*प्रेम और सद्भाव के रंगों से सराबोर हो होली : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को दी होली की बधाई ,शुभकामनाएँ

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*प्रेम और सद्भाव के रंगों से सराबोर हो होली : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को दी होली की बधाई ,शुभकामनाएँ* रायपुर 3 मार्च 2026/मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कामना की है कि यह उल्लास, उमंग और आत्मीयता का महापर्व सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और नई ऊर्जा का संचार करे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि यह आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे को सशक्त बनाने का अवसर है। यह पर्व समाज में समरसता, सद्भाव और एकता की भावना को प्रगाढ़ करता है तथा हमें सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में होली का विशेष महत्व है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय, अहंकार पर विनम्रता की जीत और वैमनस्य पर प्रेम की प्रधानता का संदेश देता है। होली के रंग हमें स्मरण कराते हैं कि विविधताओं से परिपूर्ण हमारे समाज की वास्तविक शक्ति परस्पर विश्वास, अपनत्व और सामूहिक सहयोग में निहित है। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस पर्व को हर्षोल्लास, संयम और पारंपरिक मर्यादाओं के साथ मनाएँ। प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दें तथा समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों के साथ भी इस उत्सव की खुशियाँ साझा करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के रंगों से सजी यह होली छत्तीसगढ़ की एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव को और अधिक सुदृढ़ करेगी।

कुनकुरी में अवैध शराब पर कानून का खौफ, अहाता संचालक शुभम रंगे हाथ गिरफ्तार

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कुनकुरी में अवैध शराब पर कानून का खौफ, अहाता संचालक शुभम रंगे हाथ गिरफ्तार कुनकुरी,03 मार्च 2026 – होली पर्व के मद्देनज़र अवैध शराब कारोबारियों पर पुलिस ने सख्त शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में कुनकुरी पुलिस ने बड़ी और प्रभावशाली कार्रवाई करते हुए सरकारी शराब दुकान के सामने संचालित एक अहाता (चखना दुकान) में छापा मारकर संचालक को अंग्रेजी शराब बेचते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार शाम पुख्ता सूचना के आधार पर टीम ने दबिश दी। छापेमारी के दौरान अहाता संचालक शुभम जायसवाल (32 वर्ष), पिता दीपक जायसवाल, निवासी बगीचा को ग्राहकों को अवैध रूप से अंग्रेजी शराब परोसते हुए पकड़ा गया। मौके से भारी मात्रा में शराब जब्त की गई। आरोपी के खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर की गई। लाल उम्मेद सिंह (डीआईजी व एसएसपी) के निर्देशन में कुनकुरी पुलिस द्वारा नशे के अवैध कारोबारियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राकेश यादव के मार्गदर्शन में प्रधान आरक्षक रामानुज पांडे, आरक्षक जितेंद्र गुप्ता, चंद्रशेखर बंजारे और अजय श्रीवास्तव की टीम ने पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान आरोपी ने बचने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के आगे उसकी एक न चली। इस मामले में स्थानीय लोगों ने अहाता का लायसेंस निरस्त कर संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।अहाता से लगे बंदरा खसरा नाले में गंदगी फैलाने और शराब के बोतलों,डिस्पोजल से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने पर भी कलेक्टर रोहित व्यास से सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि त्योहारों के दौरान अवैध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। कुनकुरी में हुई इस ताबड़तोड़ कार्रवाई ने यह संदेश दे दिया है कि अब अवैध शराब कारोबारियों पर कानून का खौफ साफ नजर आने लगा है और सुशासन कायम रखने के लिए पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

जशपुर में फगुआ का रंगीन धमाका: “तोर लागिन जान भी देई देबूं” ने मचाई धूम,EX MLA विनय और श्वेता की हिट जोड़ी, यूट्यूब में कमेंट्स की बौछार

