महावीर जयंती पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी बधाई,णमोकार युवा मंडल ने राहगीरों को शर्बत पिलाकर दिया अहिंसा का संदेश,नपं सीएमओ ने मांस की बिक्री बंद कराई

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Jashpur – भगवान महावीर स्वामी की जयंती पूरे देश में मनाई जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को महावीर जयंती की बधाई दी है।कुनकुरी शहर के चौक-चैराहों पर जैन धर्मानुयायी लोगों को शर्बत पिलाकर शाकाहार अपनाने की अपील कर रहे हैं। महावीर जयंती के पुण्यदिवस पर जशपुर,कुनकुरी और बगीचा शहर में लोगों तक महावीर स्वामी के शुभ सन्देश पहुंचाने के लिए कई सारे आयोजन कर रहे हैं। उन्हें भीषण गर्मी में राहत की शर्बत पिला रहे हैं।णमोकार युवा मंडल के अध्यक्ष अंशुल रारा ने बताया कि आज दिन भर लोगों की सेवा करते हुए महावीर स्वामी का स्मरण कर उनके विचारों को जन जन तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। शाम 4 बजे जैन मंदिर से महावीर स्वामी की भव्य शोभायात्रा निकालते हुए अहिंसा परमोधर्म: , शाकाहार अपनाने का सन्देश देंगे।राहगीरों को शर्बत पिलाने में निपेन्द्र जैन, रवि जैन, मुकेश जैन,मोनू-सोनू रारा,आलोक रारा,रमनजैन,शोभित जैन,कौशल  रारा,नेहिल,समंत,कुशाल समेत अनेक जैन धर्मानुयायी सक्रिय रहे।

जैव विविधताओं से भरे जशपुर में वीआईपी मूवमेंट से पहले बनानी होगी रणनीति,वीआईपी सुरक्षा बेहतर समन्वय से ही सम्भव

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  @संतोष चौधरी आपने फिल्मी गाना जरूर सुना होगा एक बरस के मौसम चार-मौसम चार,पांचवां मौसम प्यार का’।इस गाने को गुनगुनाते हुए जानिए की यह छत्तीसगढ़ राज्य का एकमात्र जिला जशपुर है जहां एक बरस नहीं बल्कि बारहों महीने चार मौसम होते हैं।अधिक ठंडा,कम ठंडा,कम गर्म,अधिक गर्म।यही वजह है कि यहां जैव विविधता भी ज्यादा है। तो मैं हाल की एक घटना से अपनी बात शुरू करना चाहूंगा जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दीपू बगीचा में सरहुल पूजा उत्सव मनाने बतौर मुख्य अतिथि आने वाले थे।जिसमें सुबह तकरीबन साढ़े दस बजे के करीब धरती माता की पूजा करते समय बैगा (आदिवासियों के पुजारी) धूप-अगरबत्ती जला दिए जिसके धुँए से पूजा स्थल के ऊपर पीपल पेड़ पर मधुमक्खियों का छत्ता था,वे नाराज हो गए और बैगाओं पर बरस पड़े।इस कारण आनन-फानन में मुख्यमंत्री श्री साय का कार्यक्रम स्थल बदलकर कल्याण आश्रम स्कूल परिसर करना पड़ा। इस कार्यक्रम के बाद से एक चर्चा सीएम सिक्योरिटी को लेकर चलने लगी।जिस पर मुझे लगता है कि ठीकरा फोड़ने से ज्यादा अच्छा होगा कि इस घटना से सबक लेते हुए आनेवाले हर वीआइपी, वीवीआइपी या कहूँ तो बड़े आयोजनों से पहले बेहतर समन्वय के साथ रणनीति बनानी होगी। जल-जंगल और जमीन से अमीर जशपुर जिले में वीआईपी की सुरक्षा को लेकर हाथियों के मूवमेंट को देखते हुए, मधुमक्खियों के छत्तों को बिना छेड़े कार्यक्रम कराने के कई उदाहरण प्रशासन के पास होंगे।मुझे याद आ रहा है कि पम्पशाला में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कंवर समाज के बड़े उत्सव में आने से पहले उनकी सुरक्षा से जुड़ी सारी चीजें बारीकी से जांची-परखी जा चुकी थी जिसमें कार्यक्रम से महज सौ मीटर बाद मधुमक्खियों के पचासों छत्ते थे।समय रहते यह पता चल गया और पुल के पास प्रस्तावित भोजन पकाने की तैयारी बंद कर दी गई।जिससे कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इससे पहले की एक घटना पूर्व सीएम भूपेश बघेल से जुड़ी है जिसमें कुनकुरी पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में भेंट मुलाकात के समय रेस्ट हाउस के बगल में पानी टँकी में कई सारे छत्ते थे जिन्हें वन विभाग के मना करने के बावजूद अन्य विभाग के द्वारा जला दिया गया था। जिससे मधुमक्खियों की नाराजगी बढ़ी और रेस्ट हाउस में हर जगह भिनभिनाने लगी।सीएम का समाज के लोगों के साथ मुलाकात के कार्यक्रम व्यवधान पैदा हो गया। समन्वय का एक उदाहरण और, जैसा कि भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील गुप्ता ने मुझे बताया कि विधानसभा चुनाव प्रचार में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह विजयी रथ से कांसाबेल पहुंचे थे जहाँ से कुछ ही दूरी पर पीपल पेड़ पर मधुमक्खियों के कई सारे छत्ते थे,जिन्हें उनके आने से पहले व्यवस्थित कर लिया गया था। एक बार गर्ल्स कॉलेज जशपुर में भी एक आयोजन के दौरान सांप घुस आया था।जिसे भी प्राचार्य विजय रक्षित द्वारा भगदड़ मचने से पहले हटा दिया गया। तो यह बात समझने की है कि जब भी कोई उच्च पदधारी व्यक्ति का जिले में आगमन हो तो सभी विभाग समय से पहले हर बारीकियों और दिशा निर्देशों का पालन करें और आयोजकों से करावें। धर्म-आस्था से जुड़ी कई ऐसी चीजें भी हैं जिन्हें हमें सम्मान देते हुए समझना भी होगा।हमारे जिले की बात करूं तो यहां मधुमक्खियों को देवीसेना के रूप में मान्यता है।जिसके कारण इन्हें जलाकर हटाने की बजाए बैगा द्वारा मंत्रोच्चार कर बांधा जाता है।यदि प्रशासन इसे अंधविश्वास मानकर बिना इनकी अनुमति के छत्ते हटाने की कोशिश करेगा तो मधुमक्खियों से पहले यहां के लोग भिन्ना जाएंगे। एक्सपर्ट बताते हैं कि मधुमक्खियों को हटाने की पूरी प्रक्रिया पांच दिनों की है।पहले दिन बैगा या जानकार व्यक्ति द्वारा मंत्रोच्चार कर मधुक्खियों को भगाया जाता है । उनके छत्ता छोड़ने के बाद छत्ते को जलाया जाता है ।इसके बाद मधुमक्खियां दो दिन तक छत्ते के आसपास मंडराती रहेंगी और जब उन्हें यह मालूम हो जाएगा कि कोई नुकसान नहीं हुआ है तो फिर वे शांत हो जाएंगी और दूसरे स्थान पर नया छत्ता बनाने लगेंगी। 5 दिन के बाद ही माना जाता है कि अब वे नहीं लौटेंगी। अतः मेरे विचार से ऐसे विशिष्ट व्यक्तियों के आगमन की जानकारी होते ही समय से पहले सभी विभाग बेहतर समन्वय के साथ रणनीति बनाएंगे तो कभी यूँ न होगा।सब काम सांय-सांय होगा।

