स्वस्थ भारत का आधार – सनातन विज्ञान है क्या ? पानी पर दस हजार घंटे से ज्यादा बोलने वाले जल विज्ञानी वैभव साठे का विशेष साक्षात्कार
स्वस्थ रहेगा भारत तभी तो बढ़ेगा भारत अभियान चला रहे WATER SCIENTIST,FOOD SCIENTIST वैभव साठे जिन्हें वैभव दादा के नाम से जाना जाता है, जिनके के साथ ख़बर जनपक्ष के संपादक संतोष चौधरी ने बातचीत की : संतोष चौधरी : वैभव जी, आप झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के वंशज हैं और वर्तमान में पूरे भारत में ‘स्वस्थ रहेगा भारत तभी बढ़ेगा भारत’ अभियान चला रहे हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है? वैभव साठे: देखिए, विरासत केवल शौर्य की नहीं होती, वह उत्तरदायित्व की भी होती है। मेरा उद्देश्य भारत को केवल आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी सशक्त बनाना है। आज हम विकास की दौड़ में तो आगे निकल रहे हैं, लेकिन हमारा शरीर बीमारियों का घर बनता जा रहा है। जब तक देश का नागरिक भीतर से स्वस्थ नहीं होगा, तब तक राष्ट्र की प्रगति स्थायी नहीं हो सकती। संतोष चौधरी : आपने जशपुर में ‘सीता रसोई’ और रामचरितमानस आधारित आहार प्रणाली की चर्चा की है। एक जलविज्ञानी और आधुनिक शिक्षित व्यक्ति के नाते आप इसे कैसे देखते हैं? वैभव साठे: यह विडंबना है कि जिसे हम ‘पुराना’ कहकर छोड़ रहे हैं, उसे नासा (NASA) जैसे संस्थान डीकोड कर रहे हैं। रामचरितमानस में वर्णित आहार की शुचिता और सीता रसोई की पद्धति केवल खाना पकाने का तरीका नहीं, बल्कि ‘पोषण विज्ञान’ है। इसमें अग्नि, पात्र (बर्तन) और मानसिक भाव का जो संतुलन बताया गया है, वह हमारे शरीर के सात चक्रों को प्रभावित करता है। आज का मॉडर्न न्यूट्रिशन साइंस अब जाकर समझ रहा है कि भोजन की ऊर्जा केवल कैलोरी में नहीं, बल्कि उसके ‘प्राण’ में होती है। संतोष चौधरी : आप जापान की एक विशेष वाटर मेडिकल डिवाइस और ‘जल विज्ञान’ पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बात करते हैं। यह साधारण पानी से अलग कैसे है? वैभव साठे: हम पानी को केवल ‘साफ’ (RO या फिल्टर) करने के पीछे भाग रहे हैं, लेकिन साफ पानी और ‘जीवित’ पानी में फर्क होता है। जापान की इस तकनीक से जो जल निकलता है, वह क्षारीय (Alkaline) होता है: जो शरीर के एसिडिक कचरे को खत्म करता है।माइक्रो-क्लस्टर्ड है: यानी यह पानी बहुत पतला होता है, जो कोशिकाओं के भीतर तक जाकर पोषण पहुँचाता है।एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर: यह गंगा के गोमुख या ग्लेशियर वाटर की तरह ऊर्जावान होता है। और एक बड़ी बात बताता हूँ, जैसे गोमूत्र में विषैले तत्वों को मारने की शक्ति होती है, वैसी ही सूक्ष्म शक्ति इस जल में वैज्ञानिक प्रक्रिया से पैदा की जाती है। इंदौर जैसी घटनाओं से हमें सीखना होगा कि दूषित जल केवल बीमारी नहीं, मृत्यु का कारण भी बन सकता है।इसलिए क्रिकेट कैप्टन शुभमन भी तीन लाख की मशीन साथ लेकर इंदौर आए थे।यहां जशपुर में भी इस मेडिकल डिवाइस को लेकर लोग स्वस्थ जीवन जीना शुरू कर दिए हैं। संतोष चौधरी : अघोरेश्वर पीठ सोगड़ा में बाबा संभव राम ने आपके साथ ‘मर्म चिकित्सा’ शिविर की बात की है। यह क्या है? वैभव साठे: मर्म चिकित्सा हमारे सनातन विज्ञान की वह पद्धति है जिसमें बिना किसी दवा के, शरीर के विशेष ऊर्जा बिंदुओं को स्पर्श कर असाध्य रोगों का उपचार किया जाता है। सोगड़ा में महाकाली का दर्शन करना और पूज्य बाबा का आशीर्वाद मिलना मेरे अभियान के लिए गौरव की बात है। हम जल्द ही ऐसे शिविर लगाएंगे जहाँ लोग प्राचीन भारतीय चिकित्सा और आधुनिक जल विज्ञान के मेल से खुद को पुनर्जीवित कर सकेंगे। संतोष चौधरी : अंत में देशवासियों के लिए आपका क्या संदेश है? वैभव साठे: बस इतना ही कहूँगा— “जल को जान लो, नहीं तो जल आपकी जान ले लेगा।” अपनी जड़ों की ओर लौटिए, तकनीक का उपयोग शरीर को सजाने के लिए नहीं, उसे स्वस्थ रखने के लिए कीजिए। धन्यवाद।