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जशपुर में फगुआ का रंगीन धमाका: “तोर लागिन जान भी देई देबूं” ने मचाई धूम जशपुर, 3 मार्च 2026 –  होली के रंगों के बीच जशपुर की धरती से एक बार फिर सांस्कृतिक सरगम गूंज उठी है। जशपुर के पूर्व विधायक Vinay Bhagat और उनकी पत्नी Shweta Bhagat ने आधुनिक नागपुरी फगुआ एलबम “तोर लागिन जान भी देई देबूं” रिलीज कर होली के जश्न में चार चांद लगा दिए हैं। दो मार्च को यूट्यूब पर लॉन्च हुए इस एलबम ने महज 20 घंटे में ही 19 हजार व्यूज़ का आंकड़ा पार कर लिया, जो इसकी लोकप्रियता का प्रमाण है। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर यह गीत तेजी से वायरल हो रहा है और दर्शकों से जबरदस्त सराहना बटोर रहा है। एलबम की सबसे बड़ी खासियत इसकी लोकेशन और सांस्कृतिक प्रस्तुति है। जशपुर की नैसर्गिक सुंदरता, पहाड़, हरियाली और स्थानीय परंपराओं को बेहद खूबसूरती से फिल्माया गया है। शूटिंग Sarna Resort Balachhapar में की गई है, जहां होली के रंग में डूबे लोग स्थानीय पारंपरिक पेय हड़िया (चावल से निर्मित राइस बीयर) को मिट्टी के बर्तनों में पीते और पारंपरिक नृत्य करते नजर आते हैं। यह दृश्य एलबम को पूरी तरह से लोक संस्कृति से जोड़ता है। दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी दिल छू लेने वाली हैं। एक दर्शक बालमुकुंद यादव ने कमेंट करते हुए लिखा, “यह वीडियो बहुत सुंदर है। कभी भोजपुरी गाना में भी बनाइए, आप लोग भोजपुरी हीरो-हीरोइन जैसे दिखते हो।” ऐसे हजारों सकारात्मक कमेंट्स इस एलबम की सफलता की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। एलबम की प्रस्तुति में Vinay Bhagat और Shweta Bhagat मुख्य कलाकार के रूप में नजर आ रहे हैं, जिनका नृत्य और अभिव्यक्ति दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रही है। उनके डांस को जशपुर ही नहीं, बल्कि झारखंड, ओडिशा, असम और बंगाल तक में खूब पसंद किया जाता है। इस एलबम की प्रोड्यूसर श्वेता विनय भगत हैं। गायन की जिम्मेदारी कयूम अब्बास और केशो देवी ने संभाली है, जबकि कैमरा और एडिटिंग का कार्य अरुण कुमार ने किया है। सह कलाकार संगम और दिव्या ने भी अपने अभिनय से गीत में जीवंतता भर दी है। होली के इस खास मौके पर “तोर लागिन जान भी देई देबूं” ने यह साबित कर दिया है कि क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति में भी वह ताकत है जो सीमाओं को पार कर दिलों को जोड़ सकती है। जशपुर की धरती से निकला यह रंगीन फगुआ गीत अब पूरे पूर्वी भारत में अपनी छाप छोड़ता नजर आ रहा है।

