वजन डेढ़ किलो है और उसे कुनकुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शिशु विशेषज्ञों द्वारा जांच के लिए ले जाया गया। घटना की सूचना मिलते ही बीएमओ ने ड्यूटी पर तैनात नर्सों को तत्काल मौके पर भेजा और जच्चा-बच्चा को सकुशल अस्पताल पहुंचाया। इस घटना में युवा व्यवसायी राहुल बंग और मकान मालकिन सपना सिंह की संवेदनशीलता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सपना सिंह ने बताया कि जब वह सावन सोमवार को शिव मंदिर से पूजा करके लौटीं, तो उन्होंने बाउंड्रीवाल के पास एक महिला को बच्चे को जन्म देते देखा। उन्होंने तुरंत पड़ोसी राहुल बंग को अस्पताल की सूचना देने के लिए कहा और खुद वाहन की व्यवस्था करने लगीं। महिला का बीपी बढ़ा हुआ था और खराब सड़कों पर बाइक से यात्रा करने के कारण यह घटना हुई थी। डॉ. मीना कुजूर, लैब टेक्नीशियन समाप्रिया खाखा, स्टाफ नर्स दीपा टोप्पो और लिपिक किरण मिंज ने भी मौके पर पहुंचकर तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की और महिला व शिशु को अस्पताल पहुंचाया। इन सभी की तत्परता और संवेदनशीलता ने एक जीवनरक्षक भूमिका निभाई और जच्चा-बच्चा को सुरक्षित रखा।

बड़ी खबर : सरिता के ‘राशन’ पर मचा बवाल,भूपेश के पोस्ट पर भाजपा और कांग्रेस भिड़ी,विनयशील ने पूछा सवाल

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रायपुर – भूपेश सरकार में डेढ़ साल तक राशन मिला और विष्णु सरकार के आते ही पिछले 6 माह से राशन नहीं मिल रहा है।यह पढ़ते ही आपको लगेगा कि राशनकार्डधारी के परिवार के साथ ऐसे कैसे हो गया? दरअसल, जशपुर जिले के कुनकुरी विधानसभा की राशनकार्डधारी महिला को बीते 18 जनवरी 2024 के बाद से आज तक राशन नहीं मिल रहा है।इस मामले को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने X पर पोस्ट करते हुए सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर हमला बोला है।वहीं बीजेपी ने इस मामले को ही खारिज करते हुए पार्टी के X एकाउंट से भूपेश बघेल को जवाब दिया है।इसके बाद छतीसगढ़ कांग्रेस के आधिकारिक एक्स X एकाउंट से महिला सरिता बाई का बयान पोस्ट कर भाजपा को फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य विनयशील ने प्रेस कांफ्रेस में कहा कि क्या हमारे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पोस्ट से भाजपा सरकार वंचितों को राशन देगी? दरअसल,यह मामला इसलिए बड़ा सियासी हो गया क्योंकि महिला जिस विधानसभा से आती है वह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सीट है ।ऐसे में मोदी की गारंटी के साथ डबल इंजन की सरकार में सुशासन जिनका नारा हो उनके ही एक परिवार की हांडी में सरकारी राशन क् चावल नहीं पकना कांग्रेस के लिए मुद्दा तो बन ही गया। सो,कांग्रेस के बड़े नेता भूपेश बघेल पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उछाल दिया।उन्होंने 31 जुलाई को X पर लिखा मुख्यमंत्री @vishnudsai जी सुनिए आपके कुनकुरी के ग़रीब परिवार के लोगों का दर्द। फ़रवरी से इस परिवार को राशन का चावल भी नहीं मिल रहा है। वे बता रहे हैं कि नया राशन कार्ड बना नहीं रहे हैं और पुराने राशन कार्ड से चावल नहीं दे रहे हैं। सोसायटी और अधिकारियों के पास गये तो बता रहे हैं कि ऊपर से चावल नहीं आ रहा है। इस पोस्ट के बाद सरकार हरकत में आई और मामले की तफ़्तीश बड़ी तेजी से कराई जिसके बाद प्रदेश भाजपा ने खाद्य अधिकारी का पत्र अटैच करके भूपेश बघेल पर पलटवार किया।