मुख्यमंत्री ने 8 साल की बच्ची को दिया नया जीवन,अँतड़ी में आलपिन चले जाने से बच्ची का जीवन खतरे में,रायपुर में हुआ ईलाज, सीएम कैंप बगिया से मरीजों को मिल रहा नया जीवन

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जशपुर – खाना खाने के बाद,दांत साफ करते समय आलपीन  निगल जाने से संकट में फंसी 8 साल की बच्ची को सीएम कैम्प बगिया की पहल से नया जीवन मिला है। रायपुर के डीकेएस अस्पताल में सफल आपरेशन के बाद बच्ची घर लौट कर स्वास्थ्य लाभ ले रही है। मरीज के माता पिता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का अभार जताया है। जिले के फरसाबहार ब्लाक के डोंगादरहा निवासी संध्या राउत के पिता रविशंकर ने बताया कि लगभग 1 माह पूर्व संध्या खाना खाने के बाद आलपिन से दांत साफ करते समय उसे निगल गई। जिस समय आलपीन मासूम के पेट में गया वह खुला हुआ था। पेट की अंतड़ियों में फंसी आलपीन के चुभने से मासूम को भयंकर दर्द होने लगा। दर्द से बैचेन संध्या का रो रो कर बुरा हाल हो गया। संध्या के माता पिता ने उसकी जान बचाने के लिए स्थानीय अस्पताल में जांच कराया। चिकित्सकों ने एक्सरे के माध्यम से पेट में फंसे हुए आलपीन का पता लगाया और इसे निकालने की भी कोशिश की लेकिन इसमें वे सफल नहीं हो सके। चिकित्सकों ने रवि शंकर को किसी बड़े अस्पताल में ले जा कर,आपरेशन कराने की सलाह दी लेकिन आर्थिक तंगी ने रवि शंकर का रास्ता रोक लिया। ऐसे में उन्होनें संध्या के उपचार में सहायता के लिए जिले के कांसाबेल ब्लाक के बगिया में स्थित सीएम कैम्प में गुहार लगाई। मासूम की गंभीर स्थिति को देखते हुए सीएम कैम्प ने तत्काल स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया और उसके उपचार के लिए रायपुर के डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में व्यवस्था की। यहां चिकित्सकों ने पीड़ित संध्या की जांच करने के बाद,पेट का आपरेशन कर,अंतड़ी में फंसे हुए पिन को बाहर निकाल कर,उसे नया जीवनदान दिया है,और समुचित इलाज कराकर वापस घर लौट आई है। पथरी का भी हुआ उपचार पेट में फंसे हुए आलपीन के दर्द से परेशान संध्या को जब उपचार के लिए मातापिता डीकेएस अस्पताल लेकर पहुंचे तो डाक्टरों ने जांच के दौरान पाया कि मासूम संध्या को पथरी की भी समस्या है जो आगे चल कर,उसके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। आलपीन निकालने के साथ ही चिकित्सकों ने संध्या को पथरी की समस्या से भी निजात दिला दीlबच्ची की जान बचाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का परिजनों ने आभार जताया है।