रांची में ‘TCI प्रोड्यूसर्स मीट 2026’ का समापन, आदिवासी सिनेमा को मिलेगा नया मंच

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रांची में ‘TCI प्रोड्यूसर्स मीट 2026’ का समापन, आदिवासी सिनेमा को मिलेगा नया मंच रांची, 1 मार्च 2026 – Tribal Cinema of India (TCI) के द्वारा रांची के बगाइचा सोशल सेंटर में दो दिवसीय ‘TCI प्रोड्यूसर्स मीट 2026’ का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 28 फरवरी और 1 मार्च को हुआ। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों से फिल्म बनाने वाले लोग, निर्देशक, लेखक और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आदिवासी और क्षेत्रीय फिल्मों को मजबूत बनाना और उन्हें देश-विदेश तक पहुंचाना था। पहले दिन क्या हुआ? पहले दिन चर्चा हुई कि आदिवासी फिल्मों को सिर्फ कला तक सीमित न रखकर इसे रोजगार और उद्योग के रूप में कैसे आगे बढ़ाया जाए। फिल्म बनाने में आने वाली दिक्कतों—जैसे पैसों की कमी, सही मार्गदर्शन का अभाव और फिल्मों को दर्शकों तक पहुंचाने की समस्या—पर खुलकर बात हुई। डिजिटल प्लेटफॉर्म मेरा टीवी की ओर से भी जानकारी दी गई कि अब गांव और क्षेत्रीय भाषा की फिल्में भी ऑनलाइन माध्यम से देश-विदेश में दिखाई जा सकती हैं। दूसरे दिन क्या निर्णय हुए ? दूसरे दिन फिल्म निर्माण को बेहतर बनाने और नई तकनीक अपनाने पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि क्षेत्रीय फिल्मों को सिर्फ स्थानीय दर्शकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अच्छी डबिंग और तकनीक से इन फिल्मों को दूसरी भाषाओं में भी दिखाया जा सकता है। बैठक में ‘प्रोड्यूसर्स कंसोर्टियम’ यानी निर्माताओं का एक समूह बनाने का प्रस्ताव रखा गया। यह समूह फिल्मों के निर्माण और वितरण में आपसी सहयोग करेगा। साथ ही एक कार्यकारी टीम और रिसर्च टीम बनाने की भी बात कही गई। फिल्म पिचिंग सेशन भी हुआ कार्यक्रम के अंतिम चरण में नए फिल्मकारों ने अपने फिल्म प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। इससे उन्हें निवेशकों से जुड़ने और भविष्य में फिल्म बनाने का अवसर मिल सकेगा। कई राज्यों से पहुंचे प्रतिभागी इस कार्यक्रम में झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार से करीब 50 फिल्म निर्माता, निर्देशक और कलाकार शामिल हुए। आयोजकों ने कहा कि TCI आगे भी आदिवासी संस्कृति और पहचान को मजबूत करने के लिए काम करता रहेगा। अनामिका मरियन टोप्पो ने ट्राइबल सिनेमा ऑफ इंडिया (TCI) की प्रेस विज्ञप्ति जारी की। कार्यक्रम को सफल बनाने में बीजू टोप्पो, दीपक बड़ा, एनुस कुजूर, जगत लकड़ा, सुरेंद्र कुजूर, अंकित बागची, रामकृष्ण सोरेन, इशाराज मुर्मू, साहेब नागपुरिया, निशिता रॉय, राजीव सिन्हा, मिथिलेश छेत्री, सृष्टि मरांडी, सौरव मुंडा, दीप्ति मिंज, अनामिका टोप्पो, अजित टुडू, संजय शुभम, आकृति लकड़ा, आनंद हेंब्रम, अनिकेत उरांव, आनंद सोरेन, पवनदीप खाखा और राकेश रोशन किड़ो आदि ने सक्रिय योगदान दिया। पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन जेनिफर बाखला द्वारा किया गया।

सुशासन सप्ताह के अंतिम दिन जोकारी में विकासखंड स्तरीय शिविर, 17 आवेदनों में 5 का मौके पर निराकरण

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सुशासन सप्ताह के अंतिम दिन जोकारी में विकासखंड स्तरीय शिविर, 17 आवेदनों में 5 का मौके पर निराकरण कुनकुरी – सुशासन सप्ताह के अंतिम दिन कुनकुरी विकासखंड के ग्राम जोकारी में विकासखंड स्तरीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की शुरुआत छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा-अर्चना के साथ हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जनपद पंचायत अध्यक्षा श्रीमती सुशीला साय उपस्थित रहीं। शिविर में कुल 17 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 5 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया, जबकि शेष 12 आवेदनों को संबंधित विभागों को अग्रेषित कर शीघ्र समाधान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्राप्त आवेदनों में फौती-नामांतरण, आधार कार्ड केवाईसी, आयुष्मान कार्ड केवाईसी तथा महतारी वंदन योजना से जुड़े प्रकरण शामिल रहे। मुख्य अतिथि श्रीमती सुशीला साय ने कहा कि शिविर में एक भी शिकायत प्राप्त नहीं होना और 17 आवेदनों का आना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में सुशासन प्रभावी ढंग से लागू है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी प्रसन्नता जताई कि अब महिलाएं व्यवसाय के क्षेत्र में आगे आ रही हैं। कुनकुरी क्षेत्र में मत्स्य पालन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से आर्थिक विकास को गति मिली है। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विकासवादी सोच का परिणाम बताया। जनपद पंचायत सीईओ प्रमोद सिंह ने बताया कि सुशासन सप्ताह के तहत कुनकुरी विकासखंड की चार ग्राम पंचायतों में ब्लॉक स्तर के शिविर आयोजित किए गए। शासन की मंशानुसार क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है और आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शिविर में जनपद पंचायत सीईओ प्रमोद सिंह, बीईओ सुदर्शन पैंकरा, एसडीओ पीएचई विनोद मिश्रा, जोकारी पंचायत की सरपंच मंजू भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं भाजपा पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर ग्रामीणों में संतोष का वातावरण देखा गया।

नहीं रहे पी. के. बजाज, ‘लोटपोट’ को ऊँचाइयों तक पहुंचाने वाले युगपुरुष को भावभीनी श्रद्धांजलि

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नहीं रहे पी. के. बजाज, ‘लोटपोट’ को ऊँचाइयों तक पहुंचाने वाले युगपुरुष को भावभीनी श्रद्धांजलि  नई दिल्ली – हिंदी बाल-पत्रकारिता जगत के लिए अत्यंत दुखद समाचार सामने आया है। लोकप्रिय बाल पत्रिका लोटपोट को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाले वरिष्ठ प्रकाशक पी. के. बजाज का निधन हो गया है। उनके निधन की जानकारी प्रख्यात कार्टूनिस्ट एवं ‘मोटू पतलू’ के सर्जक डॉ. हरविंदर मांकड़ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से साझा की। डॉ. मांकड़ ने भावुक शब्दों में लिखा कि आज मन भारी है और शब्द साथ नहीं दे रहे। उन्होंने बताया कि पी. के. बजाज ने अपने पूज्य पिता ए. पी. बजाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ‘लोटपोट’ और मायापुरी जैसी पत्रिकाओं को देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनके नेतृत्व में ये पत्रिकाएं पाठकों के बीच सबसे अधिक पढ़ी और सराही जाने वाली पत्रिकाओं में शामिल रहीं। नए रचनाकारों के संरक्षक थे बजाज जी डॉ. मांकड़ के अनुसार, पी. के. बजाज केवल एक प्रकाशक नहीं थे, बल्कि वे प्रतिभाओं को पहचानने वाले साधक थे। नए रचनाकारों को अवसर देना, उनकी प्रतिभा पर विश्वास करना और उन्हें आगे बढ़ाने का साहस देना उनकी कार्यशैली का स्वाभाविक हिस्सा था। उन्होंने बताया कि उनका बजाज जी से 47 वर्षों का आत्मीय संबंध रहा। उनके जीवन की पहली बड़ी पहचान ‘मोटू पतलू’ को प्रकाशित करने का श्रेय भी बजाज जी को ही जाता है। आज यह किरदार घर-घर में मुस्कुराहट बाँट रहा है तो उसमें बजाज जी का विश्वास, आशीर्वाद और दूरदर्शिता शामिल है। संघर्ष में देखा संभावना, अनजान को दी पहचान डॉ. मांकड़ ने अपने संदेश में लिखा कि जब वे संघर्ष के दौर में थे, तब बजाज जी ने उनमें संभावना देखी। जब वे अनजान थे, तब उन्होंने पहचान दी। हर मोड़ पर उन्होंने संबल और हौसला प्रदान किया। उनके निधन से बाल साहित्य, कॉमिक्स और पत्रिका प्रकाशन जगत में शोक की लहर है। ‘लोटपोट’ का हर पन्ना, हर मुस्कुराता चेहरा और हर छपी हुई रेखा मानो उन्हें नमन कर रही है। ईश्वर से प्रार्थना की जा रही है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिजनों व शुभचिंतकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। सेलिब्रिटी क्लब ऑफ इंडिया की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

*कुनकुरी में चोरी की बाइकों का बड़ा जाल टूटा, दुर्ग / कुनकुरी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 24 बाइक बरामद, आरोपी का नेटवर्क बेनकाब*

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*कुनकुरी में चोरी की बाइकों का बड़ा जाल टूटा, दुर्ग / कुनकुरी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 24 बाइक बरामद, आरोपी का नेटवर्क बेनकाब* *कुनकुरी*– जशपुर जिले के कुनकुरी से बड़ी खबर सामने आई है, जहां चोरी की मोटरसाइकिलों के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। दुर्ग पुलिस ने कुनकुरी पुलिस के सहयोग से बड़ी कार्रवाई करते हुए CG 07 नंबर की 24 चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। इस कार्रवाई से वाहन चोर गिरोह में हड़कंप मच गया है। कुनकुरी थाना प्रभारी निरीक्षक राकेश यादव ने बताया कि दुर्ग पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुनकुरी इलाके में एक व्यक्ति बेहद सस्ते दामों पर चोरी की बाइक बेच रहा है। सूचना मिलते ही दुर्ग पुलिस की टीम कुनकुरी पहुंची। वहीं SSP डॉ० लाल उमेद सिंह के नेतृत्व में ASP राकेश कुमार पाटनवार के मार्गदर्शन में दुर्ग और कुनकुरी पुलिस टीम ने घर-घर दबिश देकर अलग-अलग स्थानों से होंडा साइन, स्प्लेंडर, स्कूटी समेत कुल 24 चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद कीं। आरोप है कि आरोपी आधार कार्ड लेकर कागजात बनवाने के नाम पर अतिरिक्त पैसे भी वसूलते थे। इस मामले में मुख्य मास्टर माइंड आरोपी पप्पा राव को दुर्ग पुलिस अपने साथ लेकर आई थी, वहीं कुनकुरी से दो अन्य खरीददार आरोपी सेवक राम प्रजापति उर्फ रवि राम, दूसरा मनोज राम को पंडरीपानी क्रेशर प्लांट से गिरफ्तार कर लिया गया है। बरामद सभी वाहनों के साथ दोनों आरोपियों को भी आगे की कार्रवाई के लिए भिलाई रवाना किया गया है। वहीं प्रारंभिक जांच में यह एक संगठित चोरी गिरोह का मामला प्रतीत हो रहा है, जिसके तार अन्य जिलों से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब नेटवर्क, खरीददारों और वाहनों के असली मालिकों की पहचान में जुटी है।यह भी जानकारी मिली है कि जिस क्रेशर प्लांट से चोरी की बाइक बेचे जाने के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार हुए हैं वे प्लांट के कर्मचारी हैं।वहीं पप्पा राव पोकलेन का इंजीनियर था,जो हर बार दुर्ग जिले से बाइक चोरी कर लाता था।दुर्ग पुलिस के खुलासे के बाद और भी जानकारी सामने आ सकती है। जशपुर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि सस्ते दामों में मिलने वाले संदिग्ध वाहनों से बचें और किसी भी शंका की सूचना तुरंत पुलिस को दें। मामले में आगे और खुलासों की उम्मीद है।

PART 1 : “VIP” ईंट के आका कौन ? अवैध बंगला भट्ठों पर मेहरबानी या मिलीभगत! बंद हुए तो जनता को होगी परेशानी, जिम्मेदार अधिकारियों का चौंकाने वाला तर्क

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जशपुर/फरसाबहार – जिले में लाल ईंट के कथित अवैध कारोबार को लेकर अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है आखिर “VIP” ईंट के पीछे असली आका कौन हैं? वर्षों से बंगला ईंट भट्ठों का संचालन खुलेआम जारी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ही इन भट्ठों के संचालन को लेकर ऐसा तर्क दिया जा रहा है, जिसने प्रशासनिक भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल,फरसाबहार राजस्व अनुविभाग में स्थानीय स्तर पर “VIP” ब्रांड की मुहर लगाकर लाल ईंटों की बिक्री धड़ल्ले से किए जाने की जानकारी सामने आई है। सरपंच – सचिव से मिली जानकारी के अनुसार बलुआबहार, पम्पशाला, कंदईबहार इलाके में बिना पंचायत एवं ग्राम सभा की अनुमति के ही व्यावसायिक स्तर पर बंगला ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है। नियमों के मुताबिक इस प्रकार के किसी भी भट्ठे के संचालन के लिए स्थानीय निकायों से वैधानिक अनुमति अनिवार्य होती है, किंतु संबंधित पंचायतों के पास ऐसे किसी भी संचालन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं बताए जा रहे हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर पदस्थ जनप्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों का कहना है कि उनके अभिलेखों में संचालित बंगला ईंट भट्ठों के संबंध में कोई भी वैध स्वीकृति दर्ज नहीं है। इसके बावजूद बीते कई वर्षों से इनका संचालन जारी है, जिससे यह आशंका हो रही है कि कारोबार पूरी तरह से नियमों की अनदेखी कर संचालित किया जा रहा है। मामले को लेकर एक और गंभीर पहलू सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, जब संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से इन भट्ठों के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर चर्चा की जाती है, तो यह तर्क दिया जाता है कि यदि बंगला ईंट भट्ठों को बंद करा दिया गया, तो आम जनता को निर्माण कार्यों में भारी समस्या का सामना करना पड़ेगा। इतना ही नहीं, यह भी कहा जाता है कि ऐसे में चिमनी ईंट निर्माताओं द्वारा ईंटों के दामों में भारी वृद्धि कर दी जाएगी, जिससे बाजार में ईंटों की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। अधिकारियों का यह तर्क अब कई सवालों को जन्म दे रहा है । यदि कोई गतिविधि अवैध है, तो उसे केवल इस आधार पर जारी रहने देना कि उससे बाजार संतुलित बना हुआ है, क्या नियमानुसार उचित है? क्या अवैध संचालन को अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण दिया जा रहा है? ऐसे कई प्रश्न अब स्थानीय नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बनते जा रहे हैं। जानकारों का यह भी कहना है कि क्षेत्र में कोयले के अवैध भंडारण की गतिविधियां भी संचालित होने की सूचना समय-समय पर सामने आती रही हैं। पर्यावरण से जुड़े लोगों का मानना है कि बिना किसी नियामक नियंत्रण के संचालित हो रहे भट्ठे क्षेत्रीय पर्यावरण के लिए भी खतरा बन सकते हैं, लेकिन दबाव एवं भय के कारण लोग खुलकर अपनी बात रखने से बच रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि जांच के नाम पर खनिज विभाग,राजस्व विभाग के अधिकारी प्रतिवर्ष क्षेत्र का दौरा करते हैं, किंतु कार्रवाई सीमित रूप से चालान तक सिमट जाती है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि गतिविधियां अवैध हैं, तो उन्हें केवल आर्थिक दंड लगाकर संचालित रहने देना किस हद तक न्यायसंगत है? वर्तमान स्थिति में यह पूरा मामला प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी बनता जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इन कथित अवैध बंगला ईंट भट्ठों के विरुद्ध कोई ठोस एवं निर्णायक कार्रवाई करते हैं या फिर कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा। सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है “VIP” ईंट के असली आका आखिर हैं कौन? हमारी पड़ताल जारी है,,

मुख्यमंत्री के क्षेत्र में 10 करोड़ के उद्यानिकी महाविद्यालय में घोटाले की बू? बैलाटोली में बिना PCC सैकड़ों फुटिंग, जंग लगी सरिया का इस्तेमाल

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मुख्यमंत्री के क्षेत्र में 10 करोड़ के उद्यानिकी महाविद्यालय में घोटाले की बू? रेमते में बिना PCC सैकड़ों फुटिंग, जंग लगी सरिया का इस्तेमाल कुनकुरी/रेमते (जशपुर) – विष्णुदेव साय के विधानसभा क्षेत्र में बन रहे करीब 10 करोड़ रुपये की लागत वाले उद्यानिकी महाविद्यालय भवन में भारी अनियमितताओं का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कुनकुरी विकासखंड के ग्राम रेमते में निर्माणाधीन इस प्रोजेक्ट को लेकर घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। बिना PCC के सैकड़ों फुटिंग, 200 कॉलम पर सवाल सूत्रों और सामने आई तस्वीरों के अनुसार मुख्य कॉलेज भवन में बिना पीसीसी (Plain Cement Concrete) किए ही सैकड़ों फुटिंग डाल दी गईं। बताया जा रहा है कि करीब 200 कॉलम इसी तरह खड़े कर दिए गए हैं। निर्माण मानकों के अनुसार जहां क्रैंक और मजबूत बेस अनिवार्य होता है, वहां सीधे-सीधे नियमों की अनदेखी की गई है। निर्माणाधीन ढांचे में अभी से कई जगह दरारें दिखाई देने लगी हैं, जो भविष्य में बड़े हादसे का संकेत मानी जा रही हैं। जंग लगी सरिया और कबाड़ सामग्री का इस्तेमाल? आरोप है कि निर्माण में पुरानी और जंग लगी सरिया का इस्तेमाल किया जा रहा है। यदि यह सही है तो यह न केवल गुणवत्ता से समझौता है, बल्कि करोड़ों रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला भी बनता है। मुंशी पर मनमानी और पैसों की हेराफेरी के आरोप स्थानीय सूत्रों के मुताबिक ठेकेदार के मैनेजर/इंजीनियर राजेंद्र प्रसाद द्वारा साइट पर मनमानी की जा रही है। पहले यह काम पेटी कांट्रेक्टर आकाश के माध्यम से कराया जा रहा था, लेकिन बाद में बाहरी मजदूर लगाकर निम्नस्तरीय कार्य शुरू कर दिया गया। यह भी आरोप है कि परिवार में शादी का हवाला देकर साइट से ही 10 लाख रुपये निकालने की बात मजदूरों के बीच कही गई। साथ ही मजदूरों से गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार की शिकायतें भी सामने आई हैं। गुणवत्ता बनाम कमीशन का खेल? पेटी कांट्रेक्टर का दावा है कि वह मानकों के अनुरूप काम कर रहा था, लेकिन कथित रूप से कमीशनखोरी और जल्दबाजी में घटिया निर्माण कराया जा रहा है। यदि समय रहते तकनीकी जांच नहीं हुई तो यह इमारत भविष्य में बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। मुख्यमंत्री के क्षेत्र में उठे बड़े सवाल यह उद्यानिकी परियोजना स्वयं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र में स्वीकृत है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेंगे? सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि इस निर्माण कार्य में कथित रूप से घटिया काम कराने वाले मैनेजर/इंजीनियर राजेंद्र को कुछ स्थानीय भाजपा नेताओं का संरक्षण भी प्राप्त है। हालांकि फिलहाल इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है कि किन नेताओं का नाम इसमें जुड़ा है, लेकिन यदि संरक्षण के आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला और भी गंभीर हो जाएगा। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या 10 करोड़ की यह इमारत गुणवत्ता के साथ तैयार होगी या फिर भ्रष्टाचार के दीमक के कारण धराशायी होने का इंतजार करेगी? स्थानीय लोगों ने उच्चस्तरीय तकनीकी जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

कुसमी मारपीट कांड: एक आदिवासी ग्रामीण की मौत के बाद एसडीएम पर गंभीर सवाल, एसडीएम करुण डहरिया गिरफ्तार

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कुसमी मारपीट कांड: एक ग्रामीण की मौत के बाद प्रशासन पर गंभीर सवाल, एसडीएम गिरफ्तार बलरामपुर,16 फरवरी 2026 – बलरामपुर जिले के कुसमी थाना क्षेत्र अंतर्गत मारपीट की एक गंभीर घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। अवैध बॉक्साइट खनन की कथित जांच के दौरान हुए विवाद के बाद एक आदिवासी ग्रामीण की मौत और दो अन्य के घायल होने से एसडीएम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, कुसमी ब्लॉक के हंसपुर क्षेत्र में जांच के दौरान स्थानीय ग्रामीणों और एसडीएम करुण कुमार डहरिया के बीच विवाद हुआ। एसडीएम के साथ उनके निजी लोग थे जिन्हें बचाने के लिए और यह दिखाने के लिए कि यह मारपीट एक राजस्व विभाग की कार्रवाई के दौरान हुई है,एसडीएम ने नायब तहसीलदार को फोन करके दो पुलिसकर्मियों को लेकर आने का आदेश दिया। आरोप है कि इस दौरान कुसमी एसडीएम करुण डहरिया एवं उनके साथ मौजूद निजी लोगों द्वारा ग्रामीणों के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। घायल ग्रामीणों का कहना है कि वे गेहूं के खेत में सिंचाई कर रात करीब 8 बजे लौट रहे थे, तभी एसडीएम की गाड़ी और एक अन्य वाहन में सवार 6–7 लोगों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया और लाठी-डंडे व रॉड से पिटाई की। मारपीट के बाद तीनों ग्रामीणों को कुसमी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां इलाज के दौरान राम नरेश राम (60 वर्ष) की मौत हो गई, जबकि अजीत उरांव (60 वर्ष) और आकाश अगरिया (20 वर्ष) घायल हैं। घटना के बाद स्थिति तनावपूर्ण होने की आशंका को देखते हुए कुसमी थाना एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। जांच के लिए बलरामपुर एडिशनल एसपी विश्व दीपक त्रिपाठी कुसमी पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, मारपीट की घटना के बाद एसडीएम की सूचना पर पहुंचे तहसीलदार पारस शर्मा को भी इस पूरे मामले में साजिश के तहत फंसाने की कोशिश किए जाने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि नायब तहसीलदार, जो घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थे, उनके साथ दो पुलिसकर्मियों को भी जबरन इस मामले में लपेटने का प्रयास किया गया, जिससे तहसीलदार संघ में भारी आक्रोश है और संघ इस मुद्दे पर सक्रिय हो गया है। वहीं, स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि एसडीएम करुणा डहरिया का व्यवहार पूर्व से ही आक्रामक रहा है और वे जनभावनाओं के विपरीत कार्य करते रहे हैं। उनके पुराने मामलों को लेकर भी किशोरावस्था में अपने पिता की हत्या करने के गंभीर दावे किए जा रहे हैं, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासनिक या न्यायिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि जांच प्रशासनिक थी, तो एसडीएम सरकारी वाहन और सुरक्षा बल के साथ क्यों नहीं गए, और निजी लोगों की मौजूदगी में ऐसी कार्रवाई की आवश्यकता क्यों पड़ी? फिलहाल,कार्रवाई जारी है।