पढ़िए , ठगेश जी, झूठ बोलने की कांग्रेसी यूनिवर्सिटी के आप टॉपर छात्र हैं। जिस विषय पर आपने जो रायता फैलाया है, उसकी सच्चाई जान लीजिए। महिला का राशनकार्ड झारखंड में बना था, जिसके कारण उनका कार्ड छत्तीसगढ़ में निरस्त किया गया। अब महिला ने झारखंड से अपना राशन कार्ड निरस्त करवा लिया है, जशपुर जिला प्रशासन को नए कार्ड के लिए आवेदन भी दे दिया है। विष्णु सरकार सुचारू रूप से कार्य कर रही है। आपकी सरकार में बैठे लोगों ने इतनी खोजबीन तब की होती तो आपके 9 मंत्री अपना चुनाव न हारते। अब इस पलटवार से जाहिर है भूपेश बघेल /कांग्रेस तिलमिला गई।प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य विनयशील की भेजी एक वीडियो के साथ INC CHHATTISGARH ने X पर लिखा, लीपापोती से कुछ नहीं होगा @BJP4CGState जो पद्मव्यूह जनता के लिए रच रहे हो ना उसे जनता समझ रही है। राशन कार्डधारी सरिता बाई कह रही हैं कि उनका नाम झारखंड से 2021 में कट गया था। 2022 में उनके नाम से छत्तीसगढ़ में कार्ड बन गया था। डेढ़ साल राशन भी मिला और जनवरी से बंद हुआ। अब अपनी नाकामी छिपाने के लिए अधिकारी से चिट्ठी लिखवा रहे हो। तारीख़ तो डाल देते!!!! हड़बड़ी में वो भी भूल गए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का क्षेत्र है, कम से कम मुख्यमंत्री की बेइज़्ज़ती तो न करवाओ। इस सियासी उठाफ्टक से हटकर देखा जाए तो कुनकुरी विकासखंड के रायकेरा ग्राम पंचायत निवासी सरिता बाई पति दीपक राम को जनवरी 2024 से आज तक राशन नहीं मिला।जिसका कारण बताया जा रहा है कि वह शादी से पहले झारखण्ड राज्य के सिमडेगा जिले की निवासी थी,वहां के राशनकार्ड से नाम नहीं कटाया गया था। जनवरी में इसकी जानकारी हुई और छत्तीसगढ़ से प्राप्त राशनकार्ड में सरिता का नाम हटाया गया जिससे राशनकार्ड शून्य हो गया।जिसका असर सरिता के पति व बच्चों पर पड़ा।सरिता बाई का कहना है जैसा कि वीडियो में कांग्रेस को बताई, हमर राशनकार्ड बइन रहलक जे हमें चावल नी मिलत रहलक तो हमें मन मंत्री ठन शिकायत कईर रहली तो ओ मन कहलें,पँचायत के कहलें तो पँचायत से मोर ठन आलें और वीडियो बनाइकर लेगलें,कहलें कि झारखण्ड से तोर नाम नी कइट रहलक। विनयशील पूछते हैं – तोर नाम कब कईट रहलक? तब सरिता बताती है कि  मोर नाम 2021 में झारखण्ड से कटलक तब 2022 में छत्तीसगढ़ में कार्ड बनलक और डेढ़ साल तक राशन मिललक।जनवरी 24 तक मिललक ओखर बाद में अचानक नाम कट गेलक।6-7 महीना से चावल नी मिलअथे।फिर सोसायटी वाला आलक और मोर वीडियो बनालक कहलक कि झारखण्ड में तोर नाम जुडले आहे।अब नया कार्ड बनही।कार्ड लाइन देबुं,अगले महीना से राशन भी देबुं। इस मामले में खबर जनपक्ष ने जब भाजपा का पक्ष जानना चाहा तो एक भाजपा नेता ने वीडियो भेजा और अभी खबर लिखे जाने तक जिला अथवा मंडल भाजपा की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।वीडियो में सरिता बाई अपने पति के साथ खड़ी है और हिंदी में में कह रही है कि झारखण्ड में मेरा मायके था वहां झारखण्ड में मेरा नाम था इसलिए छत्तीसगढ़ में मेरा राशनकार्ड कट गया।झारखण्ड का राशनकार्ड से मेरा नाम कटवा दी हूँ और छत्तीसगढ़ में राशनकार्ड बनवाने का कष्ट करें। इन दोनों वीडियो में सरिता की परेशानी एक ही है कि राशन नहीं मिल रहा है।बहरहाल,अब यह तो तय हो गया कि बीते 6 माह का राशन नहीं मिलेगा लेकिन अगस्त माह से सरिता को राशन मिलना शुरू हो जाएगा।जैसा कि राशन विक्रेता ने कहा है। खबर से सम्बंधित तस्वीरें